स्वच्छता पर भाषण

स्वच्छता हमारे जीवन का अभिन्न अंग है और इसे हम बचपन से सीखते आए हैं और उम्र के साथ ये हमारी आदत बन जाती है। हम बचपन से अन्य व्यवहार जैसे बोलना, चलना सीखते हैं ठीक इसी प्रकार हमें सफाई की भी शिक्षा दी जाती है, इसका उदाहरण आप उस छोटे बच्चे से ले सकते हैं, जिसे जब भी शौच जाना हो तो बिस्तर पर करने के बजाए रोने लगता है। हम चाहे जिस उम्र मे हों स्वच्छता सदैव हमारे साथ चलती है। हमें जीवनभर स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए।

स्वच्छता पर लम्बे तथा छोटे भाषण (Long and Short Speech on Cleanliness in Hindi)

भाषण 1

आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, उप-प्रधानाचार्य महोदय, शिक्षक गण एवं मेरे प्रिय साथियों आज मैं आप सबके सामने स्वच्छता पर कुछ शब्द बोलना चाहती हूं और आशा करती हूं कि आप सबको यह अवश्य ज्ञानवर्धक लगेगा।

स्वच्छता हमारे स्वस्थ जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है और बिना स्वच्छता के जीवन शायद मुमकिन ही नहीं। क्यों कि गंदगी कीटाणुओं का घर होता है और जो विभिन्न प्रकार कि बिमारियों को जन्म देता है। हम बच्चों को शुरु से कुछ अच्छी आदतें सिखाते हैं और अपने वातावरण को भी साफ रखना सिखाते हैं। हमारे शारीरिक स्वच्छता के साथ-साथ आस पास के जगहों कि सफाई भी आवश्यक है।

स्वच्छता

ठीक इसी प्रकार एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते यह हमारा कर्तव्य है कि, हम अपने देश को भी साफ-सुथरा रखें। भारत हमारे घर जैसा है और जैसे हम अपने घर को साफ रखते हैं, वैसे हि हमें अपने देश के बारे में भी सोचना चाहिये। हमारे जीवन में शारीरिक, मानसिक विचारों कि शुद्धी जितनी आवश्यक है उतनी ही आवश्यकता हे हमारे आस-पास कि सफाई। तो एक जिम्मेदार नागरिक बनें और स्वच्छता को अपनाएं।

स्वच्छता अपनाएं और देश को आगे बढ़ाएं।

धन्यवाद।


 

भाषण 2

आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, उप-प्रधानाचार्य महोदय, शिक्षक गण एवं मेरे प्रिय साथियों आज मैं आप सबके सामने स्वच्छता के संबंध में कुछ शब्द बोलना चाहती हूं और उसके महत्व को अपने शब्दों में समझाना चाहती हूं।

स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है और स्वस्थ शरीर, के लिए स्वस्थ वातावरण का होना बहुत जरुरी होता है। हमारा शरीर तभी स्वस्थ रह सकता है, जब हमारा वातावरण भी स्वछ हो और यह हमारा कर्तव्य है कि हमारा देश सदैव साफ रहे।

स्वच्छता बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह बात सच है कि हर बच्चे को अपने घर में स्वच्छता का पाठ पढ़ाया जाता है, पर हमें इसका पालन केवल घर तक सीमित नहीं रखना चाहिये। हमें अपने आस-पास के पर्यावरण और देश के हित में भी स्वच्छता का उपयोग करना चाहिये। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री मोदी जी ने स्वछ भारत अभियान कि शुरुआत की, जिसका मुख्य उद्देश्य देश में स्वच्छता को बढ़ाना और देश में विकास कि गति को आगे बढ़ाना है। देश साफ रहेगा तो बीमारियां कम फैलेंगी और लोग कम बिमार पड़ेंगे। जिससे बीमारियों में देश का कम पैसा खर्च होगा और देश के विकास कि गति और बढ़ जाएगी।

हमें बाहरी स्वच्छता के साथ-साथ आंतरिक स्वच्छता की भी आवश्यकता होती है। आंतरिक स्वच्छता का तात्पर्य हमारे आंतरिक विचारों कि शुद्धी से है। हमें अपने विचारों को साफ रखना चाहिये तथा किसी के लिए मन में द्वेश नहीं रखना चाहिये। जब कोई व्यक्ति बाहरी और आंतरिक सब तरीकों से स्वच्छ होगा, तो उस देश को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। क्यों कि हर कोइ एक दूसरे का भला चाहेगा। इस प्रकार हमने स्वच्छता के सार्वभौमिक विकास के बारे में जाना और आशा करती हूं कि आप इसे अपने व्यवहार में जरुर लाएंगे।

धन्यवाद।

 

