राष्ट्रीय ध्वज़ पर निबंध

किसी देश का राष्ट्रीय ध्वज उस देश के सम्मान तथा गौरव का प्रतीक होता है, यह उस देश के स्वतंत्रता तथा आत्मसम्मान को भी दर्शाने का प्रयास करता है। यही कारण है कि हर देश के नागरिकों द्वारा अपने देश के राष्ट्रीय ध्वज का काफी सम्मान किया जाता है। राष्ट्रीय ध्वज इसी महत्व को देखते हुए हमने इन निबंधों को तैयार किया है, आपकी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए हमने इन विभिन्न शब्द सीमाओं जैसे की 150, 250, 300, 350, 400, 500, 600 शब्दों के निबंधों को तैयार किया है।

भारत के राष्ट्रीय ध्वज पर बड़े तथा छोटे निबंध (Long and Short Essay on National Flag of India in Hindi)

Find here some essay on National Flag of India in Hindi language for students in different words limit (150, 250, 300, 350, 400, 500 and 600 words).

इन दिये गये निबंधों में से आप अपनी आवश्यकता अनुसार किसी भी निबंध का चयन कर सकते है। यह निबंध काफी सरल तथा ज्ञानवर्धक है।

इन निबंधों के माध्यम से हमनें राष्ट्रीय ध्वज के विभिन्न विषयों जैसे कि राष्ट्रीय ध्वज का महत्व क्या है? भारत के राष्ट्रीय ध्वज का नाम क्या है? राष्ट्रीय ध्वज की आवश्यकता, राष्ट्रीय ध्वज फहराने का नियम क्या है आदि जैसे विषयों पर प्रकाश डालने का कार्य किया है।

भारत के राष्ट्रीय ध्वज़ पर निबंध 1 (150 शब्द)

भारत हमारा देश है और इसका राष्ट्रीय ध्वज हमारे लिये बहुत मायने रखता है। यहाँ पर रह रहे विभिन्न धर्मों के लोगों के लिये हमारा राष्ट्रीय ध्वज एकता के प्रतीक माना जाता है। हमें अपने देश के राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करना चाहिये। ये बहुत जरूरी है कि सभी आजाद देशों के पास उनका अपना राष्ट्रीय ध्वज हो।

हमारा राष्ट्रीय ध्वज तीन रंगों का है इसलिये इसे तिरंगा भी कहते हैं। तिरंगे के सबसे ऊपर की पट्टी में केसरिया रंग, बीच की पट्टी में सफेद रंग और सबसे नीचे की पट्टी में हरा रंग होता है। तिरंगे के बीच की सफेद पट्टी में एक नीले रंग का अशोक चक्र होता है जिसमें एक समान दूरी पर 24 तीलियाँ होती है। यह जानना अत्यंत रोचक है कि हमारा राष्ट्रीय ध्वज अपने आरंभ से किन-किन परिवर्तनों से गुजरा। इसे हमारे स्वतंत्रता के राष्ट्रीय संग्राम के दौरान खोजा गया या मान्यता दी गई।

राष्ट्रीय ध्वज़

भारत के राष्ट्रीय ध्वज़ पर निबंध 2 (250 शब्द)

प्रस्तावना

राष्ट्रीय ध्वज एक स्वतंत्र राष्ट्र के एक नागरिक होने की हमारी अलग पहचान है। हर स्वतंत्र राष्ट्र का अपना अलग राष्ट्रीय ध्वज होता है। हमारा राष्ट्रीय ध्वज एकता और आजादी का प्रतीक है। सरकारी अधिकारियों के द्वारा सभी राष्ट्रीय अवसरों पर राष्ट्रीय ध्वज को फहराया जाता है हालाँकि भारतीय नागरिकों को भी कुछ अवसरों पर राष्ट्रीय ध्वज को फहराने की अनुमति है। गणतंत्रता दिवस, स्वतंत्रता दिवस और कुछ दूसरे राष्ट्रीय कार्यक्रमों में सरकारी कार्यालयों, स्कूल और दूसरे शिक्षण संस्थानों में इसे काफी उत्साह और सम्मान के साथ फहराया जाता है।

