महात्मा गाँधी पर भाषण

महात्मा गाँधी हर भारतीय के लिए एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व है। कोई भी भारतीय, देश के स्वाधीनता आंदोलन मे उनके योगदान को नही भूल सकता। यही कारण है कि उनके महान कार्यो और विचारो के याद में देश भर मे 2 अक्टूबर के दिन गाँधी जंयती मनाई जाती है। तो इस बात की काफी संभावना है की किसी उत्सव या कार्यक्रम में जैसे की गाँधी जयंती, स्वतंत्रा दिवस या गणतंत्र दिवस जैसे अवसरो पर आपको भी गाँधी जी पर भाषण देना पड़े या फिर एक विद्यार्थी के रुप में ये आपकी पढ़ाई का भी हिस्सा हो सकता है और यदि आप इसके लिये तैयार नही है, तो हम आपकी मदद करेंगे।

महात्मा गाँधी पर लम्बे और छोटे भाषण (Long and Short Speech on Mahatma Gandhi in Hindi)

महात्मा गाँधी पर छोटा भाषण 1

आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, उप प्रधानाचार्य महोदय, माननीय शिक्षक गण एवं मेरे प्यारे भाइयों एवं बहनों। आज गांधी जयंती के अवसर पर मुझे इतने महान पुरूष के बारे मे बोलने का अवसर प्राप्त कर बड़े गर्व कि अनुभूति हो रही है।

महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 में हुआ था। गांधी जी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। उनके पिता का नाम करमचंद गांधी था और माता थीं पुतली बाई। उनका विवाह 13 वर्ष कि अवस्था में कस्तूरबा के साथ हो गया था। वे गुजरात के रहने वाले थे।

मैट्रक तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद, वे आगे वकालत पढ़ने विदेश चले गये। वहां से लौटने के बाद उन्होंने भारत को अंग्रेजों से मुक्त कराने में अहम भूमिका निभाई। सत्य अहिंसा का मार्ग अपना के उन्होने इतिहास में अपने नाम को सुनहरे अक्षरों मे दर्ज कराया और महात्मा, राष्ट्रपिता जैसी उपाधियां प्राप्त की। लोग इन्हे प्यार से बापू बुलाते थे। हमें इनसे अहिंसा का पाठ पढ़ना चाहिये और यह सीखना चाहिये कि परिस्थिति चाहे जैसी भी हो, सत्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिये।

जय हिंद!


 

महात्मा गाँधी पर छोटा भाषण 2

आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, माननीय शिक्षक गण एवं मेरे प्यारे भाइयों एवं बहनों आज मैं गांधी जयंती के उपलक्ष पर आप सभी को उनके बारे में कुछ महत्वपूर्ण बाते बताने जा रही हूं।

आया था एक नन्हा सा बालक 2 अक्टूबर को इस दुनिया में, छोटे-छोटे हाथों मे एक स्वतंत्र भारत का सौगात लिये। 13 वर्ष कि अवस्था में इनका पुतलीबाई से ब्याह हुआ, और आगे कि शिक्षा के लिये इनका विदेश को गमन हुआ। धीरे-धीरे फिर इनको अपने भारत कि दुर्दशा दिखी, कि कैसे अंग्रजों के आने से, हमारा अपने ही देश में दमन हुआ।

बहुत हुआ अब अत्याचार, अंग्रेजों को होने वाली अब कठिनाई थी। साधारण सा था वो बालक, पर इसने अपनी एक अलग ही पहचान बनाई थी। अहिंसा था जिसका हथियार और सत्य को जिसने अपना राह चुना। लोग प्यार से इन्हे बापू बुलाते और महात्मा कि उपाधी भी इन्होने ही कमाइ थी। एक व्यक्तित्व थे असाधारण से, दुबली पतली सी जिनकी काया थी। पर वह हिम्मत ही थी इनकी, जिसने हमें आजादी दिलाया।

