मेरा भारत पर कविता

देश के लिए प्यार और कुछ करने का जज्बा बहुत कम लोगों में होती है। लेखक ने ये कविता मातृभूमि से प्यार और देश के नागरिकों के मन में देश के लिए कुछ करने की भावना जगाने के लिए लिखी है। लेखक ने पूरी कोशिश की है की इस कविता के जरिये वो लोगों के अंदर अपने देश के प्रति प्यार और जज्बात को जगा सके। नीचे लिखी सारी कविताओं के शब्द काफी सोच-समझकर लिए गए है जो की बहुत ही सराहनीय है। लेखक ने अपने मातृभूमि से बेहद प्यार और अपने देश के लिए कुछ करने का जज्बा पर प्रकाश डाला है।

मेरे भारत पर कविता, शीर्षक में देशभक्ति कविताओं का संग्रह है, जो लेखक की अपने देश और देश के युवाओं से देश के लिए कुछ करने का आह्वान करती है। देशभक्ति कविता, पढ़ने वाले व्यक्ति के मन में अपने देश के लिए सोए हुए प्रेम और सम्मान को जगा देती है। ऐसी ही कुछ देशभक्ति की कविताएं हम यहाँ आपको उपलब्ध करा रहे हैं।

मेरा भारत पर कवितायें (Poems on My India in Hindi)

ऐसे कई अवसर आते हैं जब आपको देश से जुड़ी कविताओं की आवश्यकता पड़ती है यदि आपको भी ऐसे ही सामग्रियों की आवश्यकता है, तो परेशान मत होइये हमारे वेबसाइट पर देश से जुड़ी कई कविताएं तथा अन्य सभी सामग्रियां उपलब्ध है। जिनका आप अपने आवश्यकता अनुसार उपयोग कर सकते हैं।

 

'कुछ करने का जज्बा'

 

देश के लिए प्यार है तो जताया करो,

कुछ करने का जज्बा है तो, उसे फिर किया करो।

 

रुको न तुम ये सोचकर, दुनिया वाले क्या सोचेंगे,

ठान लो तुम बस मन में, बढ़ते कदम न रुकने दोगें।

 

किसी का साथ पाने को तुम, खुद को रोका न करो,

कुछ करने का जज्बा है तो, उसे फिर किया करो।

 

दुनिया की सोचकर तुम बढ़ते कदम पीछे हटा लोगे,

अपनी सारी इच्छाओं को यू हीं मन में ही दबा लोगे।

 

बहुत हुई खामोशी अब, अपने हक के लिए बोला करो,

कुछ करने का जज्बा है तो, उसे फिर किया करो।

 

 

सोचेगें इतना तो ये, सुनहरा वक्त निकल जायेगा,

कुछ कर दिखाने का सपना यू हीं अधूरा रह जायेगा।

 

हर बाधा को पार करके तुम आगे बढ़ा करो,

कुछ करने का जज्बा है, तो उसे फिर किया करो।

 

ले लो शपथ कि देश पर आँच न आने दोगे,

हर बढ़ती चिंगारी को पहले ही धूमिल कर दोगे।

 

मिल जुल कर रहे सब ऐसा, माहौल बनाया करो,

कुछ करने का जज्बा है तो, उसे फिर किया करो।

 

------ वन्दना शर्मा।

 

'मातृभूमि से है बेहद प्यार'

 

हमको अपनी मातृभूमि से बेहद प्यार है।

हमको अपनी .................................-2।

 

यह जन्मभूमि, यह कर्मभूमि, यह अपनी पहचान है,

जो न करे सम्मान इसका, उसका जीना बेकार है.

हमको अपनी मातृभूमि से बेहद प्यार है;

हमको............................................।

 

 

दिवानों की दिवानगी में, भारत इसका नाम है,

इसकी सीमा रक्षा हेतु, जीवन अपना कुर्बान है,

हमको अपनी मातृभूमि से बेहद प्यार है;

हमको...............................................।

 

इसकी ओर उठी हर बुरी नजर को, वीरों ने हर बार झुकाया है,

हर जीत के बाद लहराता, तिरंगा जिसकी शान है,

हमको अपनी मातृभूमि से बेहद प्यार है;

हमको..........................................।

 

इसके सम्मान को कभी कोई न कम कर पाया है,

बढ़ते हुए दुश्मनों के दल को, वीरों ने मार भगाया है,

हमको अपनी मातृभूमि से बेहद प्यार है;

हमको...........................................।

 

आजाद, भगत, बोस जैसे युवा, इस देश की पहचान है,

इनके जीवन से प्रेरित, हर भारतवासी महान है,

हमको अपनी मातृभूमि से बेहद प्यार है;

हमको............................................।

 

हमको अपनी मातृभूमि से बेहद प्यार है;

हमको अपनी मातृभूमि से बेहद प्यार है।।

जय हिन्द, जय भारत।

 

------- वन्दना शर्मा।

 

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