गणतंत्र दिवस - 26 जनवरी

भारतीय संविधान को सम्मान देने के लिये 26 जनवरी को पूरे सम्मान के साथ हर वर्ष भारत में गणतंत्र दिवस मनाया जाता है क्योंकि आज ही के दिन 1950 में ये लागू हुआ था। भारतीय संविधान ने 1935 के अधिनियम को बदल कर खुद को भारत के संचालक दस्तावेज़ के रुप में स्थापित किया था। इस दिन को भारतीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय अवकाश के रुप में घोषित किया गया है। भारतीय संवैधानिक सभा द्वारा नये भारतीय संविधान की रुप-रेखा तैयार हुई और स्वीकृति मिली तथा भारत के गणतांत्रिक देश बनने की खुशी में इसे हर वर्ष 26 जनवरी को मनाने की घोषणा हुई।

भारतीय गणतंत्र दिवस - 26 जनवरी 2019 (Republic Day of India in Hindi)

भारत में वर्ष 2019 का गणतंत्र दिवस 26 जनवरी, शनिवार को मनाया जायेगा। इस साल 2019 में भारत अपना 70 वाँ गणतंत्र दिवस मनायेगा। भारत ने अपना पहला गणतंत्र दिवस 1950 में मनाया था।

गणतंत्र दिवस 2019 के मुख्य अतिथि

2019 में आयोजित होने वाले भारत के 70वें गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि दक्षिण अफ्रीका के पांचवे तथा वर्तमान राष्ट्रपति “माटामेला सिरिल रामाफोसा” होंगे।

दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रमफोसा को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अर्जेंटीना के राजधानी ब्यूनस आयर्स में आयोजित हुए जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान आमंत्रित किया गया था। दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति को आमंत्रित करने की एक मुख्य वजह यह भी है इस वर्ष भारत महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनायेगा और क्योंकि महात्मा गांधी का दक्षिण अफ्रीका से काफी गहरा जुड़ाव रहा है। इसलिए यह बात भी इस आमंत्रण को काफी खास बनाती है। इस विषय में बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दक्षिण अफ्रीकी प्रधानमंत्री का यह भारत दौरा दोनो देशों के संबंधों को मजबूती प्रदान करने का कार्य करेगा।

