राष्ट्र निर्माण में युवा की भूमिका पर निबंध

युवा राष्ट्र का संरचनात्मक और कार्यात्मक ढांचा है। हर राष्ट्र की सफलता का आधार उसकी युवा पीढ़ी और उनकी उपलब्धियाँ होती हैं। राष्ट्र का भविष्य युवाओं के सर्वांगीण विकास में निहित है। इसलिए युवा राष्ट्र निर्माण में सर्वोच्च भूमिका निभाते हैं। आज इस विषय पर अलग अलग शब्द सीमा में हम आपके लिए कुछ निबंध लेकर आये हैं जिनके माध्यम से आप इस विषय को बेहतर ढंग से समझ पायेंगे।

राष्ट्र निर्माण में युवा की भूमिका पर लघु और दीर्घ निबंध (Short and Long Essays on Role of Youth in Nation Building in Hindi)

निबंध 1 (250 शब्द) - युवा: राष्ट्र की आशा के रूप में

परिचय

युवाओं में समाज का वह क्षेत्र शामिल है, जो अभी तक विकासशीलता की खिलती हुई कली हैं और एक राष्ट्र के लिए भाग्य परिवर्तक हैं। यह बचपन से वयस्क बनने तक के बीच का चरण है। हर व्यक्ति जीवन के इस दौर से गुजरता है। यदि इस वक़्त का सही से उपयोग किया जाए तो यह चरण वास्तव में रोमांचक साबित होता है, जो कुछ नया करने के लिए अतिरिक्त इच्छा से भरा होता है।

युवा : राष्ट्र की उम्मीद

किसी देश में रहने वाले लोग राष्ट्र के विकास और प्रगति के लिए स्वयं जिम्मेदार होते हैं। किसी भी राष्ट्र में कुल जनसंख्या का 20-30 प्रतिशत हिस्सा युवा होते हैं। कामकाजी लोग और विशेष रूप से युवा किसी भी राष्ट्र की प्रगति तय करते हैं। राष्ट्र की प्रगति कई उपायों से तय होती है, अर्थात् विज्ञान, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, प्रबंधन और अन्य में विकास के द्वारा। इन सभी मानदंडों को पूरा करने के लिए सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक आधार पर युवा सशक्तीकरण के द्वारा ही संभव है।

इन सभी क्षेत्रों में सफलता पाने के लिए युवाओं को एक सकारात्मक दिशा में निर्देशित किया जाना चाहिए। युवाओं के विकास और प्रशिक्षण पर ध्यान दिया जाना चाहिए। युवाओं को उचित शिक्षा और कौशल विकास की आवश्यकता है ताकि वे सही दिशा में समृद्ध हो सकें। युवा में काम करने की क्षमता होती है और वह उत्साह से भरा होता है और सफलता की ओर अग्रसर होने का उसमे जोश होता है।

निष्कर्ष

आज का युवा, राष्ट्र के कल की स्थिति को आकार देने जा रहा है और इसलिए युवाओं को पर्याप्त अवसर देकर उनकी शक्ति और क्षमता का उपयोग किया जाना चाहिए। दूसरा लेकिन सबसे महत्वपूर्ण कारक युवाओं को सशक्त बनाना है, क्योंकि उनके सामने विभिन्न चुनौतियां होती हैं जिनका वे सामना करते हैं।

निबंध 2 (400 शब्द) - राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका: युवा शक्ति

परिचय

जिस तरह से इंजन को चालू करने के लिए इंधन जिम्मेदार होता है; ठीक उसी तरह युवा राष्ट्र के लिए है। यह राष्ट्र की प्रेरक शक्ति के रूप में कार्य करता है। राष्ट्र का सर्वांगीण विकास और भविष्य, वहां रहने वाले लोगों की शक्ति और क्षमता पर निर्भर करता है और इसमें प्रमुख योगदान उस राष्ट्र के युवाओं का है।

किसी भी राष्ट्र को प्रौद्योगिकियों, शोध, विज्ञान, चिकित्सा, यानी आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक के संदर्भ में प्रगति और विकास के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है। जब युवा अपने प्रयासों के साथ ईमानदारी से यही काम करता हैं, तो इसे चिह्नित किया जाता है। भारत में युवाओं की सबसे बड़ी संख्या है, जिन्हें यदि बेहतर तरह से पोषित किया जाये और अगर ये अपना प्रयास सही दिशा में लगाते हैं, तो यह देश पूरी दुनिया में सबसे उत्कृष्ट बन जायेगा।

