एड्स/एचआईवी पर निबंध

एक्वायर्ड इम्यून डेफिसिएंसी सिंड्रोम या एड्स एक सिंड्रोम है, जैसा कि नाम से पता चलता है, ये हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करता है। यह संक्रमण एक वायरस के वजह से होता है जो ह्यूमन इम्यूनोडेफिशियेंसी वायरस या एचआईवी के नाम से जाना जाता हैं। और इसके प्रसारित होने के कुछ कारन भी है जैसे असुरक्षित यौन संबंध, नीडल्स का उपयोग करना, जो पहले से ही वायरस से प्रभावित है, बिना जांच के रक्त का संचार करना और ये गर्भावस्था के दौरान प्रभावित मां से बच्चे को फैलता हैं।

यहां पे आपको एड्स, इसके कारण, लक्षण, उपचार और रोकथाम पर निबंध दिए गए है। यहां पर अलग अलग लम्बाई के एड्स पर निबंध दिए गए हैं। जो आपके परीक्षा में इस विषय पर आपके लिए उपयोगी साबित हो सकता हैं। आप अपने आवश्यकता के अनुसार किसी भी एड्स पर निबंध का चयन कर सकते हैं।

एड्स/एचआईवी पर लम्बे और छोटे निबंध (Long and Short Essay on AIDS/HIV in Hindi)

एड्स की जागरूकता पर निबंध - निबंध 1 (350 शब्द)

प्रस्तावना

एक्वायर्ड इम्यून डेफिसिएंसी सिंड्रोम या एड्स एक व्यापक बीमारी है जो एचआईवी या ह्यूमन इम्यूनोडेफिशियेंसी वायरस के कारण मानव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला करता है। इसका कोई ज्ञात इलाज नहीं है, हालांकि वायरस को पूरी तरह से फैलने से रोकने या कम करने के लिए दवाएं हैं। वायरस के स्थानांतरण के मुख्य माध्यम में से एक है असुरक्षित यौन संबंध, एड्स एक तरह का कलंक भी है इस वजह से इसकी खुले तौर पर समाज में लंबे समय तक चर्चा नहीं की जाती।

दुर्भाग्यवश, इस वर्जित का मतलब था कि बीमारी फैलाने के बारे में पर्याप्त जानकारी साझा नहीं किया जा रहा था, क्योंकि अधिकांश लोग इसके बारे में बात करने से हिचकिचाते थे। इसकी जानकारी की कमी के कारण इलाज की कमी होने के वजह से यह एक महामारी बन गया है। जिसके परिणामस्वरूप 28.9 मिलियन लोग इससे प्रभावित हुए।

जागरूकता का महत्व

एड्स के प्रसार से लड़ने का एकमात्र तरीका है, और वो है लोगों में जागरूकता उत्पन्न करना। एचआईवी के स्थानांतरण का कारण है लापरवाही या नजरअंदाज करना। जिस वजह से यह बुरी स्थिति को और भी बदतर बना देता है। इसलिए, यह जरूरी है कि लोगों को पता चले कि एड्स क्या है, यह कैसे फैलता है और संक्रमण को रोकने के लिए क्या किया जा सकता है।

सरकारों और गैर-लाभकारी संगठनों ने न केवल स्वास्थ्य जांच-पड़ताल करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम शुरू किए हैं बल्कि इस रोग से जुड़ी पक्षपात को दूर करने और इससे पीड़ित लोगों को सावधान और कुछ उपचार बताने के लिए भी विभिन्न कार्यक्रम शुरू किए हैं। जागरूकता कार्यक्रमों ने एचआईवी के बारे में जानकारी फैलाई है और इससे वर्षों तक कैसे बचा जाए या इसे कैसे फैलने से रोका जाए ये भी बताया हैं। उनके प्रयासों का फल हमे आज मिल रहा है। परिणाम हमारे सामने हैं। एचआईवी से पीड़ित लोगों का प्रतिशत पहले से काफी कम हो गया है।

लेकिन लोगों को प्रसन्न नहीं होना चाहिए न हीं भूलना चाहिए की एड्स अभी भी घातक बीमारियों में से एक हैं, जिससे इन्सान की मृत्यु हो सकती हैं। विभिन्न जागरूकता पहलुओं का आयोजन किया गया है। जिनमें से सबसे प्रमुख विश्व एड्स दिवस है - इस दिन लोग उन लोगों के साथ एकजुटता दिखाते हैं जो लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं और उन लोगों को याद करते है जिनकी इस बीमारी के वजह से मृत्यु हुई है। अगला लक्ष्य है कमजोर लोगों और समुदायों को जागरूक करना, ताकि वे पूरी तरह से सूचित हो सकें और बीमारी को फैलने से रोक सकें।