भारत का पहला राष्ट्रीय ध्वज

22 जुलाई 1947 को पहली बार भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को अंगीकृत किया गया था। हमारे राष्ट्रीय ध्वज को बहुत ही सुंदर तरीके से तीन रंगों में डिज़ाइन किया गया है, जिसे तिरंगा भी कहते हैं। ये खादी के कपड़े से बना होता और इसकी बुनाई हांथो द्वारा की जाती है। खादी के अलावा तिरंगे को बनाने के लिये किसी दूसरे कपड़े का इस्तेमाल गैरकानूनी और प्रतिबंधित है। हमारा राष्ट्रीय ध्वज अपने आरंभ में बहुत से परिवर्तनों से गुजरा है। इसका निर्माण हमारे स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हुआ था।

निष्कर्ष

हमारे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के सबसे ऊपर केसरिया रंग होता है, दूसरी पट्टी में सफेद रंग होता है इसमें एक नीले रंग का चक्र भी होता है जिसमें एक समान दूरी पर 24 तीलियाँ होती हैं तथा अंतिम पट्टी में हरा रंग होता है। केसरिया रंग समर्पण और निःस्वार्थ भाव का प्रतीक है, सफेद रंग शांति, सच्चाई और शुद्धता को प्रदर्शित करता है जबकि हरा रंग युवा और ऊर्जा को दिखाता है।

 

भारत के राष्ट्रीय ध्वज़ पर निबंध 3 (300 शब्द)

प्रस्तावना

22 जुलाई 1947 को भारत ने अपना राष्ट्रीय ध्वज अंगीकृत किया और इसके कुछ ही दिन बाद 15 अगस्त 1947 को हमारे देश को स्वतंत्रता प्राप्त हुई। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज में तीन रंग है इसलिये इसे तिरंगा भी कहते हैं, इसके साथ ही हमारा राष्ट्रीय ध्वज हमारे देश के भाईचारे, एकता और इंसानियत को भी प्रदर्शित करता है।

तिरंगे का विस्तार

तिरंगे के सबसे ऊपर स्थित केसरिया रंग समर्पण और निस्वार्थता के भाव को दिखाता है, सफेद रंग शांति, सच्चाई और शुद्धता को इंगित करता है और सबसे नीचे का हरा रंग युवा और ऊर्जा को प्रदर्शित करता है। बीच के सफेद पट्टी में एक नीले रंग का अशोक चक्र बना हुआ है जिसमें एक बराबर 24 तीलियाँ होती हैं। हमारा राष्ट्रीय ध्वज स्वतंत्रता, गर्व, एकता और सम्मान का प्रतीक है तथा अशोक चक्र ईमानदारी और न्याय की वास्तविक जीत को दिखाता है।

एकता, शांति और इंसानियत की सीख

हमारा राष्ट्रीय ध्वज हमें एकता, शांति और इंसानियत की सीख देता है। इसके साथ ही यह सच्चाई और एकता के प्रति हमारे विश्वास को बढ़ाने में भी मदद करता है। यह हर वर्ष 15 अगस्त को भारत के प्रधानमंत्री द्वारा और 26 जनवरी को देश के राष्ट्रपति द्वारा इसे फहराया जाता है। हालाँकि, भारत के लोगों को संबोधित करने के दौरान ये दोनों के द्वारा लाल किले पर फहराया जाता है।

खादी के कपड़े से बना राष्ट्रध्वज

हमारा राष्ट्रीय ध्वज खादी के कपड़े से बना होता है, ये एक हाथ से बना हुआ कपड़ा है जिसकी पहल महात्मा गाँधी द्वारा की गयी थी। खादी के अलावा किसी दूसरे कपड़े से बने तिरंगे को भारत में फहराने की बिल्कुल इजाजत नहीं है।

