महात्मा गांधी पर 10 वाक्य

जब भी देश के स्वतंत्रता की बात आती है तो गांधी जी का नाम सबसे पहले हमारे ज़हन में आता है। 1857 की क्रांति के बाद स्वतंत्रता के हमारे लम्बे संघर्ष में गांधीजी के आगमन से एक नया बदलाव आ गया। गांधीजी ने अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए देश की स्वतंत्रता में अभूतपूर्व योगदान दिया।

गांधी जयंती पर 10 वाक्य

देश में फैले सांप्रदायिकता पर वो निराश थे और लोगों से अपील किए कि स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए हमें एकजूट होना पड़ेगा। देश की आज़ादी में गांधीजी एक महान नायक रहें। यहां मैं महात्मा गांधी से जुड़े कुछ वाक्यप्रस्तुत कर रहा हूं, आशा करता हूं कि ये आपके लिए उपयोगी होंगे।

महात्मा गांधी पर 10 लाइन (Ten Lines on Mahatma Gandhi in Hindi)

बापू पर 10 वाक्य - Set 1

1) गाँधीजी का वास्तविक नाम ‘मोहनदास करमचंद गांधी’ है।

2) 2 अक्टूबर 1869 को गांधीजी का जन्म गुजरात के पोरबंदर जिले में हुआ था।

3) इस दिन को विश्व अहिंसा दिवस एवं गांधी जयंती के नाम से जानते है।

4) इनके पिताजी करमचंद गांधी एक दीवान थे।

5) इनकी माताजी पुतलीबाई का धर्म के प्रति काफी झुकाव था।

6) इनका विवाह केवल 13 वर्ष की आयु में ही कस्तूरबा गांधी से कर दिया गया था।

7) इन्होंने अपने कानून की पढ़ाई लंदन से पूरा किया।

8) बापू ने जीवन के 3 सिद्धांत बताये है- सत्य, अहिंसा, ब्रम्हचर्य।

9) इन्हें हमारे भारत के राष्ट्रपिता के नाम से भी जाना जाता है।

10) ये एक महान राजनीतिक और समाज सुधारक थे।

बापू पर 10 वाक्य - Set 2

1) भारत की आज़ादी में गांधीजी का महत्वपूर्ण योगदान है।

2) गोपाल कृष्ण गोखले को ये अपना राजनीतिक गुरु मानते थे।

3) गांधी जी सदैव ही अस्पृश्यता व अन्य कुरीतियों के विरोध में थे।

4) बापू ने देश के आज़ादी के लिए बहुत सारे आन्दोलन किए।

5) महात्मा गांधी स्वाधीनता आंदोलन के एक प्रमुख स्तंभ थे।

6) गांधीजी द्वारा बनाया गया पहला ‘सत्याग्रह आश्रम’ वर्तमान में राष्ट्रीय स्मारक है।

7) गांधीजी ने लोगों की सेवा के लिए अपना पहला आश्रम साबरमती नदी के तट पर बनाया।

8) भारत की आज़ादी की ओर गांधीजी का सबसे पहला चम्पारण आंदोलन था।

9) गांधीजी बहुत उदार प्रकृति के व्यक्ति थे, वो गरीबों और किसानों के लिए सदैव तत्पर रहते थे।

10) गांधीजी द्वारा किये आंदोलनों में चम्पारण, सविनय अवज्ञा, असहयोग, और नमक आंदोलन महत्वपूर्ण थे।

10 Lines on Mahatma Gandhi

गांधीजी जीवनपर्यंत लोगों की सेवा में लगे रहें। लंदन से वक़ालत करने के बावजूद उन्होंने विदेश में आराम की जिंदगी न चुनकर अफ्रीका में भारतीयों के लिए लड़ें। उसके बाद वो भारत की स्थिति को देखकर वापस लौट आए। गांधीजी ने कभी अहिंसा का मार्ग नहीं छोड़ा और लोगों से भी हिंसा त्यागने की अपील करते थे। गांधीजी सच्चे देशभक्त थे। उन्होंने देश की स्वतंत्रता में भी योगदान दिया और समाज में फैली कई कुप्रथाओं को भी समाप्त कराया। अंततः गांधीजी के ही एक शिष्य द्वारा उनका हत्या कर दिया गया।

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