समय और ज्वार किसी का भी इन्तजार नहीं करते - अर्थ, उदाहरण, उत्पत्ति, विस्तार, महत्त्व और लघु कथाएं

अर्थ (Meaning)

'समय और ज्वार किसी का भी इन्तजार नहीं करते' यह एक काफी पुरानी कहावत है जिसका मतलब है कि समय और ज्वार दोनों ही हमारे नियंत्रण से बाहर हैं, यानी कि वो किसी भी तरह से ना तो रोके जा सकते है ना ही भटकाए जा सकते; इसलिए, हर एक को अपने कार्य का निर्वहन इस तथ्य को मान कर करना चाहिए कि बीत गया वक़्त, फिर कभी वापिस लौट कर नहीं आता।

यह कहावत हमें समय की सही कीमत बताती है और यह भी सन्देश देती है कि समय सबसे मूल्यवान संपत्ति है। ये हमें इस बात के लिए चेतवानी भी देती है कि हमें समय को नष्ट नहीं करना चाहिए और हर तरह की घटना के लिए भी तैयार रहना चाहिए।

उदाहरण (Example)

किसी भी कहावत का सही मतलब समझने के लिए उदाहरण सबसे बेहतर तरीका होता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए मैं इस कहावत 'समय और ज्वार किसी का भी इन्तजार नहीं करते' पर आधारित कुछ ताजा उदाहरण आपके लिए लेकर आया हूँ जो इस कहावत को बेहतर तरह से समझने में आपकी मदद करेगा।

"घड़ी का हर एक सेकंड आगे बढ़ते जा रहा और बीता हुआ एक भी सेकंड फिर कभी वापिस नही आता, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की आप क्या करते हैं या इसके लिए कितने हताश है - क्योंकि समय और ज्वार किसी का भी इन्तजार नहीं करते।"

"जब गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए मछुआरे जाते हैं, तो वे शायद जानते हैं कि उन्हें एक निश्चित समय के भीतर अपने सभी काम कर लेने हैं; साथ ही उन्हें उच्च ज्वार के आने से पहले तट पर वापस जाने की आवश्यकता भी होती है, क्योंकि, समय और ज्वार उनके काम पूरा होने का इन्तजार नहीं करते।"

"अगर आप नियमित रूप से नहीं पढ़ते हैं, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आपने परीक्षा से ठीक पहले कितनी लगन और कड़ी मेहनत से पढ़ाई की है, आपके लिए अच्छे नंबर लाना मुश्किल हो जाएगा। टीचर ने यह कहते हुए एक लाइन और भी जोड़ दी कि समय और ज्वार किसी का भी इन्तजार नहीं करते।"

"अगर हम बेकार पड़े हुए हैं और लगातार अपने कार्य को टालते जा रहे हैं, तब हम अपने लक्ष्य को समय से कभी नहीं पा पाएंगे क्योंकि समय और ज्वार किसी का भी इन्तजार नहीं करते।"

"एक सेकंड की कीमत उससे पूछना चाहिए जिसने जीवन को बदल देने वाले मौके को मात्र कुछ सेकंडों की देरी की वजह से खो दिया - सच कहा गया है समय और ज्वार किसी का भी इन्तजार नहीं करते।"

उत्पत्ति (Origin)

इस वाक्यांश 'समय और ज्वार किसी का भी इन्तजार नहीं करते' की कोई सटीक उत्पत्ति नहीं मिलती, लेकिन यह एक प्राचीन अंग्रेजी कहावत है, जिसका उद्गम आधुनिक अंग्रेजी से बहुत पहले हुआ है। इस कहावत का श्रेय सेंट मारहर को जाता है: "एंड टे टाइड एंड टे टाइम पैट टू इबोरेन वेर, स्चाल बोन इब्लेस्केट" (And te tide and te time pat tu iboren were, schal beon iblescet)" जिसका आधुनिक अंग्रेजी में अनुवाद किया गया है, "ज्वार किसी भी आदमी के लिए नहीं रुकता है, न ही आदमी के लिए ठहरता है, न ही ज्वार का और न ही किसी आदमी का।" (द टाइड एबिडेस फॉर, टेरीइएथ फॉर नो मैन, स्टेस नो मैन, टाइड नार टाइम टेरीइएथ नो मैन - the tide abides for, tarrieth for no man, stays no man, tide nor time tarrieth no man).

संभवतः इस वाक्यांश से है कि यह कहावत 'समय और ज्वार किसी का भी इन्तजार नहीं करते' समय के साथ विकसित हुआ है। तब से यह वाक्यांश सार्वजनिक रूप से मछुवारों और आम जनता के बीच सामान्य उपयोग में लोकप्रिय हो गया।

कहावत का विस्तार (Expansion of the Proverb)

यह कहावत 'समय और ज्वार किसी का भी इन्तजार नहीं करते' समय के साथ-साथ आपके ताकत के महत्त्व के बारे में बताती है। समय किसी भी अन्य चीज से ज्यादा महत्वपूर्ण है, और किसी भी तरह से आप ना तो उसे रोक सकते हैं ना ही धीमा कर सकते हैं। समय अपने निश्चित गति से बढ़ते जाता है और ये अटल है।

यह कहावत हमें समय बर्बाद नहीं करने की सलाह देती है, साथ ही कहती है कि इसका पूरा उपयोग करें। अगर हम समय बर्बाद करते हैं तो इसे दुबारा से हासिल करने का कोई अन्य तरीका नहीं है। यह लगभग सभी के लिए सच है। मान लीजिए, जिस छात्र को परीक्षा की तैयारी करनी है, वह केवल समय को व्यतीत कर रहा है और अध्ययन नहीं कर रहा है। फिर एक ऐसा समय आएगा जब उसे महसूस होगा कि उसे वह समय बर्बाद नहीं करना चाहिए था।

