रक्षा बंधन पर निबंध

रक्षा बंधन एक हिन्दू त्योहार है जो कि भारत के विभिन्न हिस्सो में मानाया जाता है। इसके साथ ही यह मारीशस और नेपाल में भी मनाया जाता है। यह पर्व भाई के बहन के पवित्र रिश्ते को दर्शाता है, रक्षा बंधन का पर्व प्रचीन काल से ही मनाया जा रहा है। इस पर्व से जुड़ी हुई कई सारी पौराणिक और ऐतिहासिक  कहानियां है, जिनका अपना महत्व है। इस त्योहार की पूरे वर्ष प्रतीक्षा की जाती है तथा इसे बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है।

रक्षा बंधन पर लम्बे तथा छोटे निबंध (Long and Short Essay on Raksha Bandhan in Hindi)

यहां रक्षा बंधन से जुड़े विभिन्न लंबाई के निबंध दिए गये है, जो आपकी आपके परीक्षा और अन्य विषयों में सहायता करेंगे। इनमें से आप आवश्यकता अनुसार किसी भी रक्षा बंधन निबंध का चयन कर सकते है।

रक्षा बंधन पर निबंध - 1 (200 शब्द)

रक्षा बंधन हिन्दू धर्म के मुख्य त्योहारो में से एक है। वैसे तो यह पर्व पूरे भारत भर में मनाया जाता है, लेकिन उत्तर और पश्चिम भारत के लोगो के लिए इस पर्व का एक विशेष महत्व है।

पंडितो द्वारा देश भर में राखी बांधने के लिए एक विशेष समय की घोषणा की जाती है। यह वह समय होता है जब औरते सुदंर वस्त्र पहनकर इस त्योहार की तैयारी करती है। इस अवसर पर उनके द्वारा पारंपरिक पोशाक और इससे मिलते-जुलते जूते-चप्पल पहने जाते है। इसी तरह इस अवसर पर पुरुषो द्वारा भी भारतीय वेषभूषा के पोशाक धारण किये जाते है। इस अवसर पर पूरा वातावरण उमंग और खुशी से भर जाता है। इस पर्व की शुरुआत बहनों  द्वारा अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर किया जाता है, इसके बाद वह उनके कलाई पर राखी बाधते हुए उन्हे मिठाई खिलाती है और अपने भाई के लिए मंगलकामना करती है तथा अंत में भाइयों द्वारा अपनी बहनों  को उपहार भेंट किये जाते है और उनकी रक्षा का प्रण लिया जाता है। यह सिर्फ भाई बहनों के लिए महत्वपूर्ण दिन नही है बल्कि की पूरे परिवार के साथ घुलने-मिलने का विशेष दिन होता है।

प्रौद्योगिकी में हो रही तरक्की ने हमें हमारे प्रियजनो के पास लाने में सहयोग किया है। हमारे वह भाई-बहन जो दूर रहते है अब हमसे विडियो काल द्वारा आसानी से जुड़ सकते है। इसके अलावा वह जो रक्षा बंधन के अवसर पर एक-दूसरे से नही मिल पाते थे, वह भी काफी आसानी से फोन या लैपटाप द्वारा एक-दूसरे से बातें कर सकते है।


 

रक्षा बंधन पर निबंध - 2 (300 शब्द)

प्रस्तावना

रक्षा बंधन एक प्रमुख हिन्दू त्योहार है, जो कि बहुत उत्साह के साथ पूरे भारत में मनाया जाता है। यह त्योहार भाई-बहन के रिश्ते को और भी ज्यादे मजबूती प्रदान करने वाले पर्व के रुप में जाना जाता है। यह हर उम्र के भाई-बहनों द्वारा मनाया जाता है।

रक्षा बंधन कब मनाया जाता है?

हिन्दू पंचाग के अनुसार, रक्षा बंधन का पर्व श्रावण मास ( सावन के महीने) में आता है। यह श्रावण मास के आखिरी दिन मनाया जाता है जो कि अगस्त के महीने में आता है। सावन का पूरा महीना ही हिंदू धर्म के अनुसार काफी शुभ माना जाता है।

रक्षा बंधन कैसे मनाया जाता है?

