विश्व एड्स दिवस

विश्व एड्स दिवस पूरी दुनिया में हर साल 1 दिसम्बर को लोगों को एड्स (एक्वायर्ड इम्युनो डेफिशियेंसी सिंड्रोम) के बारे में जागरुक करने के लिये मनाया जाता है। एड्स ह्यूमन इम्यूनो डेफिशियेंसी (एचआईवी) वायरस के संक्रमण के कारण होने वाला महामारी का रोग है। यह दिन सरकारी संगठनों, गैर सरकारी संगठनों, नागरिक समाज और अन्य स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा एड्स से संबंधित भाषण या सार्वजनिक बैठकों में चर्चा का आयोजन करके मनाया जाता है।

संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति ने साल 1995 में विश्व एड्स दिवस के लिए एक आधिकारिक घोषणा की जिसका अनुकरण दुनिया भर में अन्य देशों द्वारा किया गया। एक मोटे अनुमान के मुताबिक, 1981-2007 में करीब 25 लाख लोगों की मृत्यु एचआईवी संक्रमण की वजह से हुई। यहां तक कि कई स्थानों पर एंटीरेट्रोवायरल उपचार का उपयोग करने के बाद भी, 2007 में लगभग 2 लाख लोग (कुल का कम से कम 270,000 बच्चे) इस महामारी रोग से संक्रमित थे।

विश्व एड्स दिवस समारोह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य दिन समारोह बन गया है। विश्व एड्स दिवस स्वास्थ्य संगठनों के लिए लोगों के बीच जागरुकता बढ़ाने, इलाज के लिये संभव पहुँच के साथ-साथ रोकथाम के उपायों पर चर्चा करने के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।

विश्व एड्स दिवस

विश्व एड्स दिवस 2018

विश्व एड्स दिवस 2018 में शनिवार, 1 दिसम्बर को मनाया गया।

विश्व एड्स दिवस 2018 विशेष

विश्व एड्स दिवस 2018 हर वर्ष की तरह 1 दिसंबर के दिन मनाया गया, इस बार यह विश्व एड्स दिवस की 30वीं वर्षगांठ थी। इस दिन का मुख्य उद्देश्य इस बीमारी से ग्रसित लोगों को इसके इलाज और रोकथाम के विषय में प्रेरित करना है। विश्व एड्स दिवस इस विषय से जुड़े हुए कई सारे कार्यक्रम आयोजित किये गए जैसे कि जन-जागृति रैली, जागरुकता भाषण, चिकित्सा शिविर आदि इन कार्यक्रमों में सबसे प्रमुख हैं।

वैसे तो विश्व एड्स दिवस के दिन हर वर्ष ही कई सारे कार्यक्रम आयोजित किये जाते है लेकिन इन कार्यक्रमों का असली अर्थ तब सार्थक होगा जब लोगों तक इनका संदेश पहुंचेगा जैसे इस बीमारी से बचाव के उपाय, दवाइयों की उपलब्धता आदि प्रमुख है। 2017 के अंत में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार पूरे देशभर में करीब 21.4 लाख लोग एचआईवी रोग से ग्रस्त है, जिसमें से लगभग 11.81 लाख लोग एंटीरेट्रोवायरल उपचार की सहायता ले रहे है। इसके साथ ही हमें इस रोग से ग्रसित व्यक्तियों को भी समाज में उचित सम्मान दिलाने की आवश्यकता है, ताकि वह भी सामान्य व्यक्तियों के तरह अपना जीवन व्यतीत कर सके।

विश्व एड्स दिवस पर कौशांबी जेल में हुआ कैदियों का एचआईवी परीक्षण

विश्व एड्स दिवस को देखते हुए 1 दिसंबर के दिन कौशांबी जिले में एक विशेष मुहिम चलायी गयी, इसके अंतर्गत कैदियों का एचआईवी परीक्षण किया गया। इस मौके पर आयोजित हुए स्वास्थ्य परीक्षण में जेल अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और चिकित्सक अधिकारी मौजूद रहे इस परीक्षण के प्रथम चरण में दो बंदी एचआईवी पाजीटिव पाये गये है, जिनका अन्य जांचो के लिए सैंपल ले लिया गया है। इस विषय पर मुख्य जेल अधिकारी ने बताया कि यदि दोनो कैदियों में एचआईवी की पुष्टि होती है, तो उन्हें आवश्यक इलाज और दवाएं उपलब्ध करायी जायेंगी।

