स्वच्छता के महत्व पर स्पीच

स्वच्छता का महत्व एक ऐसा विषय है, जो शायद हर उम्र के लिए समान महत्व रखता है। किसी के जीवन में इसका महत्व व्यक्ति विशेष के तौर पर उतना ही है, जितना कि एक छोटे से बालक के जीवन में होता है। स्वच्छता विभिन्न प्रकार की हो सकती है। कभी व्यवहारिक तो कभी वैचारिक। जब बच्चा छोटा होता है, तो हम तभी से उसे अच्छी आदतें सिखाते हैं। जिनमें स्वच्छता भी शामिल होती है, ठीक इसी प्रकार हमें बच्चों को व्यक्तिगत सफाई के साथ-साथ अपने परिवेश कि सफाई भी सिखाना चाहिये। उन्हे बताना चाहिये कि देश की सफाई भी हमारा कर्तव्य है।

स्वच्छता के महत्व पर लम्बे तथा छोटे भाषण (Long and Short Speech on Importance of Cleanliness in Hindi)

स्वच्छता स्वस्थ शरीर, मन और आत्मा के मिश्रण को भी कहते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को अपने बचपन से ही खासकर स्कूल में सफाई का महत्व सिखाया जाता है।

शिक्षक छात्रों को स्वच्छता का महत्वपूर्ण सबक सिखाने के लिए विभिन्न तरीकों को अपनाने के लिए कहते हैं, ताकि वे स्वच्छता के महत्व पर भाषण लिख सकें।

हमने उन्हीं भाषणों के कुछ नमूनों को नीचे उपलब्ध करवाया है, जो आपको स्वच्छता के महत्व पर भाषण लिखने में मदद करेंगे। इसमें सफाई के महत्व पर छोटे और लंबे भाषण के नमूनों को शामिल किया गया है।

भाषण की भाषा बहुत सरल और प्रभावी है। स्कूल और कॉलेज के छात्र मुख्य रूप से स्वच्छता के महत्व पर भाषण के सार पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए निम्नलिखित भाषणों से साफ-सफाई के महत्व पर विचार ले सकते हैं और अपना भाषण तैयार कर सकते हैं।

स्वच्छता के महत्व पर भाषण - 1

एक आदर्श जीवन वह होता है जिसमें जीवन व्यवस्थित रहता है। व्यवस्थित रहने का अर्थ है, सहि आदतों का मेल रहना क्यों कि हमारे पास अथाह धन होने के बावजूद भी अगर हमारे व्यवहार में स्वच्छता न रहे तो हमारा धन व्यर्थ है। स्वच्छता अच्छी आदतों मे से एक होती है और अच्छी आदतें सबको अपनी ओर आकर्षित करती हैं और जब जीवन में सब का सही मिश्रण हो तो उस व्यक्ति का अलग ही नाम होता है।

जीवन में स्वच्छता का महत्व इतना ज्यादा है कि हमारे प्रधान मंत्री मोदी जी ने भी, इसे समझते हुए स्वच्छ भारत अभियान जैसे राष्ट्र स्तरीय कार्यक्रम चलाए। जिसका मुख्य उद्देश्य भारत को स्वच्छ बनाने के साथ-साथ पूरी तरह खुले में शौच मुक्त बनाना है। गंदगी के कारण कई सारी जानलेवा बिमारियां फैलती हैं और इनसे बचने का सबसे अच्छा तरीका है, दैनिक रुप से अपने शरीर, घर, आस-पास के क्षेत्र, स्कूल, कार्यालय कि सफाई। जरुरी नहीं कि हर जगह आप को ही सफाई करनी हो, आवश्यकता है जागरूकता की। कभी भी यहां-वहां कूड़ा न फेकें और कोई फेके तो उसे समझाएं। देश के सच्चे नागरिक होने के नाते सार्वजनिक स्थानों को गंदा न करें, अपने स्कूल, कार्यालय को साफ रखें। इस प्रकार आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि स्वच्छता किसी भी व्यक्ति के जीवन के लिए कितना महत्वपूर्ण है। आशा करती हूं कि आप लोगों को स्वच्छता का महत्व अवश्य समझ आया होगा।

