दिवाली पर निबंध

दीपावली का मतलब होता है, दीपों की अवली यानी पंक्ति। इस प्रकार दीपों की पंक्तियों से सुसज्जित इस त्योहार को दीपावली कहा जाता है। दीवाली को रोशनी का उत्सव या लड़ीयों की रोशनी के रुप में भी जाना जाता है जो कि घर में लक्ष्मी के आने का संकेत है साथ ही बुराई पर अच्छाई की जीत के लिये मनाया जाता है। असुरों के राजा रावण को मारकर प्रभु श्रीराम ने धरती को बुराई से बचाया था। ऐसा माना जाता है कि इस दिन अपने घर, दुकान, और कार्यालय आदि में साफ-सफाई रखने से उस स्थान पर लक्ष्मी का प्रवेश होता है। उस दिन घरों को दियों से सजाना और पटाखे फोड़ने का भी रिवाज है।

दिपावली पर बड़ा और छोटा निबंध (Long and Short Essay on Diwali in Hindi)

निबंध 1 (300 शब्द)

प्रस्तावना

हिन्दू धर्म के लिये दीपावली एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इसमें कई सारे संस्कार, परंपराएं और सांस्कृतिक मान्यताएं हैं। इसे सिर्फ देश में ही नहीं वरन् विदेशों में पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस उत्सव से जुड़ी कई सारी पौराणिक कथाएँ है। इस कहानी के पीछे भगवान राम की राक्षस रावण पर जीत के साथ ही बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक के रुप में भी देखा जाता है। उस दिन कार्तिक महीने की अमावस्या थी। घने अंधकार में प्रकाश करने के लिए अयोध्या वासियों ने दिए जलाए थे। तब से यह दिन हर साल सभी भारतीय प्रकाश पर्व (दीपावली) के रूप में मनाते हैं

देवी लक्ष्मी और बुद्धि के देवता गणेश की पूजा

देवी लक्ष्मी के आगमन के लिये और जीवन के हर अंधेरों को दूर करने के लिये लोग अपने घरों और रास्तों को रोशनी से जगमगा देते है। इस दौरान सभी मजेदार खेलों का हिस्सा बनकर, स्वादिष्ट व्यंजनों का लुप्त उठा कर और दूसरी कई क्रियाओं में व्यस्त रहकर इस पर्व को मनाते है। सरकारी कार्यालयों को भी सजाया और साफ किया जाता है। मोमबत्ती और दीयों के रोशनी के बीच साफ-सफाई की वजह से हर जगह जादुई और सम्मोहक लगती है।

दिवाली

 

लोग इस पर्व को अपने परिजनों और खास मंत्रों के साथ मनाते है। इसमें वो एक-दूसरे को उपहार, मिठाइयाँ और दीपावली की बधाई देकर मनाते है। इस खुशी के मौके सभी भगवान की आराधना कर, खेलों के द्वारा, और पटाखों के साथ मनाते हैं। सभी अपनी क्षमता के अनुसार अपने प्रियजनों के लिये नये कपड़े खरीदते है। बच्चे खास तौर से इस मौके पर चमकते-धमकते कपड़े पहनते है।

निष्कर्ष

सूर्यास्त के बाद धन की देवी लक्ष्मी और बुद्धि के देवता गणेश की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि देवी लक्ष्मी के घर में पधारने के लिये घरों की साफ-सफाई, दीयों से रोशनी और सजावट बहुत जरूरी है। इसे पूरे भारतवर्ष में एकता के प्रतीक के रुप देखा जाता है। भारत त्यौहारों का देश है, यहाँ समय-समय पर विभिन्न जातियों समुदायों द्वारा अपने-अपने त्यौहार मनाये जाते हैं सभी त्यौहारों में दीपावली सर्वाधिक प्रिय है। दीपों का त्यौहार दीपावली दीवाली जैसे अनेक नामों से पुकारा जाने वाला आनन्द और प्रकाश का त्यौहार है।

 

निबंध 2 (400 शब्द)

प्रस्तावना

दीपावली एक महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध उत्सव है जिसे हर साल देश और देश के बाहर विदेश में भी मनाया जाता है। इसे भगवान राम के चौदह साल के वनवास से अयोध्या वापसी के बाद और लंका के राक्षस राजा रावण को पराजित करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।

भगवान राम की वापसी के बाद, भगवान राम के स्वागत के लिये सभी अयोध्या वासियों ने पूरे उत्साह से अपने घरों और रास्तों को सजा दिया। ये एक पावन हिन्दू पर्व है जो बुराई पर सच्चाई की जीत के प्रतीक के रुप में है। इसे सिक्खों के छठवें गुरु श्रीहरगोविन्द जी के रिहाई की खुशी में भी मनाया जाता है, जब उनको ग्वालियर के जेल से जहाँगीर द्वारा छोड़ा गया।

दीपावली कब-क्यों मनाई जाती है?