इस कहावत में ‘ज्वार’ का संदर्भ यह दर्शाता है कि प्राकृतिक आपदाएं भी सबसे शक्तिशाली होती हैं और मनुष्य उनके सामने असहाय हैं। आपको इस तरह के हालत के लिए तैयार रहना होगा, इस बात का ध्यान रखते हुए कि वे आपका काम पूरा होने का इंतजार नहीं करेंगे। बल्कि, आपको इसे समय पर पूरा करना होगा।

महत्त्व (Importance)

यह कहावत 'समय और ज्वार किसी का भी इन्तजार नहीं करते' जीवन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण सबक है। यह हमें अपने सपनों के अनुसरण में हमेशा तैयार रहने और एक सेकंड का भी समय बर्बाद न करना सिखाता है। कहावत का सही नैतिक अर्थ है समय बर्बाद नहीं करना और हमेशा समय का पाबंद होना चाहिए। छात्रों, पेशेवरों, व्यापारियों और अन्य लोगों के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है कि वे समय का सम्मान करें और किसी भी प्रतिकूल परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहें।

जब हम समय को महत्व देते हैं और हर बाधा के लिए तैयार रहते हैं, केवल तभी हम सफलता प्राप्त कर पाएंगे। यदि हम समय बर्बाद करते हैं, तो हम अपने रास्ते में आने वाली प्रतिकूलताओं का सामना करने के लिए तैयार नहीं होंगे और अंत में विफलता के रूप में समाप्त हो जाएंगे।

'समय और ज्वार किसी का भी इन्तजार नहीं करते' पर लघु कथाएं (Short Stories on ‘Time and Tide Wait for None’)

किसी कहावत के नैतिक गुण को समझने के लिए कहानी एक बेहतर माध्यम होती है। आज मैं आपके लिए कुछ कहानियां लेकर आया हूँ ताकि आप 'समय और ज्वार किसी का भी इन्तजार नहीं करते' कहावत का बेहतर मतलब समझ सकें।

लघु कथा 1 (Short Story 1)

एक बार गाँव में एक गरीब किसान रहता था। उसका पूरा परिवार उसके द्वारा खेतों में पूरे वर्ष भर उगाये गए उत्पादों पर ही निर्भर था। जैसा कि वो हर साल करता था, इस वर्ष भी किसान ने फ़सल बो दी थी। जब फसलों की कटाई का वक़्त आया तो किसान को शहर जाकर कुछ मजदूरों को लाने की जरूरत थी। मगर वह इसे टालता गया, यह सोचकर कि अभी तो समय है, जबकि अन्य सभी किसानों ने पहले से ही अपने खेतों में फसलों की कटाई कर ली।

यहाँ तक कि उसकी पत्नी के भी कई बार कहने के बावजूद किसान शहर जाने और मजदूरों को लाने नहीं जा रहा था। वह बस इसे टालते जा रहा था, यह सोचकर कि कुछ दिनों के विलंब से कुछ नहीं हो जायेगा। हालांकि, एक दिन उसने फैसला किया कि वह अगले दिन शहर जाने वाला है। कुछ ऐसा हुआ, कि उसी रात, गाँव में एक बहुत तेज़ तूफान आया। हवाएँ इतनी तेज थीं कि बड़े-बड़े पेड़ भी उखड़ गए।

उस बेचारे किसान की सारी फसल उस तूफ़ान में ख़राब हो गयी। वह अपार दुःख और गहरे अफ़सोस से भर गया। इस बात का अफ़सोस करता रहा कि समय को महत्त्व नहीं दिया और फसलों की कटाई में भी काफी विलम्ब कर दिया। जो उनसे किया इस तरह की परिस्थिति का आज तक उसने कभी सामना नहीं किया था। फिर भी, अब अफ़सोस करना व्यर्थ था, क्योंकि 'समय और ज्वार किसी का भी इन्तजार नहीं करते'।

लघु कथा 2 (Short Story 2)

एक बार एक संपन्न राज्य में राजा रहता था। वह हमेशा अपने मंत्रियों से घिरा रहता था जो उसे रिझाने की कोशिश में लगे रहते थे। राजा के दरबारी उसे खुश करने के लिए हर संभव प्रयास करने में लगे रहते थे। वे अक्सर ही कहते थे कि राजा के आदेश पर पूरी दुनिया चलती है और कोई भी ऐसा नही है जिसमे उनके हुक्म को ना मानने की हिम्मत है। राजा भी तक़रीबन जानता था कि उसके दरबारी सिर्फ उसे रिझाने में लगे रहते हैं और उसने उन्हें एक सबक सिखाने की ठानी। एक दिन राजा ने अपने सभी दरबारियों को समुद्री यात्रा पर साथ चलने को कहा।

उनमे से एक दरबारी ने सवाल उठाया कि आज पूर्ण चन्द्रमा है और सूरज के ढलते ही समुद्र में ज्वार उठने की संभावना है। इस परिस्थिति में समुद्र में जाना सुरिक्षित नहीं होगा। राजा मुस्कुराया और उनसे कहा - चिंता मत करो, मैने समय को थोड़ा देर से आने को कह दिया है, इस तरह सूर्य ढलेगा ही नहीं और हम दिन की रोशनी में ही रहेंगे; और लहरों के लिए - मैं उन्हें वापिस जाने का आदेश दे दूंगा, अगर वो दिखाई भी देती हैं तो। दरबारियों को अपनी गलती का एहसास हो गया था और वो राजा से माफ़ी मांगने लगे, कहने लगे "समय और ज्वार किसी का भी इन्तजार नहीं करते।"