गाँधी जयंती निबंध

हर वर्ष 2 अक्टूबर को मनाया जाने वाला कार्यक्रम गाँधी जयंती, महात्मा गाँधी का जन्म दिवस भारत के महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रमों में से एक है। गाँधी के व्यापक जीवन को समझने के लिये हम यहाँ पर सरल और आसान शब्दों में स्कूल जाने वाले विद्यार्थीयों और छोटे बच्चों के लिये विभिन्न शब्द सीमाओं तथा अलग-अलग कक्षा के बच्चों के लिये निबंध उपलब्ध करा रहे हैं। इसका प्रयोग विद्यार्थी किसी भी स्कूल प्रतियोगिता, निबंध लेखन या किसी भी अन्य अवसर के लिये कर सकते है।

गाँधी जयंती पर निबंध (गाँधी जयंती एस्से)

You can get below some essays on Gandhi Jayanti in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

गाँधी जयंती पर निबंध 1 (100 शब्द)

गाँधी जयंती भारत के राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी का जन्म दिवस है। हर वर्ष 2 अक्टूबर को इसे पूरे भारतवर्ष में एक राष्ट्रीय उत्सव के रुप में मनाया जाता है। इसे बहुत सारे उद्देश्यपूर्णं क्रियाकलापों के द्वारा स्कूल, कॉलेज, शिक्षण संस्थान, सरकारी कार्यालय, समुदाय, समाज, तथा अन्य जगहों पर मनाया जाता है। भारतीय सरकार द्वारा 2 अक्टूबर को राष्ट्रीय अवकाश के रुप में घोषित किया गया है। इस दिन पूरे भारत में सरकारी कार्यालय, स्कूल, कॉलेज, बैंक आदि बंद रहते हैं तथा यह पूरे उत्साह और ढ़ेर सारी तैयारियों के साथ मनाया जाता है।

गाँधी जयंती

गाँधी जयंती पर निबंध 2 (150 शब्द)

गाँधी जयंती 3 राष्ट्रीय अवकाशों में से एक है (स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस)। भारत के राष्ट्रपिता अर्थात महात्मा गाँधी को श्रद्धाँजलि देने के लिये हर वर्ष 2 अक्टूबर को इसे मनाया जाता है। विशेष उत्सवों में से एक के रुप में इसे माना जाता है इसी वजह से 2 अक्टूबर को अपने देशभक्त नेता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करने के लिये भारतीय सरकार द्वारा शराब की बिक्री जैसे बुरे कार्यों पर सख्ती से रोक लगा दी जाती है। 2 अक्टूबर 1869 वह दिन था जब इस महान नेता ने जन्म लिया। ये भारत के सभी राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों में मनाया जाता है।

इस दिन को मनाने का एक बड़ा महत्व है; 15 जून 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अहिंसा के अंतरराष्ट्रीय दिवस के रुप में 2 अक्टूबर को घोषित किया गया। इस राष्ट्रीय किंवदंती को सम्मान और याद करने के लिये गाँधी जयंती को मनाया जाता है, महात्मा गाँधी वह व्यक्ति थे जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिये अंग्रेजों के खिलाफ अपने पूरे जीवन भर संघर्ष किया।

गाँधी जयंती पर निबंध 3 (200 शब्द)

पूरे भारतवर्ष में राष्ट्रीय कार्यक्रम के रुप में 2 अक्टूबर मनाया जाने वाला कार्यक्रम गाँधी जयंती महात्मा गाँधी का जन्म दिवस है। इसे भारत के राष्ट्रपिता मोहनदास करमचन्द गाँधी (बापू के नाम से प्रसिद्ध) को सम्मान देने के लिये राष्ट्रीय अवकाश के रुप में मनाया जाता है। 15 जून 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के द्वारा घोषित किये जाने के बाद इसे अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रुप में मनाया जाता है। गाँधी जी अहिंसा के उपासक थे और उन्होंने अपने पूरे जीवन भर इसके पथ पर चलते हुए देश की आजादी के लिये संघर्ष किया। आज बापू हमारे बीच में शांति और सच्चाई के प्रतीक के रुप में याद किये जाते है।

