मोटापे पर भाषण/स्पीच

मोटापा एक गंभीर स्वास्थ्य स्थिति है और इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। मोटापे की समस्या को दूर करने के लिए लोगों की जागरूकता बढ़ाने और उनकी मदद हेतु कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। असल में, स्वास्थ्य सलाहकार मोटापा पर भाषण देते हैं और लोगों को सलाह भी देते हैं कि उन्हें क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए। यदि आप ऐसी ही स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं या इस विषय पर आपको किसी प्रकार की जागरूकता की आवश्यकता है तो मोटापे पर हमारे छोटे और लंबे भाषण आपकी व्यापक स्तर पर सहायता कर सकते हैं और इस विषय पर ज्ञान हासिल करने में आपकी मदद कर सकते हैं। हमारे इस भाषण को ध्यान से पढ़े और मोटापा से जुड़ी अधिक जानकारी ले और जागरूक बने!

मोटापे पर लंबे और छोटे भाषण (Long and Short Speech on Obesity in Hindi)

मोटापे पर भाषण – 1

नमस्ते दोस्तों – आप सभी को मेरी ओर से सुप्रभात!

आज मैं बहुत महत्वपूर्ण विषय अर्थात मोटापा पर आपको संबोधित करने जा रहा हूं जिससे लोग वर्तमान समय में बहुत ही ज्यादा पीड़ित हैं। सबसे पहले मैं यह जानना चाहता हूं कि आपकी राय में किसी व्यक्ति को कैसे मोटापे के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। शायद वह व्यक्ति जिसका वजन अधिक है यानी अपने शरीर के वास्तविक आकार से अधिक है। सटीक शब्दों में कहे तो मोटापे की स्थिति को बॉडी मास इंडेक्स यानी बीएमआई के रूप में परिभाषित किया गया है जो एक सामान्य फॉर्मूला है जो शरीर में फैट की मात्रा का अनुमान लगाने के लिए ऊंचाई और वजन के बीच तुलना करता है। उदाहरण के लिए यदि किसी का बीएमआई 25-30 किलो प्रति वर्ग मीटर के बीच है तो उसे अधिक वज़नी माना जाता है। दूसरी ओर अगर किसी का बीएमआई 30 से अधिक है तो उस व्यक्ति को मोटापे से ग्रस्त माना जाता है।

यह वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है आज के समय में मोटापा शब्द बहुत आम हो गया है।
वर्तमान समय में ब्रिटेन में 30 प्रतिशत बच्चे और 25 प्रतिशत वयस्कों को मोटापे से ग्रस्त माना जाता है जिसके कारण राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण को हर साल करीब एक अरब पाउंड का खर्च उठाना पड़ रहा है। हमारे देश में मोटापे की दर, अर्थात भारत में, निश्चित रूप से खतरनाक है क्योंकि लगभग हर दूसरे घर में एक व्यक्ति मोटापे से ग्रस्त है।

मोटापे की समस्या का हमारी गतिहीन जीवनशैली और खाने की आदतों के साथ बहुत गहरा संबंध है। पुरुषों के लिए सुझाए गए कैलोरी सेवन की संख्या तीन हजार पांच सौ है जबकि महिलाओं के लिए यह दो हजार कैलोरी है। जहाँ पतले लोग नियमित रूप से व्यायाम करते हैं वहीँ जिन लोगों का वजन अधिक है वे अपने वजन को नियंत्रण में लाने की कोई कोशिश नहीं करते हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार चार में से तीन मोटे लोग पूरे सप्ताह के दौरान कोई शारीरिक कार्य नहीं करते हैं।

