दिवाली पर निबंध

दीपावली या दिवाली का अर्थ है दीपों की अवली मतलब दीपों की पंक्ति। यह पर्व विशेष कर भारत और भारत के पड़ोसी देश नेपाल में बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसके अतिरिक्त अन्य देशों में (जहां हिंदू निवास करते हैं) भी यह विधि पूर्वक मनाया जाता है। यह पर्व अपने साथ खुशी, उत्साह और ढ़ेर सारा उमंग लेकर आता है। कार्तिक माह के अमावस्या को दिवाली का पर्व अनेक दीपों के प्रकाश के साथ मनाया जाता है। इस विशेष दिन पर अमावस्या की काली रात दिपों के जगमगाहट से रौशन हो जाती है। दिपावली पर पुराने रीत के अनुसार सभी अपने घरों को दीपक से सजाते हैं।

दीपावली पर छोटे-बड़े निबंध (Short and Long Essay on Diwali in Hindi)

निबंध – 1 (300 शब्द)

परिचय

प्रभु राम के चौदह वर्ष का वनवास पूर्ण कर अयोध्या वापस आने के उपलक्ष्य में दिवाली मनाया गया, तब से प्रति वर्ष दिवाली मनाया जाने लगा। स्कंद पुराण के अनुसार दिवाली से जुड़ी अनेक कथाएं प्रचलित हैं। अतः आध्यात्मिक दृष्टि से दिवाली हिंदुओं का बहुत अधिक महत्वपूर्ण त्योहार है।

दीपावली के उपलक्ष्य में विभिन्न प्रचलित कथाएं (इतिहास)

दिवाली का इतिहास बहुत पुराना है, इससे जुड़ी अनेक पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं जैसे कुछ लोगों के अनुसार सतयुग में भगवान नृसिंह ने इस दिन हिरण्यकश्यप का वध किया था इस उपलक्ष्य में दिवाली मनाया जाता है। कुछ लोगों का मानना है द्वापर में कृष्ण ने नरकासुर का वध कार्तिक आमवस्या को किया था इसलिए मनाया जाता है। कुछ के अनुसार इस दिन माता लक्ष्मी दूध सागर से प्रकट हुई थी, एवं अन्य के अनुसार माँ शक्ति ने उस दिन महाकाली का रूप लिया था इसलिए मनाया जाता है।

दिवाली

दीपावली की सर्वाधिक प्रचलित कथा

दिवाली मनाए जाने वाले कारणों में सबसे प्रचलित कहानी त्रेता युग में प्रभु राम के रावण का वध कर चौदह वर्ष पश्चात माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटने के उपलक्ष्य में पूरी अयोध्या नगरी को फूलों और दीपों से सजाया गया। तब से प्रति वर्ष कार्तिक अमावस्या को दिवाली मनाया जाने लगा।

दीपावली कब मनाई जाती है

उत्तरी गोलार्द्ध में शरद ऋतु के कार्तिक माह की पूर्णिमा को यह दिपोत्सव धूम-धाम से मनाया जाता है। ग्रेगोरी कैलेंडर के अनुसार यह त्योहार अक्टूबर या नवम्बर माह में मनाया जाता है।

दीपावली का महत्व

दिवाली की तैयारी के वजह से घर तथा घर के आस-पास के स्थानों की विशेष सफाई संभव हो पाती है। साथ ही दिवाली का त्योहार हमें हमारे परंपरा से जोड़ता है, हमारे आराध्य के पराक्रम का बोध कराता है। इस बात का भी ज्ञान कराता है कि, अंत में विजय सदैव सच और अच्छाई की होती है।

निष्कर्ष

दिवाली के साथ जुड़ी अनेक पौराणिक कहानियां इसके महत्व को और अधिक बढ़ा देती हैं। इस त्योहार से हम सभी को सच के राह पर चलने की सीख प्राप्त होती है।

निबंध – 2 (400 शब्द)

परिचय

दीपावली, नाम से ही स्पष्ठ है दीपों का त्योहार। लोग महिनों पहले से इसकी तैयारी में जुट जाते हैं। चारों ओर दीपों की रौशनी से संसार में उजाला छा जाता है। आज भी इस पर्व की पूजन विधि परंपरागत तरह से संपन्न की जाती है।