गाँधी जयंती एक राष्ट्रीय अवकाश है, इसलिये सभी स्कूल, कॉलेज, सरकारी और गैर-सरकारी कार्यालय पूरे दिन के लिये बंद रहते है। बापू ने हमारे सामने और आने वाली पीढ़ियों के समक्ष सादा जीवन और उच्च विचार का एक बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत किया है। वह हमेशा ध्रुम्रपान और मद्यपान के खिलाफ थे इसी वजह से सरकार द्वारा गाँधी जयंती के अवसर पर शराब की बिक्री पर पूरे दिन के लिये कठोरता से रोक लगाई जाती है। वो एक देशभक्त नेता थे जिन्होंने ब्रिटिश शासन से भारत की स्वतंत्रता के लिये अहिंसा आंदोलन की शुरुआत की। भारत की आजादी प्राप्ति में उनकी भूमिका अविस्मरणीय है। हर साल हम सभी गाँधी जयंती, उनके जन्म दिवस पर उनको और उनके कार्यों को याद करने के द्वारा गाँधी जी को दिल से श्रद्धांजलि देते है।


 

गाँधी जयंती पर निबंध 4 (250 शब्द)

मोहनदास करमचन्द गाँधी के जन्म दिवस को चिन्हित करने के लिये 2 अक्टूबर को हर वर्ष पूरे भारत में मनाये जाने वाला राष्ट्रीय अवकाश है गाँधी जयंती। वह भारत के राष्ट्रपिता तथा बापू के रुप में प्रसिद्ध है। ये उपाधि उन्हें आधिकारिक रुप से प्राप्त नहीं है क्योंकि किसी को भी राष्ट्र के पिता के रुप में स्थान देना भारत के संविधान में उल्लिखित नहीं है। 15 जून 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रुप में महात्मा गाँधी के जन्म दिवस को घोषित किया गया। गाँधी जयंती पूरे भारत में राष्ट्रीय अवकाश के रुप में जबकि पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रुप में को मनाया जाता है।

इस दिन पूरे देशभर में स्कूल और सरकारी कार्यालय बंद रहते हैं। इसे पूरे भारत के सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में मनाया जाता है। ये भारत (स्वत्रंता दिवस-15 अगस्त, गणतंत्र दिवस-26 जनवरी) के 3 में से एक राष्ट्रीय कार्यक्रम के रुप में मनाया जाता है। नई दिल्ली में गाँधी स्मारक (दाह संस्कार) पर राजघाट पर सरकारी अधिकारियों के द्वारा श्रद्धांजलि, प्रार्थना सेवा के रुप में जैसे कुछ महत्वपूर्णं गतिविधियों सहित इसे चिन्हित किया जाता है। दूसरे क्रियाकलाप जैसे प्रार्थना, सभा, स्मरणीय समारोह, नाट्य मंचन, भाषण व्याख्यान (अहिंसा के विषय-वस्तु पर, शांति की स्तुति करना तथा भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष में गाँधी के प्रयासों पर), निबंध लेखन, प्रश्न-उत्तर प्रतियोगिता, चित्रकला प्रतियोगिता, कविता पाठ आदि स्कूल, कॉलेज, स्थानीय सरकारी संस्थानों और सामाजिक-राजनीतिक संस्थानों में होते है। गाँधी जयंती के दिन किसी भी प्रतियोगिता में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थी को सबसे श्रेष्ठ ईनाम दिया जाता है। सामान्यत: इस दिन उत्सव मनाने के दौरान गाँधी का सबसे प्रिय भजन रघुपति राघव राजा राम गाया जाता है।

गाँधी जयंती पर निबंध 5 (300 शब्द)