संस्थानों में आयोजित हुए विशेष कार्यक्रम

इसी तरह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश की ओर से विश्व एड्स दिवस के मौके पर सामुदायिक जनजागरुकता अभियान चलाया गया। इस दौरान लोगों को इस बिमारी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गयी। इस विशेष मौके पर लोगों को संबोधित करते हुए एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने कहा हमें सामुदायिक जागरुकता कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। इसके साथ ही यदि किसी भी व्यक्ति को अपने अंदर इस बीमारी की आशंका हो तो उसे इसकी जांच कराने में किसी प्रकार का संकोच नही करना चाहिए क्योंकि समय पर किया गया उपचार आपके जीवन को बचाने के साथ ही इसके संक्रमण को फैलने से भी रोक सकता है।

 

रीवा गर्ल्स कालेज में विश्व एड्स दिवस के अवसर पर रेड रिबन क्लब इकाई ने भी जागरुकता कार्यक्रमों का आयोजन किया, जिसमें डाँ. सोनल अग्रवाल मुख्य वक्ता के रुप में मौजूद रहीं। उन्होंने बताया कि हम सभी को अपना एचआईवी परीक्षण अवश्य कराना चाहिए और इसके रोकथाम का सबसे अच्छा उपाय सतर्कता ही है क्योंकि मुख्यतः एड्स एक से अधिक व्यक्ति से असुरक्षित यौन संबंध बनाने से होता है। इसी तरह देश के विभिन्न हिस्सों में जन-जागरुकता रैली और प्रश्नोत्तर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। जिसमें लोगो को एड्स से जुड़े तमाम तरह की भ्रांतियों के विषय में भी बताया गया।

विश्व एड्स दिवस का इतिहास

विश्व एड्स दिवस की पहली बार कल्पना 1987 में अगस्त के महीने में थॉमस नेट्टर और जेम्स डब्ल्यू बन्न द्वारा की गई थी। थॉमस नेट्टर और जेम्स डब्ल्यू बन्न दोनों डब्ल्यू.एच.ओ.(विश्व स्वास्थ्य संगठन) जिनेवा, स्विट्जरलैंड के एड्स ग्लोबल कार्यक्रम के लिए सार्वजनिक सूचना अधिकारी थे। उन्होंने एड्स दिवस का अपना विचार डॉ. जॉननाथन मन्न (एड्स ग्लोबल कार्यक्रम के निदेशक) के साथ साझा किया, जिन्होंने इस विचार को स्वीकृति दे दी और वर्ष 1988 में 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस के रुप में मनाना शुरु कर दिया। उनके द्वारा हर साल 1 दिसम्बर को सही रुप में विश्व एड्स दिवस के रुप में मनाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने इसे चुनाव के समय, क्रिसमस की छुट्टियों या अन्य अवकाश से दूर मनाने का निर्णय लिया। ये उस समय के दौरान मनाया जाना चाहिए जब लोग, समाचार और मीडिया प्रसारण में अधिक रुचि और ध्यान दें सकें।

एचआईवी/एड्स पर संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रम, जो यूएन एड्स के रूप में भी जाना जाता है, वर्ष 1996 में प्रभाव में आया और दुनिया भर में इसे बढ़ावा देना शुरू कर दिया गया। एक दिन मनाये जाने के बजाय, पूरे वर्ष बेहतर संचार, बीमारी की रोकथाम और रोग के प्रति जागरूकता के लिये विश्व एड्स अभियान ने एड्स कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए वर्ष 1997 में यूएन एड्स शुरु किया।

शुरु के सालों में, विश्व एड्स दिवस के विषयों का ध्यान बच्चों के साथ साथ युवाओं पर केन्द्रित था, जो बाद में एक परिवार के रोग के रूप में पहचाना गया, जिसमें किसी भी आयु वर्ग का कोई भी व्यक्ति एचआईवी से संक्रमित हो सकता है। 2007 के बाद से विश्व एड्स दिवस को व्हाइट हाउस द्वारा एड्स रिबन का एक प्रतिष्ठित प्रतीक देकर शुरू किया गया था।

विश्व एड्स दिवस के विषय (थीम)

यूएन एड्स ने विश्व एड्स दिवस अभियान बीमारी के बारे में बेहतर वैश्विक जागरूकता बढ़ाने के लिये विशेष वार्षिक विषयों के साथ इसका आयोजन किया।

