स्वतंत्रता दिवस पर भाषण

यहाँ पर हम स्कूल जाने वाले छोटे बच्चे और विद्यार्थियों के लिये भारत के स्वतंत्रता दिवस पर कई प्रकार का भाषण उपलब्ध करा रहे है। किसी भी दिये गये भाषण का इस्तेमाल कर स्वतंत्रता दिवस उत्सव में विद्यार्थी सक्रियता से भाग ले सकते है। विद्यार्थीयों के लिये सभी भाषण (इंडिपेंडेंस डे स्पीच) बेहद आसान और सरल भाषा में लिखे गये है जिससे कि वो भारतीय स्वतंत्रता दिवस पर अपना बेहतरीन भाषण प्रस्तुत कर सकें।

स्वतंत्रता दिवस पर बड़े और छोटे भाषण (Long and Short Speech on Independence Day in Hindi)

स्वतंत्रता दिवस पर भाषण 1

आदरणीय मुख्य अतिथि महोदय, सम्माननीय शिक्षक, अभिभावक एवं साथियों। स्वतंत्रता दिवस के इस पावन अवसर पर अपने विचार व्यक्त करने का सुअवसर प्राप्त कर मुझे हर्ष की अनुभूति हो रही है। यह हमारा 73 वां स्वतंत्रता दिवस समारोह है। आज से ठीक 73 वर्ष पूर्व, हमे आजादी मिली थी। हमारे आजादी के संघर्ष की गाथा बहुत बड़ी है जिसका वर्णन एक दिन में नहीं हो सकता है। हर भारतीय के लिए स्वतंत्रता दिवस बहुत महत्व रखता है।

आज से 73 वर्ष पूर्व हम पर अंग्रेजों का शासन था, वे व्यापार के बहाने भारत आए और धीरे-धीरे सब कुछ अपने अधीन कर लिया और हमें अपना गुलाम बना लिया। फिर कई आंदोलन और लड़ाई लड़ने के बाद 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। हमारे देश के वीर योद्धाओं की वजह से आज हम स्वतंत्र हुए हैं और उन लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए इस दिन को मनाते हैं। स्वतंत्रता दिवस भारत के राष्ट्रीय पर्वों मे से एक है।

जय हिन्द।

स्वतंत्रता दिवस पर भाषण 2

स्वतंत्रता दिवस

आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, उप प्रधानाचार्य महोदय, माननीय शिक्षकगण एवं प्यारे साथियों। आज स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुझे अपने विचार आपके सामने व्यक्त करने का सुअवसर प्रप्त कर बेहद खुशी की अनुभूति हो रही है, आइये मै आपको स्वतंत्रता दिवस के महत्व के बारे मे बताती हूं।

स्वतंत्रता दिवस एक ऐतिहासिक पर्व है, आज से 73 वर्ष पूर्व भारत को अंग्रेजों से आज़ादी मिली थी। भारत, जिसने अपना अस्तित्व खो दिया था, को पुनः अपनी पहचान मिली। अंग्रेज भारत आए और यहां के परिवेश को बड़े ध्यान से जानने और परखने के बाद, हमारी कमजोरियों को ध्यान में रखते हुए हम पर आक्रमण किया और करीब दो सौ वर्षों तक शासन किया। हमारे वीर योद्धाओं ने कई लड़ाईयां लड़ी और उसके बाद जाके 15 अगस्त 1947 को हमें आज़ादी मिली।

तब से लेकर आज तक, हम हर वर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाते आए हैं। हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा हर साल लाल किले पर झंडा फहराया जाता है। इसके बाद वे देश को संबोधित करते हैं और फिर कुछ रंगा-रंग कार्यक्रम प्रस्तुत किये जाते हैं। इसे देखने के लिये दूर-दूर से लोग दिल्ली जाते हैं और जो वहां नहीं जा पाते वे इसका सीधा प्रसारण देखते हैं।