निष्कर्ष

राष्ट्रीय ध्वज को राष्ट्रीय पर्वों पर काफी उत्साह और जोश के साथ फहराया जाता है जैसे गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस आदि। भारतीय ध्वज को सम्मान और आदर करने के लिये तथा विद्यार्थियों को प्रेरणा देने के लिये स्कूल और शिक्षण संस्थानों (कालेज, विश्वविद्यालय, खेल कैंप, स्कॉऊट कैंप आदि) में भी फहराया जाता है।

 

भारत के राष्ट्रीय ध्वज़ पर निबंध 4 (350 शब्द)

प्रस्तावना

हजारों लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के अथक प्रयास से लंबे संघर्ष के बाद भारत को आजादी मिली। 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजी शासन से भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हुयी। आजादी मिलने के कुछ दिनों पहले 22 जुलाई 1947 (संविधान सभा के सम्मेलन में) को भारत के राष्ट्रीय ध्वज को एकता और विजय के प्रतीक रुप में अंगीकृत किया गया।

हमारा राष्ट्रीय ध्वज

हमारा राष्ट्रीय ध्वज तीन रंगों का है इसलिये इसे तिरंगा झंडा भी कहते हैं। हमारा राष्ट्रीय ध्वज हमारे लिये हिम्मत और प्रेरणा का एक प्रतीक चिन्ह है। ये हमें हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों के विषय में याद दिलाता है। ये हमें इस बात का अहसास दिलाता है कि हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को स्वतंत्रता प्राप्ति के लिये ना जाने कितने संघर्ष करने पड़े होगें। हमें हमेशा अपने राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करना चाहिये और अपनी मातृभूमि के लिये कभी भी इसे झुकने नहीं देना चाहिये।

राष्ट्रीय ध्वज का रंग

हमारा राष्ट्रीय ध्वज केसरिया, सफेद और हरे रंग की तीन पट्टियों के साथ क्षितिज के समांतर दिशा में डिज़ाइन किया गया है। बीच की सफेद पट्टी में एक नीले रंग का अशोक चक्र बना हुआ है जिसमें 24 तीलियाँ हैं। सभी तीन रंग, अशोक चक्र और 24 तीलियों के अपने मायने हैं। सबसे ऊपर का केसरिया रंग लगन और त्याग का प्रतीक है, सफेद पट्टी शांति और सौहार्द को इंगित करती है तथा सबसे नीचे की हरी पट्टी युवा और ऊर्जा को प्रदर्शित करती है। जबकि, अशोक चक्र (अर्थात् अशोक का पहिया) शांति और हिम्मत का प्रतीक है।

राष्ट्रीय ध्वज फहराने के नियम

हमें राष्ट्रीय ध्वज को फहराते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:-

  • राष्ट्रीय ध्वज फहराने के नियमों को सख्ती के साथ पालन करना चाहिए।
  • कभी भी खराब या क्षतिग्रस्त ध्वज को फहराना नहीं चाहिए।
  • राष्ट्रीय ध्वज का किसी तरीके के सजावटी कार्य में उपयोग नही करना चाहिए।
  • तिरंगे का आकार हमेशा 3:2 के अनुपात में होना चाहिए।

निष्कर्ष

हमारा राष्ट्रीय ध्वज खादी के कपड़े से बना हुआ है जो कि हाथ से बुना हुआ कपड़ा होता है इसकी शुरुआत महात्मा गाँधी के द्वारा की गयी थी। इसके निर्माण की सभी प्रक्रिया और डिज़ाइन के विशेष विवरण को भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा तय किया जाता है। हमारे देश में खादी के अलावा किसी भी दूसरे कपड़े से तिरंगा बनाने की सख्त मनाही है।


 

भारत के राष्ट्रीय ध्वज़ पर निबंध 5 (400 शब्द)