विश्व एड्स दिवस के सभी वर्षों के विषयों की सूची इस प्रकार है:

 

  • वर्ष 1988 में एड्स दिवस अभियान का विषय, "संचार" था।
  • विश्व एड्स दिवस के अभियान के लिए वर्ष 1989 का विषय, "युवा" था।
  • विश्व एड्स दिवस के अभियान के लिए वर्ष 1990 का विषय, "महिलाएँ और एड्स" था।
  • विश्व एड्स दिवस के अभियान के लिए वर्ष 1991 का विषय, 'चुनौती साझा करना" था।
  • विश्व एड्स दिवस के अभियान के लिए वर्ष 1992 का विषय था, "समुदाय के प्रति प्रतिबद्धता"।
  • विश्व एड्स दिवस के अभियान के लिए वर्ष 1993 का विषय, "अधिनियम"।
  • विश्व एड्स दिवस के अभियान के लिए वर्ष 1994 का विषय, "एड्स और परिवार"।
  • विश्व एड्स दिवस के अभियान के लिए वर्ष 1995 का विषय, "साझा अधिकार, साझा दायित्व"।
  • विश्व एड्स दिवस के अभियान के लिए वर्ष 1996 का विषय, "एक विश्व और एक आशा"।
  • विश्व एड्स दिवस के अभियान के लिए वर्ष 1997 का विषय, "बच्चे एड्स की एक दुनिया में रहते हैं"।
  • विश्व एड्स दिवस के अभियान के लिए वर्ष 1998 का विषय, "परिवर्तन के लिए शक्ति: विश्व एड्स अभियान युवा लोगों के साथ।"
  • विश्व एड्स दिवस के अभियान के लिए वर्ष 1999 का विषय, " जानें, सुनें, रहें: बच्चे और युवा लोगों के साथ विश्व एड्स अभियान"।
  • विश्व एड्स दिवस के अभियान के लिए वर्ष 2000 का विषय, "एड्स: लोग अन्तर बनाते हैं"।
  • विश्व एड्स दिवस के अभियान के लिए वर्ष 2001 का विषय, "मैं देख-भाल करती/करता हूँ। क्या आप करते हैं"?
  • विश्व एड्स दिवस के अभियान के लिए वर्ष 2002 का विषय, "कलंक और भेदभाव"।
  • विश्व एड्स दिवस के अभियान के लिए वर्ष 2003 का विषय, "कलंक और भेदभाव"।
  • विश्व एड्स दिवस के अभियान के लिए वर्ष 2004 का विषय, "महिलाएँ, लड़कियाँ, एचआईवी और एड्स"।
  • विश्व एड्स दिवस के अभियान के लिए वर्ष 2005 का विषय था, "एड्स रोको: वादा करो"।
  • विश्व एड्स दिवस के अभियान के लिए वर्ष 2006 का विषय था, "एड्स रोको: वादा करो-जवाबदेही"।
  • विश्व एड्स दिवस के अभियान के लिए वर्ष 2007 का विषय था, "एड्स रोको: वादा करो- नेतृत्व"।
  • विश्व एड्स दिवस के अभियान के लिए वर्ष 2008 का विषय था, "एड्स रोको: वादा करो- नेतृत्व - सशक्त - उद्धार"।
  • विश्व एड्स दिवस के अभियान के लिए वर्ष 2009 का विषय था,“विश्वव्यापी पहुँच और मानवाधिकार”।
  • विश्व एड्स दिवस के अभियान के लिए वर्ष 2010 का विषय था,“विश्वव्यापी पहुँच और मानवाधिकार”।
  • विश्व एड्स दिवस के अभियान के लिए वर्ष 2011 से वर्ष 2015 तक का विषय था, "शून्य प्राप्त करना: नए एचआईवी संक्रमण शून्य। शून्य भेदभाव। शून्य एड्स से संबंधित मौतें"।
  • विश्व एड्स दिवस के अभियान के लिए वर्ष 2016 का विषय था, "एचआईवी रोकथाम के लिए हाथ ऊपर करें"
  • वर्ष 2017 में विश्व एड्स दिवस के लिए थीम "माई हेल्थ, माई राइट" था।
  • वर्ष 2018 में विश्व एड्स दिवस के लिए थीम "नो योर स्टेटस (Know Your Status)" है।