दीपावली की विशेष तैयारी

दिवाली की तैयारी घरों में हफ्तों पहले से शुरु कर दी जाती है। घर, मकानों को पेंट किया जाता है। सभी बेकार की वस्तुओं को फेक दिया जाता है। घर के कोने-कोने की सफाई की जाती है। यह इस दृष्टि से स्वच्छता का त्योहार है।

दीपावली कैसे मनाते हैं

दिवाली पर सभी अपने घरों को विभिन्न साज-सज्जा की सामग्री से सजाते हैं, लोग अपने-अपने घरों को अनेक दीपकों की सहायता से रौशन करते हैं, लक्ष्मी पूजन करते हैं और पटाखे, फुलझड़ी जलाते हैं। महिलाओं द्वारा घर के आंगन में रंगोली बनायी जाती है। शाम में लोग एक-दूसरे के घर सूखे मेवे और मिठाइयां लेकर उनसे मिलने जाते हैं।

दीपावली पर लक्ष्मी पूजन करने की परंपरा एवं पूजा का महत्व

दिवाली के संध्या में अपने घर के पूर्व दिशा में धन की देवि लक्ष्मी तथा गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधिवत पूजा, अर्चना, पाठ करने से सभी परेशानियां दूर होती हैं। व्यक्ति को धन और यश की प्रात्ति होती है।

छोटी दीपावली

दीपावली के एक दिन पूर्व छोटी दीपावली मनाते है। इस दिन आयु के देवता यमराज की पूजा की जाती है। एक दिपक जला कर उसे घर से दूर कहीं रख दिया जाता है। छोटी दिपावली को नरक चतुर्दशी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है इस दिन यमराज की पूजा करने पर अकाल मृत्यु भी टल जाता है।

धनतेरस का महत्व

समुद्र मंथन के समय कार्तिक मास के त्रियोदश तिथी को भगवान धन्वन्तरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इस वजह से कार्तिक के तेरहवें दिन धनतेरस की परंपरा निभाई जाती है। इस दिवस पर लोग बहुत अधिक खरीदारी करते हैं। नयी गाड़ी, विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक मशीन, सोना, चांदी, बरतन, कपड़े, आदि। इस दिवस पर समान खरीद कर उसकी पूजा करना शुभ माना जाता है।

दीपावली पर दुल्हन की तरह सजा बाजार

दीपावली के समय पर बाजार दुल्हन के तरह सजा मिलता है। सड़के रंग-बिरंगी छोटी-छोटी बल्ब वाले लाइट से रौशन होता है। दुकानों में विभिन्न प्रकार के पटाखे, मिठाई, बरतन आदि बिक रहें होते हैं। आभूषण व इलेक्ट्रॉनिक्स के दुकानों पर विशेष भीड़ देखी जाती है।

दीपावली एक पर्व नहीं बल्कि पर्वों की श्रृंखला है

दीपावली से जुड़े अन्य पांच पर्व इसे पर्वों की श्रृंखला का रूप देता है। इसकी शुरुआत कार्तिक त्रियोदश के धनतेरस से होती है। उसके अगले दिन नरक चतुर्दशी अर्थात छोटी दिपावली तत्पश्चात लक्ष्मी पूजन (दीपावली), दिपावली की दूसरी सुबह गोवर्धन पूजा और अंत में यम द्वितीय या भाई दूज मनाते हैं।

निष्कर्ष

दीपावली पांच दिनों तक चलने वाले पर्व के समुह के रूप में भी जाना जाता है। प्रत्येक दिन का आध्यत्मिक महत्व है। यह पांच दिन हमारे जीवन के अंधकार को प्रकाश से भर देते हैं।

निबंध – 3 (500 शब्द)

परिचय

दीपावली धन, धान्य, सुख, चैन व ऐश्वर्य का त्योहार है। भारत के विभिन्न राज्य इस अवसर पर पौराणिक कथाओं के आधार पर विशेष तरह की पूजा करते हैं। दिवाली, भारत तथा नेपाल में प्रमुख रूप से मनाया जाता है। इसके अलावा अन्य देशों में भी उत्साह के साथ मनाया जाता है।