इस प्रकार हम हमारे वीर जवानों को याद करते हुए अपना स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं।

जय हिन्द।


 

स्वतंत्रता दिवस पर भाषण 3

यहां उपस्थित सभी दिग्गजों को मेरा प्रणाम एवं भाईयों और बहनों को स्नेह भरा नमस्कार। स्वतंत्रता दिवस के इस शुभ अवसर पर मैं अपने विचारों को पंक्तिबद्ध तरीके से व्यक्त कर रही हूं, ताकि आप उस दौर के मार्मिकता को समझ पाएं, कि आखिर ऐसी क्या जरूरत आन पड़ी थी की जान बाजी लगानी पड़ी, ऐसी कौन सी विपदा आन पड़ी कि देनी पड़ी कुर्बानी थी, और आशा करती हूं कि ये आप सबको जरूर पसंद आएगा।

क्या समझोगे तुम इस युग में कि प्राण गवाने का डर क्या था, क्या समझोगे तुम इस दौर में की अंग्रेजो के प्रतारण का स्तर क्या था। क्या देखा है रातों रात, पूरे गांव का जल जाना। क्या देखा है वो मंजर, बच्चों का भूख से मर जाना। कहने को धरती अपनी थी, पर भोजन का न एक निवाला था। धूप तो उगता था हर दिन, पर हर घर में अंधियारा था।

अरे बैसाखी का था पर्व मनाने घर-घर से दीपक निकले थे, लौट न पाए अपने घर को, खून की होली खेल जो बुझ गए थे। जलियावाला बाग हत्या कांड वो कहलाया, जिसमे बच्चे-बूढ़े सब मर गए थे। क्या कसूर था उन निर्दोशों का कि देनी पड़ी कुर्बानी थी, क्या कसूर था उस बेबस मां  का जिससे रूठी उसकी किलकारी थी। धीरे-धीरे आक्रोश बढ़ा, सब के सर पर क्रोध चढ़ा। गांधी जी ने असहयोग आंदोलन चलवाया, तो हमने भी चौरा-चौरी कांड किया।

हमे बेबस समझते थे, इस लिये हमपर हुकूमत करते थे। पर देश पर जान कूर्बान करने से, न हम भारत वासी डरते थे। बहुत हुआ था तानाशाही, अब तो देश को वापस पाना था। साम, दाम, दंड, भेद चाहे जो हथियार अपनाना था। गांधी जी ने धीरज धरा और कहा अहिंसा को ही अपनाना है। इंट का जवाब पत्थर नहीं होता, यह सबक अंग्रेजों को सिखाना है।

अहिंसा को हथियार बनाया, न कोई गोली-बंदूक चलाया। फिर भी अंग्रेजों को हमने, अपने देश से खदेड़ भगाया और उस तारीख को हमने, सुनहरे अक्षरों से गढ़वाया और यही हमारा स्वतंत्रता दिवस है भाइयों, जो शान से 15 अगस्त कहलाया।

जय हिन्द, जय भारत।

 

स्वतंत्रता दिवस पर भाषण 4

मेरे सभी आदरणीय अधयापकों, अभिभावक, और प्यारे मित्रों को सुबह का नमस्कार। इस महान राष्ट्रीय अवसर को मनाने के लिये आज हमलोग यहाँ इकठ्ठा हुए है। जैसा कि हम जानते है कि स्वतंत्रता दिवस हम सभी के लिये एक मंगल अवसर है। ये सभी भारतीय नागरिकों के लिये बहुत महत्वपूर्ण दिन है तथा ये इतिहास में सदा के लिये उल्लिखित हो चुका है। ये वो दिन है जब भारत के महान स्वतंत्रता सेनानीयों द्वारा वर्षों के कड़े संघर्ष के बाद ब्रिटीश शासन से हमें आजादी मिली। भारत की आजादी के पहले दिन को याद करने के लिये हम हर साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाते है साथ ही साथ उन सभी महान नेताओं के बलिदानों को याद करते है जिन्होंने भारत की आजादी के लिये अपनी आहुति दी।