तीसरे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रम के रुप में हर साल गाँधी जयंती को मनाया जाता है। महात्मा गाँधी जन्म दिवस पर को उनको श्रद्धांजलि देने के लिये पूरे देश के भारतीय लोगों द्वारा 2 अक्टूबर को इसे मनाया जाता है। गाँधी देश के राष्ट्रपिता तथा बापू के रुप में प्रसिद्ध है। वो एक देशभक्त नेता थे और अहिंसा के पथ पर चलते हुए पूरे देश का भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में नेतृत्व किया। उनके अनुसार, ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता की लड़ाई जीतने के लिये अहिंसा और सच्चाई ही एकमात्र हथियार है। वह कई बार जेल भी गये हालाँकि देश को आजादी मिलने तक उन्होंने अपने अहिंसा आंदोलन को जारी रखा। वह हमेशा सामाजिक समानता में भरोसा रखते थे इसीलिये अस्पृश्यता के घोर खिलाफ थे।

सरकारी अधिकारियों द्वारा नई दिल्ली में गाँधीजी की समाधि या राजघाट पर बहुत तैयारियों के साथ गाँधी जयंती मनायी जाती है। राजघाट के समाधि स्थल को फूलों की माला तथा फूलों से सजाया जाता है तथा इस महान नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। समाधि पर सुबह के समय धार्मिक प्रार्थना भी रखी जाती है। इसे पूरे देशभर में स्कूल और कॉलेजों में विद्यार्थीयों के द्वारा खासतौर से राष्ट्रीय उत्सव के रुप में मनाया जाता है।

महात्मा गाँधी के जीवन और उनके कार्यों पर आधारित नाट्य ड्रामा, कविता व्याख्यान, गायन, भाषण, निबंध लेखन तथा दूसरी प्रतियोगिता में भाग लेना जैसे प्रश्न-उत्तर प्रतियोगिता, कला प्रतियोगिता आदि के द्वारा विद्यार्थी इस उत्सव को मनाते है। उनकी याद में विद्यार्थीयों के द्वारा गाँधी का सबसे प्रिय गीत “रघुपति राघव राजा राम” भी गाया जाता है। इस दिन सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले छात्र को पुरस्कृत किया जाता है। वह बहुत सारे राजनीतिक नेताओं खासतौर से देश के युवाओं के लिये प्रेरणादायी और अनुकरणीय व्यक्ति है। दूसरे महान नेता जैसे मार्टिन लूथर किंग, नेल्सन मंडेला, जेम्स लॉसन आदि महात्मा गाँधी की अहिंसा और स्वतंत्रता की लड़ाई के लिये शांतिपूर्ण तरीकों से प्रेरित हुए।


 

गाँधी जयंती पर निबंध 6 (400 शब्द)

गाँधी जयंती एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है जो राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि देने के लिये हर वर्ष मनाया जाता है। पूरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रुप में भी इसे मनाया जाता है। 15 जून 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रुप में गाँधी जयंती को घोषित किया गया है। मोहनदास करमचन्द गाँधी (2 अक्टूबर 1869 में जन्म) के जन्म दिवस को याद करने के लिये पूरे देश में गाँधी जयंती को राष्ट्रीय अवकाश के रुप में मनाया जाता है। उनके भारतीय स्वतंत्रता के लिये किये गये अहिंसा आंदोलन से आज भी देश के राजनीतिक नेताओं के साथ-साथ देशी तथा विदेशी युवा नेता भी प्रभावित होते है।

पूरे विश्व में बापू के दर्शन, अहिंसा में भरोसा, सिद्धांत आदि को फैलाने के लिये अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रुप में गाँधी जयंती को मनाने का लक्ष्य है। विश्वभर में लोगों की जागरुकता बढ़ाने के लिये उचित क्रियाकलापों पर आधारित विषय-वस्तु के द्वारा इसे मनाया जाता है। भारतीय स्वतंत्रता में उनके योगदानों और महात्मा गाँधी के यादगार जीवन को समाहित करता है गाँधी जयंती। इनका जन्म एक छोटे से तटीय शहर (पोरबंदर, गुजरात) में हुआ था, इन्होंने अपना पूरा जीवन देश के लिये समर्पित कर दिया जो आज के आधुनिक युग में भी लोगों को प्रभावित करता है।

