कथनी से अधिक करनी बोलती है - अर्थ, उदाहरण, उत्पत्ति, विस्तार, महत्त्व

अर्थ (Meaning)

'कथनी से अधिक करनी बोलती है' इस कहावत का अर्थ है कि किसी के विचार, योजना और कार्यसूची पर कार्य करना, उसके बारे में बोलने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होता है। दूसरों के द्वारा आपका कार्य देखा जाता है, ना कि आपके द्वारा कहा गया कुछ। आप जो भी कहते है संभव है कि लोग कुछ समय बाद उसे भूल जायेंगे मगर आपके द्वारा किया गया कोई भी कार्य आपके कहे गए शब्दों का प्रमाण और आपकी कबिलियत को दर्शाता है। यह कहावत कभी कभी उन लोगों के लिए एक चेतवानी की तरह इस्तेमाल की जाती है जो कहते कुछ है और करते कुछ और ही है।

उदाहरण (Examples)

इस कहावत को समझने के लिए उदाहरण ही सबसे सही तरीका है। जब कभी कोई उदाहरण सच्ची घटना पर आधारित होता है वो काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। यहाँ पर मैं कुछ उदाहरण दे रहा हूँ जो 'कथनी से अधिक करनी बोलती है' कहावत को चरितार्थ करते हैं।

"रौनक अक्सर ही कहा करता था कि बड़ा होकर वह एक डॉक्टर बनेगा, और उसके दोस्त उसपर हँसते थे और उसे जरा भी भाव नहीं देते थे। आज, वह शहर का सबसे सर्वश्रेष्ठ डॉक्टर है और उसके वही दोस्त आज उसकी इज्जत करते हैं। रौनक ने यह साबित कर के दिखा दिया कि 'कथनी से अधिक करनी बोलती है।"

"मेरे सुपरवाइजर सिर्फ बड़बोले हैं। वो योजनायें तो ढेर सारी बनाते हैं मगर एक भी लागू नहीं करते। काश मैं उन्हें सिखा पाता कि कथनी से अधिक करनी बोलती है।"

"मेरे पड़ोस में रहने वाला लड़का अक्सर ही दान, सामाजिक कार्य, आदि की बातें करता रहता है मगर आज तक कभी एक रूपया भी दान में दिया नहीं है। काश वो समझ पाता कि कथनी से अधिक करनी बोलती है।"

"मानसी अक्सर ही इस बात को लेकर चिंतित रहती है कि उसके साथी उसके प्रोजेक्ट प्लान को ज्यादा तवज्जो नहीं देंगे। मैंने उसे बताया कि अपने काम को शुरू करो क्योंकि कथनी से अधिक करनी बोलती है।"

"साधू लोग हमेशा ही मानवता, अच्छे कर्म, भगवान, आदि की बातें करते हैं। इसके विपरीत, उन पर नशीली दवाओं को बेचने का आरोप लगाया गया और उन्होंने अपना सारा सम्मान खो दिया। निश्चित रूप से, कथनी से अधिक करनी बोलती है।"

उत्पत्ति (Origin)

पहली बार इस कहावत का विचार अंग्रेजी नागरिक युद्ध के दौरान एक अंग्रेज सांसद, जॉन पीवाईएम - John Pym (1584-1643) द्वारा व्यक्त किया गया था।

1628 के ब्रिटेन के संसद की कार्यवाही के दौरान इसी कहावत के समान अर्थ वाला एक अन्य वाक्यांश भी पाया जाता है। कार्यवाही के दौरान पीआईएम ने कहा था - 'सेशन में कहा गया एक शब्द चांदी के चित्रों में सोने के सेब की तरह है, और कहने की तुलना में करना ज्यादा कीमती हैं।'

बाद में वर्ष 1693 में, अंग्रेजी पादरी थॉमस मंटन ने धर्मोपदेश पर अपनी पुस्तक में कहावत का सटीक संस्करण लिखा - 'इसलिए वे उसे महिमा देंगे, अपने होठों से उसकी प्रशंसा करेंगे, और उसे अपने जीवन से सम्मानित करेंगे। वे यह सुनिश्चित करेंगे कि उनका कार्य और कार्यक्षेत्र उनके दिलों और कार्यों की वास्तविक भाषा हो, जो शब्दों की तुलना में बहुत घटिया बोलते हैं।'

कहावत का विस्तार (Expansion)

'कथनी से अधिक करनी बोलती है' इस कहावत का अर्थ है कि कार्य को ज्यादा तवज्जो मिलती है अपितु सिर्फ कहने के। किसी व्यक्ति के पास कई सारे विचार होते हैं मगर वो सब बेकार हैं जब तक की उनपर कार्य ना किया जाये। उदाहरण के तौर पर, मान लीजिये एक व्यक्ति है जो हमेशा इसे एक दिन बड़ा बनने की बात करता है; बात करता है अमिर और मशहूर होने की, मगर असलियत में, वो ऐसा कुछ भी करने के लिए कोई भी प्रयास नही करता है और बैठे-बैठे बस अपना वक़्त बर्बाद करता है। ऐसे व्यक्ति को कभी भी वह पहचान नहीं मिलती जो वह चाहता है, जब तक कि वह अपने कार्यों के माध्यम से साबित नहीं करता है जिसका कि वह हकदार है। ना सिर्फ उसके कार्य बोलते हैं बल्कि वे उसके कहे शब्दों से ज्यादा मायने रखते हैं।

यहाँ पर इस कहावत का एक दूसरा विस्तार भी है - इसका मतलब है कि किसी भी व्यक्ति के वास्तविक चरित्र को उसके कार्यों से अधिक पहचाना जाता है, बजाय इसके कि वे क्या और कैसे बोलते हैं। उदाहरण के तौर पर, कोई व्यक्ति गरीबों के प्रति बहुत सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करता है, लेकिन वास्तव में, वह उनका अपमान करता है, तब यह कहावत उनके लिए एक चेतावनी के रूप में कार्य करती है कि कथनी से अधिक करनी बोलती है।

महत्त्व (Importance)

यह कहावत इतनी महत्वपूर्ण है कि यह हमें प्रेरित करती है कि बोलो कम और करो ज्यादा। आखिरकार हमारे कार्य हमारे शब्दों से कहीं ज्यादा बोलते हैं। लोग हमें केवल हमारे काम से ही जानते हैं, लेकिन हमारी कही बातों को जल्दी ही भूल जाते हैं। हमें अपने लक्ष्य पर कार्यरत रहते हुए बढ़ते रहना चाहिए ना कि सिर्फ विचारों में।

यह कहावत अलग अलग क्षेत्र के लोगों को प्रेरित करती है - छात्र, पेशेवर, आदि। ये सिखाता है कि अगर आप समाज में याद रखे जाना चाहते हैं और कुछ सराहनीय करना चाहते हैं तो आप उस पर तत्काल अमल करना शुरू कर दें। नतीजतन, आपके कार्य आपको सफलता देंगे, ना कि आपके कही गयी बातें।

इस कहावत का एक और महत्त्व है कि यह हमें सिखाता है कि दूसरों की कही बातों पर अपनी राय ना बनायें बल्कि उनके किये गए कार्यों के आधार पर अपना निर्णय लें। कार्य किसी भी व्यक्ति के निहित चरित्र के बारे में सच्चाई बयान करते हैं।

कथनी से अधिक करनी बोलती है पर लघु कथाएं (Short Stories on ‘Actions Speak Louder than Words’ In Hindi)

एक मनोरंजक और हंसी मजाक वाली कहानी से आप क्या सीख और समझ सकते हैं। आज मैं यहाँ पर कुछ छोटी-छोटी कहानियां दे रहा हूँ जो 'कथनी से अधिक करनी बोलती है' तथ्य पर आधारित है। आप इन कहानियों को पढ़ सकते हैं और इस कहावत का मतलब बेहद आसन और मनोरंजक तरीके से समझ सकते हैं।

लघु कथा 1 (Short Story 1)

एक बार राजू नाम का एक लड़का था, वह अक्सर ही क्रिकेट के बारे में बातें करता था और कहता था कि क्रिकेट उसका सबसे पसंदीदा खेल है। वो अपनी ख्वाइश भी जताता था कि वो एक मशहूर क्रिकेटर बनना चाहता है। वो अपने ख्वाइश में इतना ज्यादा तल्लीन था की वो चाहता था कि लोग उसकी ख्वाइश के बारे में जानें और खुद को एक मंझा हुआ क्रिकेटर समझने लगा था। मगर वो गलत था क्योंकि वो केवल क्रिकेटर बनने के बारे में सोचता था और उतनी प्रैक्टिस नही करता था जितना सफल होने के लिए चाहिए। वो इसके प्रति काफी लापरवाह था और अक्सर ही अपने मैच छोड़कर घर पर बैठा रहता था।