स्वच्छ भारत, सुरक्षित भारत। धन्यवाद।


 

स्वच्छता के महत्व पर भाषण - 2

उपस्थित सभी बड़ों को मेरा सादर प्रणाम, मैं कक्षा 2 में पढ़ने वाली नमिता हूं और आज मैं आप सब के समक्ष स्वच्छता के महत्व को समझाने आयी हूं। यह एक ऐसा विषय है जिसका ज्ञान सभी को होना चाहिये, क्यों कि स्वच्छता हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है। और बिना इसके शायद एक व्यवस्थित जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। जैसा कि हमारे लिये सांस लेना, भोजन करना जरूरी होता है, ठीक उसी प्रकार स्वच्छता भी जरुरी है। और हम सब के जीवन में इसका महत्व बहुत ज्यादा है।

जब एक नन्हा बालक इस दुनिया में आता है तो उसे कुछ नहीं आता, उसे सब कुछ सिखाया जाता है। इस क्रम में उसमें स्वच्छता की भी आदत डाली जाती है। जिसे आगे चल कर वह अपनी आदत बना लेता है। जीवन मे स्वच्छता का पालन करना यह दर्शाता है कि हम अपने जीवन में अनुशासित भी हैं।

स्वच्छता हर क्षेत्र के लिये महत्वपूर्ण है। चाहे आप जहां भी जाएं जैसे कि स्कूल, घर, मंदिर, कार्यालय आदि। स्वच्छता हर जगह के लिये समान महत्व रखती है। हम जितना अपने घर को साफ रखते हैं, हमें दूसरी जगहों को भी उतना ही साफ रखना चाहिये, कभी भी सार्वजनिक स्थानों को गंदा नहीं करना चाहिये। क्यों कि वे देश के धरोहर हैं, और हमारा देश हमारी पहचान है। जब तक हम अपने धरोहर कि रक्षा नहीं करेंगे, तो हमारे यहां आने वाले पर्यटक कहां से करेंगे। इस लिये स्वच्छता जरुरी है और इसका महत्व बहुत अधिक बढ़ जाता है। आशा करती हूं कि मैने कुछ हद तक स्वच्छता के महत्व को समझाने में आपकी मद्द अवश्य की होगी।

इसी के साथ धन्यवाद।

 

स्वच्छता के महत्व पर भाषण - 3

हमारे माननीय प्रिंसिपल, वाइस प्रिंसिपल, सहकर्मियों और हमारे प्यारे छात्रों आप सभी को मेरी तरफ से सुप्रभात!!

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि श्री नरेंद्र मोदी हमारे देश के प्रधान मंत्री ने स्वच्छ भारत अभियान का शुभारंभ किया है ताकि सभी जगहों पर लोगों को स्वच्छता और सफाई के उच्च स्तर को बनाए रखने के लिए पूरे भारत में बहुत उत्साह के साथ अभियान चलाया जा सके चाहे फिर वह हमारे घर, कार्यस्थल, सार्वजनिक स्थान, सड़कें आदि क्यों न हो। इसलिए छात्रों में उसी भावना को पैदा करना हमारी जिम्मेदारी बनती है।

जैसे भोजन, पानी, ऑक्सीजन और अन्य चीजें हमारे अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण हैं वैसे ही हमारे स्वस्थ शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए स्वच्छता भी महत्वपूर्ण है। क्या हम मलेरिया, पीलिया आदि जैसी बीमारियों से मरने वाले लोगों के बारे में खबरें नहीं सुनते हैं, जो गंदे परिवेश में पनपती हैं? इसलिए इस तरह के मामलों को रोकने के लिए भारत के लोगों को स्वच्छता बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए जो हमारे देश की यात्रा करने वाले विदेशियों की नज़र, आत्मा और दिलों-दिमाग में सम्मानजनक स्थान हासिल करने में मदद करेगा।

और अगर हर भारतीय नागरिक इस स्वच्छ भारत अभियान में कुछ हद तक का योगदान देते हैं, तो हम कल्पना भी नहीं कर सकते कि इस अभियान के उद्देश्य को पूरा करने के लिए यह कितना प्रभावी साबित होगा। वास्तव में आप अपने आसपास के क्षेत्र में रहने वाले लोगों को भी सिखा सकते हैं, या जिनके बारे में आप जानते हैं कि उनके दिन-प्रतिदिन के जीवन में स्वच्छता का क्या महत्व है।