इन्होंने स्वराज्य प्राप्ति, समाज से अस्पृश्यता को हटाने, दूसरी सामाजिक बुराईयों को मिटाने, किसानों के आर्थिक स्थिति को सुधारने में, महिला सशक्तिकरण आदि के लिये बहुत ही महान कार्य किये है। ब्रिटिश शासन से आजादी प्राप्ति में भारतीय लोगों की मदद के लिये इनके द्वारा 1920 में असहयोग आंदोलन, 1930 में दांडी मार्च या नमक सत्याग्रह और 1942 में भारत छोड़ो आदि आंदोलन चलाये गये। अंग्रेजों को भारत छोड़ने के लिये उनका भारत छोड़ो आंदोलन एक आदेश स्वरुप था। हर वर्ष पूरे देश में विद्यार्थी, शिक्षक, सरकारी अधिकारियों आदि के द्वारा गाँधी जयंती को बहुत ही नये तरीके से मनाया जाता है। सरकारी अधिकारियों के द्वारा नई दिल्ली के राजाघाट पर गाँधी प्रतिमा पर फूल चढ़ाकर, उनका पसंदीदा भक्ति गीत “रघुपति राघव राजा राम” गाकर तथा दूसरे रीति संबंधी क्रियाकलापों के साथ इसे मनाया जाता है।

यह हर साल स्कूल, कॉलेज, शिक्षण संस्थान, सरकारी तथा गैर-सरकारी संस्थाओं आदि में मनाया जाने वाला देश के 3 राष्ट्रीय अवकाशों(स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस बाकी के दो) में से एक है। भारत के इस महान नेता को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिये स्कूल, कॉलेज, सरकारी कार्यालय, बैंक आदि बंद रहते है। गाँधी जयंती मनाने के द्वारा हमलोग बापू और उनके महान कार्यों को याद करते हैं। विद्यार्थियों को महात्मा गाँधी के जीवन और उनके कार्यों से संबंधित बहुत सारे कार्य दिये जाते हैं जैसे कविता या भाषण पाठ, नाट्य मंचन करना, निबंध लेखन, नारा लेखन, समूह चर्चा आदि।


महात्मा गांधी का सविनय अवज्ञा आंदोलन पर निबंध – 7 (1100 शब्द)

प्रस्तावना

सविनय अवज्ञा का अर्थ नागरिक कानूनो की अवज्ञा करना अर्थात उन्हें ना मानना होता है। सविनय अवज्ञा के तहत प्रदर्शनकारियों द्वारा अपनी मांगो के लिए अंहिसा पूर्वक आंदोलन किया जाता है। महात्मा गांधी ने भी शांति पूर्वक ब्रिटिश शासन के खिलाफ सविनय अवज्ञा करते हुए आंदोलन किया था। उन्होंने अंग्रेजी सरकार के कई कठोर अधिनियमों और कानूनो के खिलाफ सविनय अवज्ञा के कई आंदोलन किए। यह गांधी जी के अवज्ञा आंदोलन ही थे, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को भारतीय जनता के संयुक्त शक्ति का एहसास कराया और देश की आजादी का मार्ग प्रशस्त किया।

महात्मा गांधी का सविनय अवज्ञा आंदोलन

गाँधी जी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन का उपयोग भारत से ब्रिटिश शासन को उखाड़ने के लिए किया। उनका मानना था कि अंग्रेज भारत में शासन करने में इसलिए सफल रहे, क्योंकि उन्हें भारतीयों का सहयोग मिला। गांधी जी के अनुसार अंग्रेजों को प्रशासन चलाने के अलावा अन्य कई आर्थिक और व्यापारिक कार्यों में भारतीयों के सहयोग की आवश्यकता थी। इसलिए गाँधी जी भारतीय नागरिकों से अंग्रेजी उत्पादों का पूर्ण तरीके से बहिष्कार करने की अपील की।