जानिए, 26 जनवरी 2019 पर क्या है खास

  • गणतंत्र दिवस सुरक्षा को देखते हुए दिल्ली पुलिस द्वारा राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में मानवरहित विमान गतिविधियों (यूएवी) पर रोक लगा दी गई है।
  • गणतंत्र दिवस के कारण 20 जनवरी से 26 जनवरी तक इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की कई उड़ाने प्रभावित होगीं, जिनके लिए अभी से ही निर्देश जारी कर दिये गये हैं।
  • 2019 में मनाया जाने वाला गणतंत्र दिवस महात्मा गांधी की 150वीं जयंती का वर्ष भी होगा। इस वर्ष 26 जनवरी के दिन महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि प्रदान करने के साथ गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम की शुरुआत की जायेगी।
  • इस वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर 17 प्रदेश अपनी झांकियां निकालेंगे। इसके साथ ही इस वर्ष के एक विषय का थीम गांधी जी पर भी आधारित होगा, क्योंकि इस वर्ष गांधी जी की 150वीं जयंती पूरी होने वाली है।
  • इसके साथ ही प्रवासी भारतीय दिवस के प्रतिनिधी (वाराणसी में आयोजित होने वाले प्रवासी भारतीय दिवस का कार्यक्रम 21 जनवरी से शुरु होकर 23 जनवरी तक चलेगा) राजपथ में आयोजित होने वाले देश के 70वें भव्यतापूर्ण गणतंत्र दिवस में भी हिस्सा लेंगे।
  • इस वर्ष भारतीय वायु सेना ने वायुवानों को ऐसे ईंधन से चलाने की योजना बनाई है, जिसमें जेट ईंधन के साथ बायो ईंधन मिला होगा। यह विमान एक मालवाहक विमान होगा, जिसमें जेट फ्यूल के साथ 10 परसेंट बायो फ्यूल भी मिला होगा।
  • इस गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नंरेद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन किया जायेगा। इस युद्ध स्मारक का निर्माण नई दिल्ली में इंडिया गेट के पास किया गया है, इस स्मारक का मुख्य मकसद आजादी से लेकर अबतक शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि प्रदान करना है।
  • इस वर्ष 26 जनवरी 2019 को नई दिल्ली के राजपथ में होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के 8 एनसीसी के कैडेट भी हिस्सा लेंगे। इस दौरान इन एनसीसी कैडेटों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिलने का मौका मिलेगा।
  • इस वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर उत्तराखंड द्वारा ‘अनासक्ति आश्रम’ से संबंधित झांकी दिखायी जायेगी। यह उत्तराखंड के कोशानी जिले स्थित वह जगह है, जहां 1929 के दौरान महात्मा गांधी ने काफी समय व्यतीत किया था। उत्तराखंड की इस जगह को बापू ने ‘भारत का स्विजरलैंड’ कहकर पुकारा था।
  • 2019 में होने वाली गणतंत्र दिवस परेड में M777 होवित्जर और K9 वज्र जैसी स्व-चालित तोपें देखने को मिलेंगी। इन दोनो तोपों को हाल ही में भारतीय सेना के तोपखाने में शामिल किया गया है।
  • इस बार गणतंत्र दिवस के अवसर सेना की महिला सदस्यों द्वारा कई सारे कार्यक्रमों का नेतृत्व किया जायेगा और इसके साथ ही रोमांचक करतब दिखाने वाले ‘डेयरडेविल्स मोटरसाइकल टीम’ में भी एक महिला अधिकारी शामिल होगी।
  • गणतंत्र दिवस समारोह इतिहास में ऐसा पहली बार होगा, आसाम राईफल्स की सभी महिला दस्तों द्वारा गणतंत्र दिवस समारोह में हिस्सा लिया जायेगा।
  • इस वर्ष पंजाब द्वारा निकाली जानी वाली झांकी ‘जलियावाला बाग कांड’ थीम पर आधारित होगी। इसका चयन इसलिए किया गया क्योंकि इस वर्ष जलियावाला बाग नरसंहार के सौ वर्ष पूरे होने वाले हैं।
  • गणतंत्र दिवस 2019 परेड की टिकटों की बिक्री 7 जनवरी 2019 से लेकर 25 जनवरी 2019 तक तथा बीटींग रीट्रीट समारोह की टिकट बिक्री 27 जनवरी 2019 से लेकर 28 जनवरी 2019 तक दिल्ली के विभिन्न स्थानों पर होगी जैसे नार्थ ब्लाक गोलचक्कर, सेना भवन – गेट नंबर 2, प्रगति मैदान – गेट नंबर 1, जंतर मंतर – मुख्य गेट, शास्त्री भवन – गेट नंबर 3, जामनगर हाउस – इंडिया गेट के दूसरी तरफ, लाल किला – अगस्त पार्क पंद्रह के अंदर तथा जैन मंदिर के विपरीत स्थान पर और संसद भवन (रिशेप्शन आफिस) – यह विशेष काउंटर माननीय सांसदों के लिए।