ये पर्व कार्तिक महीने की अमावस्या के दिन मनाई जाती है। अमावस्या के दिन बहुत ही अँधेरी रात होती है जिसमें दीवाली पर्व रोशनी फ़ैला ने का काम करती है। वैसे तो इस पर्व को लेकर कई कथाये है लेकिन कहते हैं भगवान राम 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे, इस खुशी में अयोध्या वासियों ने दीये जलाकर उनका स्वागत किया था।

बाजारों को दुल्हन की तरह शानदार तरीके से सजा दिया जाता है। इस दिन बाजारों में खासा भीड़ रहती है खासतौर से मिठाइयों की दुकानों पर, बच्चों के लिये ये दिन मानो नए कपड़े, खिलौने, पटाखे और उपहारों की सौगात लेकर आता है। दीवाली आने के कुछ दिन पहले ही लोग अपने घरों की साफ-सफाई के साथ बिजली की लड़ियों से रोशन कर देते है।

दीवाली उत्सव की तैयारी

दीवाली के दिन सब बहुत खुश रहते है एक दूसरे को बधाइयां देते है। बच्चे खिलौने और पटाके खरीदते है, दीवाली के कुछ दिन पहले से ही घर में साफ़ सफाई शुरू हो जाती है। लोग अपने घर का सज-सज्जा करते है। लोग इस अवसर पर नए कपड़े, बर्तन, मिठाइयां आदि खरीदते है।

देवी लक्ष्मी की पूजा के बाद आतिशबाजी का दौर शुरु होता है। इसी दिन लोग बुरी आदतों को छोड़कर अच्छी आदतों को अपनाते है। भारत के कुछ जगहों पर दीवाली को नया साल की शुरुआत माना जाता है साथ ही व्यापारी लोग अपने नया बही खाता से शुरुआत करते है।

निष्कर्ष

दीपावली, हिन्दुओं द्वारा मनाया जाने वाला सबसे बड़ा त्योहार है। दीपों का खास पर्व होने के कारण इसे दीपावली या दीवाली नाम दिया गया। कार्तिक माह की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह महा पर्व, अंधेरी रात को असंख्य दीपों की रौनक से प्रकाशमय कर देता है। दीवाली सभी के लिये एक खास उत्सव है क्योंकि ये लोगों के लिये खुशी और आशीर्वाद लेकर आता है। इससे बुराई पर अच्छाई की जीत के साथ ही नया सत्र की शुरुआत भी होती है।


 

निबंध 3 (500 शब्द)

प्रस्तावना

हिन्दुओं के लिये दीवाली एक सालाना समारोह है जो अक्तूबर और नवंबर के दौरान आता है। इस उत्सव के पीछे कई सारे धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं है। इस पर्व को मनाने के पीछे एक खास पहलू ये है कि, असुर राजा रावण को हराने के बाद भगवान राम 14 साल का वनवास काट कर अयोध्या पहुँचे थे। ये वर्षा ऋतु के जाने के बाद शीत ऋतु के आगमन का इशारा करता है। ये व्यापारियों के लिये भी नई शुरुआत की ओर भी इंगित करता है । दीवाली के अवसर पर लोग अपने प्रियजनों को शुभकामना संदेश के साथ उपहार वितरित करते है जैसे मिठाई, मेवा, केक इत्यादि। अपने सुनहरे भविष्य और समृद्धि के लिए लोग लक्ष्मी देवी की पूजा करते है|

बुराई को भगाने के लिये हर तरफ चिरागों की रोशनी की जाती है और देवी-देवताओं का स्वागत किया जाता है। दीपावली पर्व आने के एक महीने पहले से ही लोग वस्तुओं की खरीदारी, घर की साफ-सफाई आदि में व्यस्त हो जाते है। दीयों की रोशनी से हर तरफ चमकदार और चकित कर देने वाली सुंदरता बिखरी रहती है।

