माँ पर कविता

माँ जीवन का वह रुप है, जिससे ईश्वर भी अभिभूत है। निचे दिए गए कविताओं में माँ के द्वारा किया हुआ त्याग बताया गया है। माँ का मतलब ही होता है ममता। सारी कविताओं के अपने अलग-अलग शीर्षक हैं। जिनमे से एक कविता का शीर्षक है “माँ अगर तुम न होती तो”, लेखक ने इस शीर्षक का वर्णन खूब अच्छे से किया है जिसे पता चलता है की, काँटो भरी इस मुश्किल राह पर चलना कौन सिखाता है? इस कविता में माँ की ममता और स्नेह पर प्रकाश डाला गया है।

मां पर कविता, मां के लिये अपने अंदर छिपे भावों की अभिव्यक्ति है। मां दुनिया को दिया भगवान के सबसे बड़ा तौहफा है। मां अपने बच्चों को हर मुसीबत से बचाती है, हर तकलीफ उठाती है पर अपने बच्चे पर कोई आँच नहीं आने देती। हम, ऐसी महान ममता की मूरत मां पर कविताएं उपलब्ध कराने के साथ ही उम्मीद करते हैं कि आपको पसंद आयेगी।

माँ पर कवितायें (Poems on Mother in Hindi)

ऐसे कई अवसर आते हैं जब आपको माँ से जुड़ी कविताओं की आवश्यकता पड़ती है यदि आपको भी ऐसे ही सामग्रियों की आवश्यकता है, तो परेशान मत होइये हमारे वेबसाइट पर माँ से जुड़ी कई कविताएं तथा अन्य सभी सामग्रियां उपलब्ध है। जिनका आप अपने आवश्यकता अनुसार उपयोग कर सकते हैं।

 

शीर्षक: 'माँ तेरी याद आती है'

 

मेरी माँ है ममता की मूरत,
मेरी माँ है ममता की मूरत,
इस भीड़ भरी दुनिया में एक अलग सी सूरत,
एक अलग सी सूरत |

माँ तुम हो मेरी हर जरुरत की जरुरत,
जिसे मैं आज भी नहीं भूल पाती हूँ,
नहीं भूल पाती हूँ |

 

मैं तो थी अकेली, असहाय और नन्ही सी बच्ची,
जिसे मिली इस दुनिया में एक माँ तुम जैसी सच्ची,
एक माँ तुम जैसी सच्ची |

 

माँ आज भी तेरी याद आती है, बहुत याद आती है |

 

माँ वो तुम्ही थी जिसने मुझे ऊँगली पकड़ कर चलना सिखाया,
माँ वो तुम्ही थी जिसने मुझे हर मुसीबत से बचाया |

 

 

आज मै खुद एक माँ हूँ, और मेरे दो बच्चे है,
फिर भी मुझे माँ सिर्फ तेरी ममता याद आती है,
सिर्फ तेरी ममता याद आती है |

 

माँ तू मुझे बहुत याद आती है,
बहुत याद आती है |

 

मैं तो थी बिलकुल नादान, और जब सबकुछ नहीं था इतना आसान,
माँ तब भी तुमने दिखाई इतनी हिम्मत,
माँ तब भी तुमने दिखाई इतनी हिम्मत,
की आज भी पूरी होती है मेरी हर मेहनत,
मेरी हर मेहनत |

 

माँ तू ही मेरे लिए दुर्गा है, तू ही मेरे लिए गोविंदा,
माँ तू कभी नहीं मरेगी, क्योंकि तू आज भी मेरे में जिन्दा है,
तू आज भी मेरे में जिन्दा है |

 

---------अर्चना त्यागी

 

शीर्षक: 'माँ अगर तुम न होती तो'

 

माँ अगर तुम न होती तो मुझे समझाता कौन...

काँटो भरी इस मुश्किल राह पर चलना सिखाता कौन...

माँ अगर तुम न होती तो...

 

 

माँ अगर तुम न होती तो मुझे लोरी सुनाता कौन...

खुद जागकर सारी रात चैन की नींद सुलाता कौन...

माँ अगर तुम न होती तो...

 

माँ अगर तुम न होती तो मुझे चलना सिखलाता कौन...

ठोकर लगने पर रस्ते पर हाथ पकड़ कर संभालता कौन...

माँ अगर तुम न होती तो...

 

माँ अगर तुम न होती तो मुझे बोलना सिखाता कौन...

बचपन के अ, आ, ई, पढ़ना-लिखना सिखाता कौन...

माँ अगर तुम न होती तो...

 

माँ अगर तुम न होती तो मुझे हँसना सिखाता कौन...

गलती करने पर पापा की डाँट से बचाता कौन...

माँ अगर तुम न होती तो...

 

माँ अगर तुम न होती तो मुझे परिवार का प्यार दिलाता कौन...

सब रिश्ते और नातों से मेरी मुलाकात कराता कौन....

माँ अगर तुम न होती तो...

 

माँ अगर तुम न होती तो मुझे गलती करने से रोकता कौन...

सही क्या हैं, गलत क्या हैं इसका फर्क बताता कौन...

माँ अगर तुम न होती तो...

 

माँ अगर तुम न होती तो मुझे ‘प्यारी लाड़ो’ कहता कौन...

‘मेरी राज-दुलारी प्यारी बिटिया’ कहकर गले लगाता कौन...

माँ अगर तुम न होती तो...

 

माँ अगर तुम न होती तो मुझे समाज मैं रहना सीखाता कौन...

तुम्हारे बिना ओ मेरी माँ मेरा अस्तित्व स्वीकारता कौन...

माँ अगर तुम न होती तो...

 

माँ अगर तुम न होती तो मेरा हौसला बढ़ाता कौन...

नारी की तीनों शक्ति से मुझे परिचित कराता कौन...

माँ अगर तुम न होती तो...

 

--- वन्दना शर्मा

 

 

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