2019 में राज्यों में गणतंत्र दिवस की तैयारियां और उत्सव

  • पिछले वर्ष गणतंत्र दिवस को उत्तर प्रदेश के कासगंज में हुई हिंसा को देखते हुए, इस वर्ष गणतंत्र दिवस को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा कासगंज में हिंसा को रोकने के लिए विशेष इंतजाम किये जा रहे हैं और इसके अंतर्गत क्षेत्र 32 स्थानों पर सीसीटीवी कैमरा लगाये गये हैं।
  • हिमांचल प्रदेश की राजधानी शिमला में गणतंत्र दिवस समारोह को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही है। इस कार्यक्रम में प्रदेश मुख्यमंत्री के साथ राज्यपाल भी हिस्सा लेंगे।
  • इस बार दिल्ली राज्य की झांकी का थीम महात्मा गांधी के दिल्ली में बिताये गए 720 दिनों पर आधारित होगा क्योंकि वर्ष 1915 से लेकर 1948 तक गांधी जी 80 बार दिल्ली आये थे और यहां 720 दिनों तक प्रवास किया था।
  • जम्मू-कश्मीर राज्य में गणतंत्र दिवस के कार्यक्रमों का अभ्यास 13 जनवरी से ही शुरु कर दिया जायेगा।
  • जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल ने गणतंत्र दिवस 2019 को नई दिल्ली के राजपथ में होने वाली परेड के लिए राज्य चुने गये एनसीसी (नेशनल कैडेट कॉर्प्स) कैडटों को शुभकामनाएं दीं।
  • इस बार गणतंत्र दिवस 2019 के अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 1500 कैदियों को रिहा करने का फैसला लिया गया है। इसके अंतर्गत आगरा, बरेली, फतेहगढ़, नैनी और वाराणसी जेल से ऐसे कैदियों को रिहा किया जायेगा जो उम्रदराज है फिर किसी प्रकार की गंभीर बिमारी से जूझ रहे हैं।
  • इस बार गणतंत्र दिवस के अवसर पर जम्मू-कश्मीर पुलिस के ‘डेयर डेविल’ टीम द्वारा भी विशेष करतब दिखलाये जायेंगे। इस दौरान डेयर डेविल दस्ते के 31 सदस्यों द्वारा 41 मोटरसाइलों पर कलाबाजियों का प्रदर्शन किया जायेगा, इस कार्यक्रम का आयोजन 26 जनवरी 2019 के अवसर पर जम्मू विश्वविद्यालय में किया जायेगा।
  • इस वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर नई दिल्ली के राजपथ में होने वाले परेड में अरुणाचल प्रदेश की झांकी का थीम ‘पीस विदिन’ पर आधारित होगा।
  • इस वर्ष नई दिल्ली में राजपथ पर होने वाले गणतंत्र दिवस पर उत्तराखंड राज्य द्वारा निकाली जाने वाली झांकी ‘अनासक्ति आश्रम’ के थीम पर आधारित होगी क्योंकि यह वह स्थान है, जहां सन् 1929 के दौरान महात्मा गांधी ने काफी समय व्यतीत किया था और उनके द्वारा इस जगह को ‘भारत का स्विट्जरलैंड’ की संज्ञा दी गई थी।

गणतंत्र दिवस 2018 के मुख्य अतिथि

भारत गणराज्य दिवस 2018 में मुख्य अतिथि दुनिया के 10 देशों (ASEAN राज्यों के प्रमुख) के 10 महान नेता होंगे। नीचे मुख्य अतिथि और उनके राष्ट्रों के नाम की सूची है:

  1. सुल्तान और विद्यमान प्रधान मंत्री, Hassanal Bolkiah - Brunei
  2. प्रधान मंत्री, Hun Sen - Cambodia
  3. राष्ट्रपति, Joko Widodo - Indonesia
  4. प्रधान मंत्री, Thongloun Sisoulith - Laos
  5. प्रधान मंत्री, Najib Razak - Malaysia
  6. राष्ट्रपति, Htin Kyaw - Myanmar
  7. राष्ट्रपति, Rodrigo Roa Duterte - Philippines
  8. राष्ट्रपति, Halimah Yacob - Singapore
  9. प्रधान मंत्री, Prayuth Chan-ocha - Thailand
  10. प्रधान मंत्री, Nguyễn Xuân Phúc - Vietnam

क्या विशेष था गणतंत्र दिवस 2018 में:

गणतंत्र दिवस 2018 की निम्नलिखित विशेषताएं थी:

  • भारत, गणतंत्र दिवस 2018 को 10 ASEAN देशों (दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र) के राष्ट्रअध्यक्षों तथा प्रमुखों के साथ मनाया गया। इस वर्ष 2018 में, भारतीय इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ, जब 10 मुख्य अतिथि भारत के गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में एकसाथ शामिल हुए। सभी आसियान नेताओं का भारतीय गणतंत्र दिवस में एक साथ आना इसलिए भी खास है क्योंकि इस वर्ष दक्षिण पूर्व एशियाई समूह ने अपने गठन के 50 साल पूरे कर लिये हैं।
  • इस बार आयकर विभाग तथा आल इंडिया रेडियों द्वारा क्रमशः "ब्लैक मनी ड्राइव" तथा “मन की बात” थीम पर आधारिक झांकिया निकाली गयी।
  • एयरक्राफ्ट कैरियर (आईएसी) विक्रांत को भारतीय नौसेना द्वारा प्रदर्शित किया गया इस एयरक्राफ्ट कैरियर का संचालन 2020 से शुरु किया जायेगा।
  • रक्षा विकास और अनुसंधान संगठन द्वारा  "निर्भय मिसाइल" और "अश्विनी रडार सिस्टम" के साथ ही "एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम” (नेत्रा) का भी प्रदर्शन किया गया है।

गणतंत्र दिवस का उत्सव

भारत का राष्ट्रीय ध्वज

चूँकि भारत में स्वतंत्रता दिवस ब्रिटिश शासन से भारत की आजादी की खुशी के लिये मनाया जाता है, उसी तरह भारत में गणतंत्र दिवस को उसके अपने संविधान को लागू करने के लिये मनाया जाता है। अधिकारिक रुप से इसे भारत के राष्ट्रपति के समक्ष भारत की राजधानी नयी दिल्ली के राजपथ पर हर वर्ष मनाया जाता है। देश के राष्ट्रीय झंडे को फहराने के द्वारा राज्य के राज्यपाल की मौजूदगी में राज्य की राजधानी में एक छोटा उत्सव मनाया जाता है।

भारतीय सरकार द्वारा पूरे देश में राजपत्रित अवकाश के रुप में 26 जनवरी को घोषित किया गया था। स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और दूसरे शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों और शिक्षकों के द्वारा पूरे उत्साह के साथ पूरे भारत भर में इसे मनाया जाता है।

नयी दिल्ली में इंडिया गेट के सामने राजपथ पर सैनिकों के द्वारा एक उत्कृष्ट परेड और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

गणतंत्र दिवस कैसे मनाया जाता है

हवा में तिरंगा बनाते हुए भारतीय वायु सेना

हवा में तिरंगा बनाते हुए भारतीय वायु सेना

राजधानी में गणतंत्र दिवस को मनाने के लिये पहले से ही भारतीय सरकार द्वारा अच्छे प्रयास के साथ कार्यक्रम और उत्सव आयोजित किया जाता है। राज्यों की राजधानी के साथ ही नयी दिल्ली के राजपथ पर एक बड़ा और भव्य परेड का आयोजन किया जाता है। परेड में पारंपरिक डाँस समूह, जल सेना, वायु सेना और थल सेना से प्रतिभागी भाग लेते हैं।

नयी दिल्ली में रखा गया परेड खासतौर से शुरुआत किया जाता है जब इंडिया गेट के अमर ज्योति जवान पर भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा पुष्पमाला भेंट की जाती है। अपने देश की रक्षा करते हुए भारतीय सेना के सैनिकों के सभी बलिदानों को याद करने के लिये ऐसा किया जाता है। राजधानी में परेड के दौरान भारतीय राष्ट्रपति द्वारा सेना की सलामी ली जाती है जबकि राज्यों में राज्यपाल द्वारा सेना की सलामी ली जाती है। इस खास अवसर पर, राज्य के प्रमुख राष्ट्रपति के मुख्य अतिथि बनते हैं।

सशस्त्र बलों के सैनिकों, आम जन, और स्कूलों के विद्यार्थियों को इस खास दिन पर राष्ट्रीय पुरस्कार (महावीर चक्र, अशोक चक्र, परम वीर चक्र, वीर चक्र) और बहादुरी मेडल भी वितरित किये जाते हैं। दर्शको पर गुलाब की पंखुड़ियों की बरसात के लिये इंडिया गेट के आसपास के क्षेत्रों में सेना बलों के हेलिकॉप्टर परेड करते हैं। स्कूलों के बच्चों के द्वारा देशभक्ति गीत पर डाँस परेड के द्वारा प्रस्तुति भी जाती है। राष्ट्रपति को सम्मानीय सलामी देने के लिये सैन्य बलों द्वारा मोटर साईकिलों पर करतब दिखाये जाते हैं जबकि फाईटर प्लेन (धुएँ द्वारा भारतीय झंडे तीन रंग बनाती है) द्वारा वायु सेना करतब दिखाती है।