महापुरुष थे वे उस दौर के और वे हर युग में कहलाएंगे। जब-जब दुस्साहस करेगा दुश्मन, तो हम भी इतिहास दोहराएंगे। वो मोहन दास करमचंद गांधी थे जो सदैव राषट्र पिता कहलाएंगे और हर वर्ष इनका जन्मोत्सव हम बड़े हर्षों-उल्लास के साथ मनाएंगे।

जय हिंद।


 

महात्मा गाँधी पर बड़ा भाषण 3

आदरणीय प्रधानाचार्य, उप-प्रधानाचार्य, यहाँ उपस्थित समस्त शिक्षक महोदय और मेरे प्रिय मित्रो मैं आप सभी का हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ। जैसा की आप सभी जानते है कि आज हम यहाँ महात्मा गाँधी के सम्मान में उनकी जंयती मनाने के लिये इकट्ठा हुए है। इस अवसर मैं श्रेयांस कक्षा 9वीं का छात्र बहुत ही गौरवांवित महसूस कर रहा हूँ कि आज के दिन मुझे आप लोगो को संबोधित करने का अवसर मिला है।

महात्मा गाँधी का पूरा नाम तो हम सब जानते है मोहनदास करमचंद गाँधी, पर सामान्यतः हम उन्हे बापू के नाम से जानते है। महात्मा गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को हुआ था और उनके पिता का नाम करमचंद गाँधी था, वह राजकोट रियासत में एक दिवान थे। गाँधी जी के माता का नाम पुतली बाई था, जोकि एक बहुत ही धार्मिक और कर्तव्यपरायण महिला थी। अगर गाँधी जी के बचपन की बात की जाये तो उस समय के किसी सामान्य विद्यार्थी के तरह उन्होने भी सात वर्ष की आयु से विद्यालय जाना प्रारंभ किया था, वह एक नियमित और अनुशाषित छात्र थे।

 

उनकी पत्नी का नाम कस्तूरबा था, जिनसे उनकी शादी 13 वर्ष की आयु मेँ हुई थी। मैट्रीक की पढ़ाई पूरी करने के बाद गाँधी जी कानून की पढ़ाई करने के लिये इग्लैंड गये, वहाँ से उन्होने वकालत की परीक्षा उत्तीर्ण की और वापस अपने देश लौटे। भारत वापस लौटने पर वह राजकोट छोड़कर मुम्बई चले गये, जहाँ उन्होंनेवकालत शुरु की पर एक कामयाब वकील बनने में असफल साबित हुए। एक बार अपने एक मुकदमे के सिलसिले में वह दक्षिण अफ्रीका गये जहाँ वह दो दशकों तक रहें इस दौरान उन्होंनेवहाँ रह रहे भारतीयो के दयनीय और घृणित स्थिति का पास से निरीक्षण किया।

श्वेतो के द्वारा भारतीयो के प्रति इस भेदभाव और अन्यायपूर्ण व्यवहार को लेकर उन्होंनेबहादुरी से इसका विरोध किया। इसी भेदभावपूर्ण व्यवहार के अंर्तगत अंग्रेजो द्वारा भारतीयो को “कुली” कहकर भी संबोधित किया जाता था। उन्होने वहाँ एक आश्रम की शुरुआत की जिसे टॉलस्टॉय फार्म के नाम से जाना जाता है। इसके साथ ही वहाँ उन्होने नताल कांग्रेस की भी स्थापना की और इसी के प्रयासो के चलते “इंडियन रीलीफ एक्ट को मंजूरी मिली। जिससे दक्षिण अफ्रीका में रह रहे कई भारतीयो के जीवन में सुधार आया।

सन् 1915 में वह वापस भारत लौटे और कांग्रेस में शामिल हो गये। इसके साथ ही उन्होंनेअंग्रेजों के खिलाफ ऐतिहासिक सत्याग्रह आंनदोलन की शुरुआत की। उन्ही के नेतृत्व में कांग्रेस ने ब्रिटिश सरकार के अन्यायपूर्ण कानूनो के विरोध में असहयोग और अहिंसा आनदोलन की शुरुआत हुई। इसके बाद गाँधी जी के नेतृत्व में सबसे महत्वपूर्ण आंदोलन दांडी यात्रा का आंरभ हुआ, जोकि नमक कानून के विरोध में था, और इसके अंत का कारण बना।

