राष्ट्रीय किसान दिवस

किसान दिवस के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुका राष्ट्रीय किसान दिवस एक राष्ट्रीय अवसर है जो हर साल 23 दिसंबर को मनाया जाता है। राष्ट्रीय किसान दिवस भारत के पूर्व प्रधान मंत्री चौधरी चरण सिंह के सम्मान में मनाया जाता है। राष्ट्रीय किसान दिवस पूरे राष्ट्र में बड़े उत्साह और रुचि के साथ मनाया जाता है। इस दिन इस कार्यक्रम का जश्न मनाने के लिए कृषि के ऊपर कई वाद-विवाद कार्यक्रम, समारोह, सेमिनार और प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है।

राष्ट्रीय किसान दिवस 2018 (चौधरी चरण सिंह की जयंती) - National Farmer's Day in Hindi

पूरे भारत में राष्ट्रीय किसान दिवस 23 दिसंबर 2018, रविवार को मनाया गया।

राष्ट्रीय किसान दिवस 2018 विशेष

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 23 दिसंबर के दिन राष्ट्रीय किसान दिवस का कार्यक्रम मनाया गया। इस अवसर पर तमाम दलों ने किसानों के मसीहा माने जाने वाले चौधरी चरण सिंह को उनके जयंती के अवसर पर श्रद्धांजलि प्रदान की और किसानों के हितों के लिए अपने-अपने पक्ष रखे। इसी के तहत राहुल गांधी ने राष्ट्रीय किसान दिवस पर सभी को बधाई देते हुए ट्वीट किया और किसानों के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त करते हुए, उनके मेहनत की तारीफ की।

इसके साथ अपने एक बयान में राहुल गांधी ने कांग्रेस को किसानों के प्रति समर्पित पार्टी बताया। उन्होंने कहा काग्रेंस ने हमेशा से ही देश के किसानों और मजदूरों के भलाई के लिए कार्य किया है। हमने किसानों से किये अपने हर एक वादे को पूरा किया है और जिन राज्यों में भी हमारी सरकार बनी है वहां हमने 2 दिनों के भीतर किसानों का कर्ज माफ किया है।

मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय किसान दिवस पर किसानों को दि गयी महत्वपूर्ण जानकारी

किसान दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के ग्यारसपुर क्षेत्र में मिशन सुनहरा कल के अंतर्गत किसानों को महत्वपूर्ण जानकारियां देने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण अतिथि मौजूद रहे, कृषि महाविद्यालय के प्रचार्यों द्वारा किसानों को सीएसवी कंपोनेंट के बारे में समझाया गया इसके साथ ही उन्हें मृदा एंव जल संरक्षण, कार्बन, स्मार्ट मौसम, स्मार्ट ब्रीडर, उन्नत बीज और स्मार्ट बाजार के विषय में समझाया गया और कार्यक्रम के अंत में मिशन सुनहरा कल एवं एनसीएचएसई के द्वारा सभी किसानों को सम्मानित भी किया गया।

कई जगहों पर निकाली गई किसान जागरुकता रैली

इसके साथ ही इस बार किसान दिवस पर हर बार से कुछ अलग देखने को भी मिला इस बार किसान दिवस के अवसर पर कई सारे संस्थाओं और लोगों द्वारा किसानों के लिए जागरुता रैली का आयोजन किया गया। इसके अंतर्गत लोगों को देश के विकास में किसानों के भागीदारी तथा मेहनत के विषय में बताया गया। इसके साथ ही रैली द्वारा किसानों को भी उनके अधिकारों तथा उन्हें सरकार द्वारा मिलने वाले विशेष लाभों और योजनाओं के विषय में भी जानकारी दी गई।

राष्ट्रीय किसान दिवस का इतिहास

राष्ट्रीय किसान दिवस को भारत के पांचवें प्रधान मंत्री चौधरी चरण सिंह के सम्मान में मनाया जाता है। 28 जुलाई, 1979 से 14 जनवरी, 1980 तक उन्होंने एक बहुत ही छोटे कार्यकाल के लिए प्रधान मंत्री के रूप में देश की सेवा की। वे बहुत ही सरल और साधारण दिमाग वाले व्यक्ति थे जिन्होंने अत्यंत सरल जीवन व्यतीत किया। प्रधान मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने भारतीय किसानों के जीवन में सुधार के लिए कई नीतियां शुरू कीं।