ब्रिटीश शासन से 15 अगस्त 1947 में भारत को स्वतंत्रता मिली। आजादी के बाद हमें अपने राष्ट्र और मातृभूमि में सारे मूलभूत अधिकार मिले। हमें अपने भारतीय होने पर गर्व होना चाहिये और अपने सौभाग्य की प्रशंसा करनी चाहिये कि हम आजाद भारत की भूमि में पैदा हुए है। गुलाम भारत का इतिहास सबकुछ बयाँ करता है कि कैसे हमारे पूर्वजों ने कड़ा संघर्ष किया और फिरंगियो कें क्रूर यातनाओं को सहन किया। हम यहाँ बैठ के इस बात की कल्पना नहीं कर सकते कि ब्रिटीश शासन से आजादी कितनी मुश्किल थी। इसने अनगिनत स्वतंत्रता सेनानीयों के जीवन का बलिदान और 1857 से 1947 तक कई दशकों का संघर्ष लिया है। भारत की आजादी के लिये अंग्रेजों के खिलाफ सबसे पहले आवाज ब्रिटीश सेना में काम करने वाले सैनिक मंगल पांडे ने उठायी थी।

बाद में कई महान स्वतंत्रता सेनानीयों ने संघर्ष किया और अपने पूरे जीवन को आजादी के लिये दे दिया। हम सब कभी भी भगत सिंह, खुदीराम बोस और चन्द्रशेखर आजाद को नहीं भूल सकते जिन्होंने बहुत कम उम्र में देश के लड़ते हुए अपनी जान गवाँ दी। कैसे हम नेताजी और गाँधी जी संघर्षों को दरकिनार कर सकते है। गाँधी जी एक महान व्यक्तित्व थे जिन्होंने भारतीयों को अहिंसा का पाठ पढ़ाया था। वो एक एकमात्र ऐसे नेता थे जिन्होंने अहिंसा के माध्यम के आजादी का रास्ता दिखाया। और अंतत: लंबे संघर्ष के बाद 15 अगस्त 1947 को वो दिन आया जब भारत को आजादी मिली।

हमलोग काफी भाग्यशाली है कि हमारे पूर्वजों ने हमें शांति और खुशी की धरती दी है जहाँ हम बिना डरे पूरी रात सो सकते है और अपने स्कूल तथा घर में पूरा दिन मस्ती कर सके। हमारा देश तेजी से तकनीक, शिक्षा, खेल, वित्त, और कई दूसरे क्षेत्रों में विकसित कर रहा है जोकि बिना आजादी के संभव नहीं था। परमाणु ऊर्जा में समृद्ध देशों में एक भारत है। ओलंपिक, कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स जैसे खेलों में सक्रिय रुप से भागीदारी करने के द्वारा हमलोग आगे बढ़ रहे है। हमें अपनी सरकार चुनने की पूरी आजादी है और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का उपयोग कर रहे है। हाँ, हम मुक्त है और पूरी आजादी है हालाँकि हमें खुद को अपने देश के प्रति जिम्मेदारीयों से मुक्त नहीं समझना चाहिये। देश के जिम्मेदार नागरिक होने के नाते, किसी भी आपात स्थिति के लिये हमें हमेशा तैयार रहना चाहिये।

 

स्वतंत्रता दिवस पर भाषण 5

यहाँ मौजूद मेरे प्यारे दोस्तों और आदरणीय अध्यापकों को सुबह का हार्दिक नमस्कार। 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के इस शुभ अवसर को मनाने के लिये हम सब एकत्रित हुए है। ये दिन हमलोग पूरे उत्साह और खुशी के साथ मनाते है क्योंकि इसी दिन ब्रिटीश शासन से 1947 में भारत को आजादी मिली थी। हमलोग यहाँ 73वाँ स्वतंत्रता दिवस मनाने आये है। सभी भारतीयों के लिये ये बहुत ही महान और महत्वपूर्ण दिन है।