विश्व एड्स दिवस पर लाल रिबन पहनने का महत्व

पूरे विश्व भर में लोग आज के दिन लाल रीबन पहनकर एड्स से पीड़ित व्यक्तियों के प्रति अपनी भावनात्मकता व्यक्त करते है। ऐसा लोगों में इस मुद्दे के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए किया जाता है। इसके साथ ही इस रोग से लड़ रहे लोगो के लिए सहायता राशि जुटाने के लिए भी लोग इस लाल रीबन को बेचते हैं।

इसी तरह यह, इस बामारी से लड़ते हुए अपनी जान गवानें लोगों के प्रति श्रद्धांजलि प्रदान करने का भी एक जरिया है। जैसा कि यूएनएड्स के द्वारा बताया गया है कि “यह लाल रिबन एचआईवी से ग्रस्त व्यक्तियों तथा उनके देखभाल करने वाले लोगों के प्रति सद्भावना प्रकट करने का एक तरीका है” विश्व एड्स दिवस के मौके पर लाल रिबन पहनना लोगों के भीतर इस मुद्दे पर जागरुकता लाने तथा इस बीमारी के पीड़ीतों से होने वाले भेदभाव को रोकने का एक अच्छा तरीका है। यह लाल रिबन लोगों में जागरुकता लाने के लिए पूरे विश्व भर में कही भी उपयोग किया जा सकता है।

विश्व एड्स दिवस पर क्रियाएँ

लोगों में जागरुकता बढ़ाने और उस विशेष वर्ष के विषय के सन्देश को प्रसारित करने के लिये विश्व एड्स दिवस पर विभिन्न प्रकार की क्रियाएँ की जाती हैं। लोगों के बीच में जागरुकता बढ़ाना ही कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य है। कुछ गतिविधियाँ नीचे दी गयी है:

  • समुदाय आधारित व्यक्तियों और संगठनों को योजनाबद्ध बैठक के आयोजन के लिये विश्व एड्स दिवस गतिविधियों से जोड़ा जाना चाहिये। ये अच्छी तरह से स्थानीय क्लीनिकों, अस्पतालों, सामाजिक सेवा एजेंसियों, स्कूलों, एड्स वकालत समूहों आदि से शुरू किया जा सकता है।
  • बेहतर जागरूकता के लिए वक्ताओं और प्रदर्शकों द्वारा एकल कार्यक्रम या स्वतंत्र कार्यक्रमों का एक अनुक्रम मंचों, रैलियों, स्वास्थ्य मेलों, समुदायिक कार्यक्रमों, विश्वास सेवाओं, परेड, ब्लॉक दलों और आदि के माध्यम से निर्धारित किये जा सकते हैं।
  • विश्व एड्स दिवस से मान्यता प्राप्त एजेंसी बोर्ड द्वारा एक सार्वजनिक बयान को प्रस्तुत किया जा सकता है।
  • स्कूलों, कार्य स्थलों या सामुदायिक समूहों के लिये लाल रिबन आशा के चिह्न के रुप में पहनना और बाँटना चाहिये। सामाजिक मीडिया के आउटलेट के लिए इलेक्ट्रॉनिक रिबन भी वितरित किया जा सकता है।
  • सभी गतिविधियों (जैसे डीवीडी प्रदर्शनियाँ और एड्स की रोकथाम पर सेमिनार) व्यवसायों, स्कूलों, स्वास्थ्य देखभाल संगठनों, पादरी और स्थानीय एजेंसियों को उनके महान काम के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
  • किसी सार्वजनिक पार्क में एक कैण्डललाईट परेड आयोजित की जा सकती है या निकटतम एजेंसी में आयोजित गायकों, संगीतकारों, नर्तकों, कवियों, कहानी वक्ताओं और आदि मनोरंजक प्रदर्शन के माध्यम से एड्स की रोकथाम का संदेश वितरित कर सकता है।
  • विश्व एड्स दिवस के बारे में जानकारी अपनी एजेंसी की वेब साइट को जोड़ने के द्वारा वितरित की जा सकती है।
  • सभी की योजनाबद्ध कार्यक्रमों और गतिविधियों को पहले से ही ई-मेल, समाचार पत्र, डाक से या इलेक्ट्रॉनिक बुलेटिन के माध्यम से वितरित किया जाना चाहिए।
  • लोगों को एचआईवी / एड्स के लिए प्रदर्शनियों, पोस्टर, वीडियो आदि प्रदर्शित करके जागरूक किया जा सकता है।
  • विश्व एड्स दिवस की गतिविधियों के बारे में ब्लॉग, फेसबुक, ट्विटर के माध्यम से या अन्य सामाजिक मीडिया वेबसाइटों के माध्यम से लोगों के एक बड़े समूह को सूचित किया जा सकता है।
  • विश्व एड्स दिवस मनाने के लिये अन्य समूह सक्रिय रूप से योगदान कर सकते हैं।
  • एक मोमबत्ती की रोशनी के समारोह को एचआईवी/एड्स के कारण जिन व्यक्तियों का निधन हो गया हो की स्मृति में आयोजित किया जा सकता है।
  • धार्मिक नेताओं को एड्स की असहिष्णुता के बारे में कुछ बात करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
  • एचआईवी/एड्स से पीड़ित लोगों को साहचर्य प्रदान करने के लिए भोजन, आवास, परिवहन सेवा शुरू की जा सकती है। उन में नैतिकता को बढ़ाने के लिये सामाजिक कार्य, पूजा या अन्य कार्यों में आमंत्रित किया जा सकता है।

