राष्ट्रीय एकता पर निबंध

राष्ट्र एकता एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया व एक भावना है जो किसी राष्ट्र अथवा देश के लोगों में भाई-चारा अथवा राष्ट्र के प्रति प्रेम एवं अपनत्व का भाव प्रदर्शित करती है। एक देश में रह रहे लोगों के बीच एकता की शक्ति के बारे में लोगों को जागरूक बनाने के लिये ‘राष्ट्रीय एकता’ एक तरीका है। अलग संस्कृति, नस्ल, जाति और धर्म के लोगों के बीच समानता लाने के द्वारा राष्ट्रीय एकता की जरूरत के बारे में ये लोगों को जागरूक बनाता है। हम यहाँ पर स्कूल जाने वाले विभिन्न आयु वर्ग और कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों के लिये अलग-अलग शब्द सीमा में राष्ट्रीय एकता पर निबंध उपलब्ध करा रहें हैं। यह निबंध आपके स्कूली कार्यों तथा अन्य प्रतियोगिताओं में आपके लिए काफी सहायक सिद्ध होंगे।

राष्ट्रीय एकता पर बड़े तथा छोटे निबंध (Long and Short Essay on National Integration in Hindi)

Find here some essays on National Integration in easy Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, 400 and 800 words.

इन दिये गये निबंधों का आप अपनी आवश्यकता अनुसार उपयोग कर सकते हैं। हमारे द्वारा राष्ट्रीय एकता पर तैयार किये गये यह निबंध काफी सरल तथा ज्ञानवर्धक हैं। इन निबंधों के माध्यम से हमनें राष्ट्रीय एकता क्यों आवश्यक है? राष्ट्रीय एकता का क्या महत्व है? राष्ट्रीय एकता का अर्थ क्या है? राष्ट्रीय एकता का इतिहास क्या है? राष्ट्रीय एकता को कैसे मजबूत कर सकते हैं? आदि जैसे विषयों पर प्रकाश डालने का प्रयास किया है।

राष्ट्रीय एकता पर निबंध 1 (200 शब्द)

राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय एकता दिवस का कार्यक्रम मनाया जाता है। देश के लोगों के बीच असमानता के साथ ही सामाजिक संस्कृति और अर्थशास्त्र के भेदभाव को घटाना इसका मुख्य पहलू है। राष्ट्रीय एकता एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया व एक भावना है जो किसी राष्ट्र अथवा देश के लोगों में भाई-चारा अथवा राष्ट्र के प्रति प्रेम एवं अपनत्व का भाव प्रदर्शित करती है। देश में राष्ट्रीय एकता लाने के लिये किसी समूह, समाज, समुदाय और पूरे देश के लोगों के बीच एकता को मजबूती देने के लिये ये बढ़ावा देता है। किसी सत्ता के द्वारा ये कोई एक दबाव नहीं है बल्कि भारत को एक विकसित देश बनाने के लिये ये लोगों से आग्रह करता है।

ये केवल लोगों की एकता और सौहार्द के द्वारा ही संभव होगा। अपने भावनात्मक संबंध को बढ़ाने के लिये उन्हें अपने विचार, मूल्य और दूसरे मुद्दों को बाँटना चाहिये। लोगों को विविधता के अंदर एकता को जीना और महसूस करना चाहिये ताकि विश्व भर में हमारे देश की एकता की शक्ति को प्रदर्शित किया जा सके। संगठन ही सभी शक्तियों की जड़ है,एकता के बल पर ही अनेक राष्ट्रों का निर्माण हुआ है। प्रत्येक वर्ग में एकता के बिना देश कदापि उन्नति नहीं कर सकता। एकता में महान शक्ति है। एकता के बल पर बलवान शत्रु को भी पराजित किया जा सकता है।

राष्ट्रीय एकीकरण

राष्ट्रीय एकता पर निबंध 2 (300 शब्द)

