लाल बहादुर शास्त्री पर भाषण

भला लाल बहादुर शास्त्री जी जैसे महान नेता को कौन नही जानता है, उन्हें किसी परिचय की जरुरत नही हांलाकि देश की इतनी सेवा करने के बाद भी उन्हें अन्य नेताओं के अपेक्षा कम सम्मान और पहचान मिला है। सारा देश उनके बारे में यहीं जानता है कि वह देश के दूसरे प्रधानमंत्री थे और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में से एक थे। भले ही वह एक बहुत ही क्षमतावान और प्रसिद्ध व्यक्ति थे, लेकिन उन्होंने सदैव अपना जीवन सादगी से जीते हुए, इसे अपनी मातृभूमि के सेवा के लिए समर्पित कर दिया। इसलिए उनके महान व्यक्तित्व के बारे में जानना हमारे लिए बहुत ही जरुरी है।

लाल बहादुर शास्त्री पर लंबे तथा छोटे भाषण (Long and Short Speech on Lal Bahadur Shastri in Hindi)

हमारे वेबसाइट पर लाल बहादुर शास्त्री पर लंबे तथा छोटे दोनो प्रकार के भाषण उपलब्ध है। इसके साथ ही हमारे वेबसाइट पर लाल बहादुर शास्त्री से जुड़े सभी तरह की समाग्रियां जैसे कि निबंध, भाषण, स्लोगन आदि भी उपलब्ध है। जिनका आप अपनी आवश्यकता अनुसार उपयोग कर सकते हैं।

लाल बहादुर शास्त्री पर भाषण 1

आदरणीय उप-प्रधानाचार्य, शिक्षकगण और मेरे प्रिय विद्यार्थियों आप सभी का हार्दिक स्वागत है।

इस विद्यालय का प्रधानाचार्य होने के नाते आज गाँधी जंयती के उन्हीं के शिष्यों में से एक के बारे में बताऊँगा, जिनका जन्म भी 2 अक्टूबर को ही हुआ था, जी हाँ मैं लाल बहादुर शास्त्री के बारे में बात कर रहा हुँ।

लाल बहादुर शास्त्री महात्मा गाँधी के अनुसरण करने वालो में से एक थे, लेकिन बहुत कम ही लोग आजादी के संघर्ष के दौरान उनके द्वारा किये गये कार्यों के बारे में जानते हैं। मुझे इस बात की काफी प्रसन्नता है कि मुझे भारत के सबसे श्रेष्ठ प्रधानमंत्रीयों में से गिने जाने वाले लाल बहादुर शास्त्री पर भाषण देने का यह विशेष अवसर प्राप्त हुआ है।

शास्त्री जी ने भारत के दूसरे प्रधानमंत्री का कार्यभार संभालने के साथ ही कांग्रेस के अन्य महत्वपूर्ण पदो पर भी कार्य किया। वह भारत के स्वाधीनता संग्राम के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले व्यक्तियों में से एक थे। वह महात्मा गाँधी द्वारा बहुत ही ज्यादे प्रभावित थे और उन्हें अपना आदर्श मानते थे, यह गाँधी जी का उनपर प्रभाव ही था कि वह इतने कम उम्र में स्वतंत्रता संघर्ष में कूद पड़े। इसके साथ ही उनकी गिनती देश के सबसे ईमानदार और अच्छे प्रधानमंत्रीयों में से की जाती है। वह एक ऐसे प्रशासक थे, जिन्होंने अपने कार्यों और गुणों से दुनिया भर में भारत का लोहा मनवाया। उनके जैसे महान नायक इतिहास पर अपनी गहरी छाप छोड़ जाते है।

उस वक्त के दौर में हमारे देश और समाज में कई प्रकार की बुराईयां व्याप्त थी, जिसने लड़ने के लिए कई प्रकार के कानूनो का निर्माण किया गया, कई तरह के परिवर्तन किये गये, लेकिन लाल बहादुर शास्त्री एक ऐसे व्यक्ति थे। जिन्होंने इस बुराई से लड़ने के लिए खुद अपने उपनाम का त्याग कर दिया। महात्मा गाँधी के तरह उन्होंने भी आजादी के लड़ाई के लिए सत्य और अंहिसा के मार्ग को चुना। अपनी कई सारी कैबिनेट मीटिंग के दौरान उन्होंने समस्याओं पर बहस करने के जगह उन्हें शांतिपूर्वक हल करने का प्रयास किया। उन्होंने भारत के विकास के लिए बनने वाले हर कानून और निती में मध्यस्थता का कार्य किया।

हमारे देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हरित क्रांति के बारे में तो आप सब ही जानते होंगे। शास्त्री जी के प्रधानमंत्री कार्यकाल में देश में कई क्रांतिकारी बदलाव हुए। यह लाल बहादुर शास्त्री ही थे, जिन्होंने जय जवान, जय किसान का प्रसिद्ध नारा दिया था। हरित क्रांति भारत के तरक्की के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम था, जिसका फैसला लाल बहादुर शास्त्री जी ने लिया था। हालांकि इस कार्यक्रम का मुख्य विकास इंदिरा गाँधी जी के कार्यकाल में देखने को मिला।

लाल बहादुर शास्त्री जी की मृत्यु ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर के बाद 11 जनवरी 1966 को उज्बेकिस्तान में हुई थी। मरणोपरांत उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया। उनके सम्मान में दिल्ली के विजय घाट में उनका स्मारक बना है, ताकि आने वाली पीढ़ीया भी उनसे प्रेरित हो सके। आज के समय में हमें शास्त्री जी जैसे राजनेताओं की आवश्यकता है, जो उन्हीं की तरह पूरी निष्ठा से देश की सेवा कर सके। तो आईये हम सब मिलकर लाल बहादुर शास्त्री जैसे महान आत्मा के लिए अपनी आँखे बंद करके उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करें। उनके जैसे ईमानदारी और सादगीपसंद इंसान सदियों में एक बार जन्म लेते हैं, जिनके तारीफ के लिए उनके कर्म ही काफी होते हैं।

आप सभी का धन्यवाद!

 

लाल बहादुर शास्त्री पर भाषण 2

आदरणीय प्रधानाचार्य, उप-प्रधानाचार्य, प्रिय शिक्षकगण और मेरे सहपाठी छात्रों आज के इस कार्यक्रम में आपका स्वागत है।

मैं शर्मित वाधवा कक्षा 12वीं का छात्र,मुझे आज के इस विशेष अवसर पर भाषण देने का अवसर देने के लिए मैं अपने कक्षा अध्यापक का विशेष आभार व्यक्त करना चाहुंगा। मैं खुद को बहुत ही भाग्यशाली मानता हुं, जो मुझे लाल बहादुर शास्त्री जैसे महानुभाव पर बोलने का अवसर मिला। वह स्वतंत्र भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे। हालाकि उन्हें इतने बड़े राजनैतिक पद का कोई विशेष अनुभव नही था फिर भी उन्होंने इस दायित्व को बखूबी निभाया। मुझे वह दिन आज भी याद है, वह 2 अक्टूबर का दिन था, जब हमारे कक्षा अध्यापक ने हमे महात्मा गाँधी और उनके जयंती पर कुछ बताने जा रहे थे। लेकिन थोड़ी देर बाद जब वह वापस आये तो उन्होंने हमसे कहा कि मैं आप लोगो को महात्मा गाँधी के जगह ऐसे व्यक्ति के बारे में बताने जा रही हुँ, जिनका जन्म भी उसी दिन हुआ था। उनकी यह बात सुनकर हम सब चौंक गये, जी हाँ वह शख्सियत जिसके बारे में वह हमें बताना चाह रही थी, वह कोई और नही शास्त्री जी थे। यह वह समय था जब मुझे गाँधी जी के राह पर चलने वाले और सादगी पसंद शास्त्री जी के बारे में पता चला।

वह ऐसे व्यक्ति थे, जो अपने किये गये वादो से कभी पीछे नही हटते थे। वह हमेशा हमारे देश को शक्तिशाली और खुशहाल बनना चाहते थे। उनके अनुसार अंग्रेजी हुकूमत ने हमारे लोगों का सिर्फ शोषण किया और उनसे काम लेकर उसके बदले में उन्हें कोई खास लाभ नही दिया तथा उनके मांगो को दबाने का भी पुरजोर प्रयास किया। यही कारण था कि वह इतने कम उम्र में भारत के स्वाधीनता आंदोलन में शामिल हो गये।

शास्त्री जी पूर्ण रुप से गाँधी जी के विचारों और नितीयों को मानने वालो में से एक थे। वह गाँधीजीकेइस विचार से काफी प्रभावित थे कि यदि गाँव सामर्थ्यशाली होंगे तो देश का विकास काफी आसानी से हो सकता है। इसीलिए वह चाहते थे कि गाँव के गरीब किसानों और मजदूरों को प्रोत्साहित करने के लिए कृषि अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया जाये। यह उनका किसानो और सेना के जवानो के प्रति आदर, उनके दिये गये जय जवान, जय किसान के नारे में भी झलकता है।

जब भारत बुरे दौर से गुजर रहा था, तो यह शास्त्री जी ही थे। जिन्होंने देश को इस संकट से निकालने का कार्य किया। उन्होंने देश में हरित क्रांति की शुरुआत की जिसने देश को तरक्की के मार्ग पर आगे बढ़ाया। इसके साथ ही उनके द्वारा जय जवान जय किसान का नारा भी दिया गया था, जिससे की देश के किसान शक्तिशाली तथा स्वालंबी बन सके और देश आत्मनिर्भरता के मार्ग पर आगे बढ़ सका।

 

देश में कई सफल नितीयों को लागू करने वाले शास्त्री जी की सन् 1966 में भारत –पाक युद्ध के ताशकंद समझौते पर दस्तखत करने के बाद वह इस सदमें को झेल न सके और उनकी मृत्यु हो गयी।

अंत में बस मैं यही कहना चाहुंगा कि शास्त्री जी ने अपने दो वर्ष के इस छोटे कार्यकाल में ऐसे कई वीरतापूर्ण और महत्वपूर्ण फैसले लिए जिसकी आज भी पूरा देश सराहना करता है।

आपना महत्वपूर्ण समय देने और मेरे इस भाषण को इतने ध्यानपूर्वक सुनने के लिए आप सभी का धन्यवाद!


 

लाल बहादुर शास्त्री पर भाषण 3

आप सभी का इस कार्यक्रम में हार्दिक स्वागत है मैं आशा करता हुं की आप सभी का दिन मंगलमय हो।

मैं अंकित पटेल यहां उपस्थित सभी लोगों का धन्यवाद करता हुं मैं काफी भाग्यशाली हुं कि मुझे आज इस अवसर पर लाल बहादुर शास्त्री के जीवन पर भाषण देने का मौका मिला है। मुझे उम्मीद है कि अपने इस भाषण से मैं आप सभी को लाल बहादुर शास्त्री के नितीयों और कार्यों के बारे में समझा पाउंगा।

शास्त्री जी का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को हुआ था, वह पंडित जवाहर लाल नेहरू के बाद वह भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बने थे, इसके साथ ही वह कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में से भी एक थे। शास्त्री जी महात्मा गाँधी के उन समर्थकों में से थे, जो हमेशा उनके विचारों और मूल्यों का आदर किया करते थे। वह महात्मा गाँधी के साहस और अंहिसा निती से काफी प्रभावित थे, यह उनपर महात्मा गाँधी का प्रभाव ही था, कि वह देश के आजादी की लड़ाई में इतने कम उम्र में शामिल हो गये थे।

बचपन से ही उनका देश के आजादी के प्रति खास लगाव था। बड़े होते हुए उन पर इतिहास का खास जूनून सवार था। जिसमें स्वामी विवेकानन्द की शिक्षाएं भी शामिल थी, जिनसे उन्हें शांति की प्रेरणा मिली, इसके अलावा महात्मा गाँधी और एनी बेसेंट ने भी उनके जीवन पर गहरी छाप छोड़ी। वह गाँधी जी से इतने प्रभावित थे कि गाँधी जी के असहयोग आंदोलन में सरकारी विद्यालयों को छोड़ने के आवाहन पर उन्होंने अपनी पढ़ाई तक छोड़ दी और अगले ही दिन असहयोग आंदोलन में शामिल हो गये। इसके बाद वह सदैव स्वतंत्रता संघर्षों में हिस्सा लेने लगे और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक महत्वपूर्ण सदस्य बन गये।

बाबूशिवप्रसादगुप्ताऔरभगवानदासने1921मेंकाशीविद्यापीठविश्वविद्यालयकीस्थापनाकीजहाँसे शास्त्री जीउर्तीण होकर उपाