शराबबंदी पर निबंध

शराब, आज की तारीख में इस पेय ने अपनी अहमियत इतनी ज्यादा बढ़ा ली है कि कुछ लोगों के लिए यह भोजन और यहाँ तक कि पानी से भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो चुका है। सबसे बड़ी बात कि एक कम पढ़ा-लिखा व्यक्ति यदि इस तरह की आदतों को शुमार करता है तो यह उसकी भूल हो सकती है लेकिन उन लोगों के बारे में क्या कहा जाये जो बड़ी-बड़ी डिग्रियां और उच्च शिक्षा हासिल कर चुके होते हैं।

उनके जीवन में तो शराब उनके एक वक़्त के भोजन सामान हो जाता है। यक़ीनन शराब का सेवन मादकता तो प्रदान करता ही है, मगर इसके साथ ही साथ वह व्यक्तित्व के विनाश, निर्धनता की वृद्धि और मृत्यु के द्वार भी खोलता है। इसलिए इस आसुरी आदतों को समाप्त करना अतिआवश्यक है।

शराबबंदी पर लघु और दीर्घ निबंध (Short and Long Essays on Alcohol Ban in Hindi)

निबंध 1 (250 शब्द) - शराबबंदी क्यों है इतनी आवश्यक

परिचय

आज हम आधुनिक ज़माने में जी रहे हैं और अगर आप इस ज़माने के साथ साथ नहीं चलते हैं तो आप पिछड़ जायेंगे। फिर चाहे वह पढ़ाई का क्षेत्र हो या फिर नौकरी का या अपनी प्रतिष्ठा या सामाजिक स्थिति का हो। आजकल इसी समाज में लोगों के बीच जिन्हें हम आधुनिक भी कहते हैं कुछ ऐसी आदतों का चलन है जो बहुत तेजी से लोगों में फैलते जा रहा है। उन्हीं में से एक हैं शराब के सेवन की आदत, जो युवाओं को तो अपने आगोश में ले ही चुका है इसके अलावा बड़े-बुजर्गों के बीच भी यह खासा लोकप्रिय है।

कोई भी अवसर हो, चाहे उस्तव, या फिर जन्मदिन, या शादी-विवाह, यहाँ तक कि किसी तरह का मिलन समारोह भी शराब के बिना अधूरासमझा जाता हैं। ख़ास बात तो ये हैं कि अगर आप इस श्रेणी में शामिल नहीं है, तो आपको हीन भावना से देखा जाता है। और तो और आप उस समूह में हो कर भी एकदम अकेले हो जाते हैं जो कई-कई बार खुद आपको भी शर्मनाक लगने लगता है। बहुत से लोग इसे शौक के तौर पर अपने जीवन का हिस्सा बना लेते हैं जबकि कई लोग इसका सेवन करना शान समझते हैं।

शराबबंदी है बेहद जरूरी

देखा जाए तो आज की तारीख में इंसान अपनी इस तरह की गलत आदतों के चलते उम्र को घटा रहा हैं। आप खुद इस बात पर गौर कर सकते हैं हमारी पहले की पीढियां लम्बे समय तक स्वास्थ्यपूर्ण जीवन जीते थे लेकिन आज तमाम सुख सुविधाओं के बावजूद हम कुछ गलत आदतों का चुनाव कर के अपनी उम्र को प्राकृतिक और अप्राकृतिक दोनों तरह से कम करने पर तुले हुए हैं। इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि शराब एक जानलेवा चीज है इसके लाभ कुछ नही है बल्कि सिर्फ और सिर्फ नुकसान ही है। शराब से न केवल मनुष्य का शरीर बल्कि उसका पैसा, परिवार, सुख-चैन सभी का नुकसान होता है। जब लोगों के इसके दुष्परिणाम दिखते हैं या वो खुद इसका सामना करते हैं तब अक्सर ही शराबबंदी की आवाज बुलंद होती है, जो कि एकदम सही है। शराबबंदी होनी ही चाहिए क्योंकि यह कहीं से भी फायदेमंद नहीं है।

निष्कर्ष

आम नागरिक हो या फिर सरकार सभी को इस दिशा में गंभीरता से सोचना चाहिए और एक ठोस कदम उठाना चाहिए। जब हर कोई जानता है कि शराब का सेवन फलदायी नहीं है और इससे सिर्फ अपराध, समस्या और नुकसान की स्थिति ही उत्पन्न होती है तो आखिर इसे समाज में जगह दी ही क्यों जाए। निश्चित रूप से शराबबंदी को लेकर ठोस कदम उठाया जाना चाहिए वो भी राष्ट्रिय स्तर पर।