प्रस्तावना

इस देश में व्यक्तिगत स्तर के विकास को बढ़ाने के लिये भारत में राष्ट्रीय एकीकरण का बहुत महत्व है और ये इसे एक मजबूत देश बनाता है। पूरी तरह से लोगों को इसके प्रति जागरूक बनाने के लिये, 19 नवंबर से 25 नवंबर तक राष्ट्रीय एकता दिवस और राष्ट्रीय एकीकरण सप्ताह (अर्थात् कौमी एकता सप्ताह) के रुप में भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी का जन्म दिवस  19 नवंबर  को प्रतिवर्ष एक विशेष कार्यक्रम के रुप में मनाया जाता है।

भारतीय एकता का आधार

भारत विश्व का एक विशाल देश है। इस विशालता के कारण इस देश में हिन्दू, मुस्लिम, जैन, ईसाई, पारसी तथा सिक्ख आदि विभिन्न धर्मों तथा जातियों एवं सम्प्रदायों के लोग रहते हैं। अकेले हिन्दू धर्म को ही ले लीजिए। यह धर्म भारत का सबसे पुराना धर्म है जो वैदिक धर्म, सनातन धर्म, पौराणिक धर्म तथा ब्रह्म समाज आदि विभिन्न मतों सम्प्रदायों तथा जातियों में बंटा हुआ है। लगभग यही हाल दूसरे धर्मों का भी है। कहने का मतलब यह है कि भारत में विभिन्न धर्मों, सम्प्रदायों जातियों तथा प्रजातियों एवं भाषाओं के कारण आश्चर्यजनक विलक्षणता तथा विभिन्नता पाई जाती है।

निष्कर्ष

भारत एक ऐसा देश है जहाँ लोग विभिन्न धर्म, क्षेत्र, संस्कृति, परंपरा, नस्ल, जाति, रंग और पंथ के लोग एक साथ रहते हैं। इसलिये, राष्ट्रीय एकीकरण बनाने के लिये भारत में लोगों का एकीकरण जरूरी है। एकता के द्वारा अलग-अलग धर्मों और संस्कृति के लोग एक साथ रहते हैं, वहाँ पर कोई भी सामाजिक या विचारात्मक समस्या नहीं होगी। भारत में इसे विविधता में एकता के रुप में जाना जाता है हालाँकि ये सही नहीं है लेकिन हमें (देश के युवाओं को) इसे मुमकिन बनाना है।

 

राष्ट्रीय एकता पर निबंध 3 (400 शब्द)

प्रस्तावना

भारत में, हर साल 19 नवंबर को एक बहुत जरूरी सामाजिक कार्यक्रम के रुप में राष्ट्रीय एकीकरण दिवस को देखा जाता है। राष्ट्रीय एकीकरण के बारे में लोगों के बीच अधिक जागरूकता फैलाने के लिये 19 से 25 नवंबर तक राष्ट्रीय एकीकरण सप्ताह के रुप में वार्षिक तौर पर देखे जाने के लिये भारतीय सरकार द्वारा एक पूरे सप्ताह का कार्यक्रम भी लागू किया गया है।

भारत एक ऐसा देश है जो अपने विभिन्न संस्कृतियों, परंपराओं, नस्ल, धर्मों, जाति और पंथ के जाना जाता है। लेकिन इस बात को अनदेखा नहीं किया जा सकता है कि यहाँ निवास कर रहे लोगों की सोच में विविधता के कारण ये अभी भी विकासशील देशों में आता है। यहाँ रह रहे लोग अपनी संस्कृति और धर्म के अनुसार अलग-अलग सोचते हैं जो व्यक्तिगत और देश के विकास को रोकने का एक बड़ा कारण हैं।

राष्ट्रीय एकता के लिए शिक्षा का कार्यक्रम

ऊपर दी गयी बातों को ध्यान में रखते हुए हमें स्कूलों में इस प्रकार की शैक्षिक कार्यक्रम तैयार करना चाहिये जिसमें प्रत्येक बालक राष्ट्रीयता की भावना से ओतप्रोत हो जाये। निम्नलिखित पंक्ति में हम विभिन्न स्तरों के शैक्षिक कार्यक्रम पर प्रकाश डाल रहें हैं –

  • प्राथमिक स्तर बाल- दिवस, शिक्षक-दिवस तथा महापुरुषों के जन्म दिवस मनाये जायें और महान व्यक्तियों के जीवन से परिचित कराया जाये।
  • माध्यमिक स्तर - बालकों को भारत के आर्थिक विकास का ज्ञान कराकर उनमें राष्ट्रीय चेतना विकसित की जाये और राष्ट्रीयता के सम्बन्ध में महापुरुषों के व्याख्यान कराये जायें।
  • विश्वविद्यालय स्तर - समय-समय पर अध्ययन बैठक  तथा विचार बैठक आयोजित की जायें। इन बैठकों  में विभिन्न विश्वविद्यालय के बालकों को भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाये।

निष्कर्ष

भारत अपनी विविधता में एकता के लिये प्रसिद्ध है लेकिन विकास के लिये हमें एक-दूसरे के विचारों को स्वीकार करना होगा। हमारे देश में सभी मानते हैं कि उनका धर्म ही सबसे बेहतर है और जो भी वो करते हैं वही सबसे ठीक है। अपने खुद के फायदे के लिये केवल खुद को अच्छा साबित करने के लिये यहाँ रह रहे विभिन्न नस्लों के लोग आपस में शारीरिक, भावनात्मक, बहस और चर्चा आदि के द्वारा लड़ते हैं। अपने देश के बारे में एक साथ होकर वो कभी नहीं सोचते हैं। ऐसा करके ना सिर्फ वह राष्ट्रीय एकता पर आघात करते हैं बल्कि हमारे देश की प्रगति को भी रोकते हैं।

 

राष्ट्रीय एकता पर निबंध 4 (500 शब्द)

प्रस्तावना

लोगों की एकता” के रुप में भारत की एक पहचान बनाने के लिये अलग धर्मों के लोगों के बीच एकता को लाने के लिये राष्ट्रीय एकीकरण एक प्रक्रिया है। समन्वय और एकता की मजबूती के साथ ही समाज में असमानता और दूसरे सामाजिक मुद्दे जैसे विविधता, नस्लीय भेद-भाव आदि को हटाने के लिये ये एक और एकमात्र रास्ता है। भारत एक बहु-जातीय और बहु-भाषीय देश है जहाँ विभिन्न जाति के लोग एक साथ रहते हैं और अलग-अलग भाषाएँ बोलते हैं। वो अपनी प्रथा और परंपरा अपने धर्म के अनुसार निभाते हैं। भारत में लोगों के बीच केवल धर्म, जाति, पंथ, रंग और संस्कृति से ही विविधता नहीं है बल्कि सोच में भी विविधता दिखाई देती है जो भारत में अनुचित विकास का एक बड़ा विषय है।

राष्ट्रीय एकता का अर्थ

एकता का साधारण अर्थ होता है मिल-जूल कर कार्य करना। राष्ट्रीय एकता एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया व एक भावना है जो किसी राष्ट्र अथवा देश के लोगों में भाई-चारा अथवा राष्ट्र के प्रति प्रेम एवं अपनत्व का भाव प्रदर्शित करती है। एकता का महत्व मनुष्य को तभी पता चलता है जब वो बिलकुल आदिम अवस्था में होता है। राष्ट्रीय एकता का मतलब ही होता है, राष्ट्र के सब घटकों में भिन्न-भिन्न विचारों और विभिन्न आस्थाओं के होते हुए भी आपसी प्रेम, एकता और भाईचारे का बना रहना। राष्ट्रीय एकता में केवल शारीरिक समीपता ही महत्वपूर्ण नहीं होती बल्कि उसमें मानसिक,बौद्धिक, वैचारिक और भावात्मक निकटता की समानता आवश्यक है।

