स्वतंत्रता दिवस पर शिक्षको के लिये भाषण

वैसे तो हम सब ने स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री और राजनैतिक नेताओ के भाषण सुने है।  इसके साथ ही कई सारे शैक्षिक संस्थानो में स्वतंत्रा दिवस पर भाषण दिये जाते है। ऐसे कई अवसर होते है जब हमें स्वतंत्रता दिवस पर भाषण देना होता है, जिसमे ना सिर्फ हमें अपने विचारो को व्यक्त करना होता है, बल्कि की इस तरह से व्यक्त करना होता है कि वह हमारी मातृभूमि के प्रति हमारे भावनाओ को दर्शा सके।

स्वतंत्रता दिवस पर शिक्षको के लिये लम्बे और छोटे भाषण (Long and Short Speech on Independence Day for Teachers)

अगर आप एक शिक्षक है तो एक शिक्षक के नजरिये से स्वतंत्रता दिवस पर आपको एक अच्छे भाषण की जरुरत पड़ेगी। इसके लिये आप बिल्कुल सही वेबसाइट पर आये हैं। यहा आपको मिलेंगे अच्छे और आसानी से समझे जा सकने वाले भाषण जोकि मुख्यतः शिक्षको के लिए तैयार किये गये है।

स्वतंत्रता दिवस पर शिक्षको के लिये भाषण 1

आदरणीय, मुख्य अतिथि, प्रधानाचार्य, उप-प्रधानाचार्य, सम्मानित शिक्षकगण और मेरे प्यारे छात्र-छात्राओ आप सभी का हार्दिक अभिनंदन !

मैं, प्रोमिला शर्मा उच्च माध्यमिक विद्यालय की शिक्षिका इस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर एक भाषण देना चाहूंगी। मुझे विश्वास है कि 15 अगस्त का दिन आप सभी के दिलो में विशेष स्थान रखता होगा और यही कारण है कि हम बेसब्री से इस दिन का इंतजार करते है। इस विशेष दिन हम उन सभी महान क्रांतिकारियो और स्वतंत्रता सेनानियो के याद में श्रद्धांजलि अर्पित करते है। जिन्होने स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान देश के गौरव के लिये बहादुरी से लड़ते हुए त्याग और बलिदान दिया। भारत का स्वतंत्रता दिवस सिर्फ अंग्रजो से प्राप्त हुई हमारी आजादी को ही नही दर्शाता है, बल्कि की यह हमारे देश के उस के उस क्षमता और शक्ति को भी दिखाता है जिसमे लोगो ने साथ मिलकर आजादी जैसे चुनैतीपूर्ण लक्ष्य को भी प्राप्त किया।

आजादी के इन 71 वर्षो में भारत ने कभी पीछे मुड़कर नही देखा, हम सदैव ही प्रगति के ओर अग्रसित रहे है और वह दिन दूर नही है, जब पूरे विश्व में हमारा देश एक महाशक्ति के रुप में स्थापित होगा।

हमारे देश को आजाद हुए चार वर्ष भी नही हुये थे, जब हमारे संविधान के अनुसार हमारा देश एक गणतंत्र बनकर और मजबूत हुआ, जिसकी आज भी पूरे विश्व में प्रसंशा की जाती है। हमारा भारत एक बहुसांस्कृतिक और बहुभाषी देश है, यही कारण है कि हमारी शक्ति हमारी विविधता में ही छुपी हुई है। आज हमारा देश कृषि से लेकर प्रौद्योगिकी तक हर क्षेत्र में अग्रणी है, और इसमे कोई संदेह नही है कि हम निरंतर बेहतर होते जा रहे है।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ना केवल हम अपने महान स्वतंत्रता सेनानियो को याद करते है, बल्कि की अपने देश के उपलब्धियों को भी स्मरण करते है जो हमे बेहतर और लीक से हटकर कार्य करने के लिये प्रोत्साहित करता है। हम सब को यह जानकर यह प्रसन्नता होती है, कि सैन्य शक्ति के मामले में आज हम दुनियाँ के पांच सबसे शक्तिशाली देशो मे से एक है, और इसका श्रेय हमारे देश के उन वीर सैनिको को जाता है। जो हमारी सुरक्षा और देश की शांति व्यवस्था के लिये ना सिर्फ दिन-रात सीमा पर तैनात रहते है, बल्कि किसी भी आपदा और संकट के समय भी बचाव कार्यो के लिये तत्पर रहते है।

