स्वच्छता पर भाषण

सभी आयामों से हमारे जीवन में स्वच्छता बहुत महत्वपूर्ण है। हमें पूरे जीवनभर इसका ध्यान रखना चाहिए। स्वच्छता की शुरुआत सबसे पहले हमारे घर और स्कूल से बहुत छोटी सी आयु से ही शुरु हो जाती है। यदि हम स्वच्छता को नहीं बनाये रखते तो यह हमें बहुत बुरी तरह से प्रभावित करती है। हम स्वच्छता पर नीचे कुछ छोटे और विस्तृत भाषण उपलब्ध करा रहे हैं। स्वच्छता पर प्रदान किए गए, सभी भाषण विद्यार्थियों की स्कूल या कॉलेज में किसी कार्यक्रम या उत्सव मनाने के दौरान आयोजित की गयी भाषण प्रतियोगिता में अवश्य मदद करेगें। नीचे प्रदान किए गए स्वच्छता पर भाषण विद्यार्थियों के लिए बहुत ही सरल और साधारण वाक्यों का प्रयोग करके लिखे गए हैं। इसलिए, आप कोई भी स्वच्छता भाषण अपनी जरुरत और आवश्यकता के अनुसार चुन सकते हैं:

स्वच्छता पर भाषण

स्वच्छता पर भाषण 1

महोदय, महोदया और मेरे प्यारे मित्रों को सुप्रभात। मेरा नाम........है। मैं कक्षा.......में पढ़ता/पढ़ती हूँ। आज में स्वच्छता पर भाषण देना चाहता/चाहती हूँ। मैनें यह विषय विशेषरुप से हमारे दैनिक जीवन में इसके बहुत अधिक महत्व के कारण चुना है। वास्तव में, स्वच्छता का वास्तविक अर्थ घरों, कार्यस्थलों या हमारे चारों के वातवरण से गंदगी, धूल, मलिनता और गंदी बदबू की पूरी तरह से अनुपस्थिति से है। स्वच्छता बनाये रखने का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य, सुन्दरता, को बनाये रखना आपत्तिजनक गंध को दूर करने के साथ ही गंदगी और मलिनता के प्रसार से बचना है। हम ताजगी और स्वच्छता को प्राप्त करने के लिए अपने दातों, कपड़ों, शरीर, बालों को दैनिक आधार पर साफ करते हैं।

स्वच्छता

हम विभिन्न वस्तुओं को साफ करने के लिए विभिन्न प्रकार के उत्पादकों और पानी का प्रयोग करते हैं। जैसा की हमने स्वंय अपनी आँखों से देखा है कि साफ-सफाई गंदगी और बदबू को हटाने में मदद करती है। हालांकि, जो हमने स्वंय अपनी आँखों से नहीं देखा वो तथ्य है कि यह वस्तुओं से हानिकारक सूक्ष्म जीवाणुओं (जैसे बैक्ट्रीरिया, वायरस, फफूंद, कवक, शैवाल आदि) को हटाने में भी सहायक है। यह हमें स्वस्थ्य रखती है और विभिन्न प्रकार की बीमारियों से दूर रखती है जो हानिकारक जीवाणुओं से फैलती हैं। रोग के रोगाणु सिद्धांत के अनुसार, स्वच्छता से आशय कीटाणुओं की पूरी तरह अनुपस्थिति है। कुछ औद्योगिक प्रक्रियाओं में, विशेष स्वच्छता की आवश्यकता है जो विशेषरुप से साफ कमरों में ही प्राप्त की जा सकती है। गंदगी और बदबू की उपस्थिति से हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली की शक्ति कम हो सकती है।