भारत में अलगाव के कारण

भारतीय लोगों के बीच अलगाव की एक उच्च स्थिति है जो सांप्रदायिक और दूसरी समस्याओं के साथ यहाँ एक बुरा दृश्य बनाती है। भारत में अलगाव के कारण, हम लोगों ने ढेर सारी सामाजिक समस्याओं का सामना किया जैसे 1947 में भारत का बँटवारा, 1992 में बाबरी मस्जिद का विध्वंस, हिन्दू और मुस्लिमों के बीच दंगे आदि। अस्पृश्यता की बाधा, भाषा की बाधा, सामाजिक स्थिति की बाधा और दूसरी सामाजिक बाधाएँ हमें पीछे ले जा रहीं हैं। विविधता में एकता लाने के लिये भारतीय सरकार द्वारा बहुत सारे नियम-कानून लागू किये गये हैं हालांकि ये केवल मानव दिमाग है जो लोगों के बीच विविधता में स्वाभाविक एकता ला सकता है।

भावात्मक एकता

हमारे भारत वर्ष में राष्ट्रीय एकता के लिए भावात्मक एकता अत्यन्त आवश्यक है। भावात्मक एकता बनाए रखने के लिए भारत सरकार हमेशा प्रयत्नशील रही है। हमारे संविधान में ही धर्म निरपेक्ष, समाजवाद समाज की परिकल्पना की गई है। धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में भी ऐसे अनेक संगठन बनाए गए हैं जो राष्ट्रीय एकता के लिए प्रयत्नशील रहते हैं। सच्चा साहित्य भी पृथकतावादी प्रवृत्तियों का विरोधी रहा है।

निष्कर्ष

राष्ट्रीय एकीकरण में कमी के कारण यहाँ सभी सामाजिक समस्याओं का उदय हो रहा है। हम सभी को इस राष्ट्रीय एकीकरण के वास्तविक अर्थ, उद्देश्य और जरूरत को समझना चाहिये। अपने देश के मुख्य विकास के लिये भारतीय सरकार द्वारा सभी नियम-कानूनों को मानने के साथ ही हमें एक साथ रहना और सोचना चाहिये।


 

राष्ट्रीय एकता पर निबंध 5 (600 शब्द)

प्रस्तावना

भारत एक ऐसी भूमि है जहाँ अपनी अनोखी संस्कृति और विविध जीवनशैली को मानने वाले विरोधी लोग रहते हैं। ये बहुत ही साफ है कि हमें हमारे जीवन में राष्ट्रीय एकीकरण के अर्थ को समझने की जरूरत है और अपने देश को एक पहचान देने के लिये सब कुछ मानना होगा। भारत में लोग विभिन्न धर्म, जाति, समुदाय, नस्ल और सांस्कृतिक समूह से संबंध रखते हैं और वर्षों से एक साथ रह रहें हैं। भारत की सांस्कृतिक विरासत को विविध धर्म, जाति और पंथ ने समृद्ध बनाया हुआ है जिसने यहाँ पर एक मिश्रित संस्कृति को सामने रखा है हालाँकि ये बहुत ही साफ है कि भारत में हमेशा राजनीतिक एकता की कमी रही है।

राष्ट्रीय एकता क्यों आवश्यक है?

अलग धर्म और जाति होने के बावजूद हमारे देश को जो वस्तु प्रगति के रास्ते पर अग्रसित करती है, वह है हमारी राष्ट्रीय एकता। यहीं कारण है कि हमें भारत में विविधता में एकता के वास्तविक अर्थ को समझना चाहिये। इसका ये कतई मतलब नहीं है कि अखंडता की प्रकृति यहाँ पर नस्लीय और सांस्कृतिक समानता के कारण होनी चाहिये। बल्कि इसका मतलब है कि इतने अंतर के बावजूद भी एकात्मता है।

पूरे विश्व भर में दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या वाले देश के रुप में भारत को गिना जाता है, जहाँ पर 1652 भाषाएँ बोली जाती हैं और विश्व के सभी मुख्य धर्म के लोग यहाँ एक साथ रहते हैं। सभी मतभेदों के बावजूद भी हमें बिना किसी राजनीतिक और सामाजिक विरोधाभास के शांति से एक-दूसरे के साथ रहना चाहिये। हमें इस महान देश में एकता का आनन्द उठाना चाहिये जहाँ राष्ट्रीय एकीकरण के उद्देश्य को पूरा करने के लिये सब कुछ विविधता है। इसलिए इन कारणों को देखते हुए हम कह सकते हैं कि यदि हमें हमारे देश का पूर्ण विकास करना है तो हममें राष्ट्रीय एकता का होना आवश्यक है।