भाषण 3

महोदय, महोदया और मेरे प्यारे मित्रों को सुप्रभात। मेरा नाम........है। मैं कक्षा.......में पढ़ता/पढ़ती हूँ। आज में स्वच्छता पर भाषण देना चाहता/चाहती हूँ। मैनें यह विषय विशेषरुप से हमारे दैनिक जीवन में इसके बहुत अधिक महत्व के कारण चुना है। वास्तव में, स्वच्छता का वास्तविक अर्थ घरों, कार्यस्थलों या हमारे चारों के वातवरण से गंदगी, धूल, मलिनता और गंदी, बदबू की पूरी तरह से अनुपस्थिति से है। स्वच्छता बनाये रखने का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य, सुन्दरता, को बनाये रखना आपत्तिजनक गंध को दूर करने के साथ ही गंदगी और मलिनता के प्रसार से बचना है। हम ताजगी और स्वच्छता को प्राप्त करने के लिए अपने दातों, कपड़ों, शरीर, बालों को दैनिक आधार पर साफ करते हैं।

हम विभिन्न वस्तुओं को साफ करने के लिए विभिन्न प्रकार के उत्पादों और पानी का प्रयोग करते हैं। जैसे दांतो कि सफाई के लिए हम दंत-मंजन का प्रयोग करते हैं, पहले के जमाने में लोग नीम के दातून का प्रयोग परते थे। परंतु शहरीकरण के कारण उनकी अनुपलब्धता ने हमे दंत मंजन के उपयोग से वंछित कर दिया है। ठीक इसी प्रकार हम अपने बाल, नाखून, त्वचा सबकी सफाई करते हैं।

क्योंकि हर तरफ कुछ ऐसे कीटाणु होते हैं, जो हमने अपनी आँखों से नहीं दिखते और इन हानिकारक सूक्ष्म जीवाणुओं को (जैसे बैक्ट्रीरिया, वायरस, फफूंद, कवक, शैवाल आदि) को हटाने में सफाई सहायक होती है। स्वच्छता हमें स्वस्थ्य रखती है और विभिन्न प्रकार की बीमारियों को दूर रखती है, जो हानिकारक जीवाणुओं से फैलती हैं। रोग के जीवाणु सिद्धांत के अनुसार, स्वच्छता से आशय कीटाणुओं की पूरी तरह अनुपस्थिति से है। गंदगी और बदबू की उपस्थिति से हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली की शक्ति कम हो सकती है।

सामान्यतः दो तरह की स्वच्छता होती है, पहली शारीरिक स्वच्छता और दूसरी आंतरिक स्वच्छता। शारीरिक स्वच्छता हमें बाहर से साफ रखती है और हमें आत्मविश्वास के साथ सुखद अनुभव कराती है। मगर, आन्तरिक स्वच्छता हमें मानसिक शान्ति प्रदान करती है और चिंताओं से दूर करती है। आंतरिक स्वच्छता से आशय मस्तिष्क में खराब, बुरे और नकारात्मक सोच की अनुपस्थिति से है। हृदय, शरीर और मस्तिष्क को साफ और सब में सैयम बनाए रखना ही पूरी स्वच्छता है। फिर भी हमें अपने चारों को भी साफ रखने की आवश्यकता है ताकि हम साफ और स्वस्थ्य वातावरण में रह सकें। यह महामारी वाले रोगों से दूर रखने और हमें सामाजिक हित की भावना प्रदान करेगी।

यह बहुत पुरानी कहावत है कि “स्वच्छता, भक्ति से भी बढ़कर है”। यह जॉन वैस्ले द्वारा बिल्कुल सही कहा गया है। स्वच्छता को, सभी घरों में बचपन से ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि ये छोटे बच्चों के बचपन के अभ्यास से आदत बन जाये और सभी के लिए पूरे जीवन लाभकारी रहे। स्वच्छता उस अच्छी आदत की तरह है, जो न केवल एक व्यक्ति को लाभ पहुँचाती है, बल्कि, यह एक परिवार, समाज और देश को भी और इस प्रकार पूरे ग्रह को लाभ पहुँचाती है। इसे किसी भी आयु में विकसित किया जा सकता है हालांकि, बचपन से अभ्यास में रहना सबसे अच्छा है। एक बच्चे के रुप में, मैं सभी माता-पिता से अनुरोध करता/करती हूँ कि, वो अपने बच्चों में इस आदत का अभ्यास कराये क्योंकि वो आप ही हैं जो इस देश को अच्छा नागरिक दे सकते हैं।

धन्यवाद।

स्वच्छता ही सबसे बड़ी पहचान है।

 

भाषण 6

सभी महानुभावों, प्राचार्य महोदय, अध्यापक, अध्यापिकाएं और मेरे प्रिय साथियों को मेरा नम्र सुप्रभात। इस अवसर पर मैं स्वच्छता के विषय पर भाषण देना चाहता/चाहती हूँ। मैं अपनी कक्षा अध्यापिका की बहुत आभारी हूँ, जिन्होंने इस अवसर पर भाषण देने के लिए मुझे चुना। यह बहुत ही गंभीर विषय है और जिसके लिए उच्च स्तर की सामाजिक जागरुकता की आवश्यकता है।