युवाओं की शक्ति

हमारे ऐतिहासिक समय से यह देखा जा सकता है कि हमारे राष्ट्र के लिए कई परिवर्तन, विकास, समृद्धि और सम्मान लाने में युवा सक्रिय रूप से शामिल हुए हैं। इस सबका मुख्य उद्देश्य उन्हें एक सकारात्मक दिशा में प्रशिक्षित करना है। युवा पीढ़ी के उत्थान के लिए कई संगठन काम कर रहे हैं क्योंकि वे बड़े होकर राष्ट्र निर्माण में सहायक बनेंगे। गरीब और विकासशील देश अभी भी युवाओं के समुचित विकास और शिक्षण में पिछड़े हुए हैं।

एक बच्चे के रूप में प्रत्येक व्यक्ति, अपने जीवन में कुछ बनने का सपने देखता है, दूसरे शब्दों में, हम कह सकते हैं कि कुछ उद्देश्य होना चाहिए। बच्चा अपनी शिक्षा पूरी करता है और कुछ हासिल करने के लिए कुछ कौशल प्राप्त करता है। इसलिए यह राष्ट्र की प्रगति के प्रति उस व्यक्ति का सकारात्मक दृष्टिकोण है।

  • युवा अपार क्षमताओं से भरा होता है।
  • वे क्षमता, उत्साह और महान कार्य-क्षमता से भरे हुए हैं।
  • कुछ छात्र विकास मानसिकता की खासियत से धन्य होते है, जो एक मूल अवधारणा से बेहतर विचारों को प्राप्त करने का एक शानदार तरीका होता है।
  • युवाओं में त्वरित शिक्षा, रचनात्मकता, कौशल होता है। वे हमारे समाज और राष्ट्र में परिवर्तन लाने की शक्ति रखते हैं।
  • युवा उस चिंगारी के साथ बड़ा होता है, जो कुछ भी कर सकता है।
  • समाज में कई नकारात्मक कुरीतियाँ और कार्य किए जाते हैं। युवाओं में समाज परिवर्तन और लिंग तथा सामाजिक समानता की अवधारणा को लाने की क्षमता है।
  • समाज में व्याप्त कई मुद्दों पर काम करके युवा दूसरों के लिए एक आदर्श बन सकते हैं।

निष्कर्ष

युवाओं को प्रत्येक पहलू में प्रगति करने के साथ-साथ एक राष्ट्र को हर एक दृष्टिकोण से प्रगितिशील बनाने की क्षमता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। युवाओं को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ सही दिशा में काम करने पर मुख्य ध्यान देना चाहिए।

निबंध 3 (600 शब्द) - राष्ट्र निर्माण में युवा की भूमिका

परिचय

नेल्सन मंडेला की एक ख़ूबसूरत कहावत है कि, "आज के युवा कल के नेता हैं" जो हर एक पहलू में सही लागू होता है। युवा राष्ट्र के किसी भी विकास की नींव रखता है। युवा एक व्यक्ति के जीवन में वह मंच है, जो सीखने की कई क्षमताओं और प्रदर्शन के साथ भरा हुआ है।

युवा की भूमिका

  • एक युवा मन प्रतिभा और रचनात्मकता से भरा हुआ है। यदि वे किसी मुद्दे पर अपनी आवाज उठाते हैं, तो परिवर्तन लाने में सफल होते हैं।
  • युवाओं को राष्ट्र की आवाज माना जाता है। युवा राष्ट्र के लिए कच्चे माल या संसाधन की तरह होते हैं। जिस तरह के आकार में वे हैं, उनके उसी तरीके से उभरने की संभावना होती है।
  • राष्ट्र द्वारा विभिन्न अवसरों और सशक्त युवा प्रक्रियाओं को अपनाया जाना चाहिए, जो युवाओं को विभिन्न धाराओं और क्षेत्रों में करियर बनाने में सक्षम बनाएगा।
  • युवा लक्ष्यहीन, भ्रमित और दिशाहीन होते हैं और इसलिए वे मार्गदर्शन और समर्थन के अधीन होते हैं, ताकि वे सफल होने के लिए अपना सही मार्ग प्रशस्त कर सकें।
  • युवा हमेशा अपने जीवन में कई असफलताओं का सामना करते हैं और हर बार ऐसा प्रतीत होता है जैसे कि एक पूर्ण अंत है, लेकिन वो फिर से कुछ नए लक्ष्य के साथ खोज करने के लिए एक नए दृष्टिकोण के साथ उठता है।