हालांकि प्रिय छात्रों कृप्या यह भी समझने की कोशिश करें कि आप इसे हर किसी पर भी लागू नहीं कर सकते। स्वच्छता एक अच्छी आदत है और हर कोई इसके साथ पैदा नहीं होता, इसलिए जो सफाई नहीं करते हैं, तो कोशिश करे उन्हें सफाई के लाभों को समझाने कि, जो दूसरों पर अपने विचार को थोपने की बजाए स्वच्छता पर जोर देती है। स्वच्छता भी विभिन्न प्रकार की हो सकती है जैसे निजी स्वच्छता, पर्यावरण की स्वच्छता, कार्यस्थल की सफाई (जैसे हमारे कार्यालय, स्कूल, कॉलेज आदि)। हमें रोज़मर्रा की जिंदगी में सफाई बरकरार रखने में ज्यादा समय नहीं लगता - जैसे हम खाना बनाने, खाना खाने, स्नान करने आदि जैसे नियमित रूप से सफाई के कार्य करते हैं, उसी तरह सफाई भी हमारे रोज़मर्रा के जीवन का एक अभिन्न अंग बनना चाहिए। वास्तव में छोटी-छोटी चीजों जैसे फर्श या सड़क पर कूड़ा न फेंक कर कूड़ेदान में कूड़ा फेंकना, सड़क पर थूकना या पेशाब नहीं करना आदि करके हम अपने परिवेश में पर्याप्त बदलाव ला सकते हैं।

हमें इसके साथ समझौता नहीं करना चाहिए और हमारे बच्चों को उनके बचपन से ही इसका अभ्यास करवाना चाहिए, ताकि वे एक जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में बड़े हों, जिसे पता हो कि कैसे एक स्वस्थ जीवन जिया जाता है। इस आदत को अपने बच्चों में माता-पिता द्वारा बाध्य किया जाना चाहिए क्योंकि माता-पिता, विशेष रूप से मां अपने बच्चे को और उसके व्यक्तित्व को सही आकार देने में मदद करती है।

जब हम जानते हैं कि स्वच्छता भगवान का दूसरा रूप है, तो हम अब भी इस मुद्दे के प्रति असंवेदनशील क्यों हैं? प्रदूषण के रूप में पर्यावरण को हानि पहुँचाने सहित कई स्वास्थ्य संबंधी गंभीर ख़तरे उत्पन्न हो सकते हैं। गंदे परिवेश में रोगाणु चारों ओर फैले जाते हैं जिन्हें हम हमारी नग्न आंखों से नहीं देख सकते हैं और कितनी तेजी से रोगाणुओं की संख्या बढ़ती है, उसकी कल्पना भी नहीं कर सकते। यदि हमारे पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ेगा तो यह अस्थमा, कैंसर, सीने में दर्द, फेफड़ों के संक्रमण जैसे रोगों को पैदा कर देगा जिससे व्यक्ति की मौत होनी निश्चित है।

इसलिए यह सही समय है जब हम जनता की चेतना को स्वच्छ बनाए रखने के लिए जगाएं, ताकि हम अपने पर्यावरण की रक्षा कर सकें और सैकड़ों लोगों के जीवन को बचा सकें जो अस्वस्थ वातावरण के कारण मर जाते हैं।

धन्यवाद।

 

स्वच्छता के महत्व पर भाषण – 4

हमारे आदरणीय प्रिंसिपल, वाइस प्रिंसिपल, शिक्षक और मेरे प्रिय विद्यार्थियों आप सभी को सुप्रभात !!

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि स्वच्छ विद्यालय अभियान के लिए क्षेत्र के अन्य विद्यालयों के साथ हमारे स्कूल ने हाथ मिलाया है, यह हमारी अपनी संस्था से इस अभियान को शुरू करने के लिए उपयुक्त माना गया है, जहां छात्रों के रूप में हम भी हमारे आसपास स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रोत्साहन प्राप्त करेंगे लेकिन इससे पहले कि हम इस विषय पर किसी भी तरह से बात करें पहले समझ लें कि सफाई क्या है?

