भाई दूज

भाई दूज 2017

पूरे भारतवर्ष में 2017 में भाई दूज 21 अक्टूबर, शनिवार को मनाया जायेगा।

भईया दूज भारत का प्रमुख और महत्वपूर्ण त्यौहार है जब बहनें अपने प्रिय भाई की लम्बी उम्र और उनके समृद्ध जीवन के लिये कामना करती है। बहनें तिलक और पूजा की रस्म करती है और साथ ही अपने भाई से उपहार प्राप्त करती है। इसे भारत में विभिन्न स्थानों पर भाऊ बीज (गोवा, महाराष्ट्र और कर्नाटक में), भाई तिलक (नेपाल में), भरात्रु द्वितीया, भाउ-दीज, भाई फोटा (बंगाल में), नीनगोल चौकुबा (मणिपुर में) कहा जाता है।

यह भारत में सबसे ज्यादा मनाया जाने वाला त्यौहार है, जो मुख्य दिवाली के 2 दिन बाद मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, यह (अक्टूबर और नवंबर के बीच) कार्तिक के महीने में शुक्ल पक्ष के दूसरे दिन पड़ता है। प्रत्येक बहन सुबह बहुत जल्दी उठकर देवी और देवताओं से अपने भाईयों के भविष्य और अच्छे स्वास्थ्य के लिये पूजा और प्रार्थना करती है। पूजा अनुष्ठान के बाद माथे पर रोली, दही और चावल लगाने के साथ उत्सव मनाया जाता है। इस रस्म के बाद वे आरती करती है और खाने के लिये मिठाई और पीने के लिये पानी देती है। अन्त में वे एक दूसरे को उपहार देते है और बडों के पैर छूकर आशीर्वाद लेते है।

यह देश के बाहर भी मनाया जाता है। यह रक्षा बंधन के त्यौहार की तरह है जो भाई-बहनों के बीच प्यार के बंधन को और भी मजबूत करता है। इस विशेष दिन पर बहनें अपने भाई के अच्छे और कल्याण के लिये भगवान से प्रार्थना करती है, जबकि भाई अपनी प्रिय बहन को अपना प्यार और स्नेह दिखाने के लिये अपनी क्षमता के अनुसार उपहार देते हैं। इस विशेष अवसर की उत्पत्ति और उत्सव से संबंधित विभिन्न प्रकार की कहानियॉं और किंवदंतियॉं हैं।

भाई दूज का इतिहास

हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार यह माना जाता है कि इस विशेष दिन पर मृत्यु के देवता, यमराज अपनी प्रिय बहन यामी से मिलने आये थे। उनकी बहन ने तिलक और आरती की रस्म द्वारा उनका स्वागत किया। उसने उन्हें एक माला और खाने के लिए मिठाई सहित विशेष व्यंजन दिये। उन्होंने अपनी बहन की देखभाल और प्रेम के प्रतीक के रूप में अपनी बहन को एक अनोखा उपहार दिया। उस दिन यमराज ने घोषित किया कि जो भाई इस दिन पर अपनी बहन से तिलक और आरती प्राप्त करेगा वह कभी भयभीत नहीं होगा। यही कारण है कि यह दिन यम द्वितीया भी कहा जाता है।

एक और कहानी के अनुसार, हिन्दू भगवान श्री कृष्ण राक्षस राजा नरकासुर को मारने के बाद, अपनी बहन सुभद्रा के पास आये जहाँ उनका स्वागत उनकी बहन ने तिलक, आरती, मिठाई और फूलों के साथ किया।

भाई दूज कैसे मनाते है

बहनें इस त्यौहार को मनाने के लिए अपने भाइयों से उनके प्रिय व्यंजन के साथ अपने घर आने के लिए अनुरोध करती है। इस दिन बहनें भगवान से अपने भाइयों को आशीर्वाद देने, सभी समस्याओं और बुरे भाग्य से संरक्षित करने की प्रार्थना करती है। हालांकि, भाई अपनी प्यारी और दयालु बहनों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते है।

अपने भाइयों के बैठने के लिये बहनें चावल के आटे से एक सीट बनाती है और एक रस्म करती है। वे चावल और सिंदूर का लेप लगा कर भाई के हाथों की पूजा करती हैं। फिर, बहन अपने भाई की हथेलियों पर कद्दू के फूल, पान के पत्ते, सुपारी और सिक्के रखती है। बहनें हथेली पर पानी डालते हुये मंत्रों का जाप करती है। हाथ पर कलावा बॉध कर, तिलक करके आरती करती है। बहनें दक्षिण की दिशा की तरफ चेहरा करके दीया जलाती है। यह माना जाता है कि, अपने भाई की लम्बी उम्र के लिये भगवान से की गयी प्रार्थना को पूरी होने के लिये आकाश में उडती हुई पतंग को देखना बहुत भाग्यशाली माना जाता है।

भारत में कुछ स्थानों जैसे: हरियाणा, महाराष्ट्र में यह त्यौहार मनाना बहुत सामान्य है; बिना भाई की बहनें (जिनका कोई भाई नहीं है), इस खास अवसर को भाई के स्थान पर हिन्दू देवता चन्द्रमा की पूजा करके मनाती है। बहनें अपनी रिवाज और परंपरा के अनुसार इस दिन अपने हाथों पर मेंहदी लगाती हैं।

जो बहनें अपने भाईयों से दूर होती है वे चन्द्र देव की आरती करके अपने भाई के जीवन में खुशहाली और समृद्धि लाने की प्रार्थना करती है। वहीं भाई वापसी में अपनी बहन को बहुत सारा प्यार और उपहार ई-मेल, डाक या अन्य साधनों से भेजते है। बच्चों द्वारा चन्द्रमा को चन्दा मामा कहे जाने का यहीं मुख्य कारण है।

भाई दूज का महत्व

हरियाणा, महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा के लोग बहुत लगाव और आनन्द के साथ इस त्यौहार को मनाते हैं। यह वह समय है जब भाई-बहन एक दूसरे के लिए अपनी जिम्मेदारियों को याद करते है। जब परिवार के सभी सदस्य यह त्यौहार मनाने को एक साथ होते है तो यह भाई-बहन के रिश्ते और प्यार को संयुक्त और नवीनिकृत करता है। महाराष्ट्र में एक मीठा व्यंजन है जिसे बासुंदी पूरी या खीरनी पूरी के नाम से भी जाना जाता है। यह त्यौहार भाई और बहन के रिश्ते के बीच बहुत सारा सुख, स्नेह और सौहार्द लाता है। यह त्यौहार भाई और बहन का एक दूसरे के लिये प्यार और दायित्व को दर्शाने का तरीका है। पांच सुपारी और पान के पत्ते भाईयों के सिर पर उनकी बहनों द्वारा रखे जाते है। बहनों द्वारा भाईयों के हाथों पर पानी डालकर प्रार्थना की जाती है।