निष्कर्ष

हालांकि नए चिकित्साविधान एचआईवी को पूरे शरीर में फैलने से नियंत्रित करने में मदद कर सकता हैं, एड्स को आबादी में फैलने से रोकने का एक मात्र तरीका है लोगों मे जागरूकता। लोगों को यह याद दिलाता हैं कि महामारी नियंत्रण में है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं की ये महामारी पूरी तरह से चला गया है और लापरवाही या उदासीनता निश्चित रूप से सुनिश्चित करता है कि यह फिर से उसी रूप में वापस आ सकता है।

 

एड्स के निवारण पर निबंध – निबंध 2 (400 शब्द)

प्रस्तावना

बीमारी की पहली खोज के बाद से एड्स ने वर्षों में 28.9 मिलियन से अधिक लोगों को बुरी तरह से खत्म कर दिया है। वायरस जंगल की आग की तरह फैला और लाखों लोगों को संक्रमित किया। तथ्य यह है कि यह सफेद रक्त कोशिकाओं पर हमला करता है जिससे प्रतिरक्षा कमजोर हो जाता है और उसे घातक बना देता है, जिसके कारन यह मानव शरीर की रक्षा करने में अक्षम होता है और एचआईवी पॉजिटिव लोगों को भारी जोखिम उठाना पड़ता है।

दुनिया भर में सरकार द्वारा किए गए प्रयासों के लिए धन्यवाद, दवा और जागरूकता अभियानों में प्रगति के कारण, एचआईवी पॉजिटिव लोगों की संख्या में कमी आई है। हालांकि, बीमारी के लिए अभी तक कोई इलाज नहीं मिला है। न ही उपचार उपलब्ध हैं लेकिन वायरस को  फैलने से रोका जा सकता हैं। परन्तु वे इसे पूरी तरह से शरीर से खत्म नहीं कर सकते हैं। इन परिस्थितियों में, यह अनिवार्य है कि हम समस्या की जड़ तक पहुंचने के लिए उपाए और निवारण पर ध्यान केंद्रित करें।

रोकथाम के तरीके

  • अपने साथी की स्वास्थ्य स्थिति जानें- आप और आपके साथी दोनों को एचआईवी के लिए नियमित रूप से परीक्षण कराना चाहिए। विभिन्न देशों में कई स्वास्थ्य केंद्र परीक्षण किट प्रदान करते हैं। यदि आप किसी डॉक्टर से मिलने में संकोच करते हैं, तो आप इन किटों को प्राप्त कर सकते हैं और अपने साथी और आपकी स्वास्थ्य स्थिति निर्धारित कर सकते हैं।
  • सुरक्षित यौन संबंध बनाने का अभ्यास करें- चूंकि वायरस के बड़े पैमाने पर फैलने के प्रमुख कारणों में से एक असुरक्षित यौन संबंध है, इसलिए यह बिल्कुल जरूरी है कि आप सुरक्षित यौन संबंध का अभ्यास करें। कंडोम का प्रयोग करना जरूरी है। इसके अलावा, आपके साथ यौन संबंध रखने वाले भागीदारों की संख्या को प्रतिबंधित करना सबसे अच्छा है। आपके द्वारा यौन संबंध अधिक लोगों से रखने के वजह से एचआईवी या अन्य एसटीडी के सम्बंध में आने का अधिक सम्भावना रहता हैं।
  • नियमित रूप से परीक्षण करवाए- आप और आपका साथी को आवधिक और नियमित चेक-अप कराने के लिए जाना चाहिए, न केवल एड्स के लिए बल्कि अन्य एसटीडी के लिए भी। एसटीडी होने से एड्स के सम्बंध में आने की संभावना आप में बढ़ जाती हैं।
  • दवाओं का दुरुपयोग न करें - दवाओं का दुरपयोग न करें। हालांकि, यदि आप दवा लेते हैं, तो सुनिश्चित करें कि आपके द्वारा उपयोग की जाने वाली सुइयों को कीटाणुरहित कर दिया गया है और उन्हें किसी और के साथ साझा नहीं किया गया है।
  • प्री-एक्सपोजर प्रोफेलेक्सिस- प्री-एक्सपोजर प्रोफेलेक्सिस के बारे में किसी डॉक्टर या स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता से बात करें। इससे शुरुआती चरणों में एचआईवी संक्रमण का संभावना कम हो जाता है। इसे एचआईवी के संपर्क में आने के तीन दिनों के भीतर लिया जाना चाहिए।