भारत के विभिन्न स्थान पर दिपावली मानाने की वजह

भारत के विभिन्न राज्यों में दिवाली मानाने की अलग-अगल वजह है। उन में से कुछ प्रमुख निम्नवत् हैं-

  • भारत के पूर्वी भाग में स्थित उड़ीसा, बंगाल इस दिन माता शक्ति को, महाकाली का रूप धारण करने के वजह से मनाते हैं। और लक्ष्मी के स्थान पर काली की उपासना करते हैं।
  • भारत के उत्तरी भाग में स्थित पंजाब के लिए दिवाली बहुत महत्व रखता है क्योंकि 1577 में इसी दिवस पर अमृतसर में स्वर्ण मंदिर की नींव रखी गई थी। और इसी दिन पर सिक्खों के गुरु हरगोबिंद सिंह को जेल से रिहा किया गया था।
  • भारत के दक्षिण भाग में स्थित राज्य जैसे तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, आदि दिवाली पर, द्वापर में कृष्ण द्वारा नरकासुर के वध के खुशी में कृष्ण की पूजा करके मनाते हैं।

विदेश में दिपावली का स्वरूप

  • नेपाल - भारत के अलांवा भारत के पड़ोसी देश नेपाल में दिपावली का त्योहार धूम-धाम से मनाया जाता है। इस दिवस पर नेपाली कुत्तों को सम्मानित करते हुए उनकी पूजा करते हैं। इसके अलांवा वह संध्याकाल में दीपक जलाते हैं तथा एक-दूसरे से मिलने उनके घर जाते हैं।
  • मलेशिया - मलेशिया में हिंदुओं की संख्या ज्यादा होने के वजह से इस दिन पर सरकारी अवकाश दिया जाता है। लोग अपने घरों में पार्टी आयोजित करते हैं। जिसमें अन्य हिंदू व मलेशियाई नागरिक सम्मिलित होते हैं।
  • श्रीलंका - इस द्वीप में रह रहे लोग दिवाली के सुबह उठ कर तेल से स्नान करते हैं और पूजा के लिए मंदिर जाते हैं। इसके अतिरिक्त यहां दिवाली के मौके पर खेल, आतिशबाजी, गायन, नृत्य, भोज आदि आयोजित किया जाता है।

इन सब के अतिरिक्त अमेरिका, न्यूजीलैंड, मॉरिशस, सिंगापुर, रीयूनियन, फिजी में बसे हिंदुओं द्वारा यह पर्व मनाया जाता है।

दीपावली पर ध्यान रखने योग्य बातें

विशेषकर लोग दीपावली पर पटाखे जलाते हैं, यह पटाखे अत्यधिक खतरनाक होते हैं। मस्ती में होने के वजह से अनचाही दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है। अतः त्योहार के धूम-धाम में व्यक्ति को सुरक्षा का भी पूर्ण खयाल रखना चाहिए।

दीपावली पर अभद्र व्यवहार न करें

कई लोगों का मानना है, दिपावली के अवसर पर जुआ खेलने से घर में धन की बाढ़ आ जाती है। इस कारणवश अनेक लोग इस अवसर पर जुआ खेलते हैं। यह उचित व्यवहार नहीं है।

अत्यधिक पटाखो का जलाया जाना

पटाखों के आवाज से अनेक बेजुबान जानवर बहुत अधिक डरते हैं। इसके अलांवा बड़े-बुजुर्ग और गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज़ भी इन ध्वनि से परेशानियों का सामना करते हैं। इसके साथ ही दिवाली के दूसरे दिन प्रदुषण में वृद्धि हो जाती है।

निष्कर्ष

दिवाली खुशीयों का त्योहार है। इससे जुड़ी प्रत्येक चीज हमें खुशी देती है। हम सभी को समाज के ज़िम्मेदार नागरिक होने के नाते यह कर्तव्य बनता है की हमारे मस्ती और आनंद के वजह से किसी को भी किसी प्रकार का कष्ट न होने पाए।

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