बच्चा मनुष्य का पिता होता है: अर्थ, उदाहरण, उत्पत्ति, विस्तार, महत्त्व और लघु कथाएं

अर्थ (Meaning)

यह कहावत 'बच्चा मनुष्य का पिता होता है' ख़ास तौर पर बताता है कि जो भी गुण और व्यक्तित्व लक्षण हम एक बच्चे के तौर पर प्राप्त करते हैं वह बड़े होने के साथ उसी तरह से साथ रहता है। एक बच्चे के रूप में, यदि आप बाहर जाकर जंगल में घूमना पसंद करते हैं, तो निश्चित रूप से इस बात की पूरी संभावना है कि जब आप बड़े होंगे तब भी आपको यही काम पसंद आएगा।

उदाहरण (Example)

किसी भी कहावत का सही मतलब समझने के लिए उदाहरण सबसे बेहतर तरीका होता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए मैं इस कहावत 'बच्चा मनुष्य का पिता होता है' पर आधारित कुछ ताजा उदाहरण आपके लिए लेकर आया हूँ जो इस कहावत को बेहतर तरह से समझने में आपकी मदद करेगा।

"पीटर जब बच्चा था तब, उसे जब भी मौका मिलता वह बाइक चलाने निकल पड़ता था, कुछ ऐसा है कि आज भी वो इसका काफी शौक़ीन है। यह सच ही है कि बच्चा मनुष्य का पिता होता है।"

"यह हर कोई जनता है कि राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी, तब से सच्चे, इमानदार, और बेहद अनुशासक थे जब वो छोटे बच्चे थे। उन्होंने यही खूबियाँ बड़े होने पर भी खुद में दिखाई। वास्तव में बच्चा मनुष्य का पिता होता है।"

"स्कूल के दौरान, रोनिल अपने शिक्षकों से अक्सर ही ढेरो सवाल पुछा करता था। अब वह एक वयस्क इन्सान हो गया है, जो भी कर रहा उसमे सफल है, लेकिन उसके अधिकारी हमेशा उसकी शिकायत करते हैं कि वो सवाल बहुत करता है। किसी ज्ञानी ने सच ही कहा है कि बच्चा मनुष्य का पिता होता है।"

"दुनिया के सभी महान बल्लेबाज - सर डॉन ब्रैडमैन, सचिन तेंदुलकर, और अन्य। इन्होने अपने बचपन से ही खेल के प्रति लगाव विकसित किया था, और अपने इस प्यार को कभी छोड़ा नहीं। बच्चा मनुष्य का पिता होता है यह इसका एक सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।"

"विकास, जब छोटा बच्चा था हमेशा गरीब तथा जरुरतमंदों की मदद करता था। इसमें कोई आश्चर्य वाली बात नहीं है कि बड़ा होकर भूखों और जरुरतमंदों के लिए काम करने के लिए वह एक एनजीओ में शामिल हो गया। निश्चित रूप से, बच्चा मनुष्य का पिता होता है।"

उत्पत्ति (Origin)

इस वाक्यांश की उत्पत्ति का पता एक अंग्रेजी कवि विलियम वर्ड्सवर्थ द्वारा लिखी गई कविता "माय हार्ट लीप्स अप" में पायी गयी है। वह कविता 'इंद्रधनुष' के नाम से भी काफी लोकप्रिय थी जिसे वर्ड्सवर्थ द्वारा 1802 में छापी गई थी।

आपके सन्दर्भ के लिए यह कविता यहाँ निचे दी गयी है:

माय हार्ट लीप्स अप व्हेन आई बेहोल्ड ए रेनबो इन द स्काई:

"सो वाज इट व्हेन माय लाइफ बिगन;

सो इस इट नाउ आई ऍम अ मैंन;

सो बी इट व्हेन आई शैल ग्रो ओल्ड;

ऑर लेट मी डाई!

द चाइल्ड इज फादर ऑफ़ द मैंन;

एंड आई कुड विश माय डेज टू बी

बाउंड ईच टू ईच बी नेचुरल पीटी।"

इस कविता में, वर्ड्सवर्थ ने कहा है कि उन्हें अपने बचपन काफी पसंद है; एक वयस्क की तरह वो भी उसके साथ रहना चाहते हैं। वे इन्द्रधनुष को भी बच्चे की तरह ही पसंद करते हैं; कुछ ऐसा जिसे वो अपने वयस्कता में भी काफी पसंद करते हैं।

बाद में वर्ष 2011 में, 'बच्चा मनुष्य का पिता होता है' यह एक अमेरिकी रॉक बैंड 'द बीच बॉयज' के लिए ब्रायन विल्सन और वैन डाइक पार्क्स द्वारा लिखित एक अंग्रेजी गीत का शीर्षक बन गया। ये एक अधूरे एल्बम 'स्माइल' का अधुरा हिस्सा था।