विश्व एड्स दिवस का उद्देश्य

हर साल विश्व एड्स दिवस मनाने का उद्देश्य, नए और प्रभावी नीतियों और कार्यक्रमों को बनाने, स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने के साथ ही एचआईवी/एड्स के प्रति स्वास्थ्य क्षेत्रों की क्षमता को बढ़ाने के लिए सदस्य राज्यों का अच्छी तरह से समर्थन करना है। विश्व एड्स दिवस के मुख्य उद्देश्यों में से कुछ नीचे सूचीबद्ध हैं:

  • विश्व स्तर पर एचआईवी / एड्स के लिए रोकथाम और नियंत्रण के उपायों को बढ़ाने के लिए सदस्य देशों का मार्गदर्शन।
  • सदस्य देशों को रोकथाम की योजना लागू करने, देख-रेख करने के साथ ही साथ एचआईवी / एड्स के इलाज, परीक्षण, एसटीआई नियंत्रण और एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी के लिये तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना।
  • लोगों को उन एंटीरेट्रोवाइरल दवाओं या अन्य वस्तुओं के बारे में जागरूक करना जो एचआईवी / एड्स के खिलाफ लड़ने में मदद कर सकते हैं।
  • सबसे प्रभावी परिणाम प्राप्त करने के लिए अभियान में सम्मानित (धार्मिक/कुलीन) समूहों को शामिल करना।
  • एड्स के लिए आयोजित प्रतियोगिताओं में योगदान करने के लिए स्कूलों, विश्वविद्यालयों और सामाजिक संगठनों से अधिक छात्रों को प्रोत्साहित करना।
  • एचआईवी / एड्स के संक्रमित रोगियों की संख्या को नियंत्रित करने के साथ ही धार्मिक समूहों को कंडोम के लिए प्रोत्साहित करना।

विश्व एड्स दिवस नारा, उद्धरण और संदेश

  • "एचआईवी/एड्स की कोई सीमा नहीं है।"
  • “एक व्यक्ति की एड्स से मदद, समाज की मदद के समान है”।
  • “एड्स एक बिल्कुल दुखद बीमारी है। एड्स के बारे में कोई दैवीय प्रतिकार मानना बकवास के समान है”।
  • "एक बच्चे को प्यार, हँसी और शांति दें, एड्स नहीं"।
  • “मैं एक व्यक्ति को जानता हूँ जो नपुंसक था, जिसने अपनी पत्नी को एड्स दिया और जो एक चीज उन्होंने की वो केवल एक किस (चुम्बन) थी।”
  • "यदि आप लोगों को आंकलन करते है, तो आपके पास उन्हें प्यार करने के लिए कोई समय नहीं है।"
  • "एड्स एक बीमारी है कि इसके बारे में बात करना मुश्किल है"।
  • "मेरे बेटे की एड्स से मौत हो गई है।"
  • "एड्स पर शिक्षा की कमी, भेदभाव, भय, और आतंक के कारण झूठ ने मुझे घेर लिया।"
  • "आपको एक दोस्त के साथ एक गले लगने या हाथ मिलाने या भोजन करने से एड्स नहीं हो सकता है"।
  • “एड्स बहुत डरावना है। मुझे उम्मीद है कि यह मुझे नहीं है”।