बच्चों की दीवाली

इसको मनाने के लिये बच्चे बेहद व्यग्र रहते है और इससे जुड़ी हर गतिविधियों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते है। स्कूल में अध्यापकों द्वारा बच्चों को कहानीयाँ सुनाकर, रंगोली बनवाकर, और खेल खिलाकर इस पर्व को मनाया जाता है। दीवाली के दो हफ्ते पहले ही बच्चों द्वारा स्कूलों में कई सारे क्रियाकलाप शुरु हो जाते है। स्कूलों में शिक्षक विद्यार्थियों को पटाखों और आतिशबाजी को लेकर सावधानी बरतने की सलाह देते है, साथ ही पूजा की विधि और दीपावली से संबंधित रिवाज आदि भी बताते है।

दीपावली 5 दिनों का एक लंबा उत्सव है जिसको लोग पूरे आनंद और उत्साह के साथ मनाते है। दीपावली के पहले दिन को धनतेरस, दूसरे को छोटी दीवाली, तीसरे को दीपावली या लक्ष्मी पूजा, चौथे को गोवर्धन पूजा, तथा पाँचवें को भैया दूज कहते है। दीपावली के इन पाँचों दिनों की अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएँ है।

परम्परा

अंधकार पर प्रकाश का विजय यह पर्व लोगों के बिच में प्रेम और एक दूसरे के प्रति स्नेह ले आता है। यह व्यक्तिगत और सामूहिक दोनों रूप से मनाये जाने वाला बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार है। हर प्रान्त या क्षेत्र में दीवाली मनाने के तरीके और कारण अलग है, सभी जगह यह त्यौहार पीढ़ियों से चला आ रहा है। लोगों में दीवाली की बहुत उमंग होती है। लोग अपने घरों का कोना-कोना साफ़ करते हैं, नये कपड़े पहनते हैं। लोग एक दूसरे को मिठाइयां तथा उपहार देते है, एक दूसरे से मिलते है। घरों में रंग बिरंगी रंगोलियाँ बनाई जाती है। दीपक जलाये जाते है , आतिशबाजी की जाती है। अंधकार पर प्रकाश की विजय का यह पर्व समाज में उल्लास, भाई-चारे व प्रेम का संदेश फैलाता है।

निष्कर्ष

दीपावली, प्रकाश का पर्व या दूसरा नाम जश्न ए चिराग आदि अनेक नामों से पुकारा जाने वाला यह पर्व प्राचीन काल से मनाया जाता रहा है। यह पर्व लगातार पांच दिनों तक मनाया जाता है, धनतेरस से शुरुआत होती है और भैयादूज तक रहता है । धनतेरस के दिन धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है। नरक चतुर्दशी के दिन श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की खुशियां मनाई जाती हैं। वास्तव में यह त्यौहार हमें अपने मन को प्रकाशित करने का संदेश देता है।

 

निबंध 4 (600 शब्द)

प्रस्तावना

दीवाली को रोशनी का त्योहार के रुप में जाना जाता है जो भरोसा और उन्नति लेकर आता है। हिन्दू, सिक्ख और जैन धर्म के लोगों के लिये इसके कई सारे प्रभाव और महत्तम है। ये पाँच दिनों का उत्सव है जो हर साल दशहरा के 21 दिनों बाद आता है। इसके पीछे कई सारी सांस्कृतिक आस्था है जो भगवान राम के 14 साल के वनवास के बाद अपने राज्य के आगमन पर मनाया जाता है। इस दिन अयोध्या वासियों ने भगवान राम के आने पर आतिशबाजी और रोशनी से उनका स्वागत किया। हिन्दुओं के सभी पर्वों में दीपावली का महत्व व लोकप्रियता सर्वाधिक है। दीपावली का अर्थ है दीपों की माला।

महालक्ष्मी पूजा

यह पर्व प्रारम्भ में महालक्ष्मी पूजा के नाम से मनाया जाता था । दीपावली के पहले दिन को धनतेरस या धन त्रेयोंदशी कहते है जिसे माँ लक्ष्मी की पूजा के साथ मनाया जाता है। इसमें लोग देवी को खुश करने के लिये भक्ति गीत, आरती और मंत्र उच्चारण करते है। दूसरे दिन को नारक चतुर्दशी या छोटी दीपावली कहते है जिसमें भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है क्योंकि इसी दिन कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था। ऐसी धार्मिक धारणा है कि सुबह जल्दी तेल से स्नान कर देवी काली की पूजा करते है और उन्हें कुमकुम लगाते है। कार्तिक अमावस्या के दिन समुद्र मंथन में महालक्ष्मी का जन्म हुआ। लक्ष्मी धन की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण धन के प्रतीक स्वरूप इसको महालक्ष्मी पूजा के रूप में मनाते आये। आज भी इस दिन घर में महालक्ष्मी की पूजा होती है।