प्रस्तावना

तीन रंगों का होने के कारण हमारे देश के राष्ट्रीय ध्वज को तिरंगा झंडा के नाम से जाना जाता है। इसमें क्षितिज के समांतर दिशा में तीन रंग की पट्टियाँ होती है, सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और सबसे नीचे की पट्टी में हरा रंग होता है। बीच की सफेद पट्टी में एक अशोक चक्र (धर्म चक्र भी कहा जाता है) होता है। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को पहली बार संविधान सभा द्वारा 22 जुलाई 1947 को अंगीकृत किया गया था। राष्ट्रीय ध्वज की लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 का है।

ध्वज कोड की स्थापना

अनुचित प्रयोग की रोकथाम धारा 1950 और अपमान की रोकथाम के लिये राष्ट्रीय सम्मान की धारा 1971 के तहत ही इसके इस्तेमाल और प्रदर्शन को निर्धारित किया जाता है। भारतीय ध्वज के सम्मान और आदर के लिये सभी कानून, प्रथा और निर्देशों के नियमन करने के लिये वर्ष 2002 में भारत के ध्वज कोड की स्थापना की गयी थी।

भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के लिये वर्ष 1921 में महात्मा गाँधी के द्वारा पहली बार भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को प्रस्तावित किया गया था। पिंगली वैंकया के द्वारा पहली बार तिरंगे झंडे को डिज़ाइन किया गया था। ऐसा माना जाता है कि हिन्दू और मुस्लिम जैसे दोनों धर्मों के सम्मान के लिये केसरिया और हरे रंग की पट्टी की घोषणा की गयी थी। बाद में सफेद पट्टी को बीच में दूसरे धर्मों के लिये आदर के प्रतीक के रुप में घूमते हुए पहियों के साथ जोड़ा गया था।

झंडे का डिज़ाइन

भारत की आजादी के पहले ब्रिटिश शासन से आजादी प्राप्ति के लिये भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के पहले से कई सारे भारतीय झंडे को डिज़ाइन किया गया था। अंततः राष्ट्रीय ध्वज के मौजूदा डिज़ाइन को आधिकारिक रुप से अंगीकृत किया गया। ध्वज को सिर्फ सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराया जाता है। जब विशेष अवसर होते हैं तो इन्हें रात को भी फहराया जाता है।

निष्कर्ष

पूर्व में इसे आम लोगों द्वारा फहराने पर मनाही थी और किसी राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान इसे केवल सरकारी अधिकारियों द्वारा ही फहराया जा सकता था हालाँकि बाद में अपने परिसर के अंदर राष्ट्रीय ध्वज को आम लोगों द्वारा फहराने की भी अनुमति प्रदान की गई। हमारा राष्ट्र ध्वज हमारी मातृभूमि के एकता और सम्मान का प्रतीक है। इसलिये हम सभी को हमेशा अपने राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करना चाहिये और कभी भी इसके सम्मान पर आंच नही आने देना चाहिए।


 

भारत के राष्ट्रीय ध्वज़ पर निबंध 6 (500 शब्द)

प्रस्तावना

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को तिरंगा झंडा भी कहा जाता है। 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा के सम्मेलन के दौरान इसे पहली बार आधिकारिक रुप से अंगीकृत किया गया। अंग्रेजी हुकूमत से भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति के 24 दिन पहले ही इसे अंगीकृत किया गया था।

भारत के राष्ट्रीय ध्वज को पिंगाली वैंकया द्वारा डिज़ाइन किया गया था। इसे एक बराबर अनुपात में, ऊर्द्धवाकार में केसरिया, सफेद और हरे रंग की पट्टी के साथ डिज़ाइन किया गया था। इसमें सबसे ऊपर की पट्टी में केसरिया, बीच में सफेद और सबसे नीचे की पट्टी में गाढ़ा हरा रंग है। तिरंगे झंडे की लंबाई और चौड़ाई सदैव 3:2 के अनुपात में ही होनी चाहिए। तिरंगे के मध्य सफेद पट्टी में 24 तीलियों के साथ एक अशोक चक्र है। यह अशोक चक्र सारनाथ के अशोक स्तंभ से लिया गया है।