उसके पिता अपने बच्चे की स्थिति को अच्छी तरह से समझ चुके थे और उसे समझाने का प्रयास कर रहे थे। एक रोज जब राजू आलस दिखा रहा था, उसके पिता आये और उससे उसके क्रिकेटर बनाने के लक्ष्य के बारे में बताने लगे। वो बोले -'बेटा तुम्हे यह समझना होगा की तुम्हारे दिमाग में जो विचार हैं वो दूसरों के लिए बेकार हैं। इस दुनिया में सिर्फ तुम्हारा काम ही याद रखा जाता है और वही तुम्हे पहचान भी दिलाता है। तुम क्या करते हो और क्या पाते हो वह मायने रखता है ना कि वो जो सिर्फ तुम सोचते हो या जिस पर यकीन करते हो।

अगर तुम चाहते हो कि हर कोई तुम्हे तुम्हारी क्रिकेट की कला से पहचाने तो तुम्हे इसके लिए काम करना होगा।' छोटी सी बातचीत के इस अंश ने राजू के दिमाग को पूरी तरह से बदल दिया। उसने कड़ी मेहनत से प्रक्टिस करनी शुरू कर दी और बहुत जल्द वो अंतरराज्जीय प्रतियोगियता में चनियत हो गया। वह बहुत ही खुश था और अपने पिता को उनके मार्गदर्शन और समर्थन के लिए बहुत धन्यवाद दिया। उसके पिता ने उसे आशीर्वाद देते हुए कहा हमेशा याद रखना तुम्हारी कथनी से ज्यादा करनी बोलती है।

लघु कथा 2 (Short Story 2)

एक गाँव में एक बहुत चालाक बूढ़ा रहता था। वह गरीबों और कमजोरों से उनके सामने बहुत विनम्रता से बात करता था लेकिन उनकी पीठ पीछे उन्हें कोसना शुरू कर देता था और उनके बारे में बेईमानी भरी बातें करता था। जब उसे कोई नहीं देख रहा होता है तो वो उनके साथ गलत व्यवहार भी करता था, यह सोचकर की इससे उसका क्या बिगड़ेगा। विशेषकर वह शारीरिक रूप से अक्षम लोगों का मजाक उड़ाता और उनका अपमान करता। यहाँ तक कि गाँव में हर कोई उस बूढ़े व्यक्ति की गलत आदतों के बारे में जानता था और इसलिए उससे दूर रहता था, लेकिन जो कोई भी पहली बार उससे मिलता वह उसके विनम्र स्वभाव का कायल हो जाता।

एक दिन, ऐसा हुआ कि गाँव की समिति ने एक वृद्ध व्यक्ति की तलाश शुरू की, जो विशेष रूप से सक्षम बच्चों के लिए स्थापित एक स्कूल का प्रबंधन कर सके। वेतन आकर्षक था और बूढ़े व्यक्ति को भरोसा था कि समिति उसके नाम की सिफारिश करेगी क्योंकि वह गाँव का सबसे विनम्र व्यक्ति है।

लेकिन बूढ़े आदमी के आश्चर्य का ठिकाना ना रहा, समिति ने उनके नाम पर विचार तो नहीं ही किया साथ ही उसके नाम को पूरी तरह से खारिज कर दिया। बूढ़े व्यक्ति ने समिति अध्यक्ष से पूछा कि वह क्यों मना किया गया है, तो अध्यक्ष ने जवाब दिया - आपको लगता है कि आप बहुत विनम्र हैं और विकलांग लोगों के लिए विचार करते हैं, लेकिन यह सिर्फ आपकी गलत धारणा है। आप दूसरों के साथ उनके बारे में अच्छी तरह से बोल रहे होंगे, लेकिन पूरे गाँव को आपके अपमान और उनके प्रति अपमानजनक कार्यों के बारे में पता है। संभवतः आपकी हरकतें आपके शब्दों से अधिक ज़ोर से बोलती हैं। बूढ़ा व्यक्ति शर्म से पानी पानी हो गया और वहां से वापस चला गया।