कहावत का विस्तार (Expansion of the Proverb)

यह कहावत 'बच्चा मनुष्य का पिता होता है' बताता है कि व्यक्तित्व लक्षण और मूल्य, तथा अन्य गुण जो आपके पास एक बच्चे के रूप में हैं, इसकी काफी ज्यादा संभावना रहती है कि आप एक वयस्क के रूप में बड़े होने पर भी इन्ही समान गुण और लक्षणों को प्रदर्शित करेंगे।

हालांकि इस कहावत का एक और स्पष्टीकरण हो सकता है जैसा कि लोग दावा करते आये हैं। कुछ लोग इस कहावत को सत्यता और ईमानदारी के आधार पर बचपन तथा वयस्कता से तुलना करते हैं। बच्चे सच्चे होते हैं और अक्सर ही जाने या अनजाने में वो वयस्कों को एक सबक सिखाते हैं। उन्हें लगता है कि यह वाक्यांश बच्चों के इस विशिष्ट व्यक्तित्व गुण को संदर्भित करता है, जो वास्तव में वयस्कों से बेहतर है।

दावे चाहे जो भी हों, लेकिन इस कहावत 'बच्चा मनुष्य का पिता होता है' का सबसे बेहतर और संभावित विस्तार यह है कि आपके पास एक बच्चे के रूप में जो गुण होते हैं वही आपके वयस्क होने के दौरान भी होने की संभावना होगी।

महत्त्व (Importance)

यह कहावत 'बच्चा मनुष्य का पिता होता है' काफी महत्वपूर्ण है और यह जीवन के मूल सिद्धांतों को बताता है कि वयस्कता और कुछ नहीं बल्कि बचपन का एक मंसूबा है। यह हमें बताता है कि एक सफल और खुशनुमा वयस्कता की शुरुवात बचपन से ही हो जाती है। यानी की, हमे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देनी चाहिये, उन्हें प्यार और करुणा दें, उनकी जरूरतों के बारे में विचार करें, उन्हें अच्छे नैतिक मूल्यों से अवगत कराएँ, आदि क्योंकि जब वे बड़े होंते हैं, वे इन्ही अच्छी आदतों को खुद में शामिल करते हैं।

एक बच्चा जिसे ढेर सारा प्यार, दुलार, और अपनापन मिलता है, वास्तव में वह एक प्यारा और ध्यान रखने वाला वयस्क बनेगा। बहुत से प्यारे और ध्यान रखने वाले वयस्क समाज में एक गहरी छाप छोड़ते हैं, वो भी सभी अच्छी वजहों से। यह वाक्यांश बच्चों को सिखाता है कि बच्चे के तौर पर उन्हें अच्छी आदतें सीखनी चाहिए क्योंकि वे बड़े होने पर वे उन्ही आदतों को खुद में शामिल करते हैं। इसलिए, इस वाक्यांश का महत्व यह है कि आप इसे किस तरह से समझते हैं और इसे अपने जीवन में कैसे ढालते करते हैं।

'बच्चा मनुष्य का पिता होता है' पर लघु कथाएं (Short Stories on ‘Child is Father of the Man’)

जैसा की मैं पहले भी बताता आया हूँ कि किसी कहावत के नैतिक गुण को समझने के लिए कहानी एक बेहतर माध्यम होती है। आज मैं आपके लिए कुछ कहानियां लेकर आया हूँ ताकि आप 'बच्चा मनुष्य का पिता होता है' कहावत का मतलब और भी सही तरह से समझ सकें।

लघु कथा 1 (Short Story 1)

एक छोटे बच्चे के तौर पर, रोनिल के पास जब भी वक़्त मिलता वो नजदीक के जंगलों में घूमता रहता था। उसके माता-पिता को उसका जंगल और जानवरों से लगाव पसंद नहीं था, शुरुवात में तो उन्होंने उसे उसकी सुरक्षा को लेकर काफी चेताया। बहुत ही स्पष्ट रूप से उन्होंने सोचा कि उनके बच्चे के लिए जंगलों में जाना सुरक्षित नहीं होगा क्योंकि वहां कई खतरनाक जानवर और सांप आदि हो सकते हैं।