निबंध 2 (400 शब्द) - शराब: एक सामाजिक कलंक

परिचय

क्या आप पढ़े लिखे हैं, क्या आपने उच्च शिक्षा हासिल कर रखी है, क्या आप बेहतर नौकरी करते हैं, अगर इन सभी सवालों का जवाब हाँ है, तो निश्चित रूप से आप एक समझदार और काबिल इंसान है, साथ ही साथ एक सभ्य और सुसज्जित समाज से ताल्लुख रखते हैं। लेकिन, इसके बाद एक सवाल और है जो शायद इन सभी बातों से ज्यादा महत्वपूर्ण है, वो सवाल ये है कि 'क्या आप शराब का सेवन करते हैं?' अगर इसका जवाब नहीं है तो आपको पिछड़े हुए समाज और अनुशासनहीन, असामाजिक, और न जाने किस किस तरह की उपाधियाँ तत्काल मिल जाती हैं। जी हाँ, इसमें चौंकने वाली कोई बात नहीं है क्योंकि हमारे आज के आधुनिक समाज का यही असली चेहरा है।

शराब: एक सामाजिक कलंक

यदि आप शराब का सेवन करते हैं तो आप एक शानदार इंसान है, और आप खुद भी देखेंगे कि आपके साथ रहने वालों की संख्या हमेशा काफी ज्यादा होती है वहीं दूसरी तरफ अगर आप शराब से दूरी बना कर रखते हैं तो लोग भी स्वतः ही आपसे दूर होते जाते हैं। ऐसा लगता है जैसे समाज में शराब और इसका सेवन करने वालों ने आधिपत्य जमा रखा है।

शराब का सेवन किस हद तक अपने दुष्परिणाम दिखा सकता है यह किसी से छिपा नहीं हैं फिर चाहे वो समाज हो, सरकार हो या फिर खुद इसका सेवन करने वाला हो। लेकिन फिर भी लोग इसकी तरफ आकर्षित होते हैं और अपने जीवन में इसे सबसे अधिक महत्त्व भी देते हैं। शराब न सिर्फ इसका सेवन करने वाले का नाश करता है बल्कि समाज में एक कलंक के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि इसकी वजह से न जाने कितने परिवार उजड़ते है और कितनी जिंदगियां बर्बाद होती है। लेकिन इसके बावजूद सरकार इसे लेकर कोई भी ठोस कदम नहीं उठाती है।

हद तो तब हो जाती है जब थोड़े समझदार होने के बाद आपको ये पता चलता है की शराब का कारोबार खुद सरकार भी करती है। जी हाँ, सरकारों के लिए शराब राजस्व जुटाने का बड़ा जरिया है। आपको यह सुनकर काफी ज्यादा हैरानी हो सकती है कि एक आंकड़े के अनुसार देशी तथा विदेशी शराब की कुल खपत गांवों में 117 प्रतिशत तथा नगरों में 234 प्रतिशत की दर से प्रतिवर्ष बढ़ रही है। क्या कभी इस दर से नौकरी या शिक्षा के स्तर को बढ़ते आपने देखा है? इसमें कोई दो राय नहीं है कि शराब का सेवन हमें किस हद तक पीछे धकेलता है और हमारे जीवन में कलह और दुःख लाता है।

निष्कर्ष

यह केवल सरकार की ही जिम्मेदारी नहीं है बल्कि खुद हमारी और इस समाज की भी है कि लोगों को शराब का सेवन नहीं करने के लिए प्रेरित किया जाये और ज्यादा से ज्यादा प्रयासों द्वारा शराबबंदी के लिए जोर दिया जाये। क्योंकि इस सम्बन्ध में अगर कोई बदलाव ला सकता है तो वो खुद हम ही हैं।