देश के इतिहास और संस्कृति पर ध्यानाकर्षण करने के लिये विभिन्न राज्यों से पेशेवरों द्वारा विभिन्न पारंपरिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाती है। भव्य उत्सव के दौरान, 24 जनवरी से 29 जनवरी तक प्रधानमंत्री की एक रैली और लोक तरंग राष्ट्रीय फोक नृत्य उत्सव भी रखा जाता है।

इस दिन, पोस्ट ऑफिस और बैंक सहित देश के सभी सरकारी और गैर सरकारी कार्यालय बंद रहते हैं। बड़ी भीड़ के कारण इस दिन पर खास सुरक्षा व्यवस्था रहती है जो किसी भी समस्या से आमजन की रक्षा करती है।

गणतंत्र दिवस मनाने का इतिहास

वर्ष 1947 में 15 अगस्त को अंग्रेजी शासन से भारत को आजादी मिली थी। उस समय देश का कोई स्थायी संविधान नहीं था। पहली बार, वर्ष 1947 में 4 नवंबर को राष्ट्रीय सभा को ड्राफ्टिंग कमेटी के द्वारा भारतीय संविधान का पहला ड्राफ्ट प्रस्तुत किया गया था। वर्ष 1950 में 24 जनवरी को हिन्दी और अंग्रेजी में दो संस्करणों में राष्ट्रीय सभा द्वारा भारतीय संविधान का पहला ड्राफ्ट हस्ताक्षरित हुआ था।

तब 26 जनवरी 1950 अर्थात् गणतंत्र दिवस को भारतीय संविधान अस्तित्व में आया। तब से, भारत में गणतंत्र दिवस के रुप में 26 जनवरी मनाने की शुरुआत हुई थी। इस दिन भारत को पूर्णं स्वराज देश के रुप में घोषित किया गया था अत: पूर्णं स्वराज के वर्षगाँठ के रुप में हर वर्ष इसे मनाये जाने की शुरुआत हुई।

भारतीय संविधान ने भारत के नागरिकों को अपनी सरकार चुनने का अधिकार दिया। सरकारी हाऊस के दरबार हॉल में भारत के पहले राष्ट्रपति के रुप में डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद द्वारा शपथ लिया गया था। गणतंत्र दिवस मनाने के पीछे भारत के पास एक बड़ा इतिहास है।

26 जनवरी मनाने का महत्व

गणतंत्र दिवस स्वतंत्र भारत के लिये सच्चे साहस का प्रतीक है जहाँ सैन्य परेड, सैन्य सामानों की प्रदर्शनी, भारतीय राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय झंडे को सलामी और इस दिन विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन होता है। भारतीय झंडे में क्षैतिज दिशा में तीन रंग होते हैं (सबसे ऊपर केसरिया, मध्य में सफेद तथा अंत में हरा, सभी रंग बराबर अनुपात में होता है) और बीच में एक चक्र होता है (नीले रंग में 24 तिलियों के साथ) जो अशोका की राजधानी सारनाथ के शेर को दिखाता है।

भारत एक ऐसा देश है जहाँ विभिन्न संस्कृति, समाज, धर्म और भाषा के लोग सद्भावपूर्णं ढंग से एक साथ रहते हैं। भारत के लिये स्वतंत्रता बड़े गर्व की बात है क्योंकि विभिन्न मुश्किलों और बाधाओं को पार करने के वर्षों बाद ये प्राप्त हुई थी।

