गाय पर कविता

"गाय हमारी माता है" ये हम सभी को पता है, अगर गौ माता के विषय पर चर्चा करे तो शादियाँ बीत जाएँ लेकिन हमारे लेखक ने पूरी कोशिश की है कि संक्षिप्त में अपनी कविताओं द्वारा गौ माँ का हमारे ऊपर उपकार और उनके प्रति बदलती हुयी इंसानो की भावनाओं को बता सके। लेखक ने साफ़-साफ़ नीचे दी गयी कविता में लिखा है कि कैसे लोग गौ माता के प्रति स्वभाव बदल रहे है। इस कविता में गौ माता का अपने बच्चों के प्रति प्यार और उन्ही के दूध से सींचे हुए बच्चों का उनके प्रति कोई मोहमाया नहीं बताया गया है।

गाय पर कवितायें (Poems on Cow in Hindi)

कविता 1

"गाय हमारी माता है"

गाय हमारी माता है और हम है इसके बच्चे,

देखो तो सही, माँ कितनी सच्ची है और बच्चे कितने गंदे,

और बच्चे कितने गंदे।

 

क्या हम काबिल हैं कहलाने के इसके प्यारे बच्चे,
माँ हमारी कितनी काबिल पर बच्चे इसके कितने कच्चे,
पर बच्चे इसके कितने कच्चे।

 

वो हमें सींचती है अपना अमृत सा दूध देकर,
फिर भी हमारा पेट नहीं भरता इसका सबकुछ लेकर,
इसका सबकुछ लेकर।

 

क्या हम बच्चे इतने नादान, की कर नहीं सकते सबकुछ आसान,
वो तो है तत्पर हमारे लिए, पर क्या हम हो पाए है उसके,
आज, अभी और इसी समय, पूछो अपने दिल से,
गर कहते हो माँ उसे, तो मानते क्यों नहीं माँ उसे।

 

गर्व से कहो गाय हमारी माता है,
और हम उसके अटूट सहारा हैं,
हम उसके अटूट सहारा हैं।।

         ---------अर्चना त्यागी

 

कविता 2

'गौ सेवा का मार्ग'

गाय को ऐसे ही माता नही कहते,

इसके दूध से ना जाने कितने पेट भरते।

 

गौ-पालन है भारतीय सभ्यता का प्रतीक,

क्योंकि इसका स्वभाव है सबसे संतृप्त।

 

गाय जैसा निरीह प्राणी संसार में नही,

गौ सेवा किसी वरदान से कम नही।

 

वैसे गाय को माता तो हम कहते है,

फिर भी गौकशी के मुद्दे पर चुप रहते है।

 

गाय सड़को पे घूम रही लोगो को नही चिंता,

सब देख रहे लेकिन कोई कुछ नही करता।

 

गाय सड़को पर यह कूड़ा-कचरा खा रही,

पर किसी को गौ माता की परवाह नही।

 

जिसकी सेवा को दैव कृपा समझा जाता,

आज उस गौ को पूछने भी कोई नही आता।

 

गौ माता को कष्ट देकर सुखी ना रह पाओगे,

इन पापो का मोल ईश्वर के यहा चुकाओगे।

 

इसलिए ऐ भारतवासियों अब से संभल जाओ,

गौसेवा का धर्म अपनाकर सही मार्ग पर आओ।

                               ----------Yogesh Kumar Singh

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