राजनीतिक एकता

भारत में केवल एक बार राजनीतिक एकता दिखाई दी थी जब सभी ने मिलकर 1947 में अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर किया गया था। अंग्रेजों ने यहाँ कई प्रकार से बाँटो और राज करो की नीति अपनाई थी हालाँकि, इसमें वो बाद में असफल हो गये थे। कुछ बिंदु जैसे सांस्कृतिक एकता, रक्षात्मक निरंतरता, संविधान, कला, साहित्य, सामान्य आर्थिक समस्याएँ राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्र गान, राष्ट्रीय उत्सव और राष्ट्रीय प्रतीक के द्वारा भारत में राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा दिया जाता है।

भेदभाव के कारण

देश और राष्ट्र में अंतर होता है। देश का संबंध सीमाओं से होता है क्योंकि देश एक निश्चित सीमा से घिरा हुआ होता है। राष्ट्र का संबंध भावनाओं से होता है क्योंकि एक राष्ट्र का निर्माण देश के लोगों की भावनाओं से होता है। जब तक किसी देश के वासियों की विचारधारा एक नहीं होती है वह राष्ट्र कहलाने का हकदार नहीं होता है।

राष्ट्रीय एकीकरण में कमी के कारण यहाँ सभी सामाजिक समस्याओं का उदय हो रहा है। हम सभी को इस राष्ट्रीय एकीकरण के वास्तविक अर्थ, उद्देश्य और जरूरत को समझना चाहिये। अपने देश के मुख्य विकास के लिये भारतीय सरकार द्वारा सभी नियम-कानूनों को मानने के साथ ही हमें एक साथ रहना और सोचना चाहिये।

निष्कर्ष

भारत अपनी विविधता में एकता के लिये प्रसिद्ध है लेकिन ये सही नहीं है क्योंकि विकास के लिये दूसरे के विचार को स्वीकार करने के लिये लोग तैयार नहीं है। यहाँ सभी मानते हैं कि उनका धर्म ही सबसे बेहतर है और जो भी वो करते हैं वही सबसे ठीक है। अपने खुद के फायदे के लिये केवल खुद को अच्छा साबित करने के लिये यहाँ रह रहे विभिन्न नस्लों के लोग आपस में शारीरिक, भावनात्मक, बहस और चर्चा आदि के द्वारा लड़ते हैं। अपने देश के बारे में एक साथ होकर वो कभी नहीं सोचते हैं। वो कभी नहीं सोचते कि हमारे देश का विकास केवल व्यक्तिगत वृद्धि और विकास के साथ ही संभव है।


 

राष्ट्रीय एकता पर निबंध 6 (700 शब्द)

प्रस्तावना

लोगों में जाति, धर्म, भाषा, नस्ल आदि में विविधता का एक देश है भारत हालाँकि अंग्रेजी शासन से आजादी के लिये सामान्य क्षेत्र, इतिहास और लगातार लड़ने के प्रभाव के तहत बहुत बार एकता यहाँ भी देखी गयी है। भारत पर राज करने के लिये अंग्रेजों ने यहाँ पर कई वर्षों तक बाँटो और राज करो की नीति अपनायी। हालाँकि विभिन्न धर्म, जाति, नस्ल का होने के बावजूद भी भारतीयों की एकता ने अंग्रेजों को यहाँ से खदेड़ दिया। लेकिन आजादी के बाद अलगाव ने जगह ले ली जिसने भारत को भारत और पाकिस्तान में बाँट दिया।

