क्या कछुए को घर में रखने से भाग्य अच्छा होता है (Does Keeping Live Tortoise at Home bring Good Luck)

हमारा भारत देश ऐसा है, जहां देवी-देवताओं के साथ-साथ पेड़-पौधो और पशु-पक्षियों की भी पूजा की जाती है। विभिन्न देवी-देवताओं की अलग-अलग पशुओं के रुप में सवारी है। जहां चूहा गणेशजी की सवारी है तो वहीं मां गौरी शेर की सवारी करतीं हैं। भोलेनाथ नंदी बैल पर विराजते है। इसी प्रकार भगवान विष्णु के कूर्म अवतार के कारण कच्छप (कछुआ) को भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाता है।

ऐसा माना जाता है कि मां लक्ष्मी अत्यंत चंचला है, वो किसी के घर नहीं टिकती। परंतु अगर आप मां लक्ष्मी को सदा अपने घर में रखना चाहते है, तो श्री हरि विष्णु और उनसे जुड़ी चीजों को अपने घर में अवश्य रखिए। मां लक्ष्मी सदा आपके यहां निवास करेंगी।

मां लक्ष्मी का निवास होना अर्थात धन, वैभव और समृध्दि का होना। अब आज के युग में कौन ऐसा है जिसे धन-दौलत, इज्जत, शौहरत अच्छी न लगती हो, अर्थात सबको अच्छी लगती है।

इसी क्रम में कछुआ, शंख भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाता है। इन दोनों को शुभता की निशानी माना जाता है। वास्तु में भी इसका बहुत महत्व है। वास्तु शास्त्र के हिसाब से कछुआ घर में रखने से सकारात्मक ऊर्जा और शुभता आती है। घर में खुशहाली आती है। सभी काम निर्विघ्न पूरे होतें हैं। सकारात्मक रहने से आदमी खुश रहते हैं जिससे उनका स्वास्थ्य भी अच्छा बना रहता है।

घर में कछुआ रखने के फायदे (Benefits of Keeping Live Tortoise at Home)

  • कछुए सकारात्मकता को आकर्षित करते है। इससे घर में अच्छा वातावरण बना रहता है।
  • अगर आप अनिद्रा से पीड़ित हो तो इसे अपने सोने के घर में रखे। अच्छी नींद आएगी।
  • कछुए को बहुत प्यार और लाड से पालना चाहिए। इनकी देखभाल अपने बच्चे की भांति करें। ऐसा करने से सम्बंध मजबूत होते है।
  • यह धन, वैभव, शांति, सौभाग्य और समृध्दि को आकर्षित करता है।
  • इसका दीर्घायु होना अविनाशिता को दर्शाता है। यह घर में रहने वाले लोगों को भी लम्बी आयु और स्वस्थ जीवन का आशीर्वाद देता हैं।
  • इन्हें पानी में अवश्य रखें, यह अपने प्रभाव को दुगुना कर देता है।
  • यह अच्छा रोजगार पाने में भी मदद करता है।

जब भी कछुआ घर लायें, इन बातों का खास ख्याल रखें

  • कछुआ को घर लाने से पहले वाइल्ड कन्जरवेशन एक्ट को जानना आवश्यक है। क्योंकि इसकी कुछ प्रजातियों को पालना मना (निषेध) है।
  • इन्हें पालना बहुत आसान है, क्योंकि ये बहुत कम मात्रा में खाते हैं।
  • कुछ-कुछ प्रजातियों तो एक-एक दिन के अंतर पर खाती है। अतः परेशान होने की जरुरत नहीं। न ही ज्यादा खिलाने की जरुरत है।
  • उनके पानी को हर दिन या कम से कम हर दूसरे दिन जरुर बदलें।
  • ये बहुत कम खाते है, अतः इनके पोषण का विशेष ध्यान रखें। आजकल बाजारो में भी इनका भोजन मिलता है। आप चाहे तो उसे खिला सकते हैं।
  • इन्हें धूप में जरुर रखें, इनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए धूप बहुत जरुरी होता है। विटामिन डी, जो सूरज की रौशनी से मिलती है, न मिलने पर इनकी मृत्यु भी हो सकती है।
  • आप इन्हें घर पर तभी लाये, जब इनका अच्छे से ख्याल रख पाये, अन्यथा ठीक से पालन न होने पर नकारात्मक परिणाम भी भुगतने पड़ सकते है।

स्थलीय कछुए और जलीय कछुए के बीच अंतर

कछुए दो प्रकार के होते हैं, एक स्थलीय और दूसरा जलीय कछुआ है। दोनों में कुछ बुनियादी अंतर पाये जाते हैं।

  • स्थलीय कछुआ: यह एक सपाट जानवर है जिसका ऊपरी खोल सपाट आकार में होता है। इस कछुए का जीवन लगभग 80 वर्ष होता है। इसे एक शुभ जानवर माना जाता है।
  • जलीय कछुआ: ये समुन्दर और कभी-कभी ताजे पानी में और रेगिस्तान में भी रह सकते हैं। ये 150-200 साल तक जीवित रह सकते हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि ये अमरता का प्रतीक माने जाते हैं।

दोनों कछुए (स्थलीय और जलीय) को भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार एक शुभ जानवर के रूप में माना जाता है। आप इनमें से कोई भी ले सकते हैं। यदि जीवित कछुआ रखना संभव नहीं है, तो आप एक मूर्ति भी रख सकते हैं।

भारतीय मान्यताओं के अनुसार कछुए का महत्व

कछुआ को संस्कृत में 'कुर्मा' के नाम से भी जाना जाता है। यह एक भाग्यशाली प्राणी के रूप में चिह्नित है क्योंकि यह भगवान विष्णु के दस अवतारों में से एक है, कुर्मा अवतार।

एक बार ऋषि दुर्वासा ने भगवान इंद्र को एक माला भेंट की, लेकिन इंद्र ने उनका अनादर किया और ऋषि ने क्रोधित होकर इंद्र को श्राप दे दिया और अन्य देवता भी जल्द ही अपनी सारी शक्तियां खो बैठे। चूंकि इंद्र देवताओं के राजा थे, ऋषि ने पूरे राज्य को श्राप दिया था। परिणामस्वरूप, वे राक्षसों के खिलाफ सभी लड़ाई हारने लगे और इंद्र ने खुद को असहाय पाया और भगवान विष्णु से मदद की प्रार्थना की।

भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन करने का सुझाव दिया, जहां वे अमृत प्राप्त कर सकते थे। अमृत ​​उनकी शक्तियों को बहाल कर सकता था और उन्हें अमर बना सकता था। देवताओं ने इस मंथन की शुरुआत की, चूंकि उन्होंने अपनी सारी शक्तियां खो दीं थी, इसलिए उन्होंने राक्षसों को मदद के लिए बुलाया। उन दोनों ने इस काम को एक साथ शुरू किया, इस शर्त पर कि अमृत का पान दोनो करेंगे।

मंदराचल नाम के पर्वत का इस्तेमाल समुद्र में एक स्तंभ के रूप में किया जाना था, लेकिन जब उन्होंने इसे समुद्र में रखा, तो यह पानी के नीचे फिसलने लगा। तब ये भगवान विष्णु थे, जिन्होंने कछुए का अवतार लिया था और पर्वत के आधार के रूप में उनकी पीठ पर पर्वत को ग्रहण कर लिया। अंत में, मंदराचल पर्वत को एक आधार मिला और उसने फिसलना बंद कर दिया। अन्ततः वे अमृत पाने में सफल रहे।

उस समय से कछुए को उसके पौराणिक महत्व के कारण विशेष माना जाता है। मंथन में, हमें इच्छा-पूर्ति करने वाली कामधेनु गाय, धन, कल्पवृक्ष, आयुर्वेद, आदि जैसी कई चीजें मिलीं, यह सब कछुआ के कारण ही संभव हो पाया।

चीनी पौराणिक कथाओं के अनुसार कछुआ का महत्व

चीन में कछुआ समान रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह एक कछुआ था, जिसने पंगु (चीनी पौराणिक कथाओं के अनुसार पहले जीवित रहने) को दुनिया बनाने में मदद की। यह देवी नुगुआ थी, जिन्होंने एक कछुए का उपयोग एक समर्थन के रूप में किया था जब आकाश का समर्थन करने वाला पर्वत एक जल देवता गोंग गोंग द्वारा नष्ट कर दिया गया था।

पौराणिक मान्यताएं विभिन्न देशों में कछुए के महत्व को बढ़ाती है। यह एक धारणा है कि ब्रह्मांड गुंबद से एक कछुआ वहन किया गया था। चीनी फेंग शुई भी कछुआ को एक शुभ जानवर मानता है।

निष्कर्ष

यह न केवल भारत, बल्कि कई राष्ट्र हैं जो कछुए को भाग्य का प्रतीक मानते हैं। इसका बहुत लंबा जीवन काल है जो उसे विशेष बनाता है और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण जोड़ता है। वे अन्य जानवरों की तरह शोर नहीं करते हैं, इसलिए उन्हें रखना आसान है। फिर भी, कई सावधानियाँ हैं जो उनके होने पर लेनी चाहिए। कछुआ कई मायनों में अच्छा है; यह आपके परिवार को एक साथ ला सकता है और आपको सद्भाव का आशीर्वाद दे सकता है। इसलिए, यदि आप अपने घर पर एक जीवित कछुआ रखने की योजना बना रहे हैं, तो इसके लिए अवश्य जाएं।