सामूहिक सविनय अवज्ञा आंदोलन का मुख्य कारण

साइमन कमीशन और रोलेट एक्ट जैसी ब्रिटिश सरकार की क्रूर नीतियों के कारण महात्मा गाँधी के पूर्ण स्वराज के सपने को एक गहरा धक्का लगा। इसके साथ ही अंग्रेजी सरकार भारत को डोमिनयन स्टेटस देने के भी पक्ष में नही थी। इन्हीं सब  बातो के विरोध को लेकर गांधी जी ने पहले ही अंग्रेजी सरकार को चेतावनी दे दी थी, कि यदि भारत को पूर्ण स्वतंत्रता नही मिली तो अंग्रेजी हुकूमत को सामूहिक नागरिक अवज्ञा का सामना करना पड़ेगा। इन्हीं सब राजनैतिक और समाजिक कारणों ने सविनय अवज्ञा आंदोलन को जन्म दिया।

महात्मा गाँधी के नेतृत्व में सविनय अवज्ञा आंदोलन का उदय

सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत 1919 में असहयोग आंदोलन के साथ जलियावाला बांग कांड के विरोध में हुई थी। नमक सत्याग्रह के बाद इसे काफी प्रसिद्धि मिली। महात्मा गाँधी द्वारा शुरु की गयी नमक सत्याग्रह या दांडी यात्रा को हम इसका आरंभ भी कह सकते हैं। नमक सत्याग्रह की यह यात्रा 26 दिन तक चली थी, यह यात्रा 12 मार्च 1930 से शुरु होकर 6 अप्रैल 1930 को दांडी के एक तटीय गाँव में समाप्त हुई थी।

नमक सत्याग्रह की यह यात्रा कुछ लोगो के साथ शुरु हुई थी लेकिन जैसे-जैसे यह आगे बढ़ती गयी, इसके अनुयायियों की संख्या भी बढ़ती गयी। इस यात्रा का मुख्य मकसद अंग्रेजी कर व्यवस्था का विरोध करना और स्थानीय रुप से नमक ना बनाने तथा इसके उपर लगने वाले भारी कर के कानून का विरोध करना था। इस आंदोलन को काफी सफलता प्राप्त हुई और देखते ही देखते इसने एक बड़े अवज्ञा आंदोलन का रुप ले लिया और लोगो ने अंग्रेजी सरकार द्वारा बनाये हुए कानून को चुनौती देने के लिए भारी मात्रा में खुद से नमक बनाना शुरु कर दिया। हांलाकि इस आंदोलन के फलस्वरुप काफी ज्यादे संख्या में लोगो के गिरफ्तारियां की गई, फिर भी इस अंग्रेजी हुकूमत इस आंदोलन को रोकने में असमर्थ रही।

इस आंदोलन के कारण लोगो ने अंग्रेजी वस्तुओं का विरोध शुरु कर दिया और स्वदेशी उत्पादों के उपयोग को अधिक महत्व देने लगे। इसके साथ ही पूरे देश भर में लोगो ने अंग्रेजी वस्त्रों को जलाना शुरु कर दिया तथा किसानों ने अंग्रेजी सरकार को कर चुकाने से भी मना कर दिया। इन सब कार्यों ने अंग्रेजी हुकूमत को झकझोर के रख दिया।

इसके साथ ही गांधी जी के आदेश पर अपने विरोध की आवाज और बुलंद करने के लिए लोगो ने अंग्रेजी प्रशासन के महत्वपूर्ण ओहदों से इस्तीफा देना शुरु कर दिया। जिससे की शिक्षकों, सैनिकों और महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदो पर कार्यरत लोगो ने देश भर हो रहे, इस आंदोलन को समर्थन देने के लिए अपने पदो से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही 1930 के इस सविनय अवज्ञा आंदोलन में औरतो ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया, समाज के हर तबके की महिलाओ ने इस सत्याग्रह आंदोलन में हिस्सा लिया और अपना समर्थन देने के लिए बड़े मात्रा में नमक का उत्पादन करके बेचने लगी। ऐसा पहली बार देखने को मिला जब महिलाओं ने इतनी बड़ी संख्या में किसी आंदोलन में हिस्सा लिया हो। हम कह सकते हैं कि अंग्रेजी शासन की नीव हिलाने के साथ ही इस आंदोलन ने समाज के हर तबके को साथ लाने का भी कार्य किया।