सन् 1982 में उन्होंनेएक दुसरे आंदोलन की शुरुआत की जिसे “भारत छोड़ो” के नाम से जाना गया और इसने अंग्रेजो को हमारा देश छोड़ने पर विवश कर दिया, और आखिरकार उनके सफल नेतृत्व में 15 अगस्त 1947 को हमारे देश को आजादी मिली।

सिर्फ धोती पहनने वाले और दुबले-पतले शरीर वाले बापू ने दुसरो के जीवन पर जादुई प्रभाव डाला। वह बिना किसी दिखावे के साधारण जीवन जीने में विश्वास करते थे। वह एक सामान्य से गाँव सेवाग्राम के रहनें वाले थे और यही उन्होंने अपना जीवन व्यतीत किया। यहीं से उन्होंने भारत को गुलामी की जंजीरो से मुक्त कराने का दायित्व उठाया। देश की आजादी के लड़ने के अलावा उन्होंनेजाति, वर्ग और लिंग के आधार पर भेदभाव जैसे कई मुद्दो को भी उठाया।

उन्होंनेहरिजनो के भलाई के लिये भी कई कार्य किए। जब भारत ने स्वतंत्रा प्राप्त की तो गाँधी जी ने हिन्दू-मुस्लिम दंगा ग्रस्त क्षेत्र नोखाली की यात्रा की, जहाँ उन्होंनेशांति और भाईचारा का संदेश देने के लिये भूख हड़ताल भी की, परंतु दुर्भाग्यवश बापू हमारे साथ ज्यादे समय तक नही रह सके।

वह 30 जनवरी 1948 का दुखद दिन था जब शाम के समय नाथूराम गोंड़से ने बिरला भवन मैदान में गोली मारकर उनकी हत्या कर दी, जहाँ वह रोज की तरह प्रर्थना सभा में हिस्सा लेने पंहुचे थे। उनका क्रिया-कर्म यमुना के तट पर किया गया। वर्तमान समय में उनकी समाधि राजघाट दुनियाँ भर से आनेवाले लोगो के लिये तीर्थस्थल बन गया है।

बस मुझे यही कहना है, जिस तरह से उन्होंनेइस दुनियाँ में अपने कदमों के निशाँन छोड़े है। उससे यह साबित होता है कि वह वाकई में मानवता के सच्चे सेवक थे।

धन्यवाद!

 

महात्मा गाँधी पर बड़ा भाषण 2

आदरणीय प्रधानाचार्य, उप-प्रधानाचार्य, प्रिय साथियो और प्यारे छात्रो आप सभी का हार्दिक अभिनंदन करता हूँ।

मैं कृष्ण मुर्ति, उच्च माध्यमिक विद्यालय का शिक्षक आप सभी का इस अर्ध-वार्षिक सांस्कृतिक समारोह में हार्दिक स्वागत करता हूँ। मुझे उम्मीद है की हमारे समस्त छात्र और शिक्षक इस कार्यक्रम  का हिस्सा बनकर रोमांचित होंगे क्योकिं यह रोज के बोरियत भरे कार्यक्रमो से हटकर है जो इस पुरे माहैल में उत्साह भरने का कार्य करता है। इससे पहले की हम इस कार्यक्रम का शुभआरंभ करे आइये भारत के महान क्रांतिकारियो में से एक महात्मा गाँधी को स्मरण करते है, जिनका हमारे देश के आजादी में बहुत बड़ा योगदान है।

महात्मा गाँधी पर भाषण देने का कारण य़ह है कि मैं स्वंय उनके मूल विचारो और अंहिसावादी नीति से बहुत ज्यादे प्रभावित हूँ। उनके जैसे महान व्यक्तियों के अथक प्रयासो के वजह से ही आज हम एक संगठित और आजाद राष्ट्र के रुप में खड़े है। जिन्होनें किसी भी कीमत पर अंग्रेजी हुकूमत के सामने झुकने से इंकार कर दिया और हर हाल में विजयी साबित हुए।