बहु-संस्कृति स्वतंत्र भारत में जीने के लिये भारतीय लोगों को गर्व महसूस कराने के लिये इस दिन को हर वर्ष मनाया जाता है। वर्ष के उत्सव को यादगार और महत्वपूर्णं बनाने के लिये गणतंत्र दिवस को बहुत ही रंग-बिरंगे और आनन्दपूर्णं तरीके से मनाते हैं। उत्सव में शामिल लोगों के द्वारा राष्ट्र-गान गाया जाता है। ये उत्सव सभी भारतीयों को एक स्थान पर ले आने का कार्य करता है।

भारतीय गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथियों की सूची

हर साल की तरह, मुख्य अतिथि के रुप में दूसरे देश के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति को अपने गणतंत्र दिवस पर आमंत्रित करके उनका स्वागत के द्वारा “अतिथि देवो भव:” की महान भारतीय परंपरा और संस्कृति का अनुसरण भारत करता रहा है। इस वर्ष, 2018 के गणतंत्र दिवस पर, भारत ने मुख्य अतिथि के रुप में दुनिया के 10 देशों (ASEAN राज्यों के प्रमुख) के 10 महान नेताओं का दिल से स्वागत किया। यहाँ नीचे आपको भारत के पहले गणतंत्र दिवस से लेकर 2018 तक के गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथियों की सूची उपलब्ध करायी जा रही है।