सामान्यतः दो तरह की स्वच्छता होती है, पहली शारीरिक स्वच्छता और दूसरी आन्तरिक स्वच्छता। शारीरिक स्वच्छता हमें बाहर से साफ रखती है और हमें आत्मविश्वास के साथ अच्छा होने का अनुभव कराती है। मगर, आन्तरिक स्वच्छता हमें मानसिक शान्ति प्रदान करती है और चिंताओं से दूर करती है। आन्तरिक स्वच्छता से आशय मस्तिष्क में गंदी, बुरी और नकारात्मक सोच की अनुपस्थिति से है। हृदय, शरीर और मस्तिष्क को साफ और शान्तिपूर्ण रखना ही पूरी स्वच्छता है। फिर भी, हमें अपने चारों के माहौल को भी साफ रखने की आवश्यकता है ताकि हम साफ और स्वस्थ्य वातावरण में रह सकें। यह महामारी वाले रोगों से दूर रखने और हमें सामाजिक हित की भावना प्रदान करेगी।

यह बहुत पुरानी कहावत है कि “स्वच्छता, भक्ति से भी बढ़कर है”। यह जॉन वैस्ले द्वारा बिल्कुल सही कहा गया है। स्वच्छता को, सभी घरों में बचपन से ही प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि ये छोटे बच्चों के बचपन के अभ्यास से आदत बन जाये और सभी के लिए पूरे जीवन भर लाभकारी रहे। स्वच्छता उस अच्छी आदत की तरह है, जो न केवल एक व्यक्ति को लाभ पहुँचाती है, बल्कि, यह एक परिवार, समाज और देश को भी और इस प्रकार पूरे ग्रह को लाभ पहुँचाती है। इसे किसी भी आयु में विकसित किया जा सकता है हालांकि, बचपन से अभ्यास में रहना सबसे अच्छा है। एक बच्चे के रुप में, मैं सभी माता-पिता से अनुरोध करता/करती हूँ कि, वो अपने बच्चों में इस आदत का अभ्यास कराये क्योंकि वो आप ही जो इस देश को अच्छे नागरिक दे सकते हो।

धन्यवाद।

स्वच्छता ही सबसे बड़ी पहचान है।

स्वच्छता पर भाषण 2

आदरणीय प्राचार्य महोदय, अध्यापक एंव अध्यापिकाएं और मेरे प्यारे साथियों, आप सभी को नमस्कार। मैं कक्षा.......में पढ़ने वाला/वाली विद्यार्थी हूँ जो इस अवसर पर स्वच्छता पर भाषण देना चाहता/चाहती हूँ। स्वच्छता एक बहुत ही अच्छी आदत है, यह हमें शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और बौद्धिक रुप से खुश रखती है। यह बिल्कुल सत्य तथ्य है कि स्वच्छता घर से शुरु होती है। स्वच्छता एक बहुत अच्छे प्रबंध का प्रतीक है, चाहे वो घर, कार्यस्थल, स्कूल, कॉलेज, सरकारी या निजी भवन, होटल, रेस्टोरेंट, हवाई अड्डा, रेलवे स्टेशन आदि क्यों न हो। स्वच्छता का स्तर बहुत ऊंचा होना चाहिए, जो केवल तभी संभव है, यदि सभी मिलकर प्रयास करें। यह केवल एक व्यक्ति का कार्य नहीं है। इसके लिए निरंतर समर्थन और सभी व्यक्तियों के बीच उचित समझदारी की आवश्यकता है।

स्वच्छता अपनी ओर सकारात्मक ऊर्जा को आकृषित करती है और यह प्रत्येक को प्रभावित कर सकती है। विकसित देशों में अच्छे नागरिकों, कड़े सरकारी नियमों, उच्च शिक्षा स्तर और लोगों के बीच में पर्याप्त समझ होने के कारण सफाई का स्तर सामान्य तौर पर बहुत ऊंचा होता है। एक अच्छी आदतों वाला व्यक्ति घर के वातावरण को बदल सकता है हालांकि, अच्छे नागरिकों वाला देश अपने भविष्य के साथ-साथ पूरे ग्रह के वातावरण को बदल सकता है। पूरे संसार में अपनी वास्तविक क्षमता दिखाने के लिए, हमें पूरे देशभर में स्वच्छता को बनाये रखना चाहिए। यह ही केवल वो शक्ति है, जिसके द्वारा सम्मान प्राप्त किया जा सकता है क्योंकि एक बड़ा भू-भाग, शक्ति, और समृद्ध प्राकृतिक संसाधन सफाई के अभाव में बिल्कुल भी मायने नहीं रखता।