उनका व्यक्तित्व एक अलग तरह का ही था। उन्होने अपना सारा जीवन सत्य को समर्पित कर दिया इसके साथ ही उन्होंनेअपने आंनदोलन का नाम भी सत्याग्रह रखा, जिसका अर्थ है सत्य पे भरोसा रखना या बने रहना। सन् 1920 में सत्याग्रह आंदोलन राजनैतिक रुप से अस्तित्व में आया इसी के अंतर्गत उन्होंनेसितम्बर महीनें में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बैठक से पूर्व उन्होंनेअसहयोग आंदोलन का प्रस्ताव सबके सामने रखा। उनके सत्याग्रह के विचार ने लोगो के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन पर गहरा प्रभाव छोड़ा और उनके इन्ही विचारो से वह लोगो में एक महान आध्यात्मिक नेता, बापू के रुप में प्रसिद्द हुए।

उन्होंनेकहा कि, एक व्यक्ति के लिये यह बहुत जरुरी है की वह हमेशा खुद की बुराईयों, असुरक्षा और भय से लड़े। गाँधी जी ने पहले अपने विचारों को व्यक्त करते हुए कहा था की ईश्वर ही सत्य है, लेकिन बाद में उन्होंनेइसे बदलते हुए कहा कि सत्य ही ईश्वर है। इस तरह से गाँधी जी के अनुसार  सत्य स्वंय ईश्वर है। इसके लिये उन्होने रिचार्ड द्वारा कहे गये एक कथन का सहारा लिया, जिसमे उन्होने कहा कि ईश्वर सत्य से भिन्न नही है, और आत्मा के रुप में वह संसार के हर जीवित वस्तु में मौजूद है। यदि निकोलस गैर के शब्दो में कहें तो “संसार के हर जीवित वस्तु में आत्मा मौजूद है और उसे समानता का अधिकार है।” दुसरे शब्दो में कहा जाये तो आत्मा इस पूरे संसार में समाहित है और उसे अहिंसा के नियम द्वारा महसूस किया जा सकता है।

तो छात्रों इससे हमे यह शिक्षा मिलती है की हिंसा से कुछ भी हासिल नही होता इसलिये हमें एक-दूसरे के साथ प्रेम और सौहार्द के साथ रहना चाहिये, क्योकि हम सब एक ही ईश्वर की संतान है। जिससे यह संसार और भी सुंदर जगह बन सके और यह महात्मा गाँधी जैसी महान आत्मा के लिये भी एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

तो अब मैं आप सब से अपने इस भाषण का अंत करने की अनुमति चाहूंगा और अपने अन्य साथियों से निवेदन करूँगा की वह मंच पर आयें और इस समारोह को आगे बढ़ाने की कृपा करे।

धन्यवाद!


 

महात्मा गाँधी पर छोटा भाषण 3

आप सभी को नमस्कार मैं अश्विन चावला, आज के इस भाषण समारोह में तहेदिल से आप सभी का स्वागत करता हूँ।

मुझे आज की शाम इस अवसर पर मेजबानी करते हुए वाकई काफी खुशी महसूस हो रही है और आज मैं महात्मा गाँधी पर एक छोटा सा भाषण दूंगा। जैसा की आप सब जानते है कि महात्मा गाँधी की जंयती आ रही है, इसलिये हमारे समूह ने निर्णय लिया कि हम देश के महान क्रांतिकारियो में से एक महात्मा गाँधी की याद में एक छोटे से समारोह का आयोजन करेंगे।

मैँ स्वंय व्यक्तिगत रुप से महात्मा गाँधी के अंहिसा नीति से प्रभावित हूँऔर उनके इसी अंहिसावादी मार्ग से प्रभावित होकर लाखो भारतीयो ने उनके साथ मिलकर अंग्रजो को भारत छोड़ने पर विवश कर दिया। यह कहने की कोई जरुरत नही है कि वह भारत के स्वतंत्रा संर्घष के सबसे उत्कृष्ट नायको में से एक थे। जिसके लिये उन्होंने“सविनय अवज्ञा आंदोलन” जैसे अंहिसावादी मार्गो और आंदोलनो का चुनाव किया जोकि पूरे विश्व के लिये प्रेरणा का स्त्रोत बना।