एड्स के बारे में

एड्स(इम्यून डेफिसिएंसी सिंड्रोम या एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिसिएंसी सिंड्रोम) एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनो वायरस) की वजह से होता है, जो मानव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला करता है। इस रोग को पहली बार 1981 में मान्यता मिली। ये एड्स के नाम से पहली बार 27 जुलाई 1982 को जाना गया।

एचआईवी संक्रमण आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे में प्रेषित हो जाता है यदि उन्होंने शारीरिक द्रव या रक्त श्लेष्मा झिल्ली के माध्यम से कभी सीधे संपर्क किया है। पहले की अवधि में, एचआईवी/एड्स से पीड़ित लोगों पर बहुत से सामाजिक कलंक (लांछन) लगाये जाते थे। अनुमान के मुताबिक, ये उल्लेख किया गया है कि, 33 लाख लोग एचआईवी से संक्रमित हैं और 2 लाख लोगों का हर साल इसकी वजह से निधन हो जाता है।

एचआईवी एक वायरस है, यह रोग प्रतिरक्षा प्रणाली की टी-कोशिकाओं पर हमला करता है और जिसके कारण एक रोग होता है जो एड्स के रूप में जाना जाता है। यह मानव शरीर के तरल पदार्थों में पाया जाता है जैसे: संक्रमित व्यक्ति के रक्त, वीर्य, योनि तरल पदार्थ, स्तन के दूध में जो दूसरों में सीधे संपर्क जैसे: रक्त आधान, ओरल सेक्स, गुदा सेक्स, योनि सेक्स या दूषित सुई का इंजेक्शन लगाने से फैलता है। यह प्रसव के दौरान या स्तनपान के माध्यम से गर्भवती महिलाओं से बच्चों में भी फैल सकता है।

ये पश्चिम-मध्य अफ्रीका के क्षेत्र में 19 वीं और 20 वीं सदी में हुआ था। असल में इसका कोई भी इलाज नहीं है, लेकिन हो सकता है कि कुछ उपचारों के माध्यम से कम किया जा सके।

एचआईवी / एड्स के लक्षण और संकेत

एचआईवी / एड्स से संक्रमित व्यक्ति के निम्नलिखित संकेत और लक्षण है:

  • बुखार
  • ठंड लगना
  • गले में खराश
  • रात के दौरान पसीना
  • बढ़ी हुई ग्रंथियाँ
  • वजन घटना
  • थकान
  • दुर्बलता
  • जोड़ो का दर्द
  • मांसपेशियों में दर्द
  • लाल चकत्ते

लेकिन, इस रोग के कई मामलों में प्रारंभिक लक्षण कई वर्षों तक दिखाई नहीं देते जिसके दौरान एचआईवी वायरस के कारण प्रतिरक्षा प्रणाली नष्ट हो जाती है, जो लाइलाज है। संक्रमित व्यक्ति इस अवधि के दौरान किसी भी लक्षण को कभी महसूस नहीं करता है और स्वस्थ दिखाई देता है।

लेकिन एचआईवी संक्रमण (वायरस इसके खिलाफ लड़ने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करते हैं) के आखिरी चरण में व्यक्ति एड्स की बीमारी से ग्रसित हो जाता है। आखिरी चरण में संक्रमित व्यक्ति को निम्नलिखित संकेत और लक्षण दिखने शुरू हो जाते है:

  • धुंधली दृष्टि
  • स्थायी थकान
  • बुखार (100 degree F के ऊपर)
  • रात का पसीना
  • दस्त (लगातार और जीर्ण)
  • सूखी खाँसी
  • जीभ और मुंह पर सफेद धब्बे
  • ग्रंथियों में सूजन
  • वजन घटना
  • साँसों की कमी
  • ग्रास नलीशोथ (कम घेघा अस्तर की सूजन)
  • कपोसी सार्कोमा, गर्भाशय ग्रीवा, फेफड़ों, मलाशय, जिगर, सिर, गर्दन के कैंसर और प्रतिरक्षा प्रणाली (लिम्फोमा) का कैंसर।
  • मेनिनजाइटिस, इन्सेफेलाइटिस और परिधीय न्यूरोपैथी
  • टोक्सोप्लाज़मोसिज़ (मस्तिष्क का संक्रमण)
  • यक्ष्मा
  • निमोनिया

एड्स के बारे में समाज में कुछ मिथक फैल गये हैं। एड्स हाथ मिलाने, गले लगने, छींकने, अटूट त्वचा को छूने या एक ही शौचालय के उपयोग के माध्यम से कभी नहीं फैलता है।

 

 

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