वनोन्मूलन पर निबंध (Deforestation Essay in Hindi)

व्यक्तिगत ज़रुरतों को पूरा करने के लिये पेड़ों और जंगलों को जलाने के द्वारा एक बड़े स्तर पर जंगलों को हटाना वनोन्मूलन है। पर्यावरण में प्राकृतिक संतुलन बनाने के साथ ही पूरे मानव बिरादरी के लिये जंगल बहुत महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, समाज और पर्यावरण पर इसके नकारात्मक परिणामों को बिना देखे और समझे इंसान लगातार पेड़ों को काट रहा है। प्रदूषण मुक्त स्वस्थ पर्यावरण में एक स्वस्थ और शांतिपूर्ण जीवन जीने और आनन्द उठाने के लिये हमें और हमारी भविष्य की पीढ़ी के लिये जंगल बेहद ज़रुरी है।

वनोन्मूलन पर छोटे तथा बड़े निबंध (Short and Long Essay on Deforestation in Hindi, Vanonmulan par Nibandh Hindi mein)

निबंध 1 (250 शब्द)

बिना पौधा-रोपण किये पेड़ों को लगातार काटने के द्वारा जंगलों का तेजी से नुकसान वनोन्मूलन है। ये वन्य-जीवन, मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण, बढ़ती मानव जनसंख्या के लिये बहुत खतरनाक है, विश्व में बढ़ती प्रतियोगिता मानव जाति को अच्छी तरह से विकसित शहर की स्थापना करने या खेती के लिये जंगलों को काटने को मजबूर कर रही है।

ऐसे प्रतियोगी विश्व में, सभी राष्ट्र दूसरे विकसित और उन्नत राष्ट्रों से आगे तथा शक्तिशाली बनना चाहते हैं। लोगों को घर, पार्क, मल्टीप्लेक्स, उद्योग, कागज उत्पादन, लोक संरचना आदि के लिये जंगलों को काटने की ज़रुरत है। लकड़ियों को बेचने के द्वारा कुछ लालची लोग अधिक पैसा कमाने के लिये जंगलों को काट रहें हैं और वन्य जीवन तथा मानव जीवन को खतरे में डाल रहें हैं।

वनोन्मूलन

वन्य जीव विस्थापित और मर रहें हैं, वास्तविक वनस्पति और जीव-जन्तु खत्म हो रहें हैं, पर्यावरण में मकारात्मक बदलाव हो रहा है और मानव जीवन को गड़बड़ कर रहें हैं। इस वजह से बहुत महत्वपूर्ण जानवरों के प्राकृतिक आवास खत्म हो रहें हैं और कुछ दूसरी जगह विस्थापित हो रहें हैं या मानव क्षेत्रों में प्रवेश कर रहें हैं।

भविष्य में यहाँ जीवन को बचाने के लिये पर्यावरण के प्राकृतिक चक्र को बनाये रखने और पशु अभयारण्य को बचाने के लिये जंगलों की कटाई रोकना या दुबारा पेड़-पौधा लगाने के द्वारा हमें पेड़ों को संरक्षित करना होगा। कार्बन डाइऑक्साईड की मात्रा को कम करने के साथ ही ताजे और स्वस्थ ऑक्सीजन के लिये जंगलों का संरक्षण बहुत ज़रुरी है।

वनोन्मूलन के कारण वायु प्रदूषण, पर्यावरण में जहरीली गैसों के स्तर में बढ़ौतरी, मृदा और जल प्रदूषण का बढ़ना, पर्यावरणीय उष्मा का बढ़ना आदि नकारात्मक बदलाव होते हैं। वनोन्मूलन के सभी नकारात्मक प्रभाव से बहुत सारे स्वास्थ्य विकार और खासतौर से फेफड़े और साँस संबंधी बिमारियों का खतरा बढ़ जाता है।


निबंध 2 (300 शब्द)

मानव जाति के द्वारा जंगलों को समाप्त करना वनोन्मूलन है। दिनों-दिन बढ़ती जनसंख्या के कारण कृषि, उद्योग, आवास, व्यवसाय, शहर आदि दूसरे उद्देश्यों की पूर्ति के लिये भूमि की आवश्कता बढ़ती जा रही है जिसमें स्थायी जंगलों को हटाना शामिल है। पिछले दशक में, हमारी पृथ्वी हर तरफ से जंगलों से घिरी हुई थी जबकि अब के दिनों में केवल कुछ गिने हुये जंगल ही बचे हैं। वनोन्मूलन भारत के साथ दूसरे देशों के लिये भी एक बड़ी समस्या है। बड़े पर्यावरणीय सामाजिक मुद्दे के रुप में ये पूरे विश्व में फैल रहा है।

पारिस्थितिक और पर्यावरणीय असंतुलन के कारण वनोन्मूलन मानव जीवन को गड़बड़ कर देता है। धरती पर जीवन के अस्तित्व को बचाने के लिये पेड़ों की कटाई को रोकने की ज़रुरत के लिये वनोन्मूलन लगातार हमें आगाह कर रहा है। कुछ लालची लोग लकड़ी से पैसा कमाने के लिये वनोन्मूलन कर रहे हैं। लोग अपने कृषिगत कार्यों, कागज, माचिस, फर्निचर आदि बनाने के लिये, शहरीकरण (सड़क निर्माण, घर आदि), भूमि का मरुस्थलीकरण, खनन (तेल और कोयला खनन), आग (गर्मी पाने के लिये) आदि के लिये पेड़ों को काट रहें हैं।

