वैश्विकरण या ग्लोबलाइजेशन पर निबंध

वैश्विकरण या ग्लोबलाइजेशन वह प्रक्रिया है, जिसमें व्यापार, सेवाओं या तकनीकों का पूरे संसार में वृद्धि, विकास और विस्तार किया जाता है। यह विभिन्न व्यापारों या व्यवसायों का पूरे संसार के विश्व बाजार में विस्तार करना है। विश्व भर में आर्थिक अन्तर्निहिता के लिए बहुत बड़े स्तर पर अन्तर राष्ट्रीय निवेश की आवश्यकता है, जिससे बहुत बड़े बहुराष्ट्रीय कारोबार का विकास किया जा सके। इसके लिए वैश्विक बाजार में व्यवसायों के परस्पर समर्पक और आन्तरिक आत्मनिर्भरता को भी बढ़ाना होगा।

वैश्विकरण या ग्लोबलाइजेशन पर छोटे तथा बड़े निबंध (Long and Short Essay on Globalization in Hindi)

निबंध 1 (300 शब्द)

प्रस्तावना

ग्लोबलाइजेशन पूरे विश्वभर में किसी वस्तु को फैलाने से संबंधित है। हालांकि, आमतौर पर यह उत्पादों, व्यापार, तकनीकी, दर्शन, व्यवसाय, कारोबार, कम्पनी आदि का वैश्विकरण (ग्लोबलाइजेशन) करना है। यह देश-सीमा या समय-सीमा के बिना बाजार में एक सफल आन्तरिक सम्पर्क का निर्माण करता है।

वैश्विकरण या ग्लोबलाइजेशन का सबसे सामान्य और स्पष्ट उदाहरण पूरे विश्वभर में मैक-डोनल्स होटलों का विस्तार है। यह पूरे विश्व भर के बाजारों में अपनी प्रभावी रणनीति के कारण बहुत सफल हैं, क्योंकि ये प्रत्येक देश में अपने विवरण (मैन्यू) में उस देश के लोगों की पसंद के अनुसार वस्तुओं को शामिल करता है। इसे अन्तर्राष्ट्रीयकरण भी कहा जा सकता है, जो वैश्विकरण या ग्लोबलाइजेशन और स्थानीयकरण का मिश्रण है।

ग्लोबलाइजेशन

ग्लोबलाइजेशन मानवता के लिए लाभप्रद है या हानिकारक

यह सुनिश्चित करना बहुत ही कठिन है कि, वैश्विकरण या ग्लोबलाइजेशन मानवता के लिए लाभप्रद है या हानिकारक। यह आज भी बड़े असमंजस का विषय है। फिर भी, इस बात को नजरअंदाज करना बहुत ही कठिन है कि, वैश्विकरण (ग्लोबलाइजेशन) ने पूरे विश्वभर में लोगों के लिए महान अवसरों का निर्माण किया है। इसने समाज में लोगों की जीवन-शैली और स्तर में बड़े स्तर पर बदलाव किया है। यह विकासशील देशों या राष्ट्रों के लिए विकसित होने के बहुत से अवसरों को प्रदान करता है, जो ऐसे देशों के लिए बहुत आवश्यक है।

एक कम्पनी या कारोबार के लिए अपनी सफलता को आसान बनाने के लिए यह बहुत ही आवश्यक है कि, अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में उत्पादों या सेवाओं के विक्रय के वैश्विकरण को बहुत अधिक प्रभावी बनाया जाए। उत्पादन वैश्विकरण के अन्तर्गत, एक कारखाने या कम्पनी द्वारा बहुत से देशों में स्थानीय रुप से कारखाने स्थापित किए जाते हैं और उनमें कम कीमत पर उसी देश के स्थानीय लोगों से कार्य कराया जाता है, ताकि अपने घरेलू देश की तुलना में ज्यादा लाभ प्राप्त किया जा सके।

निष्कर्ष

यदि हम इसे सकारात्मक के नजरिये से देखें तो, इसने क्षेत्रीय विविधता का उन्मूलन किया है और पूरे विश्वभर में एक जानी पहचानी संस्कृति को स्थापित किया है। इसे संचार तकनीकी द्वारा सहयोग दिया जाता है और विभिन्न देशों के व्यवसायों, कम्पनियों, सरकार और लोगों के बीच में पारस्परिक वार्तालाप और सम्पर्क को दिखाता है। वैश्विकरण (ग्लोबलाइजेशन) सकारात्मक और नकारात्मक रुप से परम्परा, संस्कृति, राजनीतिक व्यवस्था, आर्थिक विकास, जीवन शैली, समृद्धि आदि को प्रभावित करता है।

 

निबंध 2 (400 शब्द)