किसी भी देश में स्वच्छता को बनाये रखना, शिक्षा के स्तर, गरीबी, देश की जनसंख्या आदि पर निर्भर करता है। सबसे महत्वपूर्ण कारक शिक्षा है क्योंकि अच्छी शिक्षा गरीबी के स्तर को कम कर सकती है और बढ़ती हुई जनसंख्या से राहत प्रदान कर सकती है। यदि देश का नागरिक शिक्षित होगा तो वो पूरे देश में स्वच्छता को बनाये रखेगा। वो अगली पीढ़ी में अपनी अच्छी आदतों को भी हस्तान्तरित कर सकता है। भारत में सरकार द्वारा बहुत से स्वच्छता अभियानों को चलाया जा रहा है हालांकि, निरक्षरता की दर बहुत ज्यादा होने के कारण किसी में भी अधिक सफलता नहीं मिली है। अभी हाल ही में, भारतीय प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी, ने स्वच्छ भारत अभियान नाम से, सफाई अभियान चलाया जो काफी सफल रहा है।

यह बहुत गंभीर विषय है और यदि हम भारत का वास्तव में विकास चाहते हैं, तो हमें अपने देश में स्वच्छता बनाई रखनी पड़ेगी जिसे हम अपने घर से बेहतर ढंग से शुरु कर सकते हैं। हमें यह समझना होगा कि हमारा देश ही हमारा घर है और उसके बाद कोई भी समस्या नहीं होगी। देश का नागरिक होने के नाते, हम सभी उस गंदे स्थान को साफ करने के लिए जिम्मेदार है, जो भी हम देखते हैं। हमें अपनी सड़कों, यात्रा स्थलों, ऐतिहासिक स्थलों, स्कूलों, कॉलेजों, ऑफिसों आदि को बहुत साफ सुथरा रखना चाहिए।

स्वच्छता ही अच्छे स्वास्थ्य की कुंजी है।

धन्यवाद।

स्वच्छता पर भाषण 3

आदरणीय प्रधानाचार्य, शिक्षक, शिक्षिकाएं और मेरे प्रिय सहपाठियों को सुप्रभात। मैं कक्षा.......में पढ़ता/पढ़ती हूँ, और इस महान उत्सव को मनाने के लिए एकत्र हुए आप सभी महानुभावों के सामने स्वच्छता के विषय पर भाषण देने के साथ ही अपनी कक्षा अध्यापिका जी को आभार प्रकट करता/करती हूँ कि उन्होंने मुझे इस अवसर पर अपने विचार आप सभी के सामने रखने का अवसर प्रदान किया। मेरे प्रिय मित्रों, हम सभी अच्छे इंसान है, कोई भी बुरा नहीं है। फिर क्यों हम अपना भविष्य सभी जगहों पर गंदी वस्तुओं और कचरे को फैलाकर बुरा और रोगग्रसित बना रहे हैं। हमारा देश ही हमारा घर है, हमें इसे गंदा नहीं करना चाहिए। हम विदेशों में सभी जगहों एक भारतीय नागरिक के रुप में सम्मानित किए जाते हैं, इसलिए हमारा देश ही इस ग्रह पर हमारी पहचान है। इसे साफ और स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी हमारी है ताकि. यह पूरे विश्व में और अधिक सम्मान प्राप्त कर सके।

हम अपने घरों को साफ रखते हैं, तो फिर पूरे देशभर में अपने स्कूलों, कॉलेजों, सड़कों, कार्यालयों, पर्यटन स्थलों, स्टेशनों आदि को क्यों साफ नहीं रखते। हमें केवल यह याद रहता है कि जहाँ हम रह रहे हैं, वो स्थान हमें साफ रखना है, अर्थात् केवल अपना घर। हमारा घर केवल अपने देश में ही हमारी पहचान है, जबकि देश के बाहर मतलब विदेश में हमारा देश ही हमारी पहचान है। हम इसके जिम्मेदार नागरिक है, तो हमें ही इसे साफ करना ही पड़ेगा किसी और को नहीं। दूसरों से सम्मान प्राप्त करने के लिए, हमें सबसे पहले अपनी सम्पत्ति का आदर करना चाहिए और इसे साफ रखना चाहिए।