तीसरा दिन मुख्य दीपावली का होता है जिसमें माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है, अपने मित्रों और परिवारजन में मिठाई और उपहार बाँटे जाते है साथ ही शाम को जमके आतिशबाजी की जाती है।

चौथा दिन गोवर्धन पूजा के लिये होता है जिसमें भगवान कृष्ण की आराधना की जाती है। लोग गायों के गोबर से अपनी दहलीज पर गोवर्धन बनाकर पूजा करते है। ऐसा माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने अपनी छोटी उँगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर अचानक आयी वर्षा से गोकुल के लोगों को बारिश के देवता इन्द्रराज से बचाया था। पाँचवें दिन को हम लोग जामा द्वितीय या भैया दूज के नाम से जानते है। ये भाई-बहनों का त्योहार होता है।

अलग देशों में दीवाली का त्योहार

ब्रिटेन:-ब्रिटेन में भारतीय की संख्या ज्यादा है। यह पर्व वह भी बहुत धूम धाम से मनाया जाता है। ब्रिटेन में स्वामी नारायण का मंदिर है जहाँ मुख्य रूप से यह त्यौहार मनाया जाता है।

मलेशिया:-मलेशिया में दीवाली के दूसरे दिन दूसरे धर्म के लोगों को घर में दावत दी जाती है।

मॉरीशस:-मॉरीशस में बड़ी मात्रा में हिंदू रहते हैं। दीपावली के दिन वहां पर सरकारी अवकाश होता है।

दीवाली भारत का एक राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक पर्व है। इस त्यौहार को हिन्दू, मुस्लिम ,सिख और ईसाई सभी मिलकर मनाते हैं। दीपावली के दौरान लोग अपने घर और कार्य स्थली की साफ-सफाई और रंगाई-पुताई करते है। आमजन की ऐसी मान्यता है कि हर तरफ रोशनी और खुले खिड़की दरवाजों से देवी लक्ष्मी उनके लिये ढेर सारा आशीर्वाद, सुख, संपत्ति और यश लेकर आएंगी। इस त्योहार में लोग अपने घरों को सजाने के साथ रंगोली से अपने प्रियजनों का स्वागत करते है। नये कपड़ों, खुशबूदार पकवानों, मिठाइयों और पटाखों से पाँच दिन का ये उत्सव और चमकदार हो जाता है।

स्वच्छता का प्रतीक

दीपावली जहाँ रौनक और ज्ञान का प्रतीक है वही स्वच्छता का प्रतीक भी है। घरों में पिम्स, मच्छर, खटमल, आदि विषैले किटाणु धीरे-धीरे अपना घर बना लेते हैं। मकड़ी के जाले लग जाते है लोग इनकी सफाई करा देते है और घर की रंगाई फर्श की सफाई सब कर देते है। इस दिन हर जगह स्वच्छता ही दिखाई देती है। सबके घरों का एक-एक कोना साफ़ होता है। और रौनक जगमगा उठती है। घी के दिए की खुशबू पूरे वातावरण में फैली होती है। सबके मन में नई ऊर्जा और नया उत्साह जन्म लेता है। लोग अपनी बुराइयों को त्याग कर अच्छे और सच्चे राह पर चलने की कामना करते है।

निष्कर्ष

गणेश को शुभ शुरुआत के देवता और लक्ष्मी को धन की देवी कहा गया है। इस अवसर पर पटाखे मुख्य आकर्षण हैं। पड़ोसियों, मित्रों और रिश्तेदारों को घरों और मिठाई वितरण में पकाया स्वादिष्ट भोजन दीवाली उत्सव का हिस्सा हैं। लोग सड़कों, बाजारों, घरों और परिवेश में समृद्धि और कल्याण की इच्छा के लिए तेल से भरे प्रकाश की मिट्टी के साथ दीवाली का स्वागत करते हैं। दीवाली की रात को लोग अपने घरों के दरवाजे खुल गए क्योंकि वे देवी लक्ष्मी की यात्रा की उम्मीद करते हैं।

 

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