राष्ट्रीय एकीकरण

भारत विभिन्न धार्मिक समुदायों जैसे हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसियों की एक भूमि है। यहाँ पर राष्ट्रीय एकीकरण तभी संभव है जब सभी समुदाय एक-साथ शांतिपूर्वक रहें, एक-दूसरे समुदाय की सराहना करें, प्यार करें तथा एक-दूसरे की संस्कृति और परंपरा का सम्मान करें। हरेक समुदाय को उनके मेले, उत्सवों और दूसरे अच्छे दिनों को शांतिपूर्वक देखना चाहिये। हरेक समुदाय को एक दूसरे की मदद के साथ ही धार्मिक त्योहारों की खुशियों को बाँटना चाहिये। किसी भी धार्मिक समुदाय को कुछ भी ऐसा बुरा नहीं करना चाहिये जो किसी दूसरे धर्म को ठेस पहुँचाये या उस धर्म में मनाही हो।

विभिन्न धर्मों के लोग अलग-अलग भाषा बोलते हैं जैसे हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, उड़ीया, पंजाबी, बंगाली, मराठी आदि। सभी धर्मों के बीच समानता और सभी जाति के विद्यार्थियों के लिये समान सुविधा होनी चाहिये। देश के मुख्य विकास के लिये सभी समुदायों के बराबर वृद्धि और विकास और सभी नस्लों के लोगों के बीच समानता लाने के लिये आधुनिक समय में भारत में राष्ट्रीय एकीकरण की तुरंत जरूरत है। भारतीय सरकार ने इस आशा में राष्ट्रीय एकीकरण की परिषद का गठन किया है कि इसके सभी कार्यक्रमों के उद्देश्यों को पूरा करने में यहाँ रहने वाले लोग सहयोग करेंगे।

एकता का आधार

एक पहचान बनाने के लिये राष्ट्र के रहने वाले सभी लोगों का एक संगठित समूह राष्ट्रीय एकीकरण है। राष्ट्रीय एकीकरण एक खास मनोभाव है जो धर्म, जाति, भाषा या पृष्ठभूमि को बिना ध्यान दिये राष्ट्र को एक सामान संबंध में जोड़ता है। हम लोगों को खुद को भारतीय के रुप में पहचानना चाहिये ना कि किसी खास धर्म या जाति के व्यक्ति के रुप में। ये विरासत से समिध देश है हालांकि हम लोग ये नहीं कह सकते कि यहाँ लोगों में पूरी तरह से एकता है। ये देश के युवाओं में जागरूकता फैलने से ही संभव हो पायेगा। एक युवा के रुप में, हम देश का भविष्य हैं इसलिये हमें देश के प्रति अपने कर्तव्यों को समझना चाहिये और राष्ट्रीय एकीकरण के लिये जरूरी सभी कदम उठाने चाहिये।

लोगों की एकता

“लोगों की एकता” के रुप में भारत की एक पहचान बनाने के लिये अलग धर्मों के लोगों के बीच एकता को लाने के लिये राष्ट्रीय एकीकरण एक प्रक्रिया है। समन्वय और एकता की मजबूती के साथ ही समाज में असमानता और दूसरे सामाजिक मुद्दे जैसे विविधता, नस्लीय भेद-भाव आदि को हटाने के लिये ये एक और एकमात्र रास्ता है।

भारत एक बहु-जातीय और बहु-भाषीय देश है जहाँ विभिन्न जाति के लोग एक साथ रहते हैं और अलग-अलग भाषाएँ बोलते हैं। वो अपनी प्रथा और परंपरा अपने धर्म के अनुसार निभाते हैं। भारत में लोगों के बीच केवल धर्म, जाति, पंथ, रंग और संस्कृति से ही विविधता नहीं है बल्कि सोच में भी विविधता दिखाई देती है जो भारत में अनुचित विकास का एक बड़ा विषय है।

भारत में राष्ट्रीय एकता की समस्या

ध्यान देने की बात है कि भारत में विभिन्नता तो अवश्य पाई जाति है, पर संस्कृति की एकता के विषय में मतभेद है। एकता का अर्थ यह नहीं होता कि किसी विषय पर मतभेद ही न हो। मतभेद होने के बावजूद भी जो सुखद और सबके हित में है उसे एक रूप में सभी स्वीकार कर लेते हैं। राष्ट्रीय एकता से अभिप्राय है सभी नागरिक राष्ट्र प्रेम से ओतप्रोत हों सभी नागरिक पहले भारतीय हों,फिर हिन्दू, मुसलमान या अन्य।