अंत मे मै यही कहूँगी कि कोई भी देश सर्वोत्तम नही होता है हर देश में कुछ ना कुछ कमियाँ होती हैं। किसी देश की दुसरे देश के साथ तुलना करना भी गलत है क्योंकी हर देश अपने में अनोखा होता है और उसकी अपनी कमियाँ और खुबियाँ होती है। तो आइये इस स्वतंत्रता दिवस ये संकल्प लेते है कि हम अपने देश की तरक्की और उन्नती के लिये हर संभव प्रयास करेंगे। हालांकि अपने मातृभूमि के प्रति अपने स्नेह को दर्शाने के लिये हमे कोई बहुत बड़े कदम उठाने की जरुरत नही है क्योंकि बेटी पड़ाओ, बेटी बचाओ, स्वच्छ भारत अभियान जैसी योजनाओ में अपना योगदान देकर और स्वदेशी उत्पादो तथा सार्वजनिक परिवाहन उपयोग करके भी हम अपने देश को और सुदंर तथा सुदृढ़ बनाने में सहायता कर सकते है।

अंत में मै यही कहना चाहूंगी, हमारा भारत महान, जय हिंद !


 

स्वतंत्रता दिवस पर शिक्षको के लिये भाषण 2

आदरणीय, प्रधानाचार्य, उप-प्रधानाचार्य, प्रिय साथियों और मेरे प्यारे छात्र-छात्राओ आप सभी का हार्दिक अभिनंदन !

मैं नताशा शर्मा – कक्षा 9वीं की अध्यापिका आज की शाम इस स्वातंत्रा दिवस समारोह में आप सभी का स्वागत करती हूँ। यह दिन हम भारतीयो के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि 15 अगस्त के दिन ही हमने अंग्रेजी हूकुमत से आजादी हासिल की थी। स्वतंत्रता के बाद भारतीय नागरिक सभी मौलिक अधिकारो का आनंद उठा सकते थे। यह गुलामी की जंजीरो में जकड़े उन सभी भारतीयो के लिये एक नये युग की शुरुआत थी जो एक बार फिर से स्वतंत्र माहैल में अपने इच्छा अनुसार अपना जीवन जी सकते थे।

यह इतिहास के पन्नो में दर्ज है कि किस प्रकार से हमारे पूर्वजो को अंग्रेजो द्वारा अनगिनत अत्याचारो का सामना करना पड़ा और उनके द्वारा किये सर्वस्व बलिदान के बाद हमे इस आजादी की प्राप्ती हुई है। भले ही हम कहे की हम उनके द्वारा सहन किये गए कष्टो को समझ सकते है पर हम उनके दुखोः की बिलकुल भी कल्पना नही कर सकते। उनके इन्ही प्रयासो के चलते आखिरकार हमे सन् 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त  हुई, जिसके पहले सदैव युद्ध और खूनी संर्घष आम बात थी।

 

हम कह सकते है कि यह दशको का संर्घष था, जोकि 1857 से सुरु होकर 1947 तक चला। हमारे महान क्रांतिकारी मंगल पांडेय को प्रथम स्वतंत्रता सेनानी के रुप में याद किया जाता है जिन्होने सबसे पहले अंग्रजो के खिलाफ आवाज उठायी, जिससे भारत को गुलामी की जंजीरो से मुक्त कराने के लिये भीषण संर्घष की शुरुआत हुई।

जिसके बाद कई सारे स्वतंत्रता सेनानियो ने अपना पूरा जीवन देश की आजादी के लिये समर्पित कर दिया। भला हम चन्द्र शेखर आजाद, भगत सिंह और खुदी राम बोस जैसे क्रांतिकारियो के बलिदान को कैसे भूल सकते है, जिन्होने इतनी कम उम्र में देश के लिये अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया। इसके अलावा हम गाँधी जी और सुभाष चन्द्र बोस के बलिदानों को भी कैसे भूल सकते है। निसंदेह गाँधी जी एक महान भारतीय थे। जिन्होंने पूरे विश्व को अंहिसा का महत्वपूर्ण संदेश दिया। आखिरकार 15 अगस्त 1947 को हमें इतने लम्बे संर्घषो का फल प्राप्त हुआ और हमारे देश को स्वतंत्रता प्राप्त हुई।

हम बहुत ही सौभाग्यशाली है जोकि हमें अपने पूर्वजो से उपहार स्वरुप इस आजादी की प्राप्ती हुई जिससे आज हम इस शांति भरे माहौल में बिना अपने अधिकारो की चिंता किये आजादी से रह सकते है। हमारा देश विज्ञान और प्रौद्योगिकी, खेल और शिक्षा के जैसे क्षेत्रो में तेजी से तरक्की कर रहा है, जोकि आजादी से पूर्व नही संभव था। इसके साथ ही भारत एक परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बनने की ओर तेजी से आगे बढं रहा है। हम राष्ट्रमंडल, ओलिंपिक और एशियाई खेलो में भी सक्रिय रुप से हिस्सा लेते हुए आगे बढ़ रहे है।

एक भारतीय नागरिक के तौर पे अब हमें अपनी सरकार चुनने का अधिकार है और अब हम विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में पूरी स्वयत्ता के साथ अपना जीवन व्यतीत कर रहे है। हालांकि हमे अपने देश की प्रति अपनी जिम्मेदारियो से खुद को आजाद नही समझना चाहियें और एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हमे जरुरत के समय अपने देश के लिये विपत्तियों का सामना करने से पीछे नही हटना चाहीये।

तो बस अब मैं अपने इस भाषण को समाप्त करने की अनुमति चांहूगी, तो आइये हम साथ मिलकर बोले जय हिंद!