जलवायु असंतुलन, ग्लोबल वार्मिंग का बढ़ना, मृदा अपरदन, बाढ़, वन्य-जीवन का लोप, शुद्ध ऑक्सीजन स्तर का घटना और कार्बन डाइऑक्साईड गैस का बढ़ना आदि के माध्यम से वनोन्मूलन मानव जाति और शुद्ध पर्यावरण को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है। सामान्य तरीके से जीवन को चलाने के लिये वनोन्मूलन को रोकना बेहद आवश्यक है। देश की सरकार के द्वारा कुछ कड़े नियम-कानून होने चाहिये जिसका पालन सभी नागिरकों को करना चाहिये। वनोन्मूलन के कारण और प्रभाव के बारे में आम जन को जागरुक करने के लिये कुछ साधारण और आसान तरीके होने चाहिये। जंगल कटाई की ज़रुरत को कम करने के लिये जनसंख्या पर नियंत्रण करना चाहिये। जब कभी भी कोई पेड़ काटा जाये, उसकी जगह पर कोई दूसरा पेड़-पौधा लगाने का नियम होना चाहिये।

Essay on Deforestation in Hindi

निबंध 3 (400 शब्द)

जीवन के स्रोतों और लकड़ियों के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिये जंगलों का स्थायी नाश वनोन्मूलन है। पेड़ काटना बुरा नहीं है लेकिन स्थायी रुप से काटना बुरा है। अगर कोई पेड़ काटता है, उसे उसी या दूसरी जगह पर दुबारा पेड़ लगाना चाहिये। वनोन्मूलन बहुत से प्रयोजनों जैसै खेती, आजीविका, घर, फर्निचर, सड़क, ईंधन तथा औद्योगीकरण आदि कई कार्यों के लिये किया जाता है। वनोन्मूलन पर्यावरण को बहुत बुरी और तेजी से विनाश की ओर ले जा रहा है। पिछली सदी में पृथ्वी जंगलों से पटी पड़ी थी जबकि वर्तमान में लगभग 80% तक जंगल काटे और नष्ट किये जा चुके हैं और यहां तक कि वर्षा वन भी स्थायी रुप से गायब हो चुका है।

जंगली जानवरों, इंसानों और पर्यावरण के भले के लिये जंगल की ज़रुरत होती है। वनोन्मूलन के कारण पौधों और जानवरों की बहुत सी अनोखी प्रजातियाँ स्थायी रुप से खत्म हो चुकी हैं। पेड़ काटने की प्रक्रिया प्राकृतिक कार्बन चक्र को गड़बड़ कर रही है और दिनों-दिन पर्यावरण में अपने स्तर को बढ़ा रही है। वातावरण से प्रदूषकों को हटाने के साथ ही पर्यावरण से CO2 गैस का उपयोग करने के लिये जंगल बेहतर माध्यम है और जो पर्यावरण की शुद्धता को बनाये रखता है। किसी भी तरीके से जब कभी भी पेड़ों को नष्ट या जलाया जाता है, वो कार्बन और मीथेन छोड़ता है जो मानव जीवन के लिये नुकसानदायक होता है। दोनों गैसों को ग्रीन हाउस गैस कहते हैं जो अंतत: ग्लोबल वार्मिंग का कारण बनता है।

पूरी तरह से वर्षा, दवा प्राप्ति, शुद्ध हवा, वायु प्रदूषण को हटाने, बहुत से प्रयोजनों के लिये लकड़ी प्राप्त करने आदि के लिये जंगल बहुत ज़रुरी है। जब हम पेड़ काटते हैं, ये सभी चक्रों को गड़बड़ करती है और मानव जीवन को प्रभावित करती है। कागज की ज़रुरत को पूरा करने के लिये पेड़ काटने के बजाय, हमें नये पेड़ों को काटने के बचने के लिये जितना संभव हो सके पुरानी चीजों के पुनर्चक्रण की आदत को बनाना चाहिये। बिना पानी के ग्रह की कल्पना कीजिये, जीवन संभव नहीं है। और उसी तरह से, बिना पेड़ और जंगल के जीवन नामुमकिन है क्योंकि ये वर्षा, ताजी हवा, जानवरों का रहवास, छाया, लकड़ी आदि का साधन होता है।

बिना पेड़ के, पृथ्वी पर बारिश, शुद्ध हवा, पशु, छाया, लकड़ी, और ना ही दवा होना संभव है। हर जगह केवल गर्मी, सूखा, बाढ़, तूफान, कार्बन डाईऑक्साईड गैस, मीथेन, अन्य जहरीली गैसें, तथा गर्मी का मौसम होगा, सर्दी का मौसम नहीं होगा। वनोन्मूलन को रोकने के लिये हमें एक साथ होकर कोई कदम उठाना चाहिये। हमें कागजों को बरबाद नहीं करना चाहिये और कागज किचन का तौलिया, मुंह साफ करने का टिशु आदि जैसी चीजों के अनावश्यक इस्तेमाल से बचना चाहिये। पेड़ काटने की ज़रुरत को कम करने के लिये कागज के वस्तुओं को हमें दुबारा प्रयोग और पुनर्चक्रण के बारे में सोचना चाहिये। जंगल और पेड़ों को बचाना हमारे अपने हाथ में है और हमारी तरफ से उठाया गया एक छोटा सा कदम वनोन्मूलन को रोकने की ओर एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

Related Information:

पेड़ बचाओ पर निबंध