वर्ष मुख्य अतिथि देश
2019 सिरिल रामाफोसा दक्षिण अफ्रीका
2018 सुल्तान और विद्यमान प्रधान मंत्री, Hassanal Bolkiah
प्रधान मंत्री, Hun Sen
राष्ट्रपति, Joko Widodo
प्रधान मंत्री, Thongloun Sisoulith
प्रधान मंत्री, Najib Razak
राष्ट्रपति, Htin Kyaw
राष्ट्रपति, Rodrigo Roa Duterte
राष्ट्रपति, Halimah Yacob
प्रधान मंत्री, Prayuth Chan-ocha
प्रधान मंत्री, Nguyễn Xuân Phúc
Brunei
Cambodia
Indonesia
Laos
Malaysia
Myanmar
Philippines
Singapore
Thailand
Vietnam
2017 क्राउन प्रिंस, शेख मोहमद बिन ज़ायेद अल नाह्यान अबु धाबी
2016 राष्ट्रपति, फ्रांस्वा ओलांद फ्राँस
2015 राष्ट्रपति, बराक ओबामा यूएसए
2014 प्रधानमंत्री, शिंजों आबे जापान
2013 राजा, जिग्मे केसर नामग्याल वाँगचुक भूटान
2012 प्रधानमंत्री, यिंगलुक शिनवात्रा थाईलैंड
2011 राष्ट्रपति, सुसीलो बमबंग युद्धोयुनो इंडोनेशिया
2010 राष्ट्रपति, ली म्यूंग बक कोरिया गणराज्य
2009 राष्ट्रपति, नूरसुलतान नजरबयेव कज़ाकिस्तान
2008 राष्ट्रपति, निकोलस सरकोजी फ्रांस
2007 राष्ट्रपति, व्लादिमीर पुतिन रुस
2006 राजा, अब्दुल्ला बिन अब्दुल्लाजिज़ अल-सऊद सऊदी अरेबिया
2005 राजा, जिग्मे सिंघे वाँगचुक भूटान
2004 राष्ट्पति, लूइज़ इनैसियो लूला दा सिल्वा ब्राजील
2003 राष्ट्पति, मोहम्मदम खतामी इरान
2002 राष्ट्पति, कसाम उतीम मॉरीशस
2001 राष्ट्पति, अब्देलाज़िज बुटेफ्लिका अलजीरीया
2000 राष्ट्पति, ओलूसेगुन ओबाझाँजो नाइजीरिया
1999 राजा बिरेन्द्र बीर बिक्रम शाह देव नेपाल
1998 राष्ट्रपति, जैक्स चिराक फ्रांस
1997 प्रधानमंत्री, बासदियो पांडेय त्रिनीनाद और टोबैगो
1996 राष्ट्रपति, डॉ फरनॉनडो हेनरिक कारडोसो ब्राजील
1995 राष्ट्रपति, नेल्सन मंडेला दक्षिण अफ्रिका
1994 प्रधानमंत्री, गोह चोक टोंग सिंगापुर
1993 प्रधानमंत्री, जॉन मेजर यूके
1992 राष्ट्रपति, मारियो सोर्स पुर्तगाल
1991 राष्ट्रपति, मौमून अब्दुल गयूम मालदीव
1990 प्रधानमंत्री, अनिरुद्ध जुगनौत मॉरीशस
1989 गुयेन वैन लिंह वियतनाम
1988 राष्ट्रपति, जुनियस जयवर्द्धने श्रीलंका
1987 राष्ट्रपति, ऐलेन गार्सिया पेरु
1986 प्रधानमंत्री, एँड्रियास पपनड्रीयु ग्रीस
1985 राष्ट्रपति, रॉल अलफोन्सिन अर्जेन्टीना
1984 राजा जिग्मे सिंघे वाँगचुक भूटान
1983 राष्ट्रपति, सेहु शगारी नाइजीरिया
1982 राजा, जॉन कार्लोस प्रथम स्पेन
1981 राष्ट्रपति, जोस लोपेज़ पोरेटील्लो मेक्सिको
1980 राष्ट्रपति, वलेरी गिस्कार्ड द इस्टेइंग फ्रांस
1979 प्रधानमंत्री, मलकोल्म फ्रेज़र ऑस्ट्रेलिया
1978 राष्ट्रपति, पैट्रीक हिलेरी ऑयरलौंड
1977 प्रथम सचिव, एडवर्ड गिरेक पौलैण्ड
1976 प्रधानमंत्री, जैक्स चिराक फ्रांस
1975 राष्ट्रपति, केनेथ कौंडा जांबिया
1974 राष्ट्रपति, जोसिप ब्रौज टीटो यूगोस्लाविया
प्रधानमंत्री, सिरीमावो रतवत्ते दियास बंदरनायके श्रीलंका
1973 राष्ट्रपति, मोबुतु सेस सीको जैरे
1972 प्रधानमंत्री, सीवुसागर रामगुलाम मॉरीशस
1971 राष्ट्रपति, जुलियस नीयरेरे तंजानिया
1970 -
1969 प्रधानमंत्री, टोडर ज़िकोव बुल्गारिया
1968 प्रधानमंत्री, एलेक्सी कोज़ीगिन सोवियत यूनियन
राष्ट्रपति, जोसिप ब्रोज टीटो यूगोस्लाविया
1967 -
1966 -
1965 खाद्य एवं कृषि मंत्री, राना अब्दुल हामिद पाकिस्तान
1964 -
1963 राजा, नोरोदम शिनौक कंबोडिया
1962 -
1961 रानी, एलिज़ाबेथ द्वितीय यूके
1960 राष्ट्रपति, क्लिमेंट वोरोशिलोव सोवियत संघ
1959 -
1958 मार्शल यि जियानयिंग चीन
1957 -
1956 -
1955 गर्वनर जनरल, मलिक गुलाम मोहम्मद पाकिस्तान
1954 राजा, जिग्मे दोरजी वाँगचुक भूटान
1953 -
1952 -
1951 -
1950 राष्ट्रपति, सुकर्नों इंडोनेशिया

गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) परेड
रिपब्लिक डे परेड

जाड़े के उत्सव संबंधी ड्रेस पहने, राष्ट्रपति आवास से बाहर आते हुए राष्ट्रपति के अंग-रक्षकों द्वारा राजपथ पर गणतंत्र दिवस परेड की ये वास्तविक तस्वीर है। घुड़सवार रेजीमेंट में से एक खास चुनी हुयी भारतीय सेना की सबसे वरिष्ठ ईकाई भारत के राष्ट्रपति के अंगरक्षक बनते है। भारत के राष्ट्रपति की सुरक्षा और राह दिखाने के लिये उनके अंग-रक्षक पूरी तरह जिम्मेदार होते हैं। वो पूरी तरह हथियारों, बीटीआर-60 गाड़ियाँ से लैस होते हैं जो किसी भी परिस्थिति में इस्तेमाल किये जा सकते हैं साथ ही घोड़ें भी चलाते हैं।