निबंध 3 (600 शब्द) - शराबबंदी की आवश्यकता क्यों है

परिचय

यह सोचने वाली बात है, आखिर लोग सबकुछ जानने समझने के बाद भी शराब का सेवन करते ही क्यों हैं? उन्हें पढ़ना आता है, वो समझदार हैं, कई सारी डिग्रियां भी हैं उनके पास लेकिन फिर भी वो आये दिन होनी वाली घटना-दुर्घटनाओं और यहाँ तक कि शराब पर लिखी गयी चेतवानी तक को नजरअंदाज क्यों करते हैं? यह वाकई सोचने वाली बात है, चाहे कोई जश्न हो, त्यौहार हो, या अन्य कोई भी माहौल शराब का सेवन तो जैसे एक फैशन सा हो गया है। कई कई बार लोग जब अपने रिश्तों या काम से काफी ज्यादा निराश होते हैं तब शराब का सेवन करते हैं और कभी ख़ुशी के मौके पर भी करते हैं।

शराबबंदी की आवश्यकता क्यों?

समय समय पर कई रिसर्च सामने आते रहते है जिनमें कभी शराब के सेवन को लाभदायक बताया जाता है तो कभी हद से ज्यादा खतरनाक। कुछ के अनुसार एक निश्चित मात्रा में शराब का सेवन हमेशा फायदेमंद होता है जबकि सीमा से अधिक सेवन करने पर यह खुद के साथ साथ दूसरों के लिए भी जानलेना साबित हो जाता है। वैसे शराब अच्छी है या बुरी ये तो बाद की बात है लेकिन एक बात तो तय है कि किसी भी चीज की अधिकता हानिकारक होती है।

शराब के सेवन के बारे में न ही हमारे संविधान में कुछ आदेश है और न ही किसी तरह की रीति-रिवाज में कोई प्रथा, चाहे वो हिन्दू धर्म हो या मुस्लिम या फिर कोई भी अन्य। यहाँ तक कि हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी भी यही चाहते थे कि हिन्दुस्तान में एक भी ऐसा व्यक्ति न हो जो शराब का सेवन करे। वर्ष 1927 में महात्मा गांधी ने कहा था कि, "मैं भारत में कुछ हज़ार शराबी देखने के बजाय देश को अत्यधिक गरीब देखना पसंद करूँगा।“

जब शराब के सेवन से आमजन की स्थिति हद से ज्यादा ख़राब होने लगी तब कई राज्यों की सरकारों ने शराबबंदी का महत्वपूर्ण फैसला लिया, लेकिन इस बीच अवैध शराब की बिक्री तेजी से सर उठाने लगी, नतीजन सरकार को पीछे हटना ही पड़ा। मतलब इसे आप एक मकड़जाल की भांति समझ लीजिये जिसमे एक बार जो फंस गया वो कभी बाहर नहीं निकल पायेगा। मगर एक बात जो हर किसी को समझ में आती भी है और इसे बार बार समझाना भी पड़ता है, शराब के सेवन से लाभ एक भी नहीं है अपितु जो भी है सिर्फ और सिर्फ नुकसान है।

शराब न सिर्फ शरीर को खोखला बनाती है बल्कि मानसिक संतुलन को भी बिगाड़ती है। इसके लगातार सेवन से व्यक्ति असमय बूढ़ा दिखने लगता है। यह कहना गलत नहीं होगा कि ऐसी हेय वस्तु को हाथ लगाना भी महापाप है। आपने कई लोगों को यह कहते भी सुना ही होगा कि शराब पीने से इन्द्रियों में ताजगी आ जाती है, हमारी पाचन शक्ति बढ़ती है, थोड़ी मात्रा में शराब का सेवन किसी टॉनिक की भांति कार्य करता है, यह सब उनकी भ्रांति है। वास्तविकता यह है कि शराब के लगातार सेवन से मनुष्य के शरीर में अनेक रोग उत्पन्न हो जाते हैं। जो न उसे बल्कि उसके परिवार को भी परेशानी में डालते हैं।

निष्कर्ष

शराब का सेवन किसी भी दृष्टिकोण से लाभदायक नहीं होता है, इसका सेवन सिर्फ और सिर्फ अपने और दूसरों के घर को उजाड़ने में सहायक होता है। हर किसी को इसके दुष्प्रभाव के बारे में जानना व समझना चाहिए क्योंकि तभी कोई भी शराबबंदी की तरफ कदम बढ़ा सकता है। सिर्फ अपने मोहल्ले या राज्य को नहीं बल्कि पूरे देश को शराब मुक्त बनाने का संकल्प लेना है और तभी हम सभी बेहतर उन्नति कर पायेंगे और हमारा देश जो वर्षों से विकासशील है वो विकसित हो पायेगा।