जीवन में लक्ष्य की प्राप्ति कैसे करें

जीवन में कोई भी सफलता अर्जित करने के लिए सबसे पहला कदम आपके द्वारा अपने लक्ष्यों का निर्धारण करना होता है। लक्ष्य निर्धारण एक ऐसी गतिविधि है जिसके लिए आपको पर्याप्त समय देने की आवश्यकता होती है और यही आपके समय का सदुपयोग है। क्योंकि, एक बार जब आप अपने लक्ष्यों को निर्धारित कर लेते हैं तो आप उन्हें प्राप्त करने का प्रयास शुरू कर सकते हैं और साथ ही लक्ष्य प्राप्ति के लिए अपना ध्यान उन प्रयासों पर बेहतर तरीके से केंद्रित कर पाते है।

लक्ष्य की प्राप्ति के लिए क्या करना चाहिए? (How to Achieve Goals in Life in Hindi)

अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए क्या जरूरी है? लक्ष्यों को प्राप्त करने का सपना देखना निश्चित रूप से सुंदर होता है लेकिन उन्हें हासिल करने के लिए क्या करना चाहिए यह जानना भी आवश्यक है। आप कहीं ना कहीं से शुरूआत करते हैं और वही आपका  शुरुआती बिंदु है जहां आप किसी विशेष समय पर होते हैं और वहीं से आप अपने निर्धारित लक्ष्य जो कि आपका गंतव्य है के लिए पहला कदम बढ़ाते हैं। आपके लक्ष्य तक पहुंचने की यात्रा को सफल बनाने के लिए क्या महत्वपूर्ण है यह पता लगाना भी आवश्यक है। आपको अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अनुकूल प्रयास करना चाहिए और आपका प्रयास आपके लक्ष्यों के अनुरूप होना चाहिए।

आइए पता लगाते हैं कि हमारे लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए क्या ज़रूरी है।

जीवन में लक्ष्य की प्राप्ति कैसे करें

लक्ष्य निर्धारण

अपने लक्ष्य को निर्धारित करना ही सबसे पहली और सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है और यदि आपका प्रयास कामचलाऊ है और आप जो करने जा रहे हैं उसके प्रति यदि आप गंभीर नहीं है तो संभवतः आप अपने लिए अभी तक कोई लक्ष्य निर्धारित किया ही नहीं है या यह भी हो सकता है कि आपका लक्ष्य अस्पष्ट हो। तो, सबसे पहले आप अपना लक्ष्य निर्धारित करें। आप छुट्टी के दिनों को छोड़कर रोजाना स्कूल जाते हैं लेकिन आपको अपना अध्ययन अच्छी तरह से करने के लिए लक्ष्य निर्धारित करने की आवश्यकता है। आखिरकार आप स्कूल जाने के लिए कितनी परेशानियां उठाते हैं तो फिर अध्ययन क्यों नहीं अच्छी तरह से कर पाते हैं? चाहे यह शिक्षा प्राप्त करना हो या खेल या पाठयक्रम से संबंधित अन्य गतिविधियां सभी के लिए लक्ष्य निर्धारित करना आवश्यक है। इसी तरह, यदि आप एक पेशेवर हैं तो आपको अपने पेशे में शिखर तक पहुंचने के लिए भी लक्ष्य निर्धारित करने की आवश्यकता है क्योंकि अपने लक्ष्यों को स्थापित करने का अभ्यास आपको उन्हें प्राप्त करने के बारे में अधिक गंभीर बनाता है।

लक्ष्य को कैसे निर्धारित करें और उसे प्राप्त करने के लिए क्या करें

अपने लक्ष्य के बारे में स्पष्ट रहें। आपका लक्ष्य क्या है, क्या यह सिर्फ स्कूल पहुंचना है या यह समय पर स्कूल पहुंचना है? इसी से सारा फर्क पड़ जाता है। आपको परिणाम भी, जो आपने लक्ष्य निर्धारित किया है, उसी के आधार पर मिलेगा। यदि आपसे देर से स्कूल पहुंचने के लिए पूछताछ होती है तो वह शायद इसीलिए है क्योंकि आपने समय पर स्कूल पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित ही नहीं किया था। तो, आप अपने लक्ष्यों के बारे में स्पष्ट रहें और अपने लिए सिर्फ अर्थपूर्ण लक्ष्यों को निर्धारित करें।