दुर्भाग्य से, उनके जैसे महान व्यक्ति को भी अशांत और बुरे दौर का सामना करना पड़ा सन् 1932 में उन्हे सलाखो के पीछे कैद कर दिया गया। उनके कारावास के पीछे कारण यह था कि वह ब्रिटिशो द्वारा देश के सबसे निचले तबके यानि दलितो को चुनावो मे अलग निर्वाचन क्षेत्र देने के विरोध में 6 दिनो के भूख हड़ताल पर चले गये थे। हालांकि सार्वजनिक बहिष्कार के चलते अंग्रेजो को अपने फैसले पर दोबारा सोचने के लिये विवश होना पड़ा।

उन्होने कभी भी अपना जीवन सुख से नही जीया लेकिन वह हमारे समाज में फैली बुराईयो को दूर करने के लिये सदैव तत्पर रहे। तो आइये हम उनके जैसे महान व्यक्ति की याद में कुछ समय बिताते है और उनके उन महान कार्यो से प्रेरणा लेते है, जो वह हमारे लिये पीछे छोड़ गये है।

धन्यवाद!


 

महात्मा गाँधी पर बड़ा भाषण 4

प्रिय मित्रों- आप सब का आज के भाषण समारोह में स्वागत है। पहले तो मैं आज के समारोह में आने और इसे सफल बनाने के लिए आप सभी का आभार व्यक्त करता हूँ। विशेष रुप से मैं अपने वरिष्ठजनो और साथी सदस्यो को धन्यवाद देना चाहुंगा जिन्होने दिन-रात मेहनत करके इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना योगदान दिया। जिससे ज्यादे से ज्यादे लोग हमसे जुड़े और राष्ट्रीय एकता के प्रति जाग्रित हो सकें।

जब हम राष्ट्रीय एकता के बारे में बात करते है, तो मैं सबसे पहले उस व्यक्ति की बात करना चाहूंगा जिसका हमारी आजादी के साथ हमारे समाज से जाति, वर्ग और लिंग के आधार पे भेदभाव जैसी कई तरह के कुरीतियो को उखाड़ फेकने में सबसे अहम योगदान था।

वह कोई और नही बल्कि के हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ही थे। जिन्होनें भारत के कई स्वतंत्रा संर्घष आंदोलनो में सफलतापूर्वक अपनी भूमिका निभाई। उन्होंनेलाँखो लोगो को अंग्रजो के खिलाफ आजादी की लड़ाई में आने के लिये प्रेरित किया और इसी सम्मिलित प्रयासो के चलते अंग्रजो को हमे स्वतंत्रा देने के लिये विवश होना पड़ा जोकि हमारा जन्म अधिकार के साथ ही हमारा मौलिक अधिकार भी है।

तो आइये जानते है उनके द्वारा किये कुछ महत्वपूर्ण आंनदोलनो के बारे में:

  1. भारत छोड़ो आंदोलन

ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेकने के लिये महात्मा गाँधी ने 8 अगस्त 1942 को ऐतिहासिक भारत छोड़ो आंदोलन का आवाह्नन किया। जोकि एक बहुत ही असरदार अभियान साबित हुआ। अपने इस आंनदोलन में भी उन्होंने सत्य और अंहिसा को ही आधार बनाया।

  1. दांडी यात्रा

दांडी यात्रा गाँधी जी द्वारा अंग्रजो के विरुद्ध किए गये सबसे लोकप्रिय आंदोलन में से एक था। यह आंदोलन अंग्रजो द्वारा हमारे देश में नमक पर लगाए गये कर के विरोध में गाँधी जी के नेतृत्व में 12 मार्च से लेकर 6 अप्रैल 1930 तक चला, जिसमें उन्होंनेअपने समर्थको के साथ अहमदाबाद से लेकर गुजरात में ही स्थित दांडी तक 388 किलोमीटर की पैदल यात्रा की और दांडी पहुचकर उन्होने खुद से नमक बनाकर इस कानून का विरोध किया।