शब्द 'स्वच्छता' में धूल, गंदगी, कचरा, गंध, दाग, आदि का अभाव दिखता है। ज्यादातर भारतीय स्थानों चाहे वह पैदल चलने का रास्ता हो या सड़क, रेलवे स्टेशन, सरकारी कार्यालय, अस्पताल या बस स्टॉप हो निस्संदेह यह आपको आँखों के लिए अप्रिय महसूस होगा। इसके अलावा सड़कों पर पड़े कचरे, विखंडित दीवारें और बहते हुए नाले के परिणाम स्वरुप बीमारियों के फैलाव और सड़कों पर पानी के फैलने की वजह से स्थिति और बुरी हो जाती है, जिसके फलस्वरूप अधिक से अधिक लोगों को बीमारियों के शिकार होने और समुचित उपचार और देखभाल की अनुपस्थिति में मरने वालों की संख्या बढ़ जाती है।

इसलिए इस संकट से बचने के लिए हमारे देश के मूल निवासियों को न केवल अपने घरों और काम के स्थानों में बल्कि उनके परिवेश में भी सफाई बनाए रखने के लिए प्रयास करना चाहिए। एक स्वच्छ और साफ़ वातावरण ही मन को खुश और एक परिपूर्ण जीवन बनाता है। एक प्रसिद्ध मुहावरे के हिसाब से “दान घर से शुरू होता है”। इसी तरह एक शहर, गांव की सफाई से पहले लोगों के घरों में सफाई शुरू होनी चाहिए।

इसलिए इस संकट से बचने के लिए हमारे देश के मूल निवासी को प्रभावी होना चाहिए। वास्तव में लोग अपने गांवों के पर्यावरण और उन गांवों में रहने वाले लोगों की स्वच्छता की सफाई सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय हो गए हैं। खुली जगहों पर शौचालय से बचने के लिए सार्वजनिक शौचालयों के अलावा व्यक्तिगत शौचालय भी बनाए गए हैं। गंदे पानी और ठोस कचरे के प्रबंधन के लिए प्रभावी उपाय उठाए जा रहे हैं। इसलिए जब गांव के लोगों ने इतनी कोशिश की है, तो इस अभियान में प्रसिद्ध शहरों में रहने वाले लोगों को क्यों पीछे रहना चाहिए। समझने की कोशिश करें कि स्वच्छता ऑक्सीजन, पानी और भोजन के रूप में मानव अस्तित्व के लिए जरूरी है। इसके अलावा यह अनुशासन और सफलता की पहचान की नींव है, क्योंकि अगर कोई व्यक्ति खुद को संगठित और स्वच्छ नहीं रख सकता तो वह दूसरों की सफलता की दिशा में कैसे योगदान करेगा। स्वच्छ वातावरण के अभाव में लोगों के साथ स्वस्थ संबंध बनाए रखना संभव नहीं है। कम से कम साफ-सफाई का न्यूनतम स्तर जैसे नियमित रूप से स्नान करना, शौचालय का उपयोग करने के बाद अपने हाथों को धोना, धूल से अपने पैरों की रक्षा करना, कूड़ेदान में कचरा फेंकना आदि हर किसी से अपेक्षा की जाती है।

स्वच्छता स्मारकीय रूप से महत्वपूर्ण है और इसको दैनिक अभ्यास में लाना चाहिए। अगर हम अपने और हमारे आस-पास के इलाकों को साफ रखेंगे, तो यह राष्ट्र निर्माण के कार्य में भी मदद करेगा। क्योंकि इससे फिर से अधिक से अधिक विदेशी पर्यटकों को हमारे देश की यात्रा करने और उसकी सुंदरता, प्रकृति और विभिन्न स्थानों का भ्रमण करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। हमें जीवित प्राणियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करना होगा जहां हर कोई एक सुसंगत सह अस्तित्व में रह सकता है।

धन्यवाद।


 

