अभ्यास व्यक्ति को पूर्ण बनाता है पर निबंध

अभ्यास एक व्यक्ति के लिए किसी भी चीज को संभव बना सकता है। एक व्यक्ति नियमित अभ्यास द्वारा किसी भी क्षेत्र में निपुण बन सकता है। आजकल विद्यालयों में इस विषय पर छात्रों को काफी सारे निबंध लिखने के लिए दिये जाते है। इस विषय के इसी महत्व को देखते हुए हम यहाँ, “अभ्यास एक व्यक्ति को पूर्ण बनाता है”” पर निबंधों की कुछ श्रृंखलाएं उपलब्ध करा रहे हैं। यह निबंध छोटे तथा बड़े दोनो आकार में उपलब्ध है। “इन निबंधों में काफी सरल और साधारण शब्दों का प्रयोग करके किया हैं, यह दिये गये निबंध कई कार्यों में आपके लिए काफी सहायक सिद्ध होंगे।

अभ्यास एक व्यक्ति को पूर्ण बनाता है पर बड़े तथा छोटे निबंध (Long and Short Essay on Practice Make a Man Perfect in Hindi)

You can get below some essays on Practice makes a Man Perfect in Hindi language for students in 100, 200, 300, 400, 500 and 700 words.

निबंध लेखन किसी भी विषय के बारे में छात्रों के दृष्टिकोण, नए विचार और सकारात्मक सुझावों को जानने का सबसे अच्छा तरीका है। हम यहाँ, “अभ्यास एक व्यक्ति को पूर्ण बनाता है” पर निबंधों की कुछ श्रृंखला उपलब्ध करा रहे हैं, जो छोटे निबंध, बड़े निबंध आदि के रुप में वर्गीकृत किए गए हैं। “अभ्यास एक व्यक्ति को पूर्ण बनाता है”, विषय पर लिखे गए सभी निबंध सरल और साधारण शब्दों का प्रयोग करके आसान वाक्यों के रुप में लिखे गए हैं; जिनमें से आप कोई भी अपनी जरुरत और आवश्यकता के अनुसार चुन सकते हैं।

अपने इन निबंधों के माध्यम से हमने अभ्यास एक व्यक्ति को पूर्ण कैसे बनाता है? अभ्यास क्यों आवश्यक है? अभ्यास सफलता कैसे प्रदान करता है? अभ्यास का जीवन में क्या महत्व है? आदि जैसे विषयों पर प्रकाश डालने का प्रयास किया है।

“अभ्यास एक व्यक्ति को पूर्ण बनाता है” पर निबंध 1 (100 शब्द)

नियमित आधार पर किसी भी चीज का अभ्यास करना, एक व्यक्ति की बौद्धिकता और सौंदर्य क्षमताओं को इंगित करता है। अभ्यास एक व्यक्ति को पूर्ण करता है, क्योंकि यह पूर्णता लाता है, जो एक व्यक्ति को विशेष विषय या क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने की ओर ले जाता है। कार्यों को उचित योजना और अभ्यास के अनुसार करना एक व्यक्ति का पूर्ण प्रदर्शन की ओर नेतृत्व करता है। अभ्यास किसी भी कार्य को करने में गुणवत्ता लाने के साथ ही एक व्यक्ति को अन्य गुणों के लिए भी तैयार करता है। हमें विशेष रुप से विद्यार्थियों को, हमारे दैनिक जीवन में अभ्यास के महत्व को अवश्य जानना चाहिए।

अभ्यास का अर्थ होता है दोहराना और तब तक दोहराना जब तक कि आप अपनी त्रुटियों को दूर न कर ले और उस प्रक्रिया में सफल न हो जायें, अभ्यास कमियों को नजरंदाज करके कार्य को पूर्णता के साथ पूरा करने में मदद करता है। अभ्यास बहुत ही महत्वपूर्ण वस्तु है, जिसे हमें अपने जीवन में अवश्य अपनाना चाहिए। यदि इसे अभिभावकों और शिक्षकों की मदद से बचपन में ही विकसित किया जाए, तो यह और भी अच्छा होता है।