फिर भी, रोनिल जब बड़ा हो गया तो भी उसका जंगल के प्रति प्यार कम नही हुआ। यह समझते हुए, उसके माता-पिता ने बहुत ही समझदारी दिखाई और कभी उसे हतोत्साहित नहीं किया, और इसके विपरीत उसे प्रेरित किया कि वो अपनी कक्षा के साथ सफ़र पर जाये। उन्होंने उसे अपने सफ़र के दौरान हर तरह के सुरक्षा के उपाय और सावधानी बरतने के निर्देश भी दिए। यद्यपि, किसी बच्चे को सही दिशा में ले जाने का यही सही तरीका है। उन्हें कभी उनके सपनों, शौक आदि से हतोत्साहित नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये उनके अन्दर निराशा और विफलता की भवना को जागृत करता है।

रोनिल के बचपन का प्यार उसके वयस्कता के दौरान भी उसके साथ ही रहा। वो उन खुशकिस्मत लोगों में एक था जो हर रोज अपने सपने के साथ जीते है। आज की तारीख में रोनिल एक वन रक्षक है, जो भारतीय वन सेवा के तहत एक बहुत ही सम्मानजनक पद है। हाल ही में उसके पिता उसके कार्यालय में आये थे। उन्होंने देखा कि आज भी रोनिल जंगल और जानवरों के बारे में बात करने पर उतना ही खुश होता है जितना कि वह कई दशक पहले होता था जब वो छोटा था।

रोनिल की कुर्सी के पीछे, यहाँ पर एक पोस्टर लगा हुआ था जिसपर लिखा था 'बच्चा मनुष्य का पिता होता है'। पिता मुस्कुराये और खुद से ही कहे - मैने यह कहावत हजारों बार सुनी थी, मगर रोनिल को धन्यवाद, आज मैं इसका असली मतलब समझ गया।

लघु कथा 2 (Short Story 2)

दक्षिण भारत के पुट्टाबल्दी नामक एक गाँव में मंजुनाथ नाम का एक छोटा लड़का रहता था। ये एक छोटा सा गाँव था जहाँ पर किसानों के कुछ दर्जन भर झोपड़े होंगे जो वहां फसल उगाते थे। इस गाँव में सुविधाओं की काफी कमी थी और गाँव वालों को अपनी रोजमर्रा की जरूरत के सामान के लिए करीब 10 किलोमीटर दूर शहर जाना पड़ता था।

किसी तरह सुविधाओं और पैसे की कमी के चलते, मंजुनाथ के अन्दर चोरी की आदत विकसित हो गयी थी। वह पेंसिल, कागज, खाना, या कुछ भी जहाँ तक वह कर सके उसे चुरा लेता था। सबसे बुरी बात तो ये थी कि, उसकी बीमार माँ और किसान पिता को उसकी इस आदत के बारे में थोड़ी जानकारी थी, मगर वो इसे नजर अंदाज करते थे, यह सोचकर की वक़्त के साथ वो सुधर जायेगा।

चूँकि गाँव छोटा था और वहां पर बच्चे भी कुछ ही थे और इस वजह से स्कूल के शिक्षक की उनपर कड़ी नजर होती थी। स्कूल के एक शिक्षक को मंजू की चोरी वाली आदत का अंदाजा लग गया था। एक दिन शिक्षक ने मंजूनाथ को कहा की वो अपने माता-पिता से कह दे कि वो कल उसके घर आयेंगे। परेशान होते हुए, मंजू अपने घर आया और वह खबर अपने माता-पिता को दे दी।

अगले दिन शिक्षक उसके घर आये और बच्चे को बाहर खेलने को भेज दिया जब तक वो उसके माता-पिता से बात करेंगे। शिक्षक ने मंजुनाथ के माता-पिता से पुछा, क्या वो अपने बच्चे की चोरी वाली आदत से वाकिफ हैं? उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा जब उसके माता पिता ने बताया कि हाँ वो इस बारे में जानते हैं, लेकिन वे सोचते हैं कि बड़ा होने के साथ वो इस आदत को छोड़ देगा। टीचर ने उनके इस दावे को ख़ारिज करते हुए कहा - क्या आपने 'बच्चा मनुष्य का पिता होता है' नहीं सुना है!

जो आदतें और व्यवहार आपका बच्चा आज दिखा रहा है, वो आगे वयस्क होने के बाद भी उन्ही आदतों को जारी रखेगा। अगर आपका लड़का बचपन में ही अपनी चोरी करने की आदत को नहीं छोड़ता है तो यह निश्चित है कि बड़ा होने पर भी वो चोरी करता ही रहेगा। उसके माता-पिता आखिर में बात को समझ गए और शिक्षक को इस सलाह के लिए धन्यवाद दिया। माता-पिता और शिक्षक के मार्गदर्शन में, मंजुनाथ ने चोरी की आदत छोड़ दी और वह एक अच्छा बच्चा बन गया।