प्रस्तावना

पिछले कुछ दशकों में, वैश्विकरण या ग्लोबलाइजेशन बहुत तेजी से हुआ है, जिसके परिणामस्वरुप, पूरे विश्वभर में आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पारस्परिकता में तकनीकी, दूर संचार, यातायात आदि के क्षेत्र में काफी तेजी से वृद्धि हुई है। यह मानव जीवन को सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ढ़ंगों से प्रभावित किया है। इसके नकारात्मक प्रभावों को समय-समय पर सुधारने की आवश्यकता है। वैश्विकरण (ग्लोबलाइजेशन) ने पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को बहुत से सकारात्मक तरीकों से प्रभावित किया है। विज्ञान और तकनीकियों की अविश्वसनीय उन्नति ने व्यवसाय या व्यापार को सभी सुरक्षित सीमाओं तक आसानी से विस्तार करने की आश्चर्यजनक अवसरों को प्रदान किया है।

ग्लोबलाइजेशन के कारण हुयी वृद्धि

वैश्विकरण (ग्लोबलाइजेशन) के कारण, कम्पनियों या कारखानों में बड़े स्तर पर आर्थिक वृद्धि हुई है। वे पहले से भी अधिक उत्पादक हो गई हैं और इस प्रकार, अधिक प्रतियोगी संसार का निर्माण कर रही है। उत्पादों, सेवाओं आदि की गुणवत्ता में प्रतियोगिता बढ़ती जा रही है।

विकसित देशों की सफल कम्पनियाँ विदेशों में अपनी कम्पनियों की शाखाओं को स्थापित कर रही हैं, जिससे उन्हें सस्ते श्रम और कम मजदूरी के माध्यम से स्थानीयकरण का लाभ मिले। इस तरह की व्यावसायिक गतिविधियाँ विकसित देशों या गरीब देशों के लोगों को रोजगार मिलता है। इस प्रकार, उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिलता है।

वैश्विकरण या ग्लोबलाइजेशन के प्रभाव

वैश्विकरण एक व्यवसाय और कारोबार को बहुत तरीके से प्रभावित करता है। वैश्विकरण या ग्लोबलाइजेशन के पूरे विश्व के बाजार पर पड़ने वाले प्रभावों को दो श्रेणियों में विभाजित किया जाता है; बाजार वैश्विकरण या उत्पादन वैश्विकरण। बाजार वैश्विकरण के अन्तर्गत, दूसरे देशों के बाजारों में अपने उत्पादों या सेवाओं को कम कीमत पर बेचा जाता है वहीं दूसरी ओर, उन उत्पादों को घरेलू बाजार में अधिक कीमत पर बेचा जाता है।

पिछले कुछ दशकों में, वैश्विकरण या ग्लोबलाइजेशन ने तकनीकी उन्नति का रुप ले लिया है, जिसके परिणामस्वरूप लोगों के लिए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर यात्रा, संचार और व्यापार आसान हो गया है। एक तरफ, जहाँ ग्लोबलाइजेशन (वैश्विकरण) ने लोगों की तकनीकी तक पहुँच को आसान बना दिया है वहीं दूसरी तरफ, इसने प्रतियोगिता में वृद्धि करके सफलता के अवसरों में कमी का कार्य भी किया है।

निष्कर्ष

ग्लोबलाइजेशन (वैश्विकरण) के सकारात्मक आयामों के साथ ही इसके नकारात्मक प्रभावों को भी भूलने योग्य नहीं है। एक देश से दूसरे देश के बीच में यातायात के साधनों द्वारा घातक बीमारियों और छूत की बीमारियों को होने का जोखिम बढ़ गया है। मानव जीवन पर वैश्विकरण (ग्लोबलाइजेशन) के बुरे प्रभावों को रोकने के लिए, सभी देशों की सरकारों का वैश्विकरण या ग्लोबलाइजेशन पर पूरा नियंत्रण होना चाहिए।


 

निबंध 3 (500 शब्द)

प्रस्तावना

वैश्विकरण या ग्लोबलाइजेशन पूरे संसार में विज्ञान, तकनीकियों, व्यवसाय आदि का यातायात, संचार और व्यापार के साधनों के माध्यम से फैलाने की प्रक्रिया है। वैश्विकरण (ग्लोबलाइजेशन) लगभग सभी देशों को बहुत से तरीकों से जैसे; सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और मनौवैज्ञानिक रुप से भी प्रभावित करता है। वैश्विकरण या ग्लोबलाइजेशन वो प्रकार है, जो व्यापार, व्यवससाय और तकनीकियों के क्षेत्र में देशों की तेज और निरंतर पारस्परिकता और अन्तर्निहिता का संकेत करता है। ग्लोबलाइजेशन (वैश्विकरण) का प्रभाव परम्परा, वातावरण, संस्कृति, सुरक्षा, जीवन-शैली और विचारों में देखा जा सकता है। ऐसे बहुत से तत्व हैं, जो वैश्विकरण (ग्लोबलाइजेशन) को पूरे विश्वभर में प्रभावित और त्वरित (बहुत तेज) करते हैं।