राष्ट्रीय ध्वज का महत्व

हम सभी के लिये हमारे राष्ट्रीय ध्वज का बहुत महत्व है। सभी रंगों की पट्टियाँ, पहिया और तिरंगे में इस्तेमाल होने वाले कपड़े का अपना महत्व है। भारतीय ध्वज कोड इसके इस्तेमाल और फहराने के नियम को निर्धारित करता है। भारत की आजादी के 52 वर्ष के बाद भी इसे आम लोगों के द्वारा प्रदर्शन या फहराने की इजाजत नहीं थी हालाँकि बाद में नियम को बदला गया (ध्वज कोड 26 जनवरी 2002 के अनुसार) इसे घर, कार्यालय और फैक्टरी में कुछ खास अवसरों पर इस्तेमाल करने की छूट दी गयी है।

राष्ट्रीय ध्वज को राष्ट्रीय अवसरों पर फहराया जाता है जैसे गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस आदि। भारतीय ध्वज का सम्मान और आदर करने के लिये तथा विद्यार्थियों को प्रेरणा देने के लिये इसे स्कूल और शिक्षण संस्थानों (कॉलेज, विश्वविद्यालय, खेल कैंप, स्कॉऊट कैंप आदि) में भी फहराया जाता है।

खादी के कपड़े से बना राष्ट्रीय ध्वज

स्कूल और कालेज में ध्वजारोहण के दौरान विद्यार्थी तिरंगे के सामने प्रतिज्ञा लेते हैं और राष्ट्र-गान गाते हैं। सरकारी और निजी संगठन भी किसी भी अवसर या कार्यक्रम में राष्ट्रीय ध्वज को फहरा सकते हैं। किसी भी सांप्रदायिक और निजी फायदे के लिये राष्ट्रीय ध्वज को फहराने की सख्त मनाही है। किसी को भी खादी के अलावा किसी दूसरे कपड़े से बने तिरंगे को फहराने की अनुमति नहीं है ऐसा करने पर जेल और अर्थदंड प्रावाधान है।

राष्ट्रीय ध्वज को किसी भी मौसम में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच में फहराया जा सकता है। इसे जमीन से स्पर्श कराने या पानी में डुबाने, तथा जानबूझकर अपमान करने की सख्त मनाही है। कार, बोट, ट्रेन या हवाई जहाज जैसे किसी भी सवारी के बगल, पिछले हिस्से, सबसे ऊपर या नीचे को ढकने के लिये इसका प्रयोग नहीं होना चाहिये।

निष्कर्ष

हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा हमारे देश के सांस्कृतिक विरासत, सभ्यता और इतिहास को दर्शाता है। हवा में लहराता हुआ तिरंगा हमारी आज़ादी का प्रतीक है। यह हम भारतीय नागरिकों को उन स्वतंत्र सेनानियों की याद दिलाता है, जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत से लड़ते हुए देश के लिए बलिदान दिया।


भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के महत्व पर निबंध 7 (600 शब्द)

प्रस्तावना

भारत का राष्ट्रीय  झंडा जो की तिरँगा के नाम से जाना जाता है और यह हमारे राष्ट्र के गौरव का प्रतिक है। यह भारतीय गणराज्य का एक महत्वपूर्ण और अभिन्न अंग है। तिरंगा हमारे देश के एकता और अखंङता को दर्शाता को है इसी कारणवश देश के सभी नागरीक इसका सम्मान करते हैं।

तिरँगा देश के सभी सरकारी भवनों पे फहराया जाता है। गणतंत्र दिवस, स्वतन्त्रा दिवस और गांधी जंयती जैसे अवसरो पऱ तिरंगा फहराना एक सामान्य प्रथा है।