रक्षा बंधन दिन के समय मनाया जाता है, इस पवित्र दिन को मनाने के लिए भाइयों और बहनों द्वारा सुंदर वस्त्र धारण किये जाते है। बहनों द्वारा भाइयों के माथे पर तिलक लगाया जाता है तथा उनके कलाई पर राखी बांधी जाती है और उन्हे मिठाई खिलाई जाती है। इन सब कार्यो को करते हुए बहनों द्वारा अपने भाइयों के मंगल की कामना की जाती है। इसके बाद भाइयों द्वारा अपने बहनों को उपहार प्रदान किया जाता है और हर हाल में उनके रक्षा करने का संकल्प लिया जाता है। राखी बांधने तक भाइयों और बहनों द्वारा उपवास रखा जाता है और राखी बांधने के पश्चात ही वह कुछ खाते है।

 

इन रस्मों के पश्चात परिवार द्वारा साथ मिलकर खाना खाया जाता है। इसलिए रक्षा बंधन मात्र भाई-बहन के रिश्तो का त्योहार नही है बल्कि की यह वह अवसर है जब हम परिवार के दूसरे सदस्यो के साथ भी अपना समय बिताते है और उनके साथ अपने रिश्तो को मजबूत करते है। यह त्योहार सिर्फ सगे भाई-बहनों के बीच ही नही मनाया जाता है, इसे चचेरे भाई-बहनों के बीच भी मनाया जाता है। लोग ज्यादेतर अपने पुश्तैनी मकानो में इकठ्ठा होते है, जहा सभी सगे और चचेरे भाई-बहन परिवार के साथ इस त्योहार को मानने के लिए आते है। आज के इस व्यस्तता भरे जीवन में लोगो का अपने प्रियजनो से मिलना काफी मुश्किल होते जा रहा है, पर इस तरह के त्योहार हमें वह अवसर प्रदान करते है। जब हम अपने प्रियजनो और परिवार के साथ समय व्यतीत कर सके।

निष्कर्ष

महिलाए रक्षा बंधन के त्योहार को लेकर काफी उत्साहित रहती है। यह वह समय है जब वह अपने लिए सुंदर वस्त्र और अन्य चीजे खरीदती है। वही पुरुष अपने बहनों से मिलने का प्रयास करते है, वास्तव में देखा जाये तो यह सबसे अच्छे हिन्दू त्योहारो में से एक है।


 

रक्षा बन्धन पर निबंध - 3 (400 शब्द)

प्रस्तावना

रक्षा बंधन प्रमुख हिन्दू त्योहारो में से एक है, यह भाई-बहन के रिश्तो को और भी ज्यादे मजबूत करने के लिए मनाया जाता है। इस दिन बहन द्वारा भाई के कलाई पर एक पवित्र धागा यानि राखी बांधी जाती है और उनके अच्छे स्वास्थ्य और लम्बे जीवन की कामना की जाती है। वही दूसरे तरफ भाइयों द्वारा अपनी बहनों  की हर हाल में रक्षा करने का संकल्प लिया जाता है।

भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक

वैसे तो भाई-बहन का रिश्ता बहुत खास होता है, जिस तरह से वह एक-दूसरे की चिंता करते है, उसकी कोई तुलना भी नही कि जा सकती है। एक व्यक्ति कभी भी अपने दोस्तो की उतनी परवाह नही कर सकता जितनी वह अपने भाई-बहनों  की करता है। भाई-बहन के बीच का रिश्ता अतुलनीय है, इससे कोई पर्क नही पड़ता कि वह छोटी-छोटी बातो पर एक-दूसरे से कितना भी लड़ाई-झगड़ा करे लेकिन फिर भी वह एक-दूसरे के लिए कुछ भी करने से पीछे नही हटते।

जैसे-जैसे वह बड़े होते जाते है जीवन के विभिन्न समयों पर यह रिश्ता और भी ज्यादे मजबूत होता जाता है। बड़े भाई अपने बहनों  की सुरक्षा के लिए हमेशा तैयार रहते है, इसी तरह बड़ी बहनों द्वारा भी अपने छोटे भाइयों का मार्गदर्शन किया जाता है। भाई-बहन के इसी प्रेम के कारण यह विशेष पर्व मानाया जाता है, रक्षा बंधन का त्योहार हर भाई-बहन के लिए बहुत खास होता है। यह उनका एकदूसरे के प्रति आपसी स्नेह, एकजुटता और विश्वास का प्रतीक है।

 