निष्कर्ष

चूंकि इस समय एड्स के लिए कोई इलाज नहीं है, इसलिए इस बीमारी के मामले में रोकथाम निश्चित रूप से इलाज से बेहतर है। कुछ सरल निवारक उपाय से ये वायरस पूरी तरह से भले ही खत्म न हो लेकिन इसका प्रसार सीमित हो सकता है।

 

भारत में एड्स पर निबंध - निबंध 3 (450 शब्द)

प्रस्तावना

तथ्य यह है कि भारत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश है इस कारण भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा एचआईवी महामारी वाला देश भी है। प्रतिशत के मामले में, यह आंकड़ा लगभग 0.3 प्रतिशत है, जो शायद बहुत बड़ा प्रतीत नहीं होता है। हालांकि, जब यह आंकड़ा वास्तविक संख्या में परिवर्तित हो जाता है तो यह 2.1 मिलियन लोग हो जाते हैं जो एचआईवी पॉजिटिव होते हैं। यह संख्या वर्ष 2016 के यूएनएड्स द्वारा एकत्र किए गए आंकड़ों के अनुसार है। एड्स से संबंधित कारणों में उसी वर्ष 62,000 लोग मारे गए थे।

जनसांख्यिकी पर जोखिम

आबादी का सबसे अधिक जोखिम वाले वर्ग हैं यौन श्रमिक, पुरुष जो पुरुषों के साथ यौन संबंध रखते हैं, जो लोग इस्तेमाल किया हुआ सुइयां फिर से इस्तेमाल कर लेते हैं और ट्रांसजेंडर लोग। ये समाज में सबसे कमजोर समूहों में से कुछ हैं क्योंकि उनमें से अधिकतर भेदभाव और कलंक का सामना करते हैं। वह अगर, स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंचने के लिए, समर्थ नहीं है, तो उनके लिए भेदभाव वहां पहुंचना मुश्किल बना देता है। इस तथ्य को जोड़ें तो जैसे यौन सम्बंध काम से जुड़ी गतिविधियां और वेश्यालय अवैध हैं, समलैंगिक और उभयलिंगी पुरुषों को भी सामाजिक कलंक का सामना करना पड़ता है, अगर वे बाहर निकलते हैं तो नशीली दवाओं के नशे में आम तौर पर बुरा भला सुनते है और ट्रांसजेंडर लोगों को भी अच्छे से नहीं देखा जाता है और ऐसी परिश्थितियों के वजह से महामारी उत्पन्न होती हैं।

रोकथाम और उपचार पर प्रयास

सौभाग्य से, संयुक्त राष्ट्र, भारत सरकार और कई सारे गैर लाभ संगठन द्वारा इन वर्गों के जोखिम को कम करने के लिए विभिन्न अभियान चलाये जा रहे है। एड्स परीक्षण और परामर्श स्थानों की संख्या 1997 में केवल 67 थी जबकि 2016 में 20,000 हो गई। इसके अलावा, एचआईवी जागरूकता अभियान बढ़ाए गए हैं और परीक्षण तथा उपचार मुफ्त कर दिए गए हैं। इन उपायों के लिए धन्यवाद, एचआईवी का सामना करने वाले लोगों की संख्या वास्तव में 2003 में 5.1 मिलियन से घटकर 2016 में 2.1 मिलियन हो गई है।

नयी चुनौतियाँ

हालांकि उपायों के वजह से महामारी को नियंत्रित करने में मदद मिली है। बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसी बड़ी आबादी वाले राज्यों ने हाल ही में नए संक्रमण की सूचना दी है। भारत को, हानि को कम करने और समलैंगिकता और नशीली दवाओं के उपयोग को कम करने के लिए अपनी नीतियों का विस्तार करने की जरूरत है ताकि समाज के इन वर्गों को बिना किसी प्रतिक्रिया और डर के देखभाल और उपचार मिल सके।