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का महत्व

हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा हमारे देश के सांस्कृतिक विरासत, सभ्यता और इतिहास को दर्शाता है। हवा में लहराता हुआ तिरंगा हमारी आज़ादी का प्रतिक है। यह हम भारतीय नागरिको को उन स्वतंत्र सेनानियों की याद दिलाता है, जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत से लड़ते हुए देश के लिए बलिदान दिया।

इसके साथ ही यह हमे विनम्र रहने की भी प्रेरणा देता है तथा हमारे स्वतन्त्रा और आजादी के महत्व को दर्शाता है, जो हमे इतने अथक प्रयासों के बाद मिली है।

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को तिरंगा कहते हैं क्योंकि इसमें तीन रंग केसरिया, सफेद और हरा समाहित हैं। इसमें से सबसे उपर केसरिया रंग तटस्थता को दर्शता है, जिसका अर्थ है कि हमारे देश के नेताओ को सभी  भौतिकवादी चीजो से तटस्थ रहना चाहिये और राष्ट्र की सेवा उनकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिये। इसके बाद मध्य में आता है सफेद रंग जोकि सत्य और पवित्रता को दर्शता है, जिसका अर्थ है कि हमे सदैव सत्य के मार्ग पर चलना चाहिये।

तिरंगे के सबसे निचले हिस्से मे हरा रंग होता है जोकि हमारे देश की मिट्टी और प्राकृतिक धरोहर को दर्शाता है। इसके साथ ही तिरंगे के मध्य मे अशोक चक्र का चिन्ह अंकित है जोकि धर्म के नियम को प्रदर्शित करता है, यह दर्शाता है कि धर्म और सदाचार राष्ट्र सेवा के मुख्य गुण है। इसके साथ ही यह हमें जीवन मे चुनौतियो और कठिनाइयों के को पार करके निरन्तर आगे बढने की प्रेरणा देता है।

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का इतिहास

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का इतिहास बहुत ही रोचक है, सन् 1921 में भारतीय स्वाधीनता संर्घष के दौरान सर्वप्रथम महात्मा गाँधी के मन में भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के लिये एक झंण्डे का विचार आया। इस झंण्डे के मध्य में चरखे का घूमता हुआ पहिया बना हुआ था। जोकि गाँधी जी के देशवासियों को चरखे द्वारा खादी कातकर उससे कपडे बनाकर स्वालम्बित बनने के लक्ष्य को दर्शाता था, समय के साथ इसमे कई परिवर्तन आये और भारत के आजादी के समय इसमे और कई बदलाव किये गये। जिसमें चरखे के पहियें को अशोक चक्र से परिवर्तित कर दिया गया, जोकि धर्म चक्र को प्रदर्शित करता करता है।

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के नियमानुपालन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

भारतीय गणराज्य के प्रत्येक व्यक्ति से भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के आदर और सम्मान करने की अपेक्षा रखी जाती है। इसी कारणवश राष्ट्रीय ध्वज के अनादर को रोकने को लिये कुछ नियम-कानून बनायें गये  है। इन्ही में से कुछ नियम क्रमशः नीचे दिये गये हैं।

  • लहराये जाने वाला तिरंगा सिर्फ खादी या हाँथ से बुने हुये कपडे से बनाया जा सकता है, अन्य किसी प्रकार के वस्तु से बनाया हुआ तिरंगा कानून के तहत दंडनीय है।
  • समारोह के दौरान तिरंगा ध्वजवाहक द्वारा सिर्फ दाहिनें कन्धे पे धारण किया जा सकता है और ध्वजयात्रा सदैव समारोह के सामने से निकाली जानी चाहियें।
  • तिरंगा हमेशा उंचा लहराया जाना चाहिये, यह कीसी वस्तु के सामने झुका नही होना चाहीये।
  • अन्य कोई झण्डा तिरंगे से उपर या इसके बराबर नही लहराया जा सकता।
  • जब भी तिरंगा फहराया जा रहा हो, तो वहा मौजूद लोगो को सावधान मुद्रा मे खड़े होकर तिरंगे का सम्मान करना आवश्यक है।
  • मस्तूल की आँधी ऊँचाई पर फहराया हुआ तिरंगा शोक को प्रदर्शित करता है, यदि अपने सेवाकाल के दौरान राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति या प्रधानमंत्री की मृत्यु हो जाती है तो देश भर में तिरंगा आँधे मस्तूल तक ही फहराया जाता है।