अभ्यास एक व्यक्ति को पूर्ण बनाता है

अभ्यास एक व्यक्ति को पूर्ण करता है पर निबंध 2 (200 शब्द)

प्रस्तावना

अभ्यास एक व्यक्ति को पूर्ण करता है, यह कहावत हमें किसी भी विषय में कुछ भी सीखने के नियमित अभ्यास के महत्व को बताती है। कठिन परिश्रम और सफलता का कोई भी विकल्प नहीं है। हमें विशेष क्षेत्र, जिसमें हम सफल होना चाहते हैं, में नियमित आधार पर अभ्यास करना चाहिए। किसी भी क्षेत्र में जैसे व्यापार, कला, खेल, शैक्षणिक गतिविधियाँ आदि में महारत हासिल करने का कोई भी छोटा रास्ता नहीं है।

अभ्यास क्यों आवश्यक है?

केवल नियमित अभ्यास ही हमें किसी भी क्षेत्र में पूर्णता के साथ सफलता प्राप्त करने में सक्षम बनाता है। ज्ञान बहुत ही बड़ी वस्तु है, लेकिन अकेले यह हमें हमारे लक्ष्य तक नहीं ले जा सकती है, हमें अपने ज्ञान को कार्य रुप में बदलने की आवश्यकता है, जिसके लिए नियमित अभ्यास जरूरी है। बुद्धिहीन व्यक्ति को बुद्धिमान बनने के लिए निरंतर ‘अभ्यास’ करते रहना चाहिए। अभ्यास का किसी भी मनुष्य के जीवन में बहुत महत्व होता है। अभ्यास करने से विद्या प्राप्त होती है और अभ्यास ना करने से विद्या समाप्त हो जाती है। इसलिए किसी भी चीज का नियमित रुप से अभ्यास करना हमारे लिए काफी आवश्यक है।

निष्कर्ष

अभ्यास ही इकलौता तरीका है, जिसके माध्यम से हम किसी भी क्षेत्र में महारत प्राप्त कर सकते है, क्योंकि यह कार्यों में निपुणता लाता है। कुछ विषयों का उदाहरण लेते हैं; जैसे- भौतिक विज्ञान और गणित, जो पूरी तरह से अभ्यास पर आधारित है, क्योंकि हम बिना अभ्यास के सभी नियमों को भूल जाते हैं। यदि हमें कुछ भी सीखने; जैसे-संगीत, नृत्य, अंग्रेजी बोलना, खेल, कम्प्यूटर, पेंटिंग करना आदि में पूर्णता को लाना है, तो इसके लिए हमें नियमित अभ्यास की आवश्यकता है।

 

“अभ्यास एक व्यक्ति को पूर्ण बनाता है” पर निबंध 3 (300 शब्द)

प्रस्तावना

अभ्यास एक व्यक्ति को पूर्ण बनाता है”, इस कहावत का अर्थ है कि  किसी भी विशेष क्षेत्र या विषय में सफल होने के लिए एक व्यक्ति को पूरी प्रतिबद्धता और रणनीति की योजना के साथ नियमित अभ्यास की आवश्यकता होती है। सफलता प्राप्त करना कोई आसान कार्य नहीं है। इसके लिए ज्ञान, कौशल, और सबसे अधिक महत्वपूर्ण नियमित अभ्यास की आवश्यकता होती है। यदि आप की इच्छा विश्व प्रसिद्ध संगीतज्ञ बनने की है, तो इसके लिए आपको संगीत के उपकरण, अच्छे शिक्षक की व्यवस्था, और इसे सीखने के लिए आवश्यक घंटों तक नियमित रुप से अभ्यास करना होगा। तभी जाकर आप संगीत क्षेत्र में महारथ हांसिल कर पायेंगे।