ग्लोबलाइजेशन ने इस पूरे विश्व में बहुत से परिवर्तन किए हैं, जहाँ लोग अपने देश से दूसरे देशों में अच्छे अवसरों की तलाश में जा रहे हैं। व्यापार या व्यवसाय के वैश्विकरण के लिए, कम्पनी या कारोबार को अपनी व्यापारिक रणनीति में बदलाव लाने की आवश्यकता होती है। उन्हें अपनी व्यापारिक रणनीति को एक देश को ध्यान में न रखते हुए इस तरह का बनाना होता है, जिससे कि वे बहुत से देशों में कार्य करने में सक्षम हों।

ग्लोबलाइजेशन में तेजी का कारण

वैश्विकरण या ग्लोबलाइजेशन में तेजी का कारण लोगों की माँग, मुक्त व्यापार गतिविधियाँ, विश्वभर में बाजारों को स्वीकृति, नई तकनीकियों का समावेश, विज्ञान के क्षेत्र में नई तकनीकियों का समावेश, विज्ञान में शोध आदि है। वैश्विकरण या ग्लोबलाइजेशन वातावरण पर बहुत से नकारात्मक प्रभाव डालता है और बहुत से पर्यावरणीय मुद्दों की उत्पत्ति करता है; जैसे- जल प्रदूषण, वनोल्मूलन, वायु प्रदूषण, मृदा प्रदूषण, जल संसाधनों का प्रदूषित होना, मौसमों का बदलना, जैव विविधता को हानि आदि। सभी बढ़ते हुए पर्यावरणीय मुद्दों को अन्तर्राष्ट्रीय प्रयासों के द्वारा तत्कालिक आधार पर सुलझाने की आवश्यकता है, अन्यथा वे भविष्य में पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व खत्म कर सकते हैं।

पर्यावरण पर प्रभाव

पर्यावरणीय हानि को रोकने के लिए, पर्यावरणीय तकनीकियों का वैश्विकरण या ग्लोबलाइजेशन और बड़े स्तर पर लोगों के बीच पर्यावरणीय जागरुकता फैलाने की आवश्यकता है। वैश्विकरण (ग्लोबलाइजेशन) के नकारात्मक प्रभावों का सामना करने के लिए, कम्पनियों या कारखानों को हरियाली को विकसित करने वाली तकनीकी को अपनाने की आवश्यकता है, जो वर्तमान पर्यावरणीय स्थिति को बदल सके। फिर भी, ग्लोबलाइजेशन (वैश्विकरण) ने पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए बहुत से साधनों में सुधार करने (पर्यारण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव कम करके, जैसे- मिश्रित (हाईब्रिड) कारों का प्रयोग जो कम तेल का उपयोग करती हैं) और शिक्षा को बढ़ावा देकर सकारात्मक रुप से बहुत अधिक मदद की है।

निष्कर्ष

एप्पल के ब्रांड ने वैश्विकरण या ग्लोबलाइजेशन के नकारात्मक प्रभावों को कम करने और सकारात्मक प्रभावों को बढ़ावा देने के लिए पर्यावरण के अनुरुप उत्पादों का निर्माण करने का लक्ष्य रखा है। हमेशा बढ़ती जनसंख्या की माँग बड़े स्तर पर वनोल्मूलन की ओर ले जा रही हैं जो सबसे बड़ा पर्यावरणीय मुद्दा है। अभी तक, लगभग आधा से भी अधिक लाभदायक जंगल या वन बीते वर्षों में काटे जा चुके हैं। इसलिए, वैश्विकरण (ग्लोबलाइजेशन) के नकारात्मक प्रभावों को नियंत्रण में लाने के लिए ग्लोबलाइजेशन (वैश्विकरण) का निर्माण करने की आवश्यकता है।

 

निबंध 4 (600 शब्द)

प्रस्तावना

वैश्विकरण (ग्लोबलाइजेशन) अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अन्तर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों के लिए व्यवसाय को बढ़ाने, तकनीकी वृद्धि, अर्थव्यवस्था में सुधार करने आदि का तरीका है। इस तरह से, निर्माणकर्ता या उत्पादक अपने उत्पादों या वस्तुओं को पूरे विश्व में बिना किसी बाधा के बेच सकते हैं। यह व्यवसायी या व्यापारी को बड़े स्तर पर लाभ प्रदान करता है, क्योंकि उन्हें ग्लोबलाइजेशन (वैश्विकरण) के माध्यम से गरीब देशों में आसानी से कम कीमत पर मजदूर मिल जाते है। यह कम्पनियों को बड़े स्तर वैश्विक बाजार में अवसर प्रदान करता है। यह किसी भी देश को भागीदारी, मिश्रित कारखानों की स्थापना, समता अंशों में निवेश, उत्पादों या किसी भी देश की सेवाओं का विक्रय आदि करने की सुविधा प्रदान करता है।