आपको अपने उन लक्ष्यों की पहचान करनी पड़ेगी जिन्हें आप चेतन एवं अवचेतन दोनो ही अवस्थाओं में प्राप्त करने की कोशिश करते रहते हैं। यदि आप अपने लक्ष्यों के प्रति सचेत हैं और आपके लक्ष्य स्पष्ट हैं तो आप अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के प्रयासों का बिल्कुल सटीक विवरण दे सकते हैं। इसलिए आपको अच्छी तरह से सोच-विचारकर अपना लक्ष्यों का निर्धारण करना चाहिए और फिर तदनुसार उन्हें प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए।

एक साथ आपके कई लक्ष्य हो सकते हैं

हर समय आपके कई छोटे या बड़े लक्ष्य होते हैं और इन लक्ष्यों का आप किसी भी समय पता लगा सकते हैं। ये लक्ष्य तात्कालिक,  अल्पावधि या मध्यम अवधि के या दीर्घकालिक और यहां तक की पूरे जीवन के लक्ष्य हो सकते हैं।

उदाहरण के तौर पर समय पर अपने कार्यालय पहुंचना शायद आपका तात्कालिक लक्ष्य हो सकता है।

अगर आपको अपना काम पूरा करना की आवश्यकता है और इसे स्कूल या कॉलेज में या आपके कार्यालय में अपने मालिक को दो दिनों के भीतर जमा करना है तो यह आपका अल्पावधि का लक्ष्य है।

इसी प्रकार यदि आप अपने कार्यालय में वित्तीय वर्ष के लिए अपना लक्ष्य पूरा करना चाहते हैं तो यह आपका मध्यम अवधि का लक्ष्य है। वैसे ही स्कूल या कॉलेज में वार्षिक परीक्षा के लिए अपना पाठ्यक्रम पूरा करना भी आपका मध्यम अवधि का लक्ष्य हो सकता है।

साथ ही आप एक लंबे समय के दौरान अपने व्यवसाय में सफल होने का लक्ष्य बना सकते हैं या आप अपनी पढ़ाई पूरी करने का लक्ष्य निर्धारण कर सकते हैं और उसके बाद एक पेशेवर वास्तुकार बनने का लक्ष्य बना सकते हैं यह भी हो सकता है कि शायद आपने जरूरतमंदों की सहायता के लिए एक बड़ा धर्मार्थ अस्पताल स्थापित करने का लक्ष्य बनाया हो।

और साथ ही आपका लक्ष्य यह भी हो सकता है कि आपने सामान्य तौर पर, जीवन में अपने समाज के लिए एक अच्छा, धार्मिक एवं प्रसन्नचित्त व्यक्ति बनने का लक्ष्य निर्धारित किया हो।

आप अपने प्रत्येक लक्ष्यों को महत्व देते हैं और आप अपने सभी लक्ष्यों को अपने संबंधित समय सीमा में हासिल करना चाहते हैं। क्यों सही है न? निम्नलिखित कुछ तरीके हैं जो आपको अपने लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें प्राप्त करने में आपकी मदद करते हैं:

  • व्यावहारिक बनें

आप अपने निर्धारित लक्ष्यं के प्रति व्यावहारिक नजरिया अपनाएं अर्थात् आपको अपने लक्ष्यों के निर्धारण एवं उन्हें हासिल करने के लिए जरूरी प्रयासों के बारे में व्यावहारिक होना पड़ेगा।

यदि आप एक ऐसा लक्ष्य निर्धारित करते हैं जिसे आप संभवत: प्राप्त नहीं कर सकते, तो फिर ऐसे लक्ष्य का क्या उपयोग है?