कई वर्षों तक अंग्रेजों के क्रूर बर्तावों को भारतीय लोगों ने सहन किया। आज हमलोग लगभग सभी क्षेत्रों में आजाद है जैसे शिक्षा, खेल, परिवहन, व्यापार आदि क्योंकि ये केवल हमारे पूर्वजों के संघर्षों की वजह से संभव हो सका। 1947 से पहले, लोगों पर बहुत पाबंदियाँ थी यहाँ तक कि उनका अपने दिमाग और शरीर पर भी अधिकार नहीं था। वो अंग्रेजों के गुलाम थे और उनके हर हुक्म को मानने के लिये मजबूर थे। आज हम कुछ भी करने के लिये आजाद है उन महान भारतीय नेताओं की वजह से जिन्होंने ब्रिटीश शासन के खिलाफ आजादी पाने के लिये कई वर्षों तक कड़ा संघर्ष किया।

बहुत खुशी के साथ पूरे भारत में स्वतंत्रता दिवस को मनाया जाता है। ये सभी भारतीयों के लिये बेहद महत्वपूर्ण दिन है क्योंकि ये हमें मौका देता है उन महान स्वतंत्रता सेनानीयों को याद करने का जिन्होंने हमें एक शांतिपूर्ण और खूबसूरत जीवन देने के लिये अपने जीवन की कुर्बानी दे दी। आजादी से पहले, लोगों को पढ़ने-लिखने की, अच्छा खाने की और हमारी तरह सामान्य जीवन जीने की मनाही थी। भारत में आजादी के लिये जिम्मेदार उन कार्यक्रमों का एहसानमंद होना चाहिये। अपने अर्थहीन आदेशों की पूर्ति के लिये अंग्रेजों द्वारा भारतीयों के साथ गुलामों से भी ज्यादा बुरा बर्ताव किया जाता था।

भारत के कुछ महान स्वतंत्रता सेनानी है नेताजी सुभाष चनद्र बोस, गाँधीजी, जे.एल.नेहरु, बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, भगत सिंह, खुदीराम बोस, चन्द्रशेखर आजाद आदि। ये प्रसिद्ध देशभक्त थे जिन्होंने अपनी जीवन के अंत तक भारत की आजादी के लिये कड़ा संघर्ष किया। हमारे पूर्वजों द्वारा संघर्ष के उन डरावने पलों की कल्पना भी नहीं कर सकते हमलोग। आजादी के वर्षों बाद हमारा देश विकास की सही राह पर है। आज हमारा देश पूरी दुनिया में लोकतांत्रिक देश के रुप में अच्छे से स्थापित है। गाँधी एक महान नेता थे जिन्होंने अहिंसा और सत्याग्रह जैसे आजादी के असरदार तरीकों के बारे में हमें बताया। अहिंसा और शांति के साथ स्वतंत्र भारत के सपने को गाँधी ने देखा।

भारत हमारी मातृभूमि है और हम इसके नागरिक है। हमें हमेशा इसको बुरे लोगों से बचाने के लिये तैयार रहना चाहिये। ये हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने देश को आगे की ओर नेतृत्व करें और इसे दुनिया का सबसे अच्छा देश बनाये।

जय हिन्द।


 

स्वतंत्रता दिवस पर भाषण 6

आज के सम्माननीय मुख्य अतिथि, आदरणीय अध्यापकगण, अभिभावक और मेरे प्यारे मित्रों को सुबह का नमस्कार। मैं आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई देता हूँ। हम सभी यहाँ बड़े भीड़ में इकठ्ठा होने का कारण जानते है। इस महान दिन को उत्कृष्ट तरीके से मनाने के लिये हम सभी उत्साहित है। अपने राष्ट्र का 73वाँ स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिये हम सभी यहाँ इकठ्ठा हुए है। सबसे पहले हम अपना राष्ट्रीय झंडा फहराते है फिर उसके बाद स्वतंत्रता सेनानीयों के वीरता युक्त कार्य को सलामी देते है। मुझे भारतीय नागरिक होने पर गर्व महसूस होता है। आप सब के समक्ष स्वतंत्रता दिवस पर भाषण देने का मुझे अच्छा अवसर मिला है। मैं अपने आदरणीय क्लास टीचर को धन्यवाद देना चाहूँगा कि उन्होंने मुझे भारत की आजादी पर आप सबके सामने अपना विचार रखने का मौका दिया।