जहां तक ​​बच्चों और नव युवक की बात है वे 'प्ले स्टेशन' और 'एक्स बॉक्स' जैसे अलग-अलग विडियो गेम्स में अधिक वयस्त रहते हैं। विडियो गेम्स खेलने के कारण वे ज्यादातर खाली समय घर के अंदर बिताते हैं और बाहर जाने या शारीरिक गतिविधियों को करने से बचते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि सरकार को मोटापे से ग्रस्त बच्चों की बढ़ती संख्या के संबंध में कुछ सक्रिय कदम उठाने चाहिए। मेरे अनुसार कोई भी आम व्यक्ति अपने बचपन से ही मोटापे के मार्ग पर चलता है। एक बच्चा ज्यादातर वो चीजें खाता है जो उसके माता-पिता उसे खाने के लिए देते हैं। मुझे यकीन है अगर उन्हें स्वस्थ भोजन दिए जाएँ या स्वस्थ भोजन खाने की आदत बनाया जाए तो वे अन्हेल्थी भोजन खाने की आदतों की ओर कभी नहीं मुड़ेंगे और हमेशा अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहेंगे।

मुझे यकीन है कि अगर लोगों को वजन कैसे कम करना है और वजन कम करना महत्वपूर्ण क्यों है, इस बारे में जागरूकता प्राप्त होगी, तो हमारे समाज में एक बदलाव निश्चित रूप से आ सकता है । फिर उन्हें किसी बीमारी या मोटापे के डर में नहीं जीना पड़ेगा। एक फिट शरीर और एक साउंड माइंड ही मजबूत नींव रख सकता है और बेहतर कल की ओर काम कर सकता है। तो चलिए इस मुद्दे पर कई लोगों को जागरूक करें और स्वस्थ खाने की आदतों के लिए प्रोत्साहित करने की कोशिश करें।

धन्यवाद!

 

मोटापे पर भाषण – 2

आदरणीय श्रोतागण और मेरे प्रिय बच्चों - सभी को नमस्कार!

आज मैं मोटापे नामक विषय को संबोधित करने जा रहा हूं। वर्तमान समय में मोटापे की समस्या से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ रही है। मेज़-कुर्सी की नौकरी के साथ निष्क्रिय जीवन शैली और अन्हेल्थी खाने की आदतों ने मोटापे के बढ़ते बीमारि में योगदान दिया है। मोटापे को एक ऐसी स्थिति के रूप में वर्णित किया गया है जिसमें शरीर में अत्यधिक मात्रा में फैट जमा होने के कारण शरीर का वजन बढ़ जाता है। यह अनावश्यक फैट अस्वास्थ्यकर जीवनशैली, आनुवंशिकी समस्या या एक सुस्त जीवन शैली के कारण जमा हो सकता है। आजकल स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में मोटापा गंभीर मुद्दा बन गया है और ज्यादातर देश इस समस्या से जूझ रहे हैं। नई टेक्नोलॉजी और लोगों की खाने की आदतों पर नियंत्रण ना होने के कारण दुनिया में मोटापे की दर तेजी से बढ़ रही है। यद्यपि कई कारण हैं जो मोटापे के बढ़ते मामलों की ओर योगदान करते हैं लेकिन मुख्य मुद्दा हमेशा आलस्य और शारीरिक गतिविधियों की अनुपस्थिति रहा है।

मोटापे के प्रभावों को अनदेखी नहीं किया जा सकती है क्योंकि मोटे लोग अपने स्वास्थ्य से समझौता कर रहे हैं और यही कारण है कि विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएँ जैसे मधुमेह, हृदय रोग, कैंसर रोग, गठिया आदि बढ़ रहे हैं मोटापे की स्थिति में लोगों का आत्म सम्मान कम होने लगता है और वो डिप्रेशन के भी शिकार होने लगते हैं। अधिक वजन वाले लोगों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है और यह एक उच्च समय है कि हम इस स्थिति से सावधानी से निपटते हैं और इसके प्रति गंभीर ध्यान दें। विज्ञान की अत्याधुनिक तकनीकी प्रगति को धन्यवाद जिसकी वजह से अब मोटापे की स्थिति को कम करने के कई और बेहतर तरीके हैं।