चौधरी चरण सिंह के आकर्षित करने वाले व्यक्तित्व और किसानों के पक्ष में विभिन्न लाभकारी नीतियों ने जमींदारों और धनियों के खिलाफ भारत के सभी किसानों को एकजुट किया। उन्होंने भारत के दूसरे प्रधान मंत्री द्वारा दिए गए प्रसिद्ध नारे जय जवान जय किसान का पालन किया। चौधरी चरण सिंह बहुत ही सफल लेखक थे और उन्होंने कई किताबें भी लिखी जो किसानों और उनकी समस्याओं पर अपने विचारों को दर्शाती हैं। उन्होंने किसानों के जीवन में सुधार के लिए विभिन्न समाधानों के रूप में बहुत प्रयास भी किया।

चौधरी चरण सिंह किसान परिवार के थे और इस तरह उन्होंने भारत के सम्माननीय प्रधान मंत्री होने के बावजूद अत्यंत सरल जीवन जीया। भारत मुख्य रूप से गांवों की भूमि है और गांवों में रहने वाली अधिकांश आबादी किसानों की है और कृषि उनके लिए आय का प्रमुख स्रोत है। अभी भी भारतीय आबादी का 70% खेती के जरिए उत्पन्न आय पर निर्भर करता है। भारत एक दिलचस्प कृषि यात्रा का गवाह है।

पंजाब और हरियाणा में विकसित 60 के दशक के दौरान हरित क्रांति ने देश की कृषि तस्वीर को बदल दिया। इससे उत्पादकता में वृद्धि हुई और इस तरह भारत विभिन्न कृषि वस्तुओं में आत्मनिर्भर हो गया।

किसान भारत की रीढ़ की हड्डी हैं। कृषि भूमि का देश भारत 23 दिसंबर को राष्ट्रीय किसान दिवस मनाता है ताकि हमारे देश के किसानों द्वारा किए गए महान कार्य को सम्मान दिया जा सके।

 

किसान नेता (चौधरी चरण सिंह) के बारे में तथ्य

चौधरी चरण सिंह आदर्श जाट नेता थे और एक किसान परिवार से संबंध रखते थे। यही कारण था कि वे खुद को किसानों के मुद्दों से जुड़ा हुआ रखते थे और उनको समर्थन करने का भरपूर प्रयास करते थे। जब वे 1979 में भारत के प्रधान मंत्री बने तो उन्होंने किसानों के जीवन में सुधार के लिए कई बदलाव किए। यह एक दिलचस्प तथ्य भी है कि भारत के प्रधान मंत्री के रूप में चौधरी चरण सिंह ने कभी भी लोकसभा का दौरा नहीं किया। मोरारजी देसाई के शासनकाल के दौरान उन्होंने उप प्रधान मंत्री के रूप में भी काम किया।

उन्होंने 1979 के बजट को पेश किया जिसे किसानों की सभी जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किया गया था। भारतीय किसानों के पक्ष में इसकी कई नीतियां थीं। महान किसान नेता की ये पहल उन सभी किसानों के आत्मविश्वास को बढ़ाती है और उन्हें जमीनदार और धनदंडियों के खिलाफ एकजुट होने की शक्ति प्रदान करती है। कृषि निर्माण के पीछे विधानसभा में चौधरी चरण सिंह द्वारा पेश किए गए प्रसिद्ध बाजार विधेयक थे। विधेयक का उद्देश्य जमींदारों के लालच और अत्याचार के खिलाफ किसानों की भलाई की रक्षा के लिए था। जमींदारी उन्मूलन अधिनियम भी उनके द्वारा शुरू किया गया और लागू किया गया।

नई दिल्ली में प्रसिद्ध किसान घाट उत्तर में किसान के समुदायों से संबंधित कारणों के साथ उनकी भागीदारी के कारण चौधरी चरण सिंह को समर्पित है। वह एक शौकीन लेखक भी थे और उन्होंने किसानों और उनके साथ समस्याओं से जुड़े समाधानों के बारे में अपने विचार लिखे हैं। चौधरी चरण सिंह की मृत्यु 29 मई 1987 को हुई।