हम सभी हर साल 15 अगस्त के दिन स्वतंत्रता दिवस मनाते है क्योंकि 14 अगस्त 1947 की रात को भारत को आजादी मिली। भारत की आजादी के तुरंत बाद, नई दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस को पंडित जवाहर लाला नेहरु ने भाषण दिया। जब पूरी दुनिया के लोग सो रहे थे, ब्रिटीश शासन से जीवन और आजादी पाने के लिये भारत में लोग जगे हुए थे। अब, स्वतंत्रता के बाद, दुनिया में भारत सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। हमारा देश विविधता में एकता के लिये प्रसिद्ध है। इसने कई घटनाओं का सामना किया इसके धर्मनिरपेक्षता को परखने के लिये जबकि भरतीय लोग हमेशा अपनी एकता से जवाब देने के लिये तैयार रहते है।

अपने पूर्वजों के कड़े संघर्षों की वजह से हम अपनी आजादी का उपभोग करने लायक बने है और अपनी इच्छा से खुली हवा में साँस से सकते है। अंग्रेजों से आजादी पाना बेहद असंभव कार्य था लेकिन हमारे बाप-दादाओं ने लगातार प्रयास से इसको प्राप्त कर लिया। हम उनके किये कार्य को कभी भूल नहीं सकते और हमेशा इतिहास के द्वारा उन्हें याद करते रहेंगे। केवल एक दिन में सभी स्वतंत्रता सेनानीयों के कामों को हम याद नहीं कर सकते हालाँकि दिल से उन्हें सलामी दे सकते है। वो हमेशा हमारी यादों में रहेंगे और पूरे जीवन के लिये प्रेरणा का कार्य करेंगे। आज सभी भारतीयों के लिये बहुत महत्वपूर्ण दिन है जिसको हम महान भारतीय नेताओं के बलिदानों को याद करने के लिये मनाते है, जिन्होंने देश की आजादी और समृद्धि के लिये अपना जीवन दे दिया। भारत की आजादी मुमकिन हो सकी क्योंकि सहयोग, बलिदान, और सभी भारतीयों की सहभागिता थी। हमें महत्व और सलामी देनी चाहिये उन सभी भारतीय नागिरकों को क्योंकि वो असली राष्ट्रीय हीरो थे। हमें धर्मनिरपेक्षता में भरोसा रखना चाहिये और एकता को बनाए रखने के लिये अलग नहीं होना है जिससे इसे कोई तोड़ न सके और हम पर फिर से राज न कर पाये।

हमें आज कमस खाना चाहिये कि हम कल के भारत के एक जिम्मेदार और शिक्षित नागरिक बनेंगे। हमें गंभीरता से अपने कर्तव्यों को निभाना चाहिये और लक्ष्य प्राप्ति के लिये कड़ी मेहनत करनी चाहिये तथा सफलतापूर्वक इस लोकतांत्रित राष्ट्र को नेतृत्व प्रदान करना चाहिये।

जयहिन्द, जयभारत।


 