विकसित देशों के लोग (पश्चिमी यूरोप और उत्तरी अमेरिका) सफाई कर्मचारियों पर निर्भर नहीं रहते, क्योंकि वो खुद कभी अपनी सड़कों या अपने चारों ओर के वातावरण को गंदा नहीं करते, वे यह दैनिक आधार पर करते हैं। हमें भी अपने देश को स्वच्छ रखने के लिए इसी तरह के कुछ प्रभावशाली कदम उठाने चाहिए। हमें भी किसी सफाई कर्मचारी का इंतजार नहीं करना चाहिए कि वो हमारे आसपास के क्षेत्र और सड़कों को साफ करेगा।

सबसे पहले हमें सार्वजनिक स्थलों को गंदा नहीं करना चाहिए और यदि ये गंदे हो गये हैं तो, हमें इसे साफ करना चाहिए क्योंकि इसके लिए हम ही जिम्मेदार हैं। इस जिम्मेदारी को सभी भारतीय नागरिकों को समझने की आवश्यकता है। हमें हमारी सोच को बदलने की आवश्यकता है क्योंकि केवल इसी के द्वारा हम भारत को स्वच्छ रख सकते हैं। बहुत से स्वच्छता संसाधन और प्रयास तब तक अधिक प्रभावशाली नहीं होगें जब तक कि हम अपनी सोच नहीं बनाते कि, पूरा देश हमारे घर की तरह है और हमें इसे स्वच्छ रखना है। यह हमारी सम्पत्ति है, न कि दूसरों की। हमें यह समझने की जरुरत है कि, एक देश घर की तरह होता है, जिसमें बहुत से परिवार के लोग संयुक्त परिवार की तरह रहते हैं।

हमें यह मानना चाहिए कि, घर के अंदर की वस्तुएं हमारी अपनी सम्पत्ति हैं, और उन्हें कभी भी गंदा और खराब नहीं करना चाहिए। इसी तरह, हमें यह भी मानने की आवश्यकता है कि, घर के बाहर प्रत्येक वस्तु भी हमारी अपनी सम्पत्ति है, और उसे हमें गंदा नहीं करना चाहिए और उन्हें स्वच्छ रखना चाहिए। हम अपने देश की बिगड़ी हुई स्थिति को सामूहिक स्वामित्व की भावना से बदल सकते हैं। संरचनात्मक परिवर्तनों के स्थान पर, औद्योगिक, कृषि, और अन्य क्षेत्रों से कचरे के लिए प्रभावशाली प्लांटों का निर्माण करके, सरकार द्वारा कानूनों और नियमों को बनाया जाना चाहिए; हमें अपनी खुद की जिम्मेदारी को अपनी सोच का प्रयोग करके अपने प्रयासों के द्वारा मानने की आवश्यकता है। यह केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है; यह प्रत्येक भारतीय नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।

यह सत्य है कि, हम पूरे देश को एक दिन या साल में साफ नहीं कर सकते, हालांकि, यदि हम भारत में सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने पर रोक लगाने में ही सफल हो जाते हैं, तो यह भी हमारी बड़ी भागीदारी होगी। यह हमारी जिम्मेदारी है, कि हम स्वंय को रोकने के साथ-साथ उन दूसरे लोगों को भी रोकें जो हमारे भारत को गंदा कर रहे हैं। हम सामान्य तौर पर अपने परिवारों में देखते हैं कि, घर का प्रत्येक सदस्य कुछ विशेष जिम्मेदारी (कोई झाड़ू लगाता है, कोई सफाई करता है, कोई सब्जी लाता है, कोई घर के बाहर के कार्य करता है आदि) रखता है, और उसे यह कार्य समय पर किसी भी कीमत पर करने पड़ते है। इसी तरह, यदि सभी भारतीय अपने आस-पास के छोटे स्थानों के लिए अपनी जिम्मेदारियों (स्वच्छता और गंदगी फैलाने से रोकना) समझते हैं, तो मेरा मानना है कि वो दिन दूर नहीं, जब हम देश में चारों ओर स्वच्छता को देखेंगे।

स्वच्छता अभियान को शुरु करने से पहले, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम साफ मस्तिष्क भी साफ हो। स्वच्छता न केवल दूसरों से अच्छा को प्रभावित करती है, हालांकि, यह स्वस्थ मस्तिष्क, आत्मा और वातावरण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। जैसे हम अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए इसकी देखभाल करते हैं, इसी तरह हमें अपने देश की भी देखभाल करनी चाहिए।

स्वच्छ भारत अभियान (या क्लीन इंडिया मिशन) भारत सरकार द्वारा चलाया जाने वाला स्वच्छता अभियान है जो लगभग भारत के 4,041 शहरों और कस्बों की सड़कों, गलियों और देश की संरचना को बेहतर बनाने के लिए शुरु किया गया है। हमें इस राष्ट्रीय अभियान का आदर करते हुए इसका अनुसरण करना चाहिए और अपने हर संभव सकारात्मक प्रयास के द्वारा इसे सफल करना चाहिए।

धन्यवाद।