रक्षा बंधन - लाड़ प्यार का समय

रक्षा बंधन महिलाओ के लाड-प्यार का समय है, यह वह दिन है जब उन्हे अपने भाइयों से भी उतना ही स्नेह और प्रेम प्राप्त होता है। क्योंकि यह परिवार के एकजुट होने का समय होता है, इसलिए औरते इस अवसर पर सुंदर दिखना चाहती है, इसके लिए उनके द्वारा पारंमपरिक पहनावा सबसे ज्यादे पसंद किया जाता है। इस अवसर को देखते हुए बाजार में खूबसूरत कुर्ती, सूट और दूसरे पारंपरिक परिधान सबसे ज्यादे बिकते है। इसके लिए महिलाए एक दुकान से दूसरे दुकान पर जाती है ताकि उन्हे उनके पसंद के कपड़े मिल सके और इसके साथ ही उनके द्वारा इससे मिलते जूते और चप्पल भी खरीदे जाते है।

इस त्योहार के दिन लड़किया सजने-सवरने में काफी ज्यादे समय लेती है, इसके लिए वह अपने बालो को भी अलग तरीके से बनाती है ताकि वह दूसरो से अलग दिख सके। इसके साथ उनके भाई भी इस दिन उन्हे दूसरो दिनो की तुलना में अधिक लाड-प्यार करते है और उन्हे तोहफे प्रदान करते है।

निष्कर्ष

रक्षा बंधन के पर्व को देश के अलग-अलग स्थानो पर अलग-अलग नामो से जाना जाता है, लेकिन इस त्यौहार का सार वही रहता है अर्थात भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का उत्सव मानाना।


 

रक्षा बंधन पर निबंध - 4 (500 शब्द)

प्रस्तावना

रक्षा बंधन भारत के कई हिस्सो में मानाया जाता है, इसके साथ ही पर्व नेपाल और पाकिस्तान जैसे हमारे प़ड़ोसी देशो में भी मनाया जाता है। यह वह उत्सव है जो पारिवारिक बंधनो के एकता और मजबूती को दर्शाता है। यह एक दिन विशेष रुप से भाई-बहन के रिश्तो को समर्पित किया गया है, जो कि दुनिया के सबसे विशेष रिश्तो में से एक है। यह पर्व हमारे देश में प्रचीन समय से ही मनाया जा रहा है।

रक्षा बंधनः ऐतिहासिक वर्णन

इस पर्व के उत्पत्ति को लेकर कई सारी कहानिया प्रचलित है, जिसमें कई प्रसिद्ध व्यक्तियों का जिक्र है। इस पर्व से जुड़े इसी तरह के कई ऐतिहासिक वर्णनो के विषय में नीचे बताया गया हैः

  • अलेक्जेंडर द ग्रेट

ऐसा कहा जाता है कि जब सिकंदर (अलेक्जेंडर) ने भारत पर आक्रमण किया था, तो उसकी पत्नी उसके सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित थी। तब उसने पोरस को एक पवित्र धागा भेजा था और उनसे आग्रह किया था कि वह सिकंदर को किसी तरह का नुकसान ना पहुंचाए। इस परंपरा का पालन करते हुए पोरस ने युद्ध के दौरान सिकदंर पर किसी तरह का वार नही किया और रोक्साना (सिकंदर की पत्नी) के भेजी गई राखी का मान रखा, यह घटना सन् 326 ईसा पूर्व की है।

  • रानी कर्णावती

रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूँ की कहानी इस पवित्र रस्म की कहानी बयान करती है। ऐसा कहा जाता है कि चित्तौड़ की रानी कर्णावती, जोकि एक विधवा रानी थी, उन्होने ने सहायता के लिए सम्राट हुमायूँ को राखी भेजी थी। उन्होने यह फैसला तब किया था जब उन्हे इस बात का आभास हुआ कि वह अकेले ही बहादुर शाह से अपने साम्राज्य की सुरक्षा नही कर सकती है। हुमायूँ ने राखी का सम्मान किया और हर हाल में चित्तौड़ की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनी सेना भेजी।

रक्षा बंधन के लिए सही उपहार चुनना

इस अवसर पर बाजार विभिन्न प्रकार के उपहारो से भरे पड़े होते है। कपड़ो, जूते-चप्पलो से लेकर घरो के साज सज्जा के सामान तक की हर वस्तु इतनी विविधता भरी मात्रा में मौजूद होते है कि इनका चयन करना मुश्किल हो जाता है। खासतौर से भाई इस अवसर पर काफी परेशान रहते है कि आखिर अपने बहनों के लिए क्या तोहफे ले जो उनके चेहरो पर मुस्कान ले आये। इस त्योहार के लिए एक अच्छा तोहफा खरीदना वास्तव में ही एक बहुत कठिन फैसला होता है।

तो इसलिए ऐसा नही है कि सिर्फ औरतो द्वारा ही इस मौके पर बार-बार बाजार जाया जाता है बल्कि की पुरुषो द्वारा भी इस अवसर पर अपनी प्यारी बहनों के लिए काफी खरीददारी की जाती है।

एक और त्योहार जिसे भाई-बहन के रिश्ते के रुप में मनाया जाता है

रक्षा बंधन के तरह ही भाई दूज का त्योहार भी एक ऐसा त्योहार है जिसे भाई बहन के रीश्ते के रुप में मनाया जाता है। इस दौरान बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाती है और उनके लम्बे उम्र के लिए कामना करती है और भाइयों द्वारा हर समय अपनी बहनों की सुरक्षा का प्रण लिया जाता है। बहनों द्वारा मिठाई खिलाने के साथ ही भाइयों की ओर से उन्हे उपहार प्रदान किये जाते है। लोग इस त्योहार के जश्न में पारंपरिक पोशाको को पहनते है। यह सिर्फ भाई-बहन के प्रेम का अवसर नही है, यह वह समय है जब हम अपने परिवार के दूसरे सदस्यो के साथ भी तालमेल बढ़ाते है।

निष्कर्ष

भाइयों और बहनों के लिए रक्षा बंधन का एक विशेष महत्व है। यह त्योहार सिर्फ सामान्य लोगो द्वारा ही नही मनाया जाता है, बल्कि की इसे देवी-देवताओ द्वारा भी भाई-बहन के इस पवित्र रिश्ते को कायम रखने के लिए मनाया जाता है।


 

रक्षा बंधन पर निबंध - 5 (600 शब्द)

प्रस्तावना

रक्षा बंधन वह उत्सव है जिसे भाई-बहन के इस पवित्र रिश्ते उपलक्ष्य में मानाया जाता है, यह त्योहार सावन के शुभ महीने में आता है। इस दिन बहन द्वारा अपने भाई के कलाई पर एक पवित्र धागा बांधा जाता है और उनके अच्छे स्वास्थ्य तथा भविष्य की कामना की जाती है। वही दूसरी तरफ भाइयों द्वारा अपनी बहनों  को आशीर्वाद तथा रक्षा का वचन दिया जाता है। यह त्योहार प्राचीन काल से ही काफी धूम-धाम से मनाया जा रहा है।

रक्षा बंधन की पौराणिक कथाएं

वैसे तो रक्षा बंधन के पर्व का वर्णन कई सारी पौराणिक कथाओं में मिलता है। जिससे की यह पता चलता है कि यह प्राचीन काल से ही मनाया जा रहा है। इससे जुड़ी प्राचीन काल की कथाओ से पता चलता है कि यह त्योहार ना सिर्फ सगे भाई-बहनों बल्कि की चचेरे भाई-बहनों में भी मनाया जाता था। इस पवित्र त्योहार से जुड़ी कुछ पौराणिक कथाएं इस प्रकार से हैः

  • इंद्र देव की दंतकथा

प्राचीन हिन्दू पुस्तकों में से एक भविष्य पुराण के अनुसार जब एक बार आकाश और वर्षा के देवता इन्द्र ने दानवों के राजा बलि से युद्ध किया तो दानवराज बलि के हाथो उन्हे बुरे तरह से पराजय का सामना करना पड़ा। इन्द्र को इस अवस्था में देखकर उनकी पत्नी साची ने भगवान विष्णु से अपनी चिंता व्यक्त की तब उन्होने एक पवित्र धागा साची को दिया और उसे इन्द्र की कलाई पर बांधने के लिए कहा। जिसके बाद साची ने उस धागे को अपने पती के कलाई पर बांध दिया और उनके लम्बे जीवन तथा सफलता की कामना की इसके पश्चात इंद्र ने चमत्कारिक रुप से बलि को हरा दिया। ऐसा कहा जाता है कि रक्षा बंधन का यह पर्व इसी घटना से प्रेरित है। राखी को एक रक्षा करने वाला धागा माना जाता है, पहले के समय में यह पवित्र धागा राजाओ और योद्धाओ को उनके बहनों और पत्नियों द्वारा युद्ध में जाने के पहले उनकी रक्षा के लिए बांधा जाता था।

  • जब देवी लक्ष्मी ने राजा बलि को पवित्र धागा बांधा

ऐसा कहा जाता है कि जब दानव राज बलि ने जब भगवान विष्णु से तीन लोक जीत लिए थे, तब बलि ने नरायण को अपने साथ रहने के लिए कहा इस बात पर भगवान विष्णु तैयार हो गये, लेकिन देवी लक्ष्मी को उनका यह फैसला पसंद नही आया। इसलिए उन्होंने राजा बलि को राखी बांधने का निश्चय किया, इसके बदले में जब बालि ने उनसे कुछ मांगने को कहा तो देवी लक्ष्मी ने उपहार स्वरुप अपने पति भगवान विष्णु को बैकुंठ वापस भेजेने के लिए कहा और भला दानवराज बलि अपने बहन को ना कैसे कह सकते थे। तो हमे पता चलता है कि इस पवित्र धागे की ऐसी भी शक्तियां है, जिनका वर्णन हिंदू पुराणो में किया गया है।

  • कृष्ण और द्रौपदी का पवित्र बंधन

ऐसा कहा जाता है कि शिशुपाल का वध करते वक्त गलती से भगवान श्री कृष्ण की उंगली में चोट लग गयी थी और उससे खून निकलने लगा था। तब द्रौपदी ने दौड़कर अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर श्री कृष्ण की उंगली में बांध दिया। द्रौपदी के इस कार्य ने भगवान श्री कृष्ण के दिल को छू लिया और उन्होंने द्रौपदी को रक्षा का वचन दिया, उसके बाद से द्रौपदी हर वर्ष श्री कृष्ण को राखी रुपी पवित्र धागा बांधने लगी। जब द्रौपदी का कौरवो द्वारा चीर-हरण किया जा रहा था, तब भगवान श्री कृष्ण ने ही द्रौपदी की रक्षा की थी, जिससे दोनो के बीच भाई-बहन के एक बहुत ही विशेष रिश्ते का पता चलता है।

  • रक्षा बंधन पर रविन्द्र नाथ टैगोर के विचार

प्रसिद्ध भारतीय लेखक रविन्द्र नाथ टैगोर का मानना था, रक्षा बंधन सिर्फ भाई-बहन के बीच के रिश्ते को मजबूत करने का ही दिन नही है बल्कि इस दिन हमे अपने देशवासियो के साथ भी अपने संबध मजबूत करने चाहिये। यह प्रसिद्ध लेखक बंगाल के विभाजन की बात सुनकर टूट चुके थे, अंग्रेजी सरकार ने अपनी फूट डालो राज करो के नीती के अंतर्गत इस राज्य को बांट दिया था। हिन्दुओ और मुस्लिमों के बढ़ते टकराव के आधार पर यह बंटवारा किया गया था। यही वह समय था जब रविन्द्र नाथ टैगोर ने हिन्दुओ और मुस्लिमों को एक-दूसरे के करीब लाने के लिए रक्षा बंधन उत्सव की शुरुआत की, उन्होने दोनो ही धर्मो के लोगो से एक दूसरे को यह पवित्र धागा बांधने और उनके रक्षा करने के लिए कहा जिससे दोनो धर्मो के लोगो के बीच संबंध प्रगाढ़ हो सके।

पश्चिम बंगाल में अभी भी लोग एकता और सामंजस्य को बढ़ावा देने के लिए अपने दोस्तो और पड़ोसियो को राखी बांधते है।

निष्कर्ष

राखी का भाईयों-बहनो के लिए एक खास महत्व है। इनमें से कई सारे भाई-बहन एक-दूसरे से व्यावसायिक और व्यक्तिगत कारणो से मिल नही पाते, लेकिन इस विशेष अवसर पर वह एक-दूसरे के लिए निश्चित रुप से समय निकालकर इस पवित्र पर्व को मनाते है, जो कि इसकी महत्ता को दर्शाता है।