स्वच्छता के महत्व पर भाषण – 5

सुप्रभात मेरे प्रिय सर, मैम और मेरे सारे दोस्तों को नमस्ते। आज की सुबह सभा के लिए मैंने अपने विषय के रूप में सफाई को चुना है। यह दिनचर्या, परिवेश और स्वच्छता का एक बहुत जरूरी हिस्सा है।

सफाई केवल शारीरिक नहीं होती यह सामाजिक और मानसिक भी होती है, जो अच्छे व्यक्तित्व को बनाए रखने और दूसरों पर अच्छी छाप छोड़ने में सहायता करती है। स्वच्छता शरीर, मन और आत्मा को स्वच्छ और शांतिपूर्ण रखकर अच्छे चरित्र को जन्म देती है।

क्या ऐसा नहीं है कि हम खुद को मजबूत और धनी महसूस करते हैं जब हम अपने आप को और हमारे परिवेश को साफ रखते हैं। यह हमारी आत्मा को सकारात्मक और खुश बनाता है। स्वच्छता को बनाए रखना स्वस्थ जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग है, क्योंकि यह केवल स्वच्छता ही है जो बाहरी और आंतरिक रूप से साफ रखते हुए हमारे व्यक्तित्व को बेहतर बनाने में मदद करती है।

किसी ने सही ही कहा है कि स्वच्छता धार्मिकता का रास्ता है। इसका मतलब यह है कि स्वच्छता बनाए रखने और अच्छे विचार रखने से लोग परमेश्वर के करीब या निकट पहुँच जाते हैं। व्यक्तिगत स्वच्छता को शरीर और आत्मा की पवित्रता का प्रतीक माना जाता है जो स्वस्थ और आध्यात्मिक संबंध प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है। अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त करने, सकारात्मक रहने और नैतिक जीवन का नेतृत्व करने के लिए स्वच्छता बहुत जरूरी है।

हमारे शिक्षक चारों तरफ स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए उत्सुक हैं। इसका कारण यह है कि वे जानते हैं कि एक स्वस्थ, सुखी और शांतिपूर्ण जीवन जीने के लिए हम सभी को जीवन के हर पहलू में स्वच्छ आदतों का अभ्यास करना चाहिए क्योंकि अस्वस्थ हालातों ने बुराई को जन्म दिया है जबकि स्वच्छता पवित्रता का प्रतीक है।

खुद को साफ रखना या हमारे परिवेश को साफ रखना ज्यादा मुश्किल नहीं है। हमें इसे अपने लिए, हमारे आंतरिक सुख और शांति के लिए करना चाहिए। मनुष्य के रूप में सुरक्षित और स्वच्छ होने के लिए प्रोत्साहित करना हमारी ज़िम्मेदारी है। सफाई हमारी सकारात्मक सार्वजनिक छवि बनाने में मदद करती है तथा स्वस्थ और धनी रहने में हमारी सहायता करती है।

स्वच्छता को बनाए रख कर हम रोगों और अस्वास्थ्यकर सामाजिक, शारीरिक व मानसिक आंतरिक असुरक्षा से खुद को बचा सकते हैं। हमारी दिनचर्या में नियमित रूप से सफाई को शामिल करना बहुत सरल है। हमें सफाई से कभी समझौता नहीं करना चाहिए। हमारे लिए भोजन और पानी बहुत आवश्यक है।

मुझे खुशी है कि मेरे माता-पिता और शिक्षकों ने हमेशा से मुझे प्रेरित किया है और पर्यावरण को बचाए रखने की कोशिश की है। उन्होंने हमेशा सफाई और स्वच्छता के महत्व पर ज़ोर दिया है। प्रत्येक बच्चे को स्वच्छता के महत्व को अवश्य बताया जाना चाहिए। बचपन से उन्हें यह विरासत में मिलना चाहिए। स्वच्छता से खाने की आदतों, साफ कपड़ों, यहाँ-वहां सामान न फैलाना, शौचालय इस्तेमाल करने के बाद उसकी सफाई जैसी कुछ बहुत ही आवश्यक स्वच्छता की रणनीति है जिसे हर एक को समझना चाहिए और उसका पालन करना चाहिए।

धन्यवाद।


 