  1. दलितो और अछूतो के लिये संर्घष

वह 8 मई 1933 का दिन था, जब गाँधी जी स्व शुद्धी के लिए 21 दिन के भूख हड़ताल पर चले गये इसी के साथ उन्होने दलितो और अछूतो के समर्थन में एक वर्षीय आंदोलन की शुरुआत की और उन्हें हरिजन के नाम से संबोधित किया। वैसे तो गाँधी जी का जन्म एक समपन्न और उंचे जाति के परिवार में हुआ था, पर उन्होंनेअपने पूरे जीवन दलितो और अछूतो के अधिकारों और उत्थान के लिये कार्य किया।

  1. असहयोग आंदोलन

भला असहयोग आंदोलन के बारे में कौन नही जानता है ये गाँधी जी द्वारा किये प्रसिद्ध आंदोलनो में से एक है। इस आंनदोलन ने गाँधी जी को लोगो के सामने एक महान नायक के रुप में प्रस्तुत किया। यह एक देशव्यापी आंदोलन था जोकि जलियावाला बाँग नरसंघार के विरोध में शुरु हुआ था। जिसमें अंग्रेज सिपाहियो द्वारा अमृतसर में सैकड़ो निहत्थे और मासूम लोगो को मौत के घाट उतार दिया गया था।

5. खिलाफत आंदोलन

गाँधी जी ने अंग्रजो द्वारा खलीफा (मुस्लिम धर्म का सर्वोच्च धार्मिक पद) को हटाये जाने के विरोध में मुस्लिमो का समर्थन करते हुए सन् 1919 में खिलाफत आंदोलन की घोषणा की, जिससे वह मुसलसानो के बीच भी काफी प्रसिद्ध हुए और भारत जैसे बहुसांस्कृतिक देश के सबसे लोकप्रिय वक्ता और नायक बन गए।

अपने इन्ही विचारो और सिद्धांतो से महात्मा गाँधी ने पूरे विश्व को प्रभावित किया, और इसी लिए उन्हे केवल भारत में ही नही अपितु पूरे विश्व में एक महान व्यक्तित्व के रुप में याद किया जाता है।

बस मैं आपसे इतना कहते हुए अपने इस भाषण को समाप्त करने की अनुमति चाहूंगा। धन्यवाद!


महात्मा गाँधी पर बड़ा भाषण 5

आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, यहां उपस्थित सभी शिक्षक गण और प्रिय छात्रों आप सभी का आज के इस कार्यक्रम में हार्दिक स्वागत है।

आज 2 अक्टूबर को गाँधी जंयती के इस अवसर पर, मुझे इस बात की काफी प्रसन्नता है कि, मुझे आप सब के समक्ष हमारे आदर्श महात्मा गाँधी को लेकर अपने विचारो को प्रस्तुत करने का मौका मिल रहा है।

कभी ना कभी आपके मन में भी यह विचार आता होगा कि आखिर क्यों महात्मा गाँधी को हमारे देश का आदर्श माना जाता है? विश्व भर में कई लोग उन्हें शांति और अहिंसा का रुप मानते हैं। हम रोज कई ऐसी घटनाएं सुनते है, जिसमें भारतीय छात्र और लोग अपना देश छोड़कर विदेशों में बस जा रहे है और भारतीय संस्कृति को भूल जाते है। लेकिन गाँधी जी एक ऐसे व्यक्ति थे, जो कई विदेश यात्राओं के बाद भी अपने देश को नही भूले और अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने देश वापस लौटे तथा भारत के स्वतंत्रता के लिए निस्वार्थ भाव से संघर्ष किया।

