अभ्यास मनुष्य को परिपूर्ण बनाता है: अर्थ, उदाहरण, उत्पत्ति, विस्तार, महत्त्व और लघु कथाएं

अर्थ (Meaning)

यह कहावत 'अभ्यास मनुष्य को परिपूर्ण बनाता है' दावा करता है कि जब आप किसी चीज के लिए प्रयास करते हैं तब आप उसपर महारथ हासिल कर लेते हैं। अभ्यास से, इसका मतलब है कि उस चीज को बार-बार करना। यह कुछ भी हो सकता है जैसे, पढ़ाई, खेल, या कोई भी अन्य चीज। अगर आप उस कार्य को लगातार दोहराते रहते हैं तब आप उस निश्चित कार्य या क्षेत्र में श्रेष्ठता हासिल कर लेते है।

आइये एक छात्र का उदाहरण लेते हैं जिसे कुछ ही महीनों के बाद अपने परीक्षा देनी है। प्रायोगिक तौर पर वह गणित विषय में कमजोर है और इस परीक्षा में वह अच्छा प्रदर्शन करना चाहता है। अगर वह गणित का अभ्यास लगातार करता है, तो वह उस विषय में अच्छा हो जायेगा और अच्छे अंक भी हासिल कर लेगा। यही वो बात है जो यह कहावत बताना चाहती है।

उदाहरण (Example)

किसी भी कहावत का सही मतलब समझने के लिए उदाहरण सबसे बेहतर तरीका होता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए मैं इस कहावत 'अभ्यास मनुष्य को परिपूर्ण बनाता है' पर आधारित कुछ ताजा उदाहरण आपके लिए लेकर आया हूँ जो इस कहावत को बेहतर तरह से समझने में आपकी मदद करेगा।

"एक सर्जन, जो नियमित रूप से सर्जरी कर रहा है, वह इतना परिपूर्ण हो जाता है कि मरीज अपनी जिंदगी के लिए उसपर आँख बंद कर के भरोसा कर सकता हैं।"

"एक पायलट को कई सौ घंटों तक अकेले ही उड़ान करनी पड़ती है और तब उसे किसी सार्वजानिक विमान की जिम्मेदारी दी जाती है क्योंकि लगातार अभ्यास उसे इतना परिपूर्ण बना देता है कि दूसरों की जान की जिम्मेदारी उसे दी जा सके।"

"एक सुनार बार बार और लगातार अभ्यास के बाद ही अपनी कला को परिपूर्ण बना पाता है।"

"मेजर ध्यान चंद, इतिहास के सबसे महान हॉकी खिलाड़ी, उन्होंने इस खेल में खुद को इस कदर परिपूर्ण बना लिया था कि लोग उन्हें जादूगर कहते थे। जब वो गेंद को लेकर दौड़ते थे तो ऐसा लगता था गेंद उनके हॉकी स्टिक से चिपक गयी हो। परिपूर्णता के इस स्तर पर वो सिर्फ अपने अभ्यास के बदौलत ही पहुँच पाए थे।"

"सर डॉन ब्रैडमैन, आज तक के सबसे ज्यादा लोकप्रिय बल्लेबाज, बचपन के दिनों में प्रतिदिन कई घंटों तक अभ्यास किया करते थे। उन्होंने इतना कड़ा अभ्यास किया था कि मात्र 12 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने पहला शतक लगाया था।"

उत्पत्ति (Origin)

इस वाक्यांश 'अभ्यास मनुष्य को परिपूर्ण बनाता है' की उत्पत्ति का 1550 के दशक में पता लगता है। उस दौरान एक लैटिन वाक्यांश काफी लोकप्रियता से उपयोग में था - 'उसेस प्रोमटोस फ़ेसिट' जिसका अंग्रेजी में अनुवाद करने पर 'उपयोग परिपूर्ण बनाता है' मतलब निकलता है।

हालाँकि, यह वाक्यांश कहावत के समान ही है, मगर यह बताता है कि किसी चीज़ का बार-बार उपयोग करना इसे परिपूर्ण बनाता है। साथ ही, उस विशेष चीज का उपयोग करने वाले व्यक्ति को इसकी आदत भी हो जाएगी।

सटीक कहावत - 'प्रैक्टिस एक आदमी को पूर्ण बनाती है' एक अमेरिकी स्टेट्समैन और लेखक जॉन एडम्स की डायरी और आत्मकथा में दिखाई दी थी।

कहावत का विस्तार (Expansion of the Proverb)

यह कहावत 'अभ्यास मनुष्य को परिपूर्ण बनाता है' दर्शाता है कि एक व्यक्ति किसी भी चीज पर महारथ हासिल कर सकता है अगर वो नियमित रूप से अभ्यास करता है। यह कहावत हर क्षेत्र में लागू होती है और यह किसी एक चीज पर लागू नहीं होती।

यहाँ पर अभ्यास का मतलब है जो आप हासिल करना चाहते हैं उसका लगातार अभ्यास करना। यह अलग अलग लोगों के लिए भिन्न हो सकता है। छात्रों के लिए, अभ्यास का मतलब है बार-बार पढ़ाई करना; एक खिलाड़ी के लिए, उसके निश्चित खेल का नियमित अभ्यास करना; एक शिक्षक के लिए, छात्रों को पढ़ाना, आदि। ये सभी अपने-अपने क्षेत्र में परिपूर्ण हो जाते हैं सिर्फ नियमित रूप से अभ्यास करते हुए जो भी वे करते हैं।