स्वतंत्रता दिवस पर भाषण 7

सभी माननीयों को, आदरणीय अध्यापकगण और मेरे प्यारे सहपाठियों को सुबह का नमस्कार। हमलोग यहाँ पर 73वाँ स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिये एकत्रित हुए है। इस खास अवसर पर भाषण देने के लिये मैं बहुत खुश हूँ। मैं अपने क्लास टीचर का बहुत आभारी हूँ जिन्होंने मुझे अपने देश की आजादी पर मेरे विचार रखने के लिये खास मौका प्रदान किया। स्वतंत्रता दिवस के इस खास मौके पर अंग्रेजी शासन से आजादी पाने के लिये भारतीयों के संघर्ष पर भाषण देना चाहूँगा।

बहुत साल पहले भारत के महान नेताओं ने ‘भाग्यवधु से एक प्रतिज्ञा की थी’ कि वो हमें अपने जीवन के सुखों के त्याग के द्वारा मुक्त और शांतिपूर्ण देश देंगे। आज हम यहाँ बिना किसी डर के और खुशी चेहरों के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाने आए है, केवल हमारे बहादुर पूर्वजों की वजह से। हम सोच नहीं सकते कि कितना कठिन होगा वो समय। हमारे पास अपने पूर्वजों को उनके बहुमूल्य कड़ी मेहनत और बलिदान के एवज में देने के लिये कुछ भी नहीं है। हमलोग केवल उनको और कार्यों को याद रख सकते है तथा राष्ट्रीय कार्यक्रमों को मनाने के दौरान उन्हें सलामी दे सकते है। वो हमेशा हमारे दिल में रहेंगे। सभी भारतीय नागरिकों के हँसते चेहरों के साथ स्वतंत्रता के बाद भारत का नया जन्म हुआ।

ब्रिटीश शासन के शिकंजे से 15 अगस्त 1947 को भारत को स्वतंत्रता मिली। पूरे देश में भारतीय लोग हर साल इस राष्ट्रीय उत्सव को पूरी खुशी और उत्साह के साथ मनाते है। ये सभी भारतीय नागरिकों के लिये एक महान दिन था जब भारतीय तिरंगे को भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने नई दिल्ली के लाल किले पर फहराया था।

हर साल राजपथ पर नई दिल्ली में एक बहुत बड़ा उत्सव मनाया जाता है जहाँ प्रधानमंत्री द्वारा झँडारोहण के बाद राष्ट्रगान गाया जाता है। राष्ट्रगान के साथ 21 बंदूकों की सलामी और हेलिकॉप्टर से तिरंगे पर फूलों की बारिश की जाती है। स्वतंत्रता दिवस के दिन राष्ट्रीय अवकाश होता है हालाँकि हर कोई इसको अपनी जगह से स्कूल, कार्यालय, या समाज में झंडा फहरा कर मनाता है। हमें भारतीय होने पर गर्व होना चाहिये और अपने देश के सम्मान की सुरक्षा के लिये अपना बेहतर योगदान देना चाहिये।

जयहिन्द।


स्वतंत्रता दिवस पर लम्बा भाषण - 8

माननीय अतिथि, वरिष्ठ प्रबंधक, प्रबंधक, अन्य कर्मचारी सदस्य और मेरे प्यारे दोस्तों - आप सभी को मेरा नमस्कार!

मुझे स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आपके सामने खड़े होकर इस विशेष दिन के अवसर पर आप सभी को संमबोधित करते हुए बहुत खुशी महसूस हो रही है। हम सभी भारतीवासी स्वतंत्रता दिवस के महत्व को बहुत अच्छी तरह से समझते हैं और ब्रिटिश शासन के अत्याचारों से अपनी आजादी वापस प्राप्त करने पर अत्यंत गर्व महसूस करते हैं। जब भी मैं हमारे राष्ट्रीय झंडे को लहराते हुए देखता हूं तो मुझे अत्यन्त खुशी महसूस होती है।

मुझे यकीन है कि आप मेरी भावनाओं को समझ सकते हैं। यह बताने की जरूरत नहीं है कि, स्वतंत्रता दिवस प्रत्येक वर्ष 15 अगस्त के दिन मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन 1947 को विश्व पटल पर भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में उभर कर सामने आया था। चूंकि यह हम सभी भारतीयों के लिए एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण दिन होता है, इसलिए इसे हमारे देश में राष्ट्रीय अवकाश के रुप में घोषित किया गया है। हम सभी प्रत्येक वर्ष इस दिन को बड़े ही उत्साह और जश्न के साथ मनाते हैं।