मोटापे को कम करने के लोकप्रिय उपचारों में से एक खाने की गोलियां और दवाओं का सेवन है जो कि आपकी भूख को रोकने में मदद कर सकते हैं। अधिक गंभीर मामलों के लिए लोग शल्य चिकित्सा पद्धतियों का भी सहारा लेते हैं। दो तरीके आम हैं पहला गैस्ट्रिक बैंडिंग या पेट स्टैपल जहां बैंड्स या स्टेपल का उपयोग पेट को पतला करने के लिए किया जाता है। रूक्स-एन-वाई नामक एक अन्य विधि है जो पेट को पतला बनाने में मदद करता है। ये उपचार सुनने में आसान लग सकते हैं लेकिन ये रोगी को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। ये सभी चीजें एक ही प्रभाव का कारण बनती हैं यानी व्यक्ति को कम भोजन का उपभोग करने के लिए।

अगर आप कम खाना खाते हैं तो कम कैलोरी शरीर के अंदर जाती है जो मोटापे के स्तर को कम करता है। आहार की गोलियाँ की सलाह इसलिए नहीं दी जाती है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि उनके कुछ साइड इफेक्ट होते हैं और उनसे हड्डियों के रोग और कुछ गॉलस्टोन्स भी हो सकते हैं लेकिन अगर विधि शरीर के प्रकार को ठीक करती है तो यह व्यक्ति को बहुत लाभ भी पहुंचा सकती है क्योंकि इसके लाभ से 12-18 महीने की अवधि में 50 प्रतिशत अतिरिक्त फैट कम होने का अनुमान लगाया जा सकता है। भले ही विज्ञान मोटापे के स्तर को रोकने में मदद कर सकता है लेकिन इसकी भी कुछ सीमाएं हैं। सभी दवाएं उपलब्ध होने के बावजूद सब कुछ शरीर के प्रकार और उसको क्या फायदा पहुंचता है इस पर निर्भर करता है।

हालांकि कोई भी स्थिति हो स्वस्थ भोजन की आदत होनी चाहिए। यह आवश्यक है और यदि व्यायाम  और स्वस्थ भोजन की आदत बना ले तो यह चमत्कार कर सकता है। मुझे बस यही कहना है!

धन्यवाद।

 

मोटापे पर भाषण – 3

सुप्रभात दोस्तों - आप सब कैसे हैं?

सबसे पहले मैं आप सभी का हॉल में इकट्ठा होने और मुख्य तौर पर इस सेशन में भाग लेने के लिए धन्यवाद करना चाहता हूं। मानो या न मानो लेकिन मोटापा एक गंभीर स्वास्थ्य स्थिति बन गई हैं और इन दिनों यह चिंता का प्रमुख कारण है। यह मोटापा ही है जो शरीर के अन्य प्रमुख स्वास्थ्य मुद्दों को जन्म देता है और जीवन को दुखदाई बनाता है। इस प्रकार मोटापा न केवल हमारे देश में बल्कि विश्व स्तर पर भी बढ़ती स्वास्थ्य समस्या है। मोटापे को एक ऐसी अवस्था के रूप में वर्णित किया गया है जहाँ किसी का इतना अधिक वजन हो जाए तो वह उसकी/उसके स्वास्थ्य के लिए खतरा बन जाता है। यह स्थिति विशेष रूप से अत्यधिक खाने के कारण होती है खासकर अस्वास्थ्यकर भोजन और कसरत की कमी की वजह से।

आधुनिक समय में तेजी से कम कीमत वाले और उच्च कैलोरी खाद्य पदार्थों की उपलब्धता जैसे जंक फूड या फास्ट फूड जिसमें उच्च मात्रा में चीनी, नमक, वसा होता है और जब हम अपनी जीवनशैली में इसे जोड़ते हैं तो यह हमारे शरीर को पूर्ण रूप से नुकसान पहुंचाता है। परिवहन के तरीके और बढ़ते शहरीकरण के मानकों का बदलना अन्य महत्वपूर्ण कारक हैं जो मोटापे की बढ़ती स्थिति की ओर योगदान देते हैं। मोटापे के मामलों में दुनिया भर में पिछले कुछ दशकों में काफी तेजी से वृद्धि हुई है और इस पर हैरान होने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि इसके लिए ज़िम्मेदार कारकों की संख्या बहुत ज्यादा है।