 

स्वतंत्रता दिवस पर शिक्षको के लिये भाषण 3

आदरणीय मुख्य अतिथि, प्रधानाचार्य, उप-प्रधानाचार्य प्रिय मित्रो और प्यारे विद्यार्थियो आप सभी का हार्दिक अभिनंदन और आज के इस स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।

यह वाकई बहुत ही आंनद का अवसर है की इस वर्ष हमारी आजादी के 72 वर्ष पूरे हो गये है और आज इस अवसर पर आप सब को सम्बोधित करते हुए मुझे काफी प्रसन्नता महसूस हो रही है। एक भारतीय के तौर 15 अगस्त के दिन हम बहुत ही गर्व महसूस करते है, क्योंकि इस दिन हमारे पूर्वजो द्वारा किये गये वर्षो के संर्घष और बलिदान के पश्चात अंततः हमारी मातृभूमि एक स्वतंत्रता प्राप्त हुई। हमे कभी भी अपने पूर्वजो द्वारा किये गये बलिदान को नही भूलना चाहीये और सदैव अपनी इस आजादी का आदर करना चाहिये, साथ ही हमे अपने ह्रदय में देशभक्ति की भावना रखनी चाहिये। क्योंकि यदि हम ऐसा नही करते तो ये हमारे पूर्वजो और क्रांतिकारीयो का अपमान होगा।

 

हमारा देश हमेशा से ही समृद्ध रहा है, जिसके वजह से इसे सोने की चिड़िया भी कहा जाता था। अंग्रजो ने सीधे तौर पे हम पर हमला नही किया, बल्कि की उन्होने व्यापार के बहाने अपने धूर्त और कपटी नितीयो के द्वारा हमारे देश के अलग-अलग हिस्सो पर कब्जा किया। जिसके लिये उनहोने “बांटो और राज करो” जैसे नितीयो का सहारा लिया। हम सब जानते है कि हमारा देश विविधता से भरा हुआ और अंग्रजो ने इसी का फायदा उठाते हुए हमें धर्म, जाति, वर्ग और सम्प्रदाय तमाम तरह के आधारो पर बांट दिया और हम भारतीय उनके इस धूर्तता भरे व्यवहार को पहचान ना सके और अपनी हर एक प्यारी चीज गवां बैठे।

जब अंग्रजो का यह कष्टदायी और आततायी व्यवहार सभी सीमाओ को पार कर गया तब चंद्र शेखर आजाद, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, लाला लाजपत राय, रानी लक्ष्मी बाई जैसे कई आजादी के मतवाले सामने आये और इस परिस्थिती का डटकर सामना करते हुए अंग्रजो को हमारे देश से खदेड़ने में कामयाब रहे। इसी के साथ ही उन्होंने अंग्रजो के कुटील नितीयों का भी पर्दाफाश किया, जिसके अंतर्गत वह हमारे देश में अपना शासन स्थापित करना चाहते थे। काफी संर्घषो के पश्चात और लोगो के संगठित के प्रयासो के चलते हम आजादी प्राप्त करने में सफल रहे। हमारे क्रांतिकारियों ने उस सुनहरे सपने को देखा, जिसमे हमारा देश पूर्ण रुप से आजाद हो और अपने इस सपने को पूरा करने के लिये ना सिर्फ उन्होने लड़ाई लड़ी बल्कि की मातृभूमि के लिये अपने प्राणों का भी बलिदान दे दिया।

इस पूरे समयकाल के दौरान हमारा देश ने कई कठिनाईयो का सामना किया। हालांकि एक बार स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद हमने कभी पीछे मुढ़कर नही देखा। हमारा देश विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कृषि और उद्योग में भी तेजी से तरक्की कर रहा है। इस दौरान हमारे देश में कई आतंकवादी हमले और राजनैतिक घोटाले हुए। जिन्होंने हमारे देश के अर्थव्यवस्था और एकता को हिलाकर रख दिया, लेकिन फिर भी हमारा देश उसी जोश और उमंग के साथ आगे बढ़ रहा है।

तो आइये शपथ लेते है कि हम हमेशा अपने कार्यो से अपने देश का गौरव बढ़ाने का प्रयत्न करेंगे और अपने पूर्वजो और महान क्रांतकारियो के बलिदान को कभी व्यर्थ नही जाने देंगे।

आप सभी का धन्यवाद, तो आइये साथ मिलकर बोलते है मेरा भारत माता महान!