यह तो थी स्वतंत्रता दिवस के बारे में कुछ संक्षिप्त बाते, लेकिन क्या यहां कोई भी ब्रिटिश शासन की अवधि के बारे में जानता है? मैं आपको बता दू कि 1858 से 1947 तक अंग्रेजों ने हमारे भारतीय उपमहाद्वीप को अपना उपनिवेश बनाया था । इसी समय अवधि को ब्रिटिश राज काल या अंग्रेजी हुकूमत का दौर कहा जाता है।

अब, यह जानना और भी दिलचस्प हो जाता है कि आखिर हमारे देश में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन कैसे शुरू हुआ। जब ईस्ट इंडिया कंपनी का भारत में आयी तो उनके द्वारा कई षड्यंत्रो के तहत भारतीय नागरिकों की संम्पति और भूमि हड़प ली गयी औऱ रानी विक्टोरिया द्वारा इन चाजों को शाही संपत्ति घोषित कर दिया गया।

ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1600 में एलिजाबेथ प्रथम के राजशाही शासन के दौरान रॉयल चार्टर के तहत हुई थी। हालांकि स्पष्ट रूप से इसका मुख्य उद्देश्य व्यापार करना था, पर अंत में इसने हमारे भारतीय उपमहाद्वीप के अधिकांश हिस्से को नियंत्रित करके इसे ब्रिटीश हूकुमत का एक उपनिवेश बना दिया। उस समय भारतीय उपमहाद्वीपों में रहने वाले लोग रानी विक्टोरिया के अधीन अंग्रजी हूकुमत के औपनिवेशिक शासन तथा बाद में अन्य राजाओं के अधीन बन कर रह गए थे।

मुझे विश्वास है कि हम सभी इस तरह के चुनौतीपूर्ण स्थिति के तहत आजादी प्राप्त करने का अनुमान लगा सकते हैं। हालांकि यह एक आसान काम नहीं था, लेकिन लंबे और निरन्तर प्रयासों के बाद हमने अपनी इस आजादी को हासिल किया। महात्मा गांधी जी या जिन्हें हम आम तौर पर बापू के नाम से संबोधित करते हैं स्वतंत्रता प्राप्त करने में मुख्य रूप से योगदान देने वाले सबसे अहम व्यक्तित्वों में से एक थे। उन्होंने हिंसा या रक्तपात के मार्ग का पालन न करके स्वतंत्रता प्राप्ति के लिये अंहिसा के मार्ग को चुना।

उन्होंने हिंसा नीति और सशस्त्र लड़ाई माध्यम का प्रयोग करने के बजाय अपने अनुयायियों के साथ अहिंसा अभियान जैसे भूख हड़ताल और सविनय अवज्ञा जैसे आंनदोलन करके अंग्रेजी शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उनके इन्ही कठिन प्रयासों के चलते आखिरकार हमारे देश से ब्रिटिश शासन से मुक्ति मिली। हमें उन वीर आत्माओं का नमन करना चाहिए जिन्होंने अपनी मातृभूमि के लिए अपने प्राणों को बलिदान कर दिया, इसके साथ ही हमे उनके महान कार्यो को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करनी चाहिए। हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि उनके प्रयासों और बलिदानों के कारण ही आज हम इस स्वतंत्र भारत में जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

