दिवाली पर कविता

दिवाली प्रमुख हिंदू त्योहारों में से एक है। यह प्रकाश का त्योहार है, यही कारण है इस दिन चारो ओर उजियारा ही देखने को मिलता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन प्रभु श्री राम 14 वर्ष के वनवास के पश्चात अयोध्या वापस लौटे थे और उन्हीं के स्वागतोत्सव में इस दिन अयोध्या वासियों द्वारा घी के दीपक जलाये गये थे।

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आमतौर पर दिवाली के त्योहार की तैयारी कई दिन पहले शुरु हो जाती है और लोग अपने घरो, दुकानो तथा कार्यलयों की साफ-सफाई के कार्य में लग जाते है। दिपावली के दिन को देवी लक्ष्मी की कृपा और पूजा-अर्चना वाला दिन भी माना जाता है, इसलिए इस दिन लोगो द्वारा काफी खरीददारी भी की जाती है। यही कारण है, इसे देश के सबसे बड़े व्यापारिक पर्वो में से एक माना जाता है।

दिवाली पर कवितायें (Poems on Diwali in Hindi)

ऐसे कई अवसर आते हैं जब आपको दिवाली पर आधारित कविताओं, भाषणों तथा निबंधों की आवश्यकता पड़ती है। यदि आपको भी ऐसे ही सामग्रियों की आवश्यकता है, तो परेशान मत होइये हमारे वेबसाइट पर दिवाली से जुड़ी कई कविताएं तथा अन्य सभी सामग्रियां उपलब्ध है। जिनका आप अपने आवश्यकता अनुसार उपयोग कर सकते हैं।

दिवाली जैसे विशेष त्योहार के महत्व को देखते हुए इन कविताओं को तैयार किया गया है। जिनके माध्यम से आप अपनी भावनाओं को प्रकट कर सकते हैं। इन कविताओं के द्वारा हमने दिपावली के महत्व को समझाने का प्रयास किया है।

 

'दिवाली का त्योहार'

 

आ गया दिवाली का त्योहार,

लाया सबके लिए खुशियों की भरमार।

 

हमारा यह दिवाली का त्योहार,

लाता सबके लिए खुशिया और प्यार।

 

अपनो को पास ले आता,

बिछड़ो और रुठो से मिलाता।

 

आओ सब मिलकर इसे मनाये,

खुशियो के सब दिप जलायें।

 

 

इस दिन चारो ओर होता उजियाला,

इस दिन हर ओर सजती खुशियों की माला।

 

इस पर्व की मनमोहक छंटा निराली,

हर ओर फैली यह दिपों की आवली।

 

पर इस बार हमें यह करना है संकल्प,

इको फ्रेंडली दिवाली है पर्यावरण रक्षा का विकल्प।

 

इस बार हमें यह उपाय अपनाना है,

पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाना है।

 

तो आओ मिलकर झूमे गाये,

दिवाली का यह त्योहार मनाये।

-------Yogesh Kumar Singh

 

'दिवाली की खुशियाँ'

 

आओ सब मिलकर दिवाली मनाते है,

साथ मिलकर खुशी के गीत गाते है।

 

इन रंगबिरंगे दिपो को जलाते है,

दिवाली की मनमोहक खुशियाँ मनाते है।

 

दिवाली का यह त्योहार अनोखा,

जो लाता है खुशियों का झरोखा।

 

इस दिन सब-सबको गले लगाते है,

सारे गिले-शिकवों को भूलाते है।

 

यह दिन बिछड़ो को अपनों से मिलाता है,

छुट्टी का यह दिन अपनो को पास लाता है।

 

इसी लिए तो इसे कहते हैं दिपो की आवली,

क्योंकि इसकी मनमोहक खुशिंया है निराली।

 

सब मिलकर मानते हैं दिवाली का यह त्योहार,

क्योंकि यह विशेष त्योहार वर्ष में आता एक बार।

 

जहा देखो हर ओर दीपक और पटाखे जल रहे,

हर ओर खुशियों की छंटा बहार को मिल रही।

 

तो आओ हम सब मिलकर खुशियों के दीप जलाये,

दिवाली के इस त्योहार को अपने ह्रदय में बसाये।

-------Yogesh Kumar Singh

 

 

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