यदि आप अपने लिए एक लक्ष्य निर्धारित करते हैं जिसमें किसी भी तरह के संसाधनों की आवश्यकता होती है, जो संभवत: आपके पास नहीं हैं तो ऐसे लक्ष्य का क्या मतलब है। यदि आपमें शारीरिक ताकत और सहनशक्ति या स्वास्थ्य की कमी है, लेकिन फिर भी आप एक खिलाड़ी बनने का लक्ष्य निर्धारित करते हैं, तो आप काफी सफल नहीं हो सकते हैं। बेशक, आप अपने स्वास्थ्य को अचछा करने और ताकत को बढ़ाने के प्रयास भी कर सकते हैं, लेकिन अगर यह असंभव नहीं है तो इस प्रकार का लक्ष्य निर्धारित करने से आपको बचना चाहिए।

इसी तरह, यदि विदेश में अध्ययन के लिए आवश्यक धनराशि आपके पास नहीं है लेकिन फिर भी आपने विदेश से स्नातक का अध्ययन करने का लक्ष्य निर्धारित किया है तो ऐसा लक्ष्य किस काम का। इस तरह का लक्ष्य निर्धारित करके आप अपने माता-पिता को संसाधन जुटाने के लिए अनावश्यक रूप से परेशान ही करेंगे और अंततः इसका परिणाम यही होगा कि वे आपके लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आवश्यक पैसे नहीं जुटा पाएंगे। इसलिए आपके पास जो भी संसाधन उपलब्ध हों उन्हीं का बेहतर उपयोग करते हुए लक्ष्य का निर्धारण करें और उसे प्राप्त करने का प्रयास करें और इस प्रकार आप हमेशा अच्छी स्थिति में रहेंगें।

उन्हीं लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास करें जिन्हें पाना आपके लिए मुमकिन हो तभी आपको सफलता मिलेगी और इस प्रकार आपकी नींव भी मजबूत होगी।

  • अपने दिल की सुनिए और मानिए

अपने लक्ष्य को निर्धारित करते हुए अपने दिल की सुनिए और जो भी आपका दिल कहे उसका पालन करें। उदाहरण के तौर पर हो सकता है आप अपने व्यवसाय को लाभ के मापदंडों के बजाय कुछ सामाजिक कल्याण के मानदंडों पर आगे बढ़ाना चाहते हों। आप जो भी हासिल करना चाहते हैं उसका अनुसरण करें। यह जरूरी नहीं कि आप वही करें जो फायदे के लिए किया जाना चाहिए। अगर आपको लगता है कि आपकी ज़िम्मेदारी सिर्फ ज्यादा से ज्यादा लाभ कमाने के बजाय अधिक से अधिक सामाजिक सुधार करना है तो यही कीजिए और इसी दिशा में आगे बढ़िए क्योंकि इससे आपको अधिक खुशी मिलेगी।

इसी तरह, हो सकता है आपको करियर के रूप में चिकित्सा का क्षेत्र अपनाने में कोई रूचि न हो हालांकि लोग तो आपको एक पेशेवर डॉक्टर बनने के अनेक लाभ बताते रहेंगे। इसी तरह, हो सकता है आपको अपने पारिवारिक पेशे को अपनाने के लिए मजबूर किया जा रहा हो। अपने साथियों, पारिवारिक सदस्यों या अन्य लोगों के बाहरी दबाव में कोई फैसला न करें। अपनी पसंद का ही करियर चुनें, आखिरकार आपको जिंदगी भर लगातार अपनी रोजी-रोटी के लिए इसी करियर के अनुसार कार्य करने की आवश्यकता होगी। तो क्या आप इसके लिए कोई ऐसा कार्य चुनना पसंद नहीं करेंगे जिसमें आपकी रूचि हो और जिसे करते हुए आपको आनंद की अनुभूति हो? निश्चित रूप से आप ऐसा ही करना चाहेंगे। और, जो वास्तव में आपको चाहिए उसे प्राप्त करने के लिए साहस की आवश्यकता होती है।