इसलिए मोटापा गंभीर चिकित्सा स्थिति से कम नहीं है जो हमारे शरीर के विभिन्न भागों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। जो लोग मोटापे या अधिक वजन वाले हैं उनमें गंभीर चिकित्सा स्थिति का उत्पन्न होने के जोखिम अधिक है:

  • मधुमेह
  • दिल की बीमारी
  • जोड़ और हड्डी रोग

सुस्त जीवन शैली, अस्वास्थ्यकर भोजन और शारीरिक कसरत की अनुपस्थिति के अलावा अन्य कारक भी हैं जो मोटापे को बढ़ावा देते हैं। ये कारक जीवनशैली, आनुवांशिकी और आपका शरीर कैसे ऊर्जा का उपयोग करता है उससे सम्बंधित हैं। हम आमतौर पर शारीरिक रूप से मोटापे को जोड़ते हैं लेकिन यह वास्तव में एक चिकित्सा स्थिति है और इस पर ध्यान देना आवश्यक है ताकि यह किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित न करे। मोटापे से ग्रस्त लोगों के साथ चिंता का मुख्य कारण यह है कि उनके शरीर में अतिरिक्त फैट टिशूज जीवित रहने के लिए पोषक तत्वों और ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है जो बदले में फैट टिशूज को अधिक रक्त पंप करने के लिए रक्त वाहिकाओं की आवश्यकता होती है। इससे दिल पर दबाव बढ़ जाता है क्योंकि इसे अतिरिक्त रक्त वाहिकाओं की सहायता से अधिक रक्त प्रसारित करने की ज़रूरत होती है। जब अधिक रक्त परिचालित हो जाता है तो धमनी नाड़ियों पर अधिक दबाव आ जाता है। धमनी की नाड़ियों पर बढ़ा दबाव रक्तचाप के प्रवाह को बढ़ा देता है। इसके अलावा अतिरिक्त वजन दिल की धड़कन की दर के खतरे को बढ़ा सकते हैं और नाड़ियों के माध्यम से रक्त प्रसारित करने के लिए आपके शरीर की क्षमता को कम कर सकते हैं।

हालांकि इस स्थिति से बचा जा सकता है क्योंकि लोग रातोंरात मोटापे से ग्रस्त नहीं होते हैं। यह स्थिति धीरे-धीरे तब बनती है जब ऊर्जा का सेवन ऊर्जा की किसी भी शारीरिक गतिविधि के दौरान ज्यादा होता है। तो एक स्वस्थ शरीर बनाने के लिए अपने अतिरिक्त भोजन और अस्वास्थ्यकर भोजन की आदत को कम करने का प्रयास करें।

धन्यवाद!


 

मोटापे पर भाषण – 4

प्रिय मित्रों - आप सभी को नमस्कार!

मोटापे नामक विषय पर आज के भाषण समारोह में मैं हर किसी का स्वागत करता हूं। चूंकि हम्मे से बहुत से लोग मोटापे की समस्या से जूझ रहे है। और हम अपने वजन और भोजन की आदतों पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं, इसलिए मोटापा के शिकार हो रहे हैं, जनता में इस मुद्दे को हल करने और उनकी चिंताओं को व्यक्त करना बेहद महत्वपूर्ण है। इसके अलावा इस तरह के समारोहों या कार्यक्रमों के माध्यम से हम चाहते हैं कि लोगों को हमारे शरीर पर होने वाले गंभीर प्रभावों के बारे में और अधिक जागरूक होना चाहिए।