परिपूर्ण होने का असल मतलब यही है। अगर आप किसी निश्चित वस्तु का नियमित रूप से लगातार, बार-बार अभ्यास करते रहेंगे, आप उस कार्य में परिपूर्ण हो जाते हैं।

महत्त्व (Importance)

यह कहावत 'अभ्यास मनुष्य को परिपूर्ण बनाता है' एक तरह से काफी महत्वपूर्ण कहावत है जो हमें जीवन का सबसे बड़ा सबक सिखाती है। ये हर उस व्यक्ति के लिए सही बैठती है जो अपने क्षेत्र में, अपने सपनों को पूरा कर रहा होता है। सन्देश बहुत ही साधारण सा है - अगर आप किसी विशेष क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं तो आप जो भी कर रहे हैं उसका निश्चित रूप से आपको अभ्यास करना चाहिए।

यह केवल अभ्यास से ही मुमकिन है कि कोई परिपूर्णता तक पहुँच पाए और सफल हो सके। यह कहावत जितनी महत्वपूर्ण छात्रों के लिए हैं उतनी ही कार्यरत पेशेवरों और व्यवसायीयों के लिए भी है।

'अभ्यास मनुष्य को परिपूर्ण बनाता है' पर लघु कथाएं (Short Stories on ‘Practice Makes a Man Perfect’)

जैसा की मैं पहले भी बताता आया हूँ कि किसी कहावत के नैतिक गुण को समझने के लिए कहानी एक बेहतर माध्यम होती है। आज मैं आपके लिए कुछ कहानियां लेकर आया हूँ ताकि आप 'अभ्यास मनुष्य को परिपूर्ण बनाता है' कहावत का मतलब और भी सही तरह से समझ सकें।

लघु कथा 1 (Short Story 1)

भारत के एक गाँव में एक लड़का रहता था। हालाँकि वह एक मेहनती छात्र था, मगर गणित में काफी कमजोर था। वह कितना भी ध्यान लगाकर अपने शिक्षक को सुनता था मगर वह विषय उसकी समझ से बाहर ही था। उनके वास्तविक इरादों के बावजूद, हर कोई, यहाँ तक कि उसके शिक्षक भी, उसका विषय नहीं सुधार पाए। तब, उसके दादा, जो खुद पुराने दिनों में शिक्षक हुआ करते थे, उन्होंने एक योजना बनायीं। उसके दादा को भरोसा था कि वो बच्चे को बेहतर बना देंगे, यहाँ तक कि गणित में भी जिस विषय से उसे सबसे ज्यादा डर लगता था।

उस दादा ने लड़के से रोज एक घंटे, न उससे एक मिनट कम और न ही उससे एक मिनट ज्यादा निकालने को कहा। उस एक घंटे में, दादा जी उस लड़के को गणित पढ़ाएंगे। अपने इस रूटीन को लेकर वो काफी ज्यादा सख्त थे। जो कुछ भी हो जाये वे अपनी कक्षा नहीं भूलते थे, और इसी तरह से एक माह तक चलता रहा।

परीक्षाएं नजदीक आ गयीं। वह लड़का असमंजस में था कि आखिर क्या दोहराया जाए क्योंकि सभी पाठ उसे काफी अच्छे लग रहे थे, उसने अपने नियमित अभ्यास को धन्यवाद दिया। हर कोई आश्चर्यचकित था जब लड़के ने , न केवल अपनी कक्षा में बल्कि पूरे स्कूल में गणित विषय में सबसे ज्यादा नंबर प्राप्त किये। जब उससे उसके इस सफलता का राज पुछा गया तो उसने बताया कि इसका पूरा श्रेय उसके दादा जी को जाता है। उसने यह भी बताया कि हर दिन के अभ्यास की शुरुवात में उसके दादा जी उससे बोलते थे - 'अभ्यास मनुष्य को परिपूर्ण बनाता है'।

लघु कथा 2 (Short Story 2)

एक बार, जापान में रहने वाली एक युवा लड़की जिसके मन में हमेशा से एक गायक बनाने की आकांक्षा थी। गायन उसका शौक था और यही वह चीज थी जो वह हमेशा से करना चाहती थी। उसे एक प्रशिक्षक मिला जो की एक बहुत ही अनुशासक लड़का था। वो लड़की को एक ही गाने को बार-बार, लगातार अभ्यास करने को कहता था, महीनों तक वो भी हर रोज। इससे लड़की काफी ज्यादा हताश हो कर भाग जाती है और गायन को छोड़ने का विचार बना लेती है। एक बार ऐसा होता है कि किस्मत से वो एक ऐसे होटल में खाना खा रही होती जहाँ एक गायन प्रतियोगिता चल रही थी।

उनके मेजबान ने आम जनता में से किसी को भी आकर अपनी पसंद का गाना गान के लिए पुछा। वह लड़की तैयार हो जाती है और वही गाना गाती है जिसमें उसने महीनों अभ्यास किया था। उसका प्रदर्शन इतना शानदार था कि उनके जज ने उससे पुछा कि तुम्हारा प्रशिक्षक कौन है? तब उस लड़की को यह एहसास हुआ कि उसका प्रशिक्षक एक सच्चा मार्गदर्शक था जिसने उसे लगातार अभ्यास कराकर यह परिपूर्णता हासिल कराई। वह लड़की कोई और नही बल्कि मशहूर जापानी गायिका फुबुकी कोशीजी थी।