राष्ट्रीय किसान दिवस (चौधरी चरण सिंह जयंती) क्यों मनाया जाता है

23 दिसंबर को जन्मे विनम्र व्यक्ति चौधरी चरण सिंह भी किसान नेता थे। वह बहुत विनम्र और दयालु नेता थे और किसानों में बहुत लोकप्रिय थे और इस तरह उन्हें किसानों का नेता भी कहा जाता था। चौधरी चरण सिंह जयंती या चरण सिंह का जन्मदिवस 23 दिसंबर को हैं। यह किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है। चूंकि किसान हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं इसलिए हमारा राष्ट्र चौधरी चरण सिंह की याद में किसान दिवस मनाता  हैं।

भारत के पूर्व प्रधान मंत्री चरण सिंह स्वयं एक किसान थे और उन्होंने बेहद सरल जीवन का निर्वाह किया। वे किसान के परिवार के थे इसलिए उन्होंने भारतीय किसानों के जीवन में सुधार लाने के लिए बहुत प्रयास किए। यह कहना गलत नहीं है कि किसान हमारे समाज की रीढ़ की हड्डी हैं और भारत के आर्थिक विकास के लिए बहुत योगदान करते हैं। अधिकांश भारतीय जनसंख्या गांवों में रहती हैं और खेती ही उनके लिए आय का प्रमुख स्रोत है। इस प्रकार भारतीय किसानों को समर्पित एक दिन न केवल उनके उत्साह में वृद्धि करेगा बल्कि उनके लिए लोगों के मन में सम्मान भी पैदा करेगा।

 

 

हर साल राष्ट्रीय किसान दिवस मनाया जाता है खासकर उन राज्यों में जो खेती में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं जैसे उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश आदि। किसान और ग्रामीण समुदाय के सदस्य अपने प्यारे नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए विभिन्न कृषि समारोह आयोजित करते हैं। इस दिन विभिन्न बहसें, वाद-विवाद, चर्चाएं, प्रश्नोत्तरी, प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। किसानों से संबंधित कई मुद्दे पर चर्चा की जाती है और प्रतिभागियों को साझा करने और समाधान का सुझाव देने के लिए आमंत्रित किया जाता है।

राज्य सरकारें इस दिन का उपयोग किसानों के पक्ष में नए बिलों को लागू करने के लिए करती हैं। किसानों के प्रतिनिधियों को भी समारोहों के लिए आमंत्रित किया जाता है और अपने मुद्दों और समस्याओं को सामने रखने के लिए प्रेरित किया जाता है। राष्ट्रीय किसान दिवस पर अतीत के महान और उदार नेताओं को श्रद्धांजलि दी जाती है जो किसानों के कल्याण और विकास के प्रति समर्पित थे।

राष्ट्रीय किसान दिवस (चौधरी चरण सिंह जयंती) कैसे मनाया जाता है

उत्तर प्रदेश सरकार, भारत सरकार हर साल 23 दिसंबर को राष्ट्रीय किसान दिवस मनाता है। यह भारत के पूर्व प्रधानमंत्रि, चौधरी चरण सिंह, की जन्म तारीख है। वे किसान समुदाय के प्रति बहुत दयालु थे और उन्होंने किसानों को लाभान्वित करने के लिए कई नीतियों का समर्थन किया था। इस प्रकार 23 दिसंबर को किसान दिवस या किसान सम्मान दिवस या राष्ट्रीय किसान दिवस मनाया जाता है। इस दिन उत्तर प्रदेश सरकार जिला और ब्लॉक स्तर पर उत्तर प्रदेश में भारत के किसानों और विभागीय कृषि विज्ञान से संबंधित कई कार्यक्रम, सेमिनार और चर्चा का आयोजन करती है।

खेती के क्षेत्र में विकास सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार और ग्रामीण विकास संघों द्वारा इस दिन विभिन्न कार्यशालाएं, प्रदर्शनियां और सेमिनार आयोजित किए जाते हैं। कृषि विभाग के अधिकारी और कृषि वैज्ञानिक गांवों का दौरा करके किसानों और उनसे संबंधित मुद्दों को समझने और उनके कृषि उत्पादन को बचाने के लिए कृषि तकनीकों और विभिन्न प्रकार के बीमा योजनाओं के बारे में समाधान और जानकारी प्रदान करते हैं।

किसान दिवस के समारोह को मनाने के दौरान कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञ किसानों के लाभ के लिए खेती के क्षेत्र में विभिन्न सूचना कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। विशेषज्ञ भी ऐसे हालात से बचने के लिए अलग-अलग सुझाव देते हैं जो कृषि उत्पादन को कम करते हैं या कृषि उत्पादन में ख़राब नतीजें उत्पन्न करते हैं। इस प्रकार इन कार्यक्रमों में भाग लेना किसानों को उनकी खेती के विकास के लिए बहुत फायदेमंद हैं।

उत्तर प्रदेश में लगभग 26 कृषि ज्ञान केंद्र और लगभग 31 कृषि विज्ञान केंद्र हैं। ये सभी केंद्र राज्य में अलग-अलग चर्चाओं के आयोजन द्वारा राष्ट्रीय किसान दिवस मनाते हैं। ये सभी न केवल पूर्व भारतीय प्रधानमंत्रियों में से एक का जन्मदिन मनाने के लिए आयोजित किए जाते हैं बल्कि देश के किसानों के लिए उपयोगी और सूचित परिस्थितियां भी पैदा करने के लिए आयोजित किए जाते हैं।

भारत में अधिकांश राज्य विशेषकर वे जो कृषि के लिहाज से समृद्ध हैं जैसे हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश आदि अन्य राज्य उत्तर प्रदेश से किसान दिवस को मनाने के लिए विचार कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश की जनसंख्या भारत में सबसे ज्यादा है और अधिकांश लोग अपने जीवन के लिए खेती में लगे हुए हैं। किसान भोजन और अन्य खाद्य पदार्थों का उत्पादन करते हैं जो पूरे देश में वितरित किए जाते हैं। शहरी आबादी काफी हद तक पूरे भारत में किसानों द्वारा की गई खेती पर निर्भर करती है। इस प्रकार यह महत्वपूर्ण है कि सरकार स्वस्थ और समृद्ध खेती के लिए पूरे भारत में किसानों के लिए अधिक उत्पादक परिस्थितियां विकसित करे।

किसान सम्मान दिवस भारत के कई राज्यों के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक है। किसानों से संबंधित मुद्दों और समाधानों पर चर्चा के लिए राज्य सरकार का कृषि विभाग और किसानों के प्रतिनिधि एक ही मंच पर एक साथ खड़े नज़र आते हैं। खेती की उन्नत तकनीक के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए इस दिन का उपयोग किया जाता है।

निष्कर्ष

चौधरी चरण सिंह को मिट्टी का पुत्र माना जाता है जो किसानों के समुदाय से संबंधित हैं। राष्ट्रीय किसान दिवस एक स्वतंत्र और मजबूत भारतीय किसान का सम्मान है। पूरा राष्ट्र महान उत्साह के साथ इस दिन को मनाता है। संदेश और नारे सोशल मीडिया पर साझे किए जाते हैं। आज के युवा भारतीय किसानों की समस्याओं के प्रति अधिक चिंतित हैं और उनकी हालत सुधारने के लिए कई नुक्कड़-नाटकों का आयोजन करते हैं। समय-समय पर केंद्र सरकार किसानों को दिए गए ऋणों को माफ़ कर देती है।

कई नीतियों की घोषणा और खेती के सुधार के लिए प्रौद्योगिकी में सुधार करने के बावजूद भारत में कृषि हालत अभी भी ख़राब है। हर साल भारतीय किसानों को प्राकृतिक संकट जैसे कि सूखा, बाढ़, खराब गुणवत्ता वाले बीज आदि से लड़ना पड़ता है। हालांकि पिछले 10-15 वर्षों से भारत के किसानों को सरकार से बहुत राहत मिल रही है जैसे कि उनके उत्पादन के लिए उचित मूल्य प्राप्त करना, ऋण पर छूट, खेती के लिए नई तकनीक का उपयोग करने की सुविधा आदि लेकिन अभी भी किसानों और उनकी कृषि पद्धतियों की स्थिति में सुधार करने के लिए बहुत कुछ किया जाना बाकि है तभी हमारा देश सही अर्थों में एक विकसित देश बनेगा।