ग्लोबलाइजेशन या वैश्विकरण कैसे काम करता है

वैश्विकरण (ग्लोबलाइजेशन) पूरे विश्व के बाजार को एक बाजार मानने में मदद करता है। व्यापारी व्यवसाय के क्षेत्र को संसार को एक वैश्विक गाँव मानकर बढ़ाते हैं। 1990 के दशक से पहले, भारत में कुछ निश्चित उत्पादों का आयात करने पर रोक थी, जिनका निर्माण पहले से ही भारत में किया जाता था; जैसे- कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग वस्तुएं, खाद्य वस्तुएं आदि। यद्यपि, 1990 के दशक में धनी देशों का विश्व व्यापार संगठन, विश्व बैंक और अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष पर गरीब और विकासशील देशों में अपने व्यवसाय को फैलाने के लिए दबाव था। भारत में उदारीकरण और वैश्विकरण की शुरुआत 1991 में संघीय वित्त मंत्री (मनमोहन सिंह) द्वारा की गयी थी।

बहुत सालों के बाद, वैश्विकरण (ग्लोबलाइजेशन) के कारण भारतीय बाजार में मुख्य क्रान्ति आई, जब बहुत से बहुराष्ट्रीय ब्रांड़ों ने, जैसे – पेप्सीको, के.एफ.सी, मैक-डोनल्ड, आई.बी.एम, नोकिया आदि ने भारत में सस्ती कीमत पर विभिन्न विस्तृत गुणवत्ता के उत्पादों की बिक्री की। सभी नेतृत्वकर्ता ब्रांडों ने वैश्विकरण या ग्लोबलाइजेशन की वास्तविक क्रान्ति को प्रदर्शित किया, जिसके परिणामस्वरुप यहाँ आद्यौगिकीकरण और अर्थव्यवस्था में चौकाने वाली वृद्धि हुई। बाजार में गला काट प्रतियोगिता के कारण गुणवत्ता वाले उत्पादों की कीमत कम हो गई।

भारतीय बाजार में व्यवसायों के वैश्विकरण, ग्लोबलाइजेशन और उदारीकरण ने गुणवत्तापूर्ण विदेशी उत्पादों की बाढ़ सी आ गई हालांकि, इसने स्थानीय भारतीय बाजार को बहुत अधिक प्रभावित किया। इसके परिणामस्वरुप गरीब और अनपढ़ भारतीय कामगारों की नौकरी चली गई। ग्लोबलाइजेशन (वैश्विकरण) सभी उपभोक्ताओं के लिए बहुत अधिक लाभदायक है हालांकि, छोटे स्तर के भारतीय उत्पादकों के लिए बहुत ही हानिकारक है।

वैश्विकरण (ग्लोबलाइजेशन) के सकारात्मक प्रभाव

  • वैश्विकरण या ग्लोबलाइजेशन ने भारतीय विद्यार्थियों और शिक्षा के क्षेत्र को इंटरनेट के माध्यम से विदेशी विश्वविद्यालयों को भारतीय विश्वविद्यालयों से जोड़ा है, जिसके कारण शिक्षा के क्षेत्र में बहुत बड़ी क्रान्ति आई है।
  • वैश्विकरण या ग्लोबलाइजेशन के द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र भी प्रभावित हुआ है, इसके कारण सामान्य दवाईयाँ, स्वास्थ्य को नियमित करने वाली विद्युत मशीन आदि से उपलब्ध हो जाती है।
  • ग्लोबलाइजेशन या वैश्विकरण ने कृषि क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के बीजों की किस्मों को लाकर उत्पादन को बड़े स्तर पर प्रभावित किया। यद्यपि, यह महँगे बीजों और कृषि तकनीकियों के कारण गरीब भारतीय किसानों के लिए अच्छा नहीं है।
  • यह रोजगार क्षेत्र में भी व्यापार, जैसे; लघु उद्योग, हाथ के कारखाने, कॉरपेट, ज्वैलरी और काँच के व्यवसाय आदि को बढ़ाने के माध्यम से, बड़े स्तर पर क्रान्ति लाया है।

निष्कर्ष

वैश्विकरण (ग्लोबलाइजेशन) वहन करने योग्य कीमत पर गुणवत्ता पूर्ण विभिन्न उत्पादों लाने और विकसित देशों के साथ ही बड़ी जनसंख्या को रोजगार प्रदान किया है। यद्यपि, इसने प्रतियोगिता, अपराध, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों, आतंकवाद आदि को बढ़ाया है। इसलिए, यह खुशियों के साथ कुछ दुखों को भी लाता है।

 

 

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