निष्कर्ष

इस वजह से हमें अपने हेल्थ स्टेटस की जांच बराबर करानी चाहिए, और दुसरो को भी सलाह देना चाहिए। ये बीमारी पूरी तरीके से खत्म नहीं हुई हैं, इसलिए इससे बचने के लिए हमें एड्स निवारण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।


 

विश्व एड्स दिवस पर निबंध - निबंध 4 (500 शब्द)

प्रस्तावना

एड्स एक सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा है, शायद इतिहास में दर्ज सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। हालांकि एड्स महामारी 2005 में अपने चरम पर पहुंच गई थी और तब के मुकाबले आज के समय में गिरावट आयी है, फिर भी दुनिया भर में 37 मिलियन लोग ऐसे है जो एचआईवी पॉजिटिव हैं। इसके अलावा, 2017 तक, दुनिया भर में 28.9 मिलियन में से 41.5 मिलियन लोगों की मौत के लिए एड्स जिम्मेदार है। इस बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाना बहुत जरूरी है। यही कारण है कि डब्ल्यूएचओ ने विश्व एड्स दिवस को आठ आधिकारिक वैश्विक अभियानों में से एक के रूप में चिह्नित किया है।

विश्व एड्स दिवस क्या हैं?

पहला दिसंबर विश्व एड्स दिवस के रूप में नामित दिन है, एक अंतरराष्ट्रीय दिन जिसका मतलब एड्स के बारे में जागरूकता फैलाना है। हालांकि, यह दिन मनाए जाने का एकमात्र कारण जागरूकता फैलाना नहीं है। यह आम लोगों को अवसर प्रदान करता हैं की वे उन लोगों का साथ दे और सहयोगी बने जो एचआईवी पॉजिटिव हैं। यह उन लोग को स्मरण करने का दिन भी है जिनकी इस बीमारी से मृत्यु हो गयी हैं। यह वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दे के लिए समर्पित दिन है।

विश्व एड्स दिवस का महत्व-

इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता कि एड्स का फैलाव उतना अभी नहीं है जितना कि वह पहले हुआ था। जागरूकता अभियान, वैज्ञानिक प्रगति और नए उपचारों के लिए धन्यवाद, हम रोग को बेहतर ढंग से समझ कर उसका मुकाबला कर सकते हैं। हालांकि, इस तथ्य को हम नजरअंदाज नहीं कर सकते है कि लगभग 37 मिलियन लोग इस बीमारी के साथ जी रहे हैं और यह संक्रमण अलग अलग क्षेत्र में सुनने को मिल रहा हैं। इसके अलावा, एड्स वाले लोग अभी भी भेदभाव के अधीन हैं और कलंक के डर में जीते हैं। इसलिए, यह हर किसी को याद दिलाना बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है कि एड्स अभी भी बहुत अधिक मात्रा में मौजूद है। सरकार और जनता को जागरूकता फैलाना, धन जुटाना और जो एचआईवी पॉजिटिव लोग है उनके लिए पूर्वाग्रह और भेदभाव के खिलाफ विरोध करना जारी रखना चाहिए। यही कारण है कि विश्व एड्स दिवस सालाना एक अनुस्मारक के रूप में मनाया जाता है ताकि लोगों को याद रहे की एड्स पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है।

विश्व एड्स दिवस पर क्या करना चाहिए/ गतिविधियां

विश्व एड्स दिवस पर, हमें उन लोगों के लिए अपना समर्थन दिखाने की ज़रूरत है जो इस बीमारी के साथ जी रहे हैं और जो इस के वजह से मृत्यु को प्राप्त हुए हैं। एकजुटता दिखाने का सबसे आम तरीकों में से एक एचआईवी जागरूकता के लाल रिबन को पहनना। इस रिबन को राष्ट्रीय एड्स ट्रस्ट या एनएटी के ऑनलाइन स्टोर पर 100 के पैक में पाया जा सकता है। ऑर्डर मुफ्त है लेकिन पैक खरीदने वाले लोगों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे पूंजी बढ़ाने के लिए रिबन का उपयोग करेंगे। ट्रस्ट, ऑनलाइन स्टोर से लाल रिबन ब्रूचेस को भी बेचता है। समर्थन दिखाने का एक और तरीका है या तो विश्व एड्स दिवस की आयोजन को व्यवस्थित करें या आयोजन में भाग ले।