हम अपने घरों और धार्मिक स्थानों को साफ रखते हैं और इनके अंदर जूते और चप्पल नहीं पहनते ताकि वो साफ रह सकें। लेकिन, वहीं दूसरी ओर, हम गलत प्रथाओं का अनुसरण करते हैं और सड़कों, कार्यालयों के कोनों आदि में थूकते हैं। हम कचरे को सड़को या कॉलोनी के कोने में फेंकते हैं; ये है क्या? मेरा सवाल सिर्फ यही है कि ये क्या है, मैं यह नहीं कहता/कहती कि केवल मैं ही अच्छा/अच्छी हूँ या मैं कभी इस तरह की गतिविधि में शामिल नहीं हुआ/हुई। मैं तो सिर्फ इतना कहना चाहता/चाहती हूँ कि आखिर कब तक बेसुध रहकर इस तरह की गतिविधियों में शामिल रहेगें। वो दिन कब आयेगा, जब हम हर पल सचेत रहेगें और कोई भी बुरी गतिविधि नहीं हो पायेगी। यदि हम अपने देश को साफ करने का प्रयास नहीं कर रहे तो हम बाहर से आने वाले पर्यटकों को गंदगी करने से कैसे रोक सकते हैं।

मेरे अनुसार, आज से बेहतर कोई दिन नहीं होता। आज खुद से और अपनी मातृ-भूमि से वादा करने का दिन है कि, हम इसे हमेशा साफ रखेगें और भविष्य में इसे कभी भी गंदा नहीं करेगें। अभी सोचो कि, दिवाली पर हमारे घर और पूरा देश कितना सुन्दर लगता, यदि यह हमेशा ऐसा लगे तो क्या हो जायेगा। केवल दिवाली पर की गयी स्वच्छता ही, यदि हमें पूरे वर्ष के लिए आत्मविश्वास, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा दे सकती है, तो फिर सोचो कि, क्या हम हमेशा के लिए पूरे विश्वभर के दूसरे देशों से ये शक्ति, आत्मविश्वास, सकारात्मक ऊर्जा, एक स्वस्थ्य जीवन, एक स्वस्थ्य पर्यावरण और सकारात्मक रुख प्राप्त क्यों नहीं कर सकते।

धन्यवाद।

आओ बनाये स्वच्छ भारत।


 

स्वच्छता पर भाषण 4

सभी महानुभावों, प्राचार्य महोदय, अध्यापक, अध्यापिकाएं और मेरे प्रिय साथियों को मेरा नम्र सुप्रभात। इस अवसर पर मैं स्वच्छता के विषय पर भाषण देना चाहता/चाहती हूँ। मैं अपनी कक्षा अध्यापिका की बहुत आभारी हूँ, जिन्होंने इस अवसर पर भाषण देने के लिए मुझे चुना। यह बहुत ही गंभीर विषय है और जिसके लिए उच्च स्तर की सामाजिक जागरुकता की आवश्यकता है। विकसित देशों के लोग (पश्चिमी यूरोप और उत्तरी अमेरिका) सफाई कर्मचारियों पर निर्भर नहीं रहते क्योंकि वो खुद कभी अपनी सड़कों या अपने चारों ओर के वातावरण को गंदा नहीं करते। वो यह दैनिक आधार पर करते हैं। हमें भी अपने देश को स्वच्छ रखने के लिए इसी तरह के कुछ प्रभावशाली कदम उठाने चाहिए। हमें भी किसी सफाई कर्मचारी का इंतजार नहीं करना चाहिए कि वो झाड़ू उठाकर हमारे आसपास के क्षेत्र और सड़कों को साफ करेगा।