विद्यार्थी के लिए अभ्यास

आपको जो कार्य आप कर रहे हैं, उसमें पूर्णता लाने के लिए बहुत छोटी-छोटी गलतियों का ध्यान रखने के साथ ही अपने मार्गदर्शक की आज्ञा का सम्मान के साथ पालन करना पड़ता है। यदि हम सफल लोगों की सूची देखते हैं, तो हम देखते हैं कि वे अपने कार्य के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्धता के साथ नियमित अभ्यास को शामिल करते थे। वे विद्यार्थी जो बोर्ड की परीक्षा में अच्छे अंक या पद प्राप्त करते हैं। वे पूरे वर्ष योजनाबद्ध तरीके से और खुली आँखों के माध्यम से पढ़ाई करते हैं। वे अपने पाठ्यक्रम को दोहराते हैं और पुनः दोहराते हैं और खुद को प्रत्येक विषय में बहुत अच्छा बना लेते हैं। नियमित अभ्यास का कोई भी विकल्प नहीं है, जो किसी को भी पूर्ण बना सके। बिना अभ्यास के आप केवल औसत प्रदर्शन कर सकते हैं, परन्तु किसी भी कार्य में पूर्ण प्रदर्शन नहीं दे सकते हैं।

अभ्यास एक ऐसा गुण है जो उपलब्धियों एवं सफलताओं का रास्ता प्रशस्त करता है। पुराने समय में बहुत से ऋषि मुनियों ने कठिन परिश्रम करके अनेक सिद्धियाँ प्राप्त किया करते थे। बहुत से राक्षसों ने और बहुत से राजाओं ने अपने कठिन परिश्रम के बल पर भगवानों से अनेक प्रकार के वरदान भी प्राप्त किये थे।

निष्कर्ष

ऐसी कोई भी शक्ति नहीं है, जो एक ही रात में आपको किसी भी विषय में महारथी बना दे। इसके लिए आपको निरंतर अभ्यास करना होगा क्योंकि आप अभ्यास बिना अपने लक्ष्य तक नहीं पहुँच सकते हैं। आपको क्रिकेट सीखने के लिए क्रिकेट के मैदान में उच्च कौशल वाले अच्छे कोच के मार्गदर्शन में प्रतिदिन कई घंटों तक क्रिकेट का अभ्यास करना पड़ता है।

 

“अभ्यास एक व्यक्ति को पूर्ण बनाता है” पर निबंध 4 (400 शब्द)

प्रस्तावना

अभ्यास द्वारा ही कोई व्यक्ति किसी भी कार्य में निपुणता हांसिल कर सकता है  कोई भी ऐसा कार्य जो हम कर रहे हैं; चाहे वह खेल हो या शैक्षणिक, उसमें नियमित अभ्यास द्वारा ही हम निपुण बन सकते हैं। नियमित अभ्यास हमारी सभी गलतियों और दोषों को ठीक करके हमें सफलता की ओर ले जाता है। प्रत्येक और सभी लक्ष्य, चाहे वे खेल में हो या शिक्षा में उनमें सफलता प्राप्ति के लिए हमें अभ्यास की आवश्यकता होती है।

एक निर्णय निर्माता जो सफलता प्राप्त करना चाहता है। उसे योजना के अनुसार आवश्यक घंटों के लिए नियमित अभ्यास करना होता है। उसे अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ नियमित कठिन परिश्रम में विश्वास करना चाहिए। नियमित अभ्यास के साथ कार्य के लिए लगन हमें लक्ष्य की प्राप्ति कराती है।