जीवन में विभिन्न लक्ष्यों को कैसे प्राप्त करें

निर्भय होकर अपने लक्ष्यों का निर्धारण करना चाहिए और पूरे साहस के साथ उसे पाने के प्रयासों में जुट जाना चाहिए। सभी महान लक्ष्यों को उन्हीं लोगों द्वारा प्राप्त किया गया जिन्होंने अपने लक्ष्य को पाने के लिए साधारण तरीके से छोटी शुरूआत की थी। अगर आपमें अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रति उत्सुकता है तो कोई भी लक्ष्य प्राप्त करना मुश्किल नहीं।

अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बलिदान जरूरी है। लक्ष्य चाहे बड़ा हो या छोटा आपको साहसी बनना होगा।

अगर आपको अपने दोस्तों को जो आपको व्ह्ट्सऐप पर चैट करते हुए समय बिताने पर मजबूर कर रहे हैं रात में आपको अनावश्यक रूप से पार्टी करने के लिए जोर दे रहे हैं तो आपके अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए साहस जुटाकर उन्हें मना करना ही पड़ेगा। आपका समय बहुमूल्य है और अगर आप रात में सोने के बजाए देर रात तक पार्टी करेंगे तो आप दूसरे दिन पूरे तरो-ताजा होकर जल्दी नहीं उठेंगे और साथ ही आप अपने स्कूल, कॉलेज या कार्यस्थल देर से पहुंचेंगे। यदि आपका लक्ष्य हर जगह समय पर पहुंचना है, तो आपको अनावश्यक और  बेकार की गतिविधियों को न कहने का साहस दिखाना पड़ेगा।

या, उदाहरण के लिए, यदि आपको अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक विशेष आहार योजना का पालन करना है, तो आपको उसके लिए प्रतिबद्ध होना पड़ेगा। आप अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अपने आहार योजना का अनुसरण करें, यही आपके हित में होगा और तभी आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर पाएंगे। क्यों क्या यह सही नहीं है? तो फिर ऐसा करने में आप अफसोस महसूस क्यों कर रहे हैं?

अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए आपके मार्ग को बाधित करने वाली हर चीज को छोड़ने के लिए तैयार रहें और उसके लिए पर्याप्त साहस जुटाएं। आपका साहस ही लक्ष्य प्राप्ति में आपकी सफलता को सुनिश्चित करेगा। अपने लक्ष्यों को सफलतापूर्वक हासिल करने के लिए आपको निम्नलिखित कुछ प्रमुख बिंदुओं को ध्यान में रखना चाहिए:

  • समय बहुमूल्य है

यदि आप अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक समयावधि निर्धारित करते हैं, तो आपको यथासंभव सावधानी पूर्वक उसका पालन करना होगा।

समय कीमती है क्योंकि यह तेजी से बीतता रहता है और खोया समय वापस नहीं प्राप्त किया सकता है। इसलिए, उन गतिविधियों पर समय बर्बाद करने से बचें, जो आपको अपने लक्ष्य के करीब पहुंचने में बाधा डालते हैं।

किसी भी गतिविधि पर आपके द्वारा खर्च किए जाने वाले समय के बारे में आपके पूरी जानकारी होनी चाहिए इससे आपको किसी भी काम में समय के कुशल प्रबंधन में सहायता मिलेगा। और साथ ही, आपको समय बचाने के लिए थोड़ा अभिनव होने का प्रयास करना पड़ेगा। अतः लक्ष्य की प्राप्ति के लिए समय के प्रबंधन पर ध्यान दें और याद रखें हर जगह समय पर पहुंचना हमेशा जरूरी होता है।

  • समय के बचत के लिए दृढ़ता आवश्यक है

अपने लक्ष्य एवं उसे प्राप्त करने के प्रयासों के प्रति दृढ़ रहें। अगर आपने इसमें थोड़ी भी चंचलता दिखाई और भावनाओं में बह गए तो आपके प्रयासों की तीव्रता में कमी आ जाएगी और आप अपना लक्ष्य प्राप्त करने से चूक जाएंगे।