भारत में युवाओं की प्रमुख समस्याएं

भारत में युवाओं की संख्या तक़रीबन अन्य सभी देशों की अपेक्षा सबसे अधिक है, इसलिए उनके समुचित विकास और सफलता के लिए उचित योजना और निर्णय होना चाहिए। लेकिन दुर्भाग्य से, देश के युवा कई समस्याओं से जूझ रहे हैं जिसे हमने यहाँ नीचे सूचीबद्ध किया है:

  • कई युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान नहीं की जाती है; यहां तक ​​कि कई लोग गरीबी और बेरोजगारी तथा अनपढ़ अभिभावकों के वजह से स्कूलों नहीं जा पाते हैं। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रत्येक बच्चे को स्कूल जाने और उच्च शिक्षा हासिल करने का मौका मिले।
  • बालिका शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि देश में कई ऐसे हिस्से हैं जहां लड़कियां स्कूल जाने और पढ़ाई से वंचित है। लेकिन युवा, लड़के और लड़कियों दोनों का गठन करते हैं। जब समाज का एक वर्ग उपेक्षित हो, तो समग्र विकास कैसे हो सकता है?
  • अधिकांश युवाओं को गलत दिशा में खींच लिया गया है; उन्हें अपने जीवन और करियर को नष्ट करने से रोका जाना चाहिए।
  • कई युवाओं में कौशल की कमी देखी गयी है, और इसलिए सरकार को युवाओं के लिए कुछ कौशल और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लागू करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि वे आगे एक या उससे अधिक अवसरों से लाभान्वित हो सकें।
  • भारत में 90 प्रतिशत से अधिक लोग गांवों में रहते हैं, इसलिए शिक्षा और अवसरों की सभी सुविधाओं तक उनकी उचित पहुंच नहीं है।
  • कुछ युवाओं द्वारा वित्तीय संकट और सामाजिक असमानता की समस्या होती है।
  • ऐसे कई बच्चे हैं जो प्रतिभा के साथ पैदा हुए हैं, लेकिन अपर्याप्त संसाधनों के चलते, वे अपनी प्रतिभा के साथ आगे नहीं बढ़ सके। उनमें से कई को पारिवारिक आवश्यकताओं के कारण पैसा कमाने के लिए अपनी प्रतिभा से हटकर अन्य काम करना पड़ता है, लेकिन उन्हें उस काम से प्यार नहीं है जो वे कर रहे हैं।
  • बेरोजगारी की समस्या युवाओं की सबसे बड़ी समस्या है।

अग्रणी राष्ट्र निर्माण के प्रति युवा का विकास

जैसा कि पहले भी चर्चा की जा चुकी है, युवाओं को होने वाली समस्याएं। शिक्षा तक उनकी उचित पहुंच नहीं है। कुछ लोग बिना पढ़े-लिखे हैं, जबकि मार्गदर्शन के अभाव में उनमें से कुछ को गलत रास्ते पर ले जाया जाता है।

जन्मजात प्रतिभा वाले कुछ बच्चे होते हैं, लेकिन संसाधन की कमी या उचित प्रशिक्षण नहीं होने के कारण, वे अपनी आशा और प्रतिभा भी खो देते हैं। इस प्रकार, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रत्येक बच्चे को उचित शिक्षा की सुविधा प्रदान की जाए। प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रम शुरू किए जाने चाहिए। युवाओं को कई अवसर प्रदान किया जाना चाहिए। उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रियाओं और राजनीतिक मामलों में समान रूप से भाग लेना चाहिए। कुशल समूहों को काम प्रदान करने के लिए कई रोजगार योजनाएं चलानी चाहिए।

निष्कर्ष

युवावस्था जीवन की वह अवधि है जो ताकत और खुद के लिए कुछ भी करने की भावना के साथ बढ़ाता है। किसी भी राय और स्थितियों के लिए युवाओं का एक अलग दृष्टिकोण होता है। किसी भी पहलू के प्रति युवाओं की सकारात्मकता और पागलपन कई शोधों और आविष्कारों की ओर ले जाता है। इसलिए यह कहा जा सकता है कि युवा हमारे राष्ट्र का भविष्य हैं। वे राष्ट्र की प्रगति और विकास में एक प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। जब समझ और परिपक्वता की शुरुआत के साथ युवाओं में पागलपन खत्म हो जाता है, तो यह युवावस्था के अंत होने का संकेत होता है।