कुछ भी असंभव नहीं है बशर्ते हम किसी भी चीज़ को पूर्ण दृढ़ संकल्प और ईमानदारी के साथ करे। यहां तक ​​कि मोटापे की समस्या को भी दूर किया जा सकता है यदि हम स्वस्थ जीवन शैली को बनाए रखें और हमारे भोजन की आदतों पर नज़र रखें। इसके अलावा यदि हम इस कोशिश में थोड़ा व्यायाम भी जोड़ते हैं तो यह हमारे शरीर को बहुत फायदा पहुंचाएगा। इसके लिए आपको अपनी ओर से प्रयास करने होंगे। जब तक आप ऐसा नहीं करेंगे तब तक आपको अपनी मेहनत का फल नहीं मिलेगा।

चूंकि आज का विषय मोटापा है तो चलिए पहले समझते हैं कि मोटापा क्या है। मोटापे को शरीर में मौजूद फैट की स्थिति के रूप में वर्गीकृत किया गया है यानी आपके शरीर की ज़रूरत से अधिक फैट है। जो लोग मोटापे की स्थिति से पीड़ित हैं वे प्रायः आनुवंशिक, व्यवहार और पर्यावरणीय कारकों से प्रभावित नहीं होते हैं जिन्हें भोजन पर नियंत्रण कर काबू नहीं किया जा सकता। वास्तव में मोटापा कुछ गंभीर बीमारियों के साथ-साथ अन्य जुड़े स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को भी बढ़ाता है।

भारत में मोटापे की स्थिति वर्तमान शताब्दी में बहुत खतरनाक अनुपात तक पहुंच गई है जिसने हमारे देश की आबादी के लगभग 5 प्रतिशत हिस्से को प्रभावित किया है। भारत धीरे-धीरे उन विकासशील देशों की सूची में शामिल होता जा रहा है जहां मोटापे की दर बहुत अधिक है। संसाधित, अस्वास्थ्यकर भोजन हमारे देश में कहीं भी आसानी से उपलब्ध है और यहां तक ​​कि वैश्विक खाद्य बाज़ारस्थल भी इसके साथ जुड़ा हुआ है। इसके, जो मध्यम वर्ग की बढ़ती आय के साथ एकीकृत है, परिणामस्वरूप मध्यम वर्ग के प्रत्येक व्यक्ति की औसत कैलोरी खपत में वृद्धि हुई है उपरोक्त आय वाले घरों में भी वृद्धि हुई है। मोटापे की स्थिति हृदय रोग के लिए एक गंभीर जोखिम तत्व है और ऐसे गैर-सरकारी संगठनों के रूप में भारतीय हार्ट एसोसिएशन इस मुद्दे पर लोगों की जागरूकता को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

मानो या न मानो लेकिन मोटापे की वजह से 30 से ऊपर गंभीर बीमारियाँ होने का ख़तरा है। जो लोग इस स्थिति से पीड़ित हैं उनमें ऐसी ही एक या इससे अधिक गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ विकसित होने का एक बड़ा खतरा हैं जो बिगड़ते स्वास्थ्य या चरम मामलों में भी शुरुआती मौत के कारण हैं। सबसे बड़ी मोटापा से संबंधित बीमारियां हैं:

  • उच्च रक्त चाप
  • मधुमेह
  • दिल की बीमारी
  • उच्च कोलेस्ट्रॉल
  • पित्ताशय का रोग
  • ऑस्टियोआर्थराइटिस
  • आघात
  • कुछ कैंसर रोग
  • गैस्ट्रो इस्पैगल रिफ्लक्स डिजीज (जीईआरडी)
  • स्लीप एपेनिया और श्वसन संबंधी समस्याएं

एक बहुत प्रसिद्ध कहावत है कि रोकथाम इलाज से बेहतर है तो आपको ये सलाह दिया जाता है की आप अपने बढ़ते वजन पर कंट्रोल करें और होने वाली गंभीर बीमारी से बचें, जो आपको गंभीर चिकित्सा स्थितियों में डाल सकती हैं।

धन्यवाद!