भारत अपनी स्वतंत्रता प्राप्त करने से पहले ही स्वशासन के ओर बढ़ चुका था। 19वीं शताब्दी में, विभिन्न सलाहकार के पदो पर कई भारतीय काउंसिलर्स नियुक्त किए गए थे। उन्हें ब्रिटिश वाइस-राय के सलाहकार के रुप में नियुक्त किया गया था। उन्होंने भारत के प्रमुख हिस्सों में शासन करना जारी रखा। वर्ष 1892 में, इन काउंसिलर्स के साथ-साथ अन्य भारतीय अधिकारियों को सशक्त बनाने के लिए भारतीय परिषद अधिनियम के रूप में एक कानून भी पारित किया गया था। परन्तु वे सदैव उच्च ब्रिटिश अधिकारियों के अधीन ही रहे और उन्हें सफल होने के लिये हमेशा अंग्रजो के पक्षपाती रवैये का सामना करना पड़ा।

14 अगस्त और 15 अगस्त 1947 के मध्यरात्रि और दिन के समय के बीच भारतीय स्वतंत्रा की संधि पर हस्ताक्षर किया गया था। उस समय जॉर्ज VI ब्रिटेन राजा के रूप में वहां शासन कर रहे थे और क्लेमेंट एटली उनके प्रधान मंत्री थे। आजादी के बाद जवाहर लाल नेहरू स्वतंत्र भारत के पहले प्रधान मंत्री बने और ब्रिटेन को भारत पर अपने शासन को छोड़ना पड़ा। स्वतंत्रता के बाद अंग्रेजों का भारतीय मामलों से कुछ लेना देना नहीं रह गया।

भले ही हमने वह समय ना देखा हो, लेकिन हम उस महत्वपूर्ण समय को बहुत अच्छी तरह से महसूस कर सकते हैं जब हमारे देश को वास्तव में स्वतंत्रता प्राप्त हुई थी। हम इस देश के नागरिक होने पर गर्व महसूस करते हैं। हालांकि, आजादी से कई वर्ष पहले 1929 में ही आजादी की घोषणा कर दी गई थी और इस दिन को पूर्ण स्वराज का नाम दिया गया था। इसकी घोषणा भारतीय ध्वज फहराने के साथ महान स्वतंत्रता सेनानियों, महात्मा गांधी और अन्य लोगों द्वारा की गयी थी। यह वास्तव में सभी भारतीयों के लिए महत्वपूर्ण क्षण था। यह समझना काफी महत्वपूर्ण है कि भले ही भारत ने वर्ष 1947 में अपने आजादी को प्राप्त किया हो, परन्तु फिर भी 1950 के दशक में भारत का स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में आधिकारिक संविधान लागू किया गया। इस बीच की 3 वर्ष की अवधि को हम परिवर्तनकाल का समय कह सकते है।

तो हम भारतीय भला इस महत्वपूर्ण दिन को धूमधाम और उत्साह के साथ मनाने के बजाय सामान्य रुप में कैसे बिता सकते हैं। इस महान ऐतिहासिक दिन पर, हमारे देश के प्रधान मंत्री लाल किले पर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को फहराते है, जिसके बाद राष्ट्रीय गान प्रारंभ किया जाता है। इसके बाद हमारे प्रधान मंत्री देश के लोगों को सम्बोधित करने के लिए भाषण देते है जिसके बाद कार्यक्रम का शुभारंभ किया जाता है। इस दिन पूरा वातावरण अत्यंत मनोहर और शानदार होता है और कई सारे कार्यक्रम और समारोह का भी आयोजन किया जाता हैं। आने वाले, 15 अगस्त, 2018 को भारत का 72 वां स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा।

वैसे तो स्वतंत्रता का कोई मूल्य नही है। हमारे देश के बहादुर सैनिक लगातार हमारे देश की रक्षा करने के लिए उग्रवादीयों और आतंकवादीयो से सीमाओं पर लड़ते हुए अपने प्राणों का बलिदान देते रहते है। इसलिए हमें अपने स्वतंत्रता के महत्व को कभी भुलना नहीं चाहिए और इसे दिलोजान से संजो कर रखना चाहिए।

मैं बस आप सब से इतना ही कहना चाहता था, जय हिंद!

 

 

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