रिपब्लिक डे परेड में अग्नि मिसाइल

राजपथ पर एक अग्नि-II बैलिस्टिक मिसाइल के प्रदर्शन के द्वारा गणतंत्र दिवस परेड की ये तस्वीर है। पड़ोसी देशों के लिये 3500 किमी से लेकर 5000 किमी की दूरी की मारक क्षमता वाले अग्नि-II एक असाधारण बैलिस्टिक मिसाइल है। अपने प्रकार की एक बेहद प्रगतिशील भारतीय बैलिस्टिक मिसाइल के रुप में इसे विकसित किया गया है जिसमें 40 मीटर की दूरी के अंतर्गत गोलाकार त्रुटि की संभावना होती है। इसके बाद, 2011 में जून के महीने में इसके क्रमानुयायी के रुप में भारत का अग्नि-III बैलिस्टिक मिसाइल भी विकसित किया गया।

रिपब्लिक डे पर डेकोरेशन

भारत के गणतंत्र दिवस को मनाने के अवसर पर राजपथ पर लॉयन कैपिटल का ये एक उत्कृष्ट सजायी गयी तस्वीर है। लॉयन कैपिटल के ठीक सामने पीले रंग के फूलों के साथ भारत का मान-चित्र बनाया गया है। मान-चित्र के बीच में तिरंगा बना हुआ है। मान-चित्र के ठीक नीचे एक बड़े वृत्ताकार में फूलों से सजे तीन वृत बने हैं। कितना सुंदर सजाया गया है ये लॉयन कैपिटल।

बीएसएफ द्वारा रिपब्लिक डे परेड

राजपथ पर भारत की विशेष बीएसएफ ऊँट टुकड़ी के द्वारा गणतंत्र दिवस परेड की ये फोटो है। भारत के गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत भारतीय सरकार की सीमा सुरक्षा बल बना भारत का बीएसएफ जो भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदार है। खासतौर से चुनी गयी केन्द्रीय सैन्य पुलिस बलों में से एक बीएसएफ बनती है जो 1 दिसंबर 1965 को भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा की शांति के लिये स्थापित हुई साथ ही सीमा पार से होने वाले अपराधों को भी रोकने के लिये बनी है। 186 बटालियन में भारतीय बीएसएफ में लगभग 24,000 जवान है (पुरुष और महिला दोनों सहित)। पूरे विश्व भर में भारत की बीएसएफ सबसे बड़ी सीमा सुरक्षा बल है। भारतीय बीएसएफ के पहले मुख्य निदेशक के.एफ.रुस्तम जी थे जिन्होंने इसकी स्थापना की और भारतीय बीएसएफ के संस्थापक पिता के रुप में जाने जाते थे।

मद्रास रेजिमेंट द्वारा रिपब्लिक डे परेड

राजपथ पर भारतीय सेना की मद्रास रेजीमेंट द्वारा गणतंत्र दिवस परेड का ये एक अद्भुत् दृश्य है। 1750 (मद्रास शहर की स्थापना वर्ष 1639 में हुई थी) के दौरान भारत में बनी सेना का सबसे पुरानी रेजीमेंट के रुप में भारत की मद्रास रेजीमेंट को माना जाता है। ब्रिटिश भारतीय सेना के विभिन्न अभियानों के द्वारा ये पुरानी भारतीय रेजीमेंट बनी और भारतीय सेना के रुप में जारी है। पूर्व में 1660 के दशक के दौरान इसे ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा मद्रास यूरोपियन रेजीमेंट के रुप में विकसित किया गया था जबकि बाद में 1750 के दशक के दौरान मेजर स्ट्रींगर लॉरेन्स के द्वारा इसे एक बटालियन के रुप में विकसित किया गया था। आजादी के बाद, मद्रास रेजीमेंट का निर्माण हुआ था जो बहुत सारे अभियानों में शामिल था जैसे मानवतावादी और संचालन और यूएन शांति स्थापित रखने वाला मिशन।

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