 

स्वतंत्रता दिवस पर शिक्षको के लिये भाषण 4

आप सभी को शुभ प्रभात इसके साथ ही आप सब को इस स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाए!

विद्यार्थियो आप सभी आश्चर्यचकित होंगे की हमारे विद्यालय में आज स्वतंत्रता दिवस के दिन इस कार्यक्रम का आयोजन क्यो किया गया है, जबकि हर बार यह कार्यक्रम एक दिन पहले आयोजित किया जाता है। तो मैं आपको बता दूँ कि विद्यालय समिति द्वारा यह निर्णय इस लिये गया है ताकि इस अवसर को और भी खास बनाये जा सके। स्वतंत्रता दिवस हमारे देश में राष्ट्रीय अवकाश के रुप में घोषित है और जैसा कि हम सब जानते है कि यह 15 अगस्त के दिन मनाया जाता है।

आज के ही ऐतहासिक दिन हमारे देश को हमारे पूर्वजो के संर्घषो और बलिदानो के चलते हमे स्वतंत्रता की प्राप्ति हुई थी, इसलिये हम भारतीयो के लिये यह एक महात्वपूर्ण दिन है। महात्मा गाँधी, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस जैसे क्रांतिकारियो ने हमारे देश को गुलामी की बेड़ियो से मुक्त कराने के लिये अपने प्राणो की आहुती दी। तो आइये उन सभी महान आत्माओ का स्मरण करते है, जिन्होने स्वंय के लिये ना जीकर अपनी इस मातृभूमि के लिये जीवन व्यतीत किया।

इसके आलावा अपने देश के प्रति निष्ठा से कार्य करने के साथ ऐसा कोई कार्य ना करके जिससे हमारे राष्ट्र के एकता और अखंडता पे आघात आये और ऐसा करक के भी अपने क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियो के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते है। इस देश में पैदा होने और यहाँ के नागरिक होने के नाते यह हमारा कर्तव्य बनता है कि हम अपने देश का नाम रोशन करे। हमसे यह उम्मीद नही की जाती है की हम जोश में आकर युद्ध करे बल्कि की हमसे जितना हो सके अपने देश हित में काम करे, क्योंकि यही सच्चे मायने में यही देशभक्ति है।

इससे कोई फर्क नही पड़ता की एक व्यक्ति पेशे से डाक्टर, इंनजिनयर, शिक्षक या पायलट है, महत्व इस बात का है कि हम जो भी कार्य करे, उसे पूरी मेहनत और ईमानदारी से करे। इसके अलावा हमे मेहनत से बिना कीसी को कोई नुकसान पहुचाये अपनी मातृभूमि की सेवा करनी चाहिये। जिससे हममे भाईचारे, दया और सत्यता आदि गुण उत्पन्न हो।

एक वयक्ति जोकि धोखेबाज और गलत प्रवृत्ति का होगा ना सिर्फ अपने परिवार का बल्कि की पूरे राष्ट्र का नाम कलंकित करेगा और हमारे राष्ट्र को ऐसे लोगो की कोई आवश्यकता नही है। हमारे देश को ऐसे  व्यक्तियों की आवश्यकता है, जोकि मेहनती और ईमानदार हो। तो विद्यार्थियो क्योकि आप सभी इस देश का भविष्य है, इसलिये आप से अपेक्षा की जाती है कि आप ऐसे रास्ते पर चलेंगे और आचरण का पालन करेंगे जिससे कभी भी हमारे देश का शीश ना झुके।

हमारा देश की भूमि एक बहुत ही समृद्ध भूमि है, जहाँ विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक और नैतिक मूल्यो का अनुसरण करने वाले रहते है। हम प्राचीन समय से ही आयुर्वेद और विज्ञान के क्षेत्र में शीर्ष पर रहे है। इन्ही गुणों के चलते भारत अन्य देशो के तुलना में पश्चिमी देशो में काफी लोकप्रिय है। हमारा भारत अपने विशाल सांस्कृतिक, सामाजिक और भैगोलिक विविधताओं के लिये भी जाना जाता है।

इसलिये हमे गर्व होना चाहिये की हमने भारत जैसे देश में जन्म लिया, जोकि विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र और एक तेज विकासशील देश है। हमने दूरसंचार, हरित क्रांति, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रो में सफलता प्राप्त की है और इसके साथ ही अब हम सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी उभरते हुए देशो में से एक है।

मैं यह उम्मीद करता हूँ की हमारा देश इसी प्रकार से हर क्षेत्र में उन्नति करते हुए आने वाले समय में विश्व में अगले महाशक्ति के रुप में स्थापित होगा। अपनी तरफ से मैं आप सब से बस इतना ही कहना चाहता था।

धन्यवाद!

 

 

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