आत्म-विकास का साधन

एक टीम का नेतृत्व करने के लिए अधिक से अधिक कठिन अभ्यास की आवश्यकता होती है, जो टीम को संभालने और उसका नेतृत्व करने के लिए अनुभव देता है। एक टीम का नेतृत्वकर्त्ता होने के नाते, किसी को भी इस विषय को, पढ़ने, लिखने, या खेलने, नवीनता लाने के लिए नए विचारों का प्रयोग करने के कौशल के बारे में अच्छा जानकार होने की आवश्यकता है और उसे अपने टीम के सदस्यों के कौशल और ज्ञान के बारे में जानकर उसे टीम के लिए प्रयोग करना चाहिए। और सबसे अधिक महत्वपूर्ण, इन सभी चीजों को करने के लिए, टीम के नेता को प्रतिदिन कई घंटों तक कठिन परिश्रम करने की आवश्यकता होती है, और इसके बाद वह अच्छा और सफल टीम का नेता बन सकेगा।

यह कहावत कई तरीकों से हमारे दैनिक जीवन की गतिविधियों में सही उतरती है। कुछ समय बुरी परिस्थितियाँ बहुत से लोगों को कुछ प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम करना सिखा देती है हालांकि, कुछ लोग बचपन से ही अपने माता-पिता के कारण लक्ष्य पर आधारित होते हैं। वे लोग जो भविष्य में अच्छा कैरियर चाहते है, वे स्वयं को सभी आवश्यक वस्तुओं के अभ्यास की ओर ले जाते हैं। कुछ लोग लगन की कमी के कारण अभ्यास करने में विफल हो जाते हैं।

निष्कर्ष

अभ्यास ही इकलौता तरीका है, जिसके माध्यम से हम किसी भी क्षेत्र में महारत प्राप्त कर सकते है, क्योंकि यह कार्यों में पूर्णता लाता है। कुछ विषयों का उदाहरण लेते हैं; जैसे- भौतिक विज्ञान और गणित, जो पूरी तरह से अभ्यास पर आधारित है, क्योंकि हम बिना अभ्यास के सभी नियमों को भूल जाते हैं। यदि हमें कुछ भी सीखने; जैसे-संगीत, नृत्य, अंग्रेजी बोलना, खेल, कम्प्यूटर, पेंटिंग करना आदि में पूर्णता को लाना है, तो इसके लिए हमें नियमित अभ्यास की आवश्यकता है।


 

“अभ्यास एक व्यक्ति को पूर्ण बनाता है” पर निबंध 5 (500 शब्द)

प्रस्तावना

अभ्यास का हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण योगदान है, यह वह वस्तु है जो हमें सफलता के ओर अग्रसित करती है। अभ्यास के साथ बुद्धिमत्ता और सौंदर्य की शक्तियों का प्रयोग करके संभावित दोषों को सही करके एक व्यक्ति को पूर्णता की ओर ले जाता है। अभ्यास प्रदर्शन में पूर्णता और उत्कृष्टता लाता है। पर्याप्त योजना के साथ किया गया अभ्यास एक व्यक्ति को पूर्णता के साथ प्रदर्शन का बढ़ावा देता है। लक्ष्य तक पहुँचने के लिए अच्छे मार्गदर्शक या प्रशिक्षण के मार्गदर्शन में सही दिशा में अभ्यास करना बहुत ही आवश्यक है। अभ्यास का अर्थ है, सही दिशा में गतिविधियों को दोहराना है, जो योग्यता को आकार प्रदान करता है।

अभ्यास का महत्व

पूर्णता प्राप्त करने के लिए अभ्यास सबसे अच्छा तरीका है, क्योंकि जितना अधिक व्यक्ति अभ्यास करता है, वह उतना ही अधिक दोषरहित और आत्मविश्वासी बनता है। अभ्यास के माध्यम से हम पहले की गई गलती को दुबारा नहीं करते और नई चीजों को सीखते हैं। कोई भी अभ्यास की आदत को किसी भी आयु में विकसित कर सकता है, हालांकि: इसे अन्य गतिविधियों, जैसे- घूमना, बात करना, लिखना, पढ़ना, खाना, खेलना, खाना बनाना आदि का बचपन से ही अभ्यास करके विकसित करना अच्छा होता है।

एक स्कूल जाने वाला बच्चा पत्र लिखने का अभ्यास करने से पहले शब्द, वाक्य और अन्त में पैराग्राफ और बड़े लेख लिखने का अभ्यास करता है: जो उन्हें पूर्णता की ओर ले जाता है, चाहे वह लिखना हो, पढ़ना हो या बोलना हो। इस तरह से, एक बच्चा नियमित अभ्यास से एक योग्य और कुशल प्रतिभा को विकसित कर लेता है।

सफलता की कुंजी

जो मनुष्य अपने अंदर से आलस्य को त्याग देता है और परिश्रम करता है तो उसके उन्नति के मार्ग में कोई भी बाधा नहीं आती है। जो मनुष्य परिश्रम से दूर भागता है उसे कभी भी सफलता प्राप्त नहीं होती है। अगर किसी को किसी भी क्षेत्र में सफलता चाहिए तो उसे लगातार अभ्यास करने की जरूरत पडती है। अभ्यास को ही सफलता की चाभी कहते है जी हाँ अगर कोई व्यक्ति या विद्यार्थी जितना ही अभ्यास करेगा उसका उतना ही मीठा फल मिलेगा और वो व्यक्ति अपने जीवन के लक्ष्य तक पहुँच पायेगा। किसी भी काम में सफल होने के लिए अभ्यास और परिश्रम भी करना जरूरी भी होता है।

निष्कर्ष

प्रत्येक गतिविधि (जैसे-अच्छी आदतें, स्वच्छता, समय निष्ठता, अनुशासन, नैतिकता, पढ़ना, लिखना, बोलना, खाना बनाना, नृत्य करना, गाना गाना, आदि) में गुणवत्ता और पूर्णता लाने के लिए अभ्यास की आवश्यकता होती है। कठिन परिश्रम, धैर्य, विश्वास, दृढ़ इच्छा शक्ति, सहनशीलता, सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास, लगन और समर्पण के लिए अभ्यास की आवश्यकता होती है। अभ्यास एक व्यक्ति को अन्य गुणों को रखने के लिए तैयार करता है। एक व्यक्ति को उस समय तक अभ्यास करना नहीं रोकना चाहिए, जब तक कि वह पूर्णता प्राप्त न कर ले।


 

“अभ्यास एक व्यक्ति को पूर्ण बनाता है” पर निबंध 6 (700 शब्द)

प्रस्तावना

यदि हम अपने दैनिक दिनचर्या पर थोड़ा सा ध्यान दे तो अभ्यास के द्वारा हम अपने जीवन में काफी बदलाव ला सकते हैं। मनुष्य के साथ ही अन्य जीवित प्राणियों को अपनी आजीविका को प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम करना पड़ता है। मनुष्य को किसी भी वस्तु को पूर्णता के साथ सीखने के लिए नियमित अभ्यास करना पड़ता है। मनुष्य को स्वयं के लिए लक्ष्यों को निर्धारित करने पड़ते हैं और उसके बाद सफल जीवन के लिए उसी के अनुसार अभ्यास करना पड़ता है।

नियमित अभ्यास करने के लिए, किसी को भी बहुत अधिक धैर्य, लगन, और दृढ़ इच्छा शक्ति की आवश्यकता होती है। अभ्यास लोगों के गुणों को बेहतर गुणों में बदल सकता है। कुछ निश्चित गतिविधियों का अभ्यास करने के लिए, मनुष्य को अपना मस्तिष्क, आत्मा, और शरीर को एक स्थान पर सुचारु रुप से अधिक सहजता और सन्तुष्टि के साथ निश्चित आवश्यक उपलब्धियों की प्राप्ति के लिए एकाग्रता की आवश्यकता है।