निष्कर्ष

भारत में केवल एक बार राजनीतिक एकता दिखाई दी थी जब सभी ने मिलकर 1947 में अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर किया गया था। अंग्रेजों ने यहाँ कई प्रकार से बाँटो और राज करो की नीति अपनाई थी हालाँकि, इसमें वो बाद में असफल हो गये थे। कुछ बिंदु जैसे सांस्कृतिक एकता, रक्षात्मक निरंतरता, संविधान, कला, साहित्य, सामान्य आर्थिक समस्याएँ राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्र गान, राष्ट्रीय उत्सव और राष्ट्रीय प्रतीक के द्वारा भारत में राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा दिया जाता है।


राष्ट्रीय एकता पर बड़ा निबंध 7 (1000 Words)

प्रस्तावना

हमारा भारत देश विविधताओं से भरा देश है, यहा विभिन्न संस्कृतियों, धर्मों, संप्रदायो को मनाने वाले लोग रहते है। हमारा देश बहुभाषी, बहुसांस्कृतिकऔर बहुधर्मी होने के बावजूद भी राष्ट्रीय रुप से एक है। हमारे राष्ट्रीय एकता की भावना ही हमारे देश की एकता का आधार स्तंभ है और एकता में शक्ति की अवधारणा से तो हम सब ही वाकिफ है फिर भी कई सारे ऐसी बाते है, जिन्हें अपनाकर हम अपने देश को और भी ज्यादा संगठित तथा प्रगतिशील बना सकते है।

राष्ट्रीय एकता की आवश्यकता

भारत में राष्ट्रीय एकता का महत्व बहुत ही बड़ा है। यह हमारे देश की राष्ट्रीय एकता की भावना ही थी, जिसने हमें एक साथ लाकर हमारे देश के आजादी के लिए अंग्रेजी हुकूमत से लड़ने के लिए एक किया। कश्मीर में कन्याकुमारी तक फैला हमारा यह भारत देश कई तरह की विविधताओं से भरा हुआ है और ऐसे में हमें एक सूत्र में पिरोये रखने के लिए हमारे अंदर राष्ट्रीय एकता की भावना का होना बहुत ही आवश्यक है।

भले ही अपने देश में हम पंजाबी, गुजराती, मराठी या बिहारी नाम से जाने जाते हैं, लेकिन एक बार हम जब अपने देश के बाहर जाते हैं तो वहां सिर्फ हमें एक भारतीय के रुप में जाना जाता है। वहां हमारे प्रदेश, जाति या धर्म का कोई महत्व नही रह जाता है। इस प्रकार से हम कह सकते है कि हमारी मजबूत अंतरराष्ट्रीय छवि को प्रस्तुत करने के लिए हममें राष्ट्रीय एकता का होना बहुत ही आवश्यक है।

राष्ट्रीय एकता और अखंडता की अवधारणा

इस बात को लेकर हमेशा सवाल उठते रहते हैं कि भले ही धार्मिक रुप से भारत के हर प्रांत में कई समानताएं रही हो पर प्रचीनकाल में भारत कभी भी एक नही था और इसका वर्तमान रुप अंग्रेजो द्वारा दिया गया पर यह बात सत्य नही है। हमारे देश में राष्ट्रीय एकता और अखंडता की अवधारणा अग्रेंजो के आने से बहुत पहले ही जन्म ले चुकी थी। भारत में सर्वप्रथम राष्ट्रीय एकता और अखंडता का पक्ष रखने वाले व्यक्ति आचार्य चाणक्य थे, जिन्होंने ना सिर्फ राष्ट्रीय अखंडता का स्वप्न देखा बल्कि की इसे साकार भी किया।