स्वच्छता के महत्व पर भाषण – 6

सुप्रभात मेरे प्रिय महोदय, मैम और सारे दोस्तों को मेरी तरफ से नमस्ते।

मैं अपने कक्षा अध्यापक को धन्यवाद करना चाहूँगा कि उन्होंने मुझे उस व्यक्ति के रूप में चुना

जो स्वच्छता के महत्व आपको समझा सकता है।

दोस्तों स्वच्छता एक बहुत ही आसान और महत्वपूर्ण चीज है जिसका हम सभी को एक व्यक्ति के रूप में और एक देश के नागरिक के रूप में पालन करना चाहिए। हमारे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष 'स्वच्छ भारत अभियान' योजना शुरू की है।

देश के नागरिक होने के नाते हमारा कर्तव्य है कि हमारा देश साफ रहे। हमें हमारी सड़कों, पर्यटन स्थलें, ऐतिहासिक जगहों, स्कूलों, कॉलेजों, ऑफिस भवनों आदि को बहुत ही साफ़ और स्वच्छ रखना चाहिए।

सफाई केवल देश के लिए ही आवश्यक नहीं है, यह हमेशा घर से शुरू होता है। हमारा घर, विद्यालय, कॉलेज, समाज, समुदाय, कार्यालय, संगठन और यहाँ तक की हमें खुद को भी साफ रखना चाहिए। यह केवल हमारी पसंद ही नहीं बल्कि इंसान होने के नाते हमारी ज़िम्मेदारी भी है। हमें अपने घर, आसपास के इलाकों, हमारे समाज, समुदाय, शहर, उद्यान और पर्यावरण को दैनिक रूप से साफ रखने की आवश्यकता है।

यह केवल हमारा शारीरिक दिखावा नहीं है बल्कि हमारी मानसिक चेतना से भी जुड़ा हुआ है। स्वच्छता हमारी सामाजिक शक्तियां बनाने में हमारी सहायता करती है। एक स्वच्छ व्यक्ति का व्यक्तित्व हमेशा सबको आकर्षित करता है। लोग हमेशा ऐसे लोगों की सराहना करते हैं और उनसे जुड़ना पसंद करते हैं जिनके पास अच्छी आदतें है। इसी तरह यदि हमारा देश साफ दिखेगा तो हम कितना अच्छा महसूस करेंगे, कितना अच्छा लगेगा बाहर से आए पर्यटक हमारे देश की तारीफ करेंगे। सफाई एक बार नहीं बल्कि हमारे दैनिक अभ्यास में होनी चाहिए।

शारीरिक सफाई के साथ मन की सफाई भी महत्वपूर्ण है जैसा कि हम अपने शरीर को साफ रखते हैं उसी तरह हमें अपने मन और हृदय को भी साफ रखना चाहिए। स्वच्छता का अभाव बुराई का प्रतीक है और स्वच्छता पवित्रता का प्रतीक है। सफाई को सही तौर पर भक्ति कहा जा सकता है, जब तक व्यक्ति स्वच्छ नहीं रहेगा तब तक आध्यात्मिकता का प्रचार भी नहीं किया जा सकता है।

शुरुआत से बच्चों को सफाई से जुड़े सबक अनिवार्य रूप से दिए जाने चाहिए। उन्हें शरीर की स्वच्छता के बारे में पढ़ाया जाना चाहिए। खाने से पहले उन्हें अपने हाथों को धोना चाहिए और सिर्फ साफ भोजन और शुद्ध पानी लेना चाहिए। स्कूल में बच्चों को साफ कुर्सियों और बेंच पर बिठाया जाना चाहिए। बुजुर्गों को बच्चों के लिए आदर्श के तौर पर पेश आना चाहिये। उन्हें स्वयं सफाई के बारे में सभी आवश्यक नियमों का पालन करना चाहिए।

मुझे पूरा विश्वास है कि जब हम इस सभा को खत्म करेंगे, तो हम सभी पहले की तुलना में स्वच्छता अभियान को और अधिक समर्पण के साथ चलाएंगे।

धन्यवाद! स्वच्छ भारत अभियान के संदेश को साझा करना जारी रखें। यह भूमिका हमे ही निभानी है। धन्यवाद!

 

 

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