निष्कर्ष

जबकि एड्स महामारी एक निश्चित स्तर के लिए निहित है, रोग अभी भी समाप्त नहीं हुआ है। जब तक हम इसे समाप्त करने का लक्ष्य नहीं प्राप्त कर लेते है, तब तक विश्व एड्स दिवस को जारी रखने की आवश्यकता है ताकि लोग गलत धारणा के तहत श्रम न करें कि यह घातक बीमारी खत्म हो गई है। इसके बजाय लोग इस रोग की रोकथाम और इसके उपचार के बारे में जागरूक रहे।


 

एचआईवी/एड्स पर निबंध: कारण, ट्रांसमिशन, संकेत, लक्षण और उपचार – निबंध 5 (800 शब्द)

प्रस्तावना

एड्स कि महामारी, एक समय में, दुनिया भर में जंगल की आग की तरह फैल रही थी। दुनिया भर में निर्धारित अभियानों के लिए धन्यवाद, इस वजह से अधिक लोग एड्स के बारे में जागरूक हो रहे हैं - न केवल यह कितना घातक है बल्कि इसका कारण क्या है और इसका इलाज कैसे किया जाता है। हमारे पास जितनी अधिक जानकारी होगी उतना बेहतर हम इस बीमारी से लड़ सकेंगे। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि हम इस सिंड्रोम के बारे में जितना हो सके उतना जाने, ताकि उसकी गति को रोकने में मदद मिल सके।

एड्स / एचआईवी के कारण

एड्स एचआईवी या ह्यूमन इम्यूनोडेफिशियेंसी वायरस के कारण होता है। यह एक रेट्रोवायरस है, जिसका अर्थ है कि यह अपने जीनोम की डीएनए कॉपी को मेजबान कोशिकाओं में डालकर प्रतिकृति करता हैं। इस मामले में, मेजबान कोशिकाएं सफेद रक्त कोशिकाएं होती हैं जिन्हें टी-हेल्पर कोशिकाएं या सीडी 4 कोशिकाएं कहा जाता है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली का हिस्सा हैं। एचआईवी इन कोशिकाओं को नष्ट कर देता है और स्वयं की प्रतियां बनाता है, जिससे मानव प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाता है। व्यावहारिक रूप से, यह समय के साथ बीमारियों से लड़ने की हमारी क्षमता को कम करता है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति जो एचआईवी पॉजिटिव है उसे एड्स हो। हालांकि, अगर इलाज समय पर नहीं कराया जाता है, तो एचआईवी पॉजिटिव वाले व्यक्ति की शरीर में एड्स विकसित हो जाता है।

एड्स / एचआईवी का प्रसारण

एचआईवी को तीन तरीकों से स्थानांतरित किया जा सकता है:

  • रक्त- रक्त संक्रमण के माध्यम से एचआईवी पारित किया जा सकता है, हालांकि इन दिनों यह काफी असामान्य है। अधिकांश विकसित देशों में प्रक्रिया से पहले रक्त की सख्त जाँच होती हैं कि रक्त का संक्रमण कही संक्रमित तो नहीं है। हालांकि, रक्त के लिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पास करने का एक और तरीका है और यह सुइयों को साझा करने के माध्यम से होता है जोकि कई दवा उपयोगकर्ता अक्सर करते हैं। यदि इन सुइयों को किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा साझा किया जाता है जो एचआईवी पॉजिटिव है, तो वायरस उस व्यक्ति में स्थानांतरित हो जाता हैं, जिसके साथ वे साझा कर रहे हैं।
  • प्रसवकालीन- अगर एक गर्भवती मां एचआईवी पॉजिटिव है, तो उनके बच्चे को वायरस से गुजरना पड़ सकता है। यह गर्भावस्था के दौरान, प्रसव के दौरान या बाद में, या स्तनपान के दौरान हो सकता है।
  • यौन संचरण- एचआईवी, यौन समबंध के दौरान शारीरिक तरल पदार्थ के साझाकरण के माध्यम से स्थानांतरित किया जा सकता है। इन तरल पदार्थ में जेनिटल, रेक्टल और ओरल तरल पदार्थ शामिल हैं। इसका मतलब है कि कंडोम की सुरक्षा के बिना, वायरस ओरल, अनल या वैजिनल सेक्स के माध्यम से प्रसारित किया जा सकता है। यह तब भी हो सकता है जब सेक्स टॉयज किसी ऐसे व्यक्ति के साथ साझा किए जाते हैं जो एचआईवी पॉजिटिव है।