जब-जब हमारा देश पतन के कगार पर पंहुचकर परतंत्र हुआ, तब-तब हमारी राष्ट्रीय एकता की भावना ने हमें गुलामी के जंजीरो को काटने के लिए साथ आने की प्रेरणा दी फिर चाहे वह 300 ई.पू. आचार्य चाणक्य और चंद्रगुप्त मौर्य का समय रहा हो या 1857 ई. में मंगल पांडे द्वारा प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में आजादी के लिए किया गया विद्रोह हो। हमारी राष्ट्रीय एकता की भावना ने ही हमें इनके लिए प्रेरित करने का कार्य किया।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रीय एकता की भूमिका

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए जिस चीज ने लोगों को सबसे अधिक प्रेरित किया, वह हमारी राष्ट्रीय एकता की भावना ही थी। इसी ने हमें हमारे गुलामी की जंजीरों को तोड़ने के लिए प्रेरित किया और हमें संगठित करने का कार्य किया। जब अंग्रेजों द्वारा जलियावाला बाग कांड जैसा जघन्य अपराध किया गया तो हमारे देश के दूर-दराज के इलाकों में भी विरोध प्रदर्शन हुए और लोगो ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज बुलंद की। यह हमारी राष्ट्रीय एकता की ही भावना थी जिसने पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक हमारे देश को एक करने का कार्य किया और आजादी के लड़ाई के लिए सबको एकजुट किया।

स्वतंत्र भारत के निर्माण में राष्ट्रीय एकता की भूमिका

हमारे राष्ट्रीय एकता के भावना की भूमिका सिर्फ हमारे स्वतंत्रता संर्घष तक ही सीमित नही है बल्कि की इसका मुख्य योगदान तो भारत के स्वतंत्रता के बाद वर्तमान भारत के निर्माण में रहा है। अंग्रेजो ने भारत को स्वतंत्रता प्रदान करने के बाद वापस उसी स्थिति में पहुंचा दिया था, जो उनके आने के पहले थी। उन्होंने आजादी की घोषणा के बाद 584 छोटी-छोटी रियासतों को यह सुविधा प्रदान की अगर वह चाहें तो भारत या पाकिस्तान में मिले या पूर्णतः स्वतंत्र रहे।

इसमें से अधिकतर रियासतों ने अपने राज्यों का विलय गणतांत्रिक भारत में कर दिया परन्तु जूनागढ़, कश्मीर, त्रावणकोर और हैदराबाद जैसी कई रियासतों ने भारतीय गणतंत्र को या तो चुनौती दी या फिर स्वतंत्र रहने की घोषणा की। ऐसे में इनमें से कई प्रांतो की जनता ने खुद को भारतीय नागरिक मानते हुए अपने प्रांत के राजा-महाराजाओं के विरुद्ध विद्रोह कर दिया, इन घटनाओं से डरकर त्रावणकोण और जूनागढ़ के शासकों ने अपने राज्यों का भारत में विलय कर दिया।

इसके अलावा हमारे देश को एक करने और आजादी के पश्चात हमारे अंदर राष्ट्रीय एकता की भावना को जगाने का सबसे महत्वपूर्ण कार्य भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने किया। अपने दृढ़ निश्चय और इच्छाशक्ति के बलबूते उन्होंने 500 से भी अधिक छोटी-छोटी रियासतों को एक करते हुए ना सिर्फ वर्तमान भारत के रुप को आकार दिया बल्कि की हैदराबाद और जूनागढ़ विद्रोह जैसी घटनाओं पर विजय पाकर विश्व को गणतांत्रिक भारत की शक्ति का भी परिचय दिया।

निष्कर्ष

हमारे राष्ट्रीय एकता का हमारे जीवन और हमारे देश के अस्तित्व में बहुत बड़ा योगदान है। यह हमारी राष्ट्रीय एकता की भावना ही है, जो भारत जैसे विविधतापूर्ण और बहुसांस्कृतिक देश को एक रखने का कार्य करती है। हमारी राष्ट्रीय एकता की भावना ने ही हमें अंग्रेजी हुकूमत से लड़ने के लिए एक किया और हमें स्वतंत्रता दिलाई। यहीं कारण है कि हमारी राष्ट्रीय एकता हमारे लिए इतनी महत्वपूर्ण है।

 

 

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