सविनय अवज्ञा आंदोलन का प्रभाव

सविनय अवज्ञा आंदोलन ने अंग्रेजी हुकूमत की नीव हिलाकर दी और उसे आर्थिक तथा प्रशासनिक स्तर पर काफी बड़ा झटका दिया। इसी के तहत स्वदेशी आंदोलन के कारण भारत में उत्पादों के उत्पादन के लिए कई उत्पाद इकाईया भी खुल गयी।

अंग्रेजी उत्पादों के बहिष्कार ने ब्रिटेन से आयात होने वाले उत्पादों को काफी बड़े स्तर पर प्रभावित किया, जिससे अंग्रेजी वस्त्रों और सिगरेट का आयात घटकर आधा हो गया। इसके साथ ही लोगो ने सरकार को कर देने से मना कर दिया और नमक के उत्पादन का कार्य भी शुरु कर दिया, जिससे कि ब्रिटिश सरकार को आर्थिक रुप से काफी क्षति पहुंची। इस आंदोलन के कारण अंग्रेजी सरकार भी सोच में पड़ गयी कि आखिर इस अहिंसक तथा अवज्ञा आंदोलन से कैसे निपटें क्योंकि यह एक ऐसा आंदोलन था, जिसमें बल प्रयोग का कोई औचित्य नही था।

इस आंदोलन ने अंग्रेज अधिकारियों को सोचने के लिए मजबूर कर दिया, उन्होंने स्वंय इस बात की माना कि, उनके लिए अहिंसक आंदोलनो के बजाय हिंसक आंदोलनो से लड़ना अधिक आसान था। इस अहिंसक सविनय अवज्ञा आंदोलन ने भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के मुद्दे को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोगो का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया तथा लोगो को भारतीयों के प्रति अंग्रेजी हुकूमत की इन क्रूर नितियों से भी परिचित कराया। 8 अगस्त 1942 को शुरु हुआ यह आंदोलन अंग्रेजी हुकूमत के ताबूत में आखरी कील बना। जिससे अंग्रेजो को अंततः द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात भारत को स्वतंत्रता देने के लिए राजी होना पड़ा।

निष्कर्ष

सविनय अवज्ञा आंदोलन का भारत के स्वतंत्रता संग्राम में काफी बड़ा महत्व है। इसने पूरे देश को एक करके लड़ने का एक मकसद प्रदान किया। इसकी शुरुआत नमक के मुद्दे को लेकर हुई थी पर देखते ही देखते इसने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ एक राष्ट्रीय आंदोलन का रुप ले लिया। सविनय अवज्ञा आंदोलन वह अंहिसक आंदोलन था, जिसमें रक्त का एक कतरा भी नही बहा, फिर भी इसने भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष में एक महत्वपूर्ण योगदान निभाया।

वह महात्मा गांधी ही थे, जिनके कारण भारतीय स्वाधीनता संग्राम को अंतरराष्ट्रीय मंच मिला और उनके इस दृढ़ संकल्प तथा इच्छा शक्ति का लोहा पूरे विश्व ने माना। उन्होंने विश्व को अंहिसा की शक्ति दिखाई और लोगो को यह समझाया कि हर लड़ाई हिंसा से नही जीती जा सकती, बल्कि की कुछ लड़ाईया बिना खून की एक भी बूंद बहाये अंहिसा के मार्ग पर चलकर भी जीती जा सकती है।

 

सम्बंधित जानकारी:

गाँधी जंयती पर स्लोगन

गाँधी जयंती पर भाषण

महात्मा गाँधी पर भाषण

महात्मा गाँधी के प्रसिद्ध भाषण

गाँधी जयंती पर निबंध

गाँधी जयंती उत्सव पर निबंध

महात्मा गांधी पर निबंध

गांधी जयंती

गाँधी जयंती पर कविता

 

और देखें:

बाल दिवस पर निबंध

शिक्षक दिवस पर निबंध

अम्बेडकर जयंती पर निबंध