गाँधी जी भारत को अंग्रेजो से आजाद कराने को लेकर अपने विचारों के प्रति काफी स्पष्ट थे। वह चाहते थे कि देशवासी अपने स्वतंत्रता के महत्व को समझे, उनका मानना था कि हम अपना देश चलाने में स्वंय सक्षम है और हमें दूसरों के विचारो तथा संस्कृति को अपनाने की कोई आवश्यकता नही हैं। यही कारण था कि उन्होंने देशवासियों से अंग्रेजी वेशभूषा का त्याग करने और भारतीय मिलों में बने खादी के कपड़ो को अपनाने के लिए कहा। इसके साथ गाँधी जी ने देश के लोगो से आग्रह किया कि वह खुद नमक बनाये और अंग्रेजी हुकूमत के नमक कानून का पालन ना करें।

अंग्रेजो के नमक कानून का विरोध करने के लिए गाँधी जी ने दांडी यात्रा की शुरुआत की, उनके इस आंदोलन में अमीर-गरीब, औरतों, बुजर्गों जैसे समाज के हर तबके ने हिस्सा लिया। जिसने इस बात को साबित किया की महात्मा गाँधी समाज के हर तबके के सर्वमान्य नेता थे, इन्हीं विरोधों के चलते विवश होकर अंग्रेजों को नमक कानून को वापस लेना पड़ा।

गाँधी जी का हर कार्य प्रशंसनीय है, अपने जीवन में उन्हें ना जाने कितने ही बार जेल भी जाना पड़ा। उन्होंने सदैव महिलाओं की तरक्की पर जोर दिया और आज उन्हीं के बदौलत के महिलाएं पुरुषों के संग हर क्षेत्र में कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही है। गाँधी जी के सिद्धांत सिर्फ हम तक या हमारे देश तक ही सीमित नही थे, बल्कि की मार्टिन लूथर किंग जैसे लोगो ने भी रंगभेद की नीति के खिलाफ उनके अहिंसा के विचारों को अपनाया।

हमें सदैव उनका आभार मानना चाहिये, क्योंकि भारत के तरक्की और मानव जाति के सेवा के लिए उन्होंने अपने प्राणों को भी न्यौछावर कर दिया। उनकी सादगी भरे रहन-सहन और व्यक्तित्व के कारण लोग अपने आप को उनके ओर आकर्षित होने से रोक नही पाते थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज की सेवा और भारत को अंग्रेजो के अत्याचारों से मुक्त कराने के लिए समर्पित कर दिया।

हम गाँधी जी के सहनशीलता और अहिंसा मार्ग से अपने जीवन में बहुत कुछ सीख सकते है, यदि हम इन्हें अपने जीवन में अपना ले तो संसार से ना जाने कितनी ही समस्याओं का अंत हो जायेगा। गाँधी जी ने ना सिर्फ देश के आजादी के लिए लड़ाई लड़ी बल्कि की छुआछुत, जाति प्रथा तथा लिंग भेद जैसी समाजिक कुरितियों से भी लोहा लिया। उन्होंने मानवता की सेवा को ही सच्चा धर्म माना और आजीवन इसके सेवा के लिए तत्पर रहे। उनकी महानता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, जब उनकी हत्या हुई तो भी उनके मुख से ईश्वर का ही नाम निकला। उनकी महानता का वर्णन कुछ शब्दों में करना काफी मुश्किल है, उनका जीवन ना सिर्फ हमारे बल्कि आने वाले पीढ़ीयों के लिए भी प्रेरणा स्त्रोत हैं।

उनके विचार और त्याग सिर्फ हमें ही नही अपितु पूरे विश्व को यह बताने का कार्य करते है कि हमारे बापू कितने विनम्र और सहनशील थे और हमारे लिए उनसे अच्छा आदर्श शायद ही कोई हो सकता है। मैं उम्मीद करता हूँ कि आप सबको मेरी ये बाते पसंद आयी हो और महात्मा गाँधी की यह बातें आपके जीवन में प्रेरणा का स्त्रोत बने। अब अपने इस भाषण को विराम देते हुए, मैं आपसे विदा लेने की आज्ञा चाहूँगा।

मुझे इतने धैर्यपूर्वक सुनने के लिए आप सबका धन्यवाद!

 

 

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