एड्स / एचआईवी के लक्षण

एचआईवी में हमेशा आसानी से पहचाने जाने योग्य लक्षण नहीं होते हैं। हालांकि, कुछ लक्षण इस बात पर निर्भर कर सकते हैं कि शरीर में उसकी प्रगति कितनी हुई है।

  • शुरुआती लक्षण- इस चरण में हर किसी में एचआईवी पॉजिटिव होने का संकेत नहीं दिखता है। फिर भी, 80 प्रतिशत एचआईवी पॉजिटिव लोगो में फ्लू के विपरीत लक्षण नहीं दिखते हैं। इन लक्षणों में आम तौर पर ठंड, बुखार, मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों में दर्द, रात को पसीना आना, गले में खराश, लाल धब्बे, बढ़ी हुई ग्रंथियां, कमजोरी, थकान, थ्रश और वजन घटाने शामिल हैं। हालांकि, ये लक्षण तब भी दिखाई देते हैं जब शरीर अन्य वायरल संक्रमणों से लड़ रहा होता है। इसलिए, जो लोग हाल ही में एचआईवी संविदा के खतरे में हैं, उन्हें तत्काल परीक्षण कराना चाहिए।
  • स्पर्शोन्मुख एचआईवी- शुरुआती चरण के लक्षण के बाद, एचआईवी पॉजिटिव लोगों में महीनों, वर्षों तक कोई अन्य लक्षण नहीं दिखाई देता हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि वायरस निष्क्रिय है। यही वह समय है जब वायरस सीडी 4 कोशिकाओं पर हमला कर रहा होता है और प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर रहा होता है। उचित दवा के बिना, यह प्रक्रिया तब भी चल रही होती है जब व्यक्ति को कोई लक्षण दिखाई नहीं देता।
  • देर-चरण के लक्षण- इस चरण में, वायरस के वजह से प्रतिरक्षा प्रणाली पहले से ही कमजोर हो जाती है, जिससे व्यक्ति हल्के से गंभीर तक कई संक्रमणों के लिए कमजोर बन जाता है और उन संक्रमणों से लड़ने का ताकत खत्म हो जाता है। यह वह चरण है जिसे एड्स के रूप में जाना जाता है। इस चरण के लक्षणों में पुरानी दस्त, धुंधली दृष्टि, बुखार, सप्ताहों, शुष्क खांसी, निरंतर थकान, रात को पसीना आना, ग्रंथियां जो सप्ताह तक सूजी होती हैं, डिस्पने या सांस की तकलीफ, मुंह और जीभ पर सफेद धब्बे और वजन घटना शामिल हो सकता है।

एक बार रोग की प्रगति उस चरण तक पहुंच जाए, जहां एड्स की कम या ज्यादा होने की संभावना होती हैं तो, एक रोगी तपेदिक जैसी अन्य बीमारियों के लिए अतिसंवेदनशील हो जाता है।

एड्स या एचआईवी का उपचार

इस समय एड्स या एचआईवी के लिए कोई इलाज नहीं है। चूंकि एचआईवी एक रेट्रोवायरस है जो मेजबान सेल के डीएनए को अपने स्वयं के डीएनए की प्रतियों के साथ प्रतिस्थापित करके प्रतिलिपि बनाता है, इसके प्रसार को बाधित करने का सबसे अच्छा तरीका एआरटी या एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी है। यह एक दवा चिकित्साविधान है जो वायरस को प्रतिकृति से रोकती है, जिससे इसकी प्रगति धीमी हो जाती है या फैलने से रुक जाता है। संक्रमण के शुरुआती चरणों में उपचार शुरू करना सबसे अच्छा होता है ताकि प्रतिरक्षा प्रणाली महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित न हो। बाद के चरण में, कमजोर प्रतिरक्षा के कारण रोगियों में जो दूसरी बीमारियां हो गयी है उसका इलाज करने के लिए इस उपचार को दूसरे दवाओं के साथ जोड़ा जा सकता है।

निष्कर्ष

मरीज को ये पता लगने पर की वह एचआईवी पॉजिटिव है, उसे खुद को संभालना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, बीमारी को फैलने से रोकने के लिए अब उपचार उपलब्ध है उसके साथ-साथ, एचआईवी से पीड़ित मरीज़ अभी भी लंबे, स्वस्थ और उत्पादक जीवन का नेतृत्व कर सकते हैं।

 

 

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