यदि आप वास्तव में अपना लक्ष्य प्राप्त करना चाहते हैं तो सही दिशा में ठोस प्रयास करें। यदि आप अपने सोच को लगातार बदलते रहते हैं और किसी एक लक्ष्य के प्रति दृढ़ न रहते हुए अलग-अलग लक्ष्यों को निर्धारित करते रहते हैं तो आप एक भी लक्ष्य प्राप्त नहीं कर पाएंगे। इस प्रकार आप अपना समय और ऊर्जा दोनों ही बर्बाद कर चुके होंगे और बदले में आपको मिलेगा कुछ भी नहीं। इसलिए आपको अपने समय एवं उर्जा, दोनों ही का विवेकानुसार उपयोग करना चाहिए, बशर्ते दोनों ही की एक निश्चित आपूर्ति सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।

तो, समय सोच समझकर खर्च करें और साथ ही आपको अपना लक्ष्य भी सोच समझकर ही निर्धारित करना चाहिए न कि मजाक-मजाक में कोई भी लक्ष्य निर्धारित कर लें। आपको अपने लक्ष्य का निर्धारण उसके फायदे एवं नुकसान दोनों ही का विस्तार से अध्ययन करने के बाद करना चाहिए। साथ ही, आपको अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए चतुर बनना पड़ेगा।

यदि आप अपने लक्ष्य तक पहुंचने के बारे में गंभीर हैं, तो सही दिशा में प्रयास करने के प्रति गंभीर रहें। साथ ही, दृढ़ता भी जरूरी है और यदि आप लगातार और पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करते हैं तो आपको निश्चित रूप से सफलता मिलेगी। साथ ही आप अपने समय और संसाधनों का उचित प्रबंधन करने में भी कामयाब होंगे।

  • निराश न हों बल्कि स्वयं को प्रोत्साहित करें

आगर आप अपने लक्ष्य की प्राप्ति के प्रति गंभीर हैं तो आपको दूसरों के प्रोत्साहित करने वाले शब्दों पर निर्भर नहीं होना चाहिए और साथ ही आपको दूसरों के द्वारा आपके मार्ग में पैदा की जा रही बाधाओं एवं निराश करने वाली गतिविधियों प्रभावित होकर कमजोर नहीं पड़ना चाहिए। असल में, निराश होने के बजाय, आपको अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए और भी अधिक आत्मविश्वास के साथ प्रयास करना चाहिए। अपने लिए लक्ष्य निर्धारित करते हुए खुश रहें और उनकी प्राप्ति के लिए प्रयास करते हुए भी आपको प्रसन्न रहना पड़ेगा। यदि आप अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं लेकिन आप खुश नहीं हैं तो आपके द्वारा किए गए किसी भी प्रयास का कोई नतीजा नहीं निकलेगा। मानसिक प्रसन्नता आपको सक्षम बनाती है और गुणात्मक रूप से आपके प्रयासों का असर बढ़ा देती है।

और इस प्रकार आपके द्वारा किए जा रहे प्रयास भी आपको बोझ प्रतीत नहीं होंगे बल्कि वे प्रयास आपके लिए उपयोगी बन जाएंगे। और अगर आपको जल्दी सफलता नहीं मिलती है तो भी आप अपने लक्ष्यों से मुंह न मोड़े बल्कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए प्रयास करते रहें। आप आप अपने लक्ष्य का निर्धारण करें और आप उसे निश्चित रूप से प्राप्त कर सकते हैं। और यदि आप अपने पहले प्रयास में सफल नहीं होते हैं तो फिर से कोशिश करें और बार-बार  कोशिश करें और ऐसा आपने अक्सर सुना होगा कि विफलता, सफलता प्राप्ति के मार्ग में पहला मील का पत्थर है। पहली कोशिश में यदि आपको असफलता मिलती है तो वास्तव में यह असफलता आपके द्वारा किए गए प्रयासों के कई पहलुओं को स्पष्ट करेगी जिनमें सुधार करके आप अपने बाद के प्रयासों को अधिक अर्थपूर्ण और उत्पादक बना सकेंगे।