सबसे पहले हमें सार्वजनिक स्थलों को गंदा नहीं करना चाहिए और यदि ये गंदे हो गये हैं तो, हमें इसे साफ करना चाहिए क्योंकि इसके लिए हम ही जिम्मेदार है। इस जिम्मेदारी को सभी भारतीय नागरिकों को समझने की आवश्यकता है। हमें हमारी सोच को बदलने की आवश्यकता है क्योंकि केवल इसी के द्वारा हम भारत को स्वच्छ रख सकते हैं। बहुत से स्वच्छता संसाधन और प्रयास तब तक अधिक प्रभावशाली नहीं होगें तब तक कि हम अपनी सोच नहीं बदलते कि, पूरा देश हमारे घर की तरह है और हमें इसे स्वच्छ रखना है। यह हमारी सम्पत्ति है, न कि दूसरों की। हमें यह समझने की जरुरत है कि, एक देश घर की तरह होता है, जिसमें बहुत से परिवार के लोग संयुक्त परिवार की तरह रहते हैं।

हमें यह मानना चाहिए कि, घर के अंदर की वस्तुएं हमारी अपनी सम्पत्ति है, और उन्हें कभी भी गंदा और खराब नहीं करना चाहिए। इसी तरह, हमें यह भी मानने की आवश्यकता है कि, घर के बाहर, प्रत्येक वस्तु भी हमारी अपनी सम्पत्ति है, और उसे हमें गंदा नहीं करना चाहिए और उन्हें स्वच्छ रखना चाहिए। हम अपने देश की बिगड़ी हुई स्थिति को सामूहिक स्वामित्व की भावना से बदल सकते हैं। संरचनात्मक परिवर्तनों के स्थान पर, औद्योगिक, कृषि, और अन्य क्षेत्रों से कचरे के लिए प्रभावशाली प्लांटों का निर्माण करके, सरकार द्वारा कानूनों और नियमों को बनाया जाना चाहिए; हमें अपनी खुद की जिम्मेदारी को अपनी सोच का प्रयोग करके अपने प्रयासों के द्वारा मानने की आवश्यकता है। यह केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है; यह प्रत्येक और सभी भारतीय नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

यह सत्य है कि, हम पूरे देश को एक दिन या साल में साफ नहीं कर सकते, हालांकि, यदि हम भारत में सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने पर रोक लगाने में ही सफल हो जाते हैं, तो यह भी हमारी बड़ी भागीदारी होगी। यह हमारी जिम्मेदारी है, कि हम स्वंय को रोकने के साथ-साथ उन दूसरे लोगों को भी रोकें जो हमारे भारत को गंदा कर रहे हैं। हम सामान्य तौर पर अपने परिवारों में देखते हैं कि, घर का प्रत्येक सदस्य कुछ विशेष जिम्मेदारी (कोई झाड़ू लगाता है, कोई सफाई करता है, कोई सब्जी लाता है, कोई घर के बाहर के कार्य करता है आदि) रखता है, और उसे यह कार्य समय पर किसी भी कीमत पर करने पड़ते है। इसी तरह, यदि सभी भारतीय अपने आस-पास के चारों ओर के छोटे स्थान के लिए अपनी जिम्मेदारियों (स्वच्छता और गंदगी फैलाने से रोकना) को लेते हैं, तो मेरा मानना है कि वो दिन दूर नहीं, जब हम देश में चारों ओर स्वच्छता को देखेंगे।

स्वच्छता अभियान को शुरु करने से पहले, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम साफ मस्तिष्क को रखते हैं। स्वच्छता न केवल दूसरों से अच्छा प्रभाव प्राप्त करने के लिए आवश्यक है, हालांकि, यह स्वस्थ्य मस्तिष्क, आत्मा और वातावरण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। जैसे हम अपने शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए इसकी देखभाल करते हैं, इसी तरह हमें अपने देश की भी देखभाल करनी चाहिए।

स्वच्छ भारत अभियान (या क्लीन इंडिया मिशन) भारत सरकार द्वारा चलाया जाने वाला स्वच्छता अभियान है जो लगभग भारत के 4,041 शहरों और कस्बों की सड़कों, गलियों और देश की संरचना को बेहतर बनाने के लिए शुरु किया गया है। हमें इस राष्ट्रीय अभियान का आदर करते हुए इसका अनुसरण करना चाहिए और अपने हर संभव सकारात्मक प्रयास के द्वारा इसे सफल करना चाहिए।

धन्यवाद।

 

 

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