अभ्यास से सफलता की ओर

बिना दृढ़ निश्चय के, कोई भी सफलता के साथ अभ्यास में संलग्न नहीं हो सकता है. आशाहीन व्यक्ति कभी भी अभ्यास नहीं करते हैं, क्योंकि वे पर्याप्त परिणाम की प्राप्ति से पहले ही आसानी से अपना अभ्यास छोड़ देते हैं। अभ्यास को नियमित रखने के लिए, एक व्यक्ति को सकारात्मक सोच के साथ आशा, विश्वास और आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है। यदि हम इतिहास पर दृष्टि डालें, तो हम देखते हैं कि, एकलव्य को गुरु द्रोणाचार्य ने धनुर्विद्या सिखाने से मना कर दिया था हालांकि, उसके दृढ़ निश्चय ने उसकी मदद की और वह अपने गुरु की मूर्ति के सामने किए गए कुछ वर्षों के नियमित अभ्यास से तीरंदाजी बहुत अच्छे से सीख गया था।

अभ्यास क्यों आवश्यक है?

अभ्यास हमारे लिए व्यायाम और मंत्र की तरह है, जो शारीरिक और मानसिक संस्थाओं को आवश्यक आवृत्ति के साथ एक रास्ते पर लाती है और धीरे-धीरे लेकिन निश्चितता के साथ हमें पूर्णता की ओर ले जाती है। विश्वास के साथ नियमित अभ्यास एक एकजुट ताकत का निर्माण करता है, जो शारीरिक और मानसिक संस्थाओं को आवश्यक आवृत्ति के साथ कार्य करने के लिए एक-दूसरे से जोड़ता है। यदि योजनाबद्ध तरीके से अभ्यास किया जाए, तो कोई भी अपना लक्ष्य धीरे-धीरे से लेकिन निश्चय ही प्राप्त कर सकता है।

महत्वाकांक्षी लोग अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए कठिन परिश्रम करते हैं, परन्तु कभी भी हारने के बारे में नहीं सोचते हैं। अभ्यास एक ऐसा साधन है, जिसका उपयोग हम स्वंय को बेहतर करने के लिए कर सकते है तथा इसके साथ ही इसके द्वारा हम अपनी प्रतिभाओं और क्षमताओं को भी निखार सकते हैं। अभ्यास हमारा सबसे अच्छा दोस्त होता है, जो हमें सफलता की ओर ले जाता है और सदैव ज्ञान को हमारे साथ रहने देता है।

अभ्यास एक वरदान

"अभ्यास परिपूर्ण बनाता है " निश्चित रूप से एक आम प्रयोग में लाये जाने वाला वाक्यांश है। साधारणतया यह दर्शाता है कि कैसे हम उस कौशल को प्राप्त कर पायें जो हमारे पास नहीं है। अभ्यास को केवल एक व्यक्तिगत ही नहीं बल्कि एक सामूहिक वरदान के रूप में भगवान द्वारा दिया गया है। विद्यार्थी जीवन से ही मनुष्य करना आरंभ करता है। जब विद्यार्थी एक बार परीक्षा में असफल हो जाता है तो बार-बार अभ्यास करके वह परीक्षा में विजय प्राप्त करता है। जब अभ्यास की बात आती है तो सबके जबान पर एक सूत्र सामने आ ही जाती है कि-

“करत-करत अभ्यास के जणमति होत सुजान,

रसरि आवत जात ही सर पर पड़त निशान।”

निष्कर्ष

अभ्यास हममें आत्मविश्वास के स्तर को बढ़ाने का कार्य करता है। यह हमारे मस्तिष्क को शान्त करता है और खुशी प्रदान करता है, क्योंकि किसी भी वस्तु का अभ्यास ध्यान की तरह होता है। हम किसी भी वस्तु को प्राप्त कर सकते हैं और अभ्यास के माध्यम से दुर्गम ऊँचाइयों तक पहुँच सकते हैं। यह हमें सही दिशा में जाने और चुनौतियों का सामना करके जीतने की क्षमता प्रदान करने के लिए तैयार करता है। अभ्यास एक नियमित गतिविधि है, जो दृढ़ इच्छा शक्ति को बढ़ाने का भी कार्य करता है।

 

 

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