निष्कर्ष

हमारा राष्ट्रीय ध्वज हमारे गौरव का प्रतीक है, हमे हर कीमत पर इसके गरिमा की रक्षा करनी चाहिये। तिरंगा सदैव ऊँचा फहराया होना चाहिये क्योंकि ये हमारी उस आजादी का प्रतीक है, जो हमे इतने वर्षो के संर्घषो और बलिदानों के बाद मिली है।


 

भारत के राष्ट्रीय ध्वज़ पर बड़ा निबंध 8 (800 शब्द)

प्रस्तावना

22 जुलाई 1947 को हमारा राष्ट्रीय ध्वज अस्तित्व में आया। इससे पहले कई ध्वज बने और उन में ढ़ेरों बदलाव हुए और अंतः हमें एक ऐसा ध्वज प्राप्त हुआ जो अपने आप में पूरे राष्ट्र को दर्शाता है। हमारा ध्वज हमें प्रेरित करता है कि हम सब भारतवासियों के बीच सदैव भाईचारे की भावना हो, हम सभी धर्मों का आदर करें और सदैव प्रगती के पथ पर अथक और निश्छल भाव से आगे बढ़ते चलें।

हमारे राष्ट्रीय ध्वज के रंगों का अर्थ

हमारे राष्ट्रीय ध्वज में तीन रंग हैं, जो की अलग-अलग बातें दर्शाती हैं जैसे की -

  • केसरिया: यह रंग साहस और जोश का प्रतीक है। यह हमे अपने वीरों के बलिदानों की याद दिलाता है, जैसा की रक्त का रंग लाल होता है और आज़ादी के ज़ग में लाखों योद्धा कुर्बान हुए, इसलिए उनकी याद में पहले रंग को केसरिया रखा गया।
  • सफ़ेद: दूसरा रंग है सफ़ेद, जो सच्चाई एवं स्पष्टता का प्रतीक है। इसकी तुलना भारतवासियों से की गई है, जो हृदय के स्पष्ट होते हैं और साथ-साथ यह रंग देश में मौजूद विभिन्न धर्मों का भी सूचक है और यह सारे धर्मों में व्याप्त एकता को दर्शाता है।
  • हरा: अंतिम रंग है हरा, जो भारत के खेत-खलिहानों का प्रतीक है, जैसा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहां कि ज्यादातर आबादी की जीविका कृषि पर आधारित है, इसलिए अंतिम रंग को कृषकों को समर्पित कर ये बताया गया है कि कृषि भारत का एक अभिन्न अंग है।
  • अशोक चक्र: सफेद रंग पर मौजूद चक्र, जिसमें 24 तिल्लियां हैं, हमारे 24 घंटो को दर्शाता है और साथ-साथ भारत को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते हुए दिखाता है एवं हमे बिना थके आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी करता है। इस चक्र को अशोक स्तंभ से लिया गया है।

हमारे राष्ट्रीय ध्वज का सफ़र

  • पहला राष्ट्रीय ध्वज का सर्वोत्तम विचार गांधी जी के मन में आया था और पहली बार भगिनी निवेदिता द्वारा इसे चित्रित किया गया था, जो स्वामी विवेकानंद की शिष्या थी। इस तिरंगे को कांग्रेस के पारसी बगान चौक में हुए अधिवेशन में फहराया गया। इस ध्वज में तीन रंग थे, लाल, पीला और हरा, जिसमें से हरे रंग पर आठ कमल के फूल थे और नीचे के लाल पट्टी पर सूरज़ और चांद बने थे और बीच में मौजूद पीले पट्टी पर वंदेमातरम लिखा था।
  • दूसरा ध्वज मैडम कामा जी एवं कुछ क्रांतिकारियों द्वारा पेरिस में फहराया गया था, यह पहले ध्वज के जैसा ही था, बस इसमें आठ कमल के फूल की जगह केवल एक कमल का फूल था।
  • तीसरा ध्वज़: डॉ. एनी बीसंट और लोकमान्य तिलक ने एक नए घरेलू शासन आंदोलन मे फहराया था, जिसमें 4 लाल और 4 हरी पट्टियां थीं और सप्तऋषियों के सात सितारे बने थे। उपरी किनारे पर एक ओर सफेद अर्धचंद एंव सितारा बना था तो वही दूसरी तरफ यूनियन जैक।
  • चौथा ध्वज़: आंध्र प्रदेश में स्थित विजयवाड़ा का एक युवक पिंगली वैंकैया ने वहां सम्पन्न कांग्रस के एक अधिवेशन में, चौथा ध्वज बनाकर गांधी जी को दिया। इस ध्वज में केवल दो रंग थे, लाल और हरा जो राष्ट्र के दो प्रमुख धर्मों को दर्शाते थे। गांधी जी के सुझाव के अनुसार उसमें बाकी धर्मों का सूचक, एक सफेद पट्टी भी होनी चाहिए और राष्ट्र के प्रगति का सूचक एक चलता हुआ चरखा होना चाहिए।
  • मौजूदा ध्वज: इस प्रकार 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा द्वारा हमारे वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज को अपनाया गया। इसमें चलते चरखे के स्थान पर अशोक चक्र को अपनाया गया। इस ध्वज को कांग्रेस पार्टी एवं स्वतंत्र भारत का राष्ट्रीय ध्वज घोषित किया गया।

राष्ट्रीय ध्वज संबंधी कुछ नियम व जानकारियां

  • हमारा राष्ट्रीय ध्वज केवल खादी का बना होता है, जिसमें कच्चे माल के रूप में रेशम, कपास और ऊन का ही इस्तेमाल किया जा सकता है और इसकी लंबाई एवं चौड़ाई का अनुपात 3:2 का होता है।
  • ध्वज को बनने के बाद बीआईएस के प्रयोगशाला भेजा जाता है, जहां इसकी बनावट, बुनावट, रंगाई, छपाई की बारीकी से जांच की जाती है और उसके बाद ही इसे बेचा जाता है।
  • चाहे कोई भी मौसम हो, ध्वज को सदैव सूर्यास्त के पश्चात उतार देना चाहिए। कुछ विशेष परिस्थितियों में, सरकारी कार्यालयों पर इन्हे रखा जा सकता है।
  • ध्वज को कभी धरती या ज़मीन पर नहीं रखा जाना चाहिए, ऐसा करना ध्वज का निरादर माना जाता है।
  • आप कभी भी ध्वज का प्रयोग किसी पोशाक (कमर से नीचे के भाग के लिए) के रूप में या पर्दे, किसी वस्तु को ढ़कने के लिए नहीं कर सकते।
  • ध्वज को कभी भी झुका के नहीं रखना चाहिये, ऐसा किसी शोक के समय किया जाता है, जैसे की राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री की मृत्यु आदि के समय।
  • ध्वज के क्षतिग्रस्त या मैले हो जाने पर, उसे इधर-उधर फेकने के बजाए उसे उचित सम्मान के साथ गंगा में विसर्जित कर दिया जाए।

निष्कर्ष

हमारा ध्वज हमारा अभिमान है, जो हमें अपने गौरव पूर्ण इतिहास का स्मरण कराता है। हम इसे अपने आजादी का तोहफा भी कह सकते हैं और यही वजह है कि हम इसे इतने जतन से रखते हैं, इतना मान-सम्मान देते हैं और हम भारतवासी यह प्रतिज्ञा करते हैं कि विश्व पटल पर इसके मान-सम्मान को बढ़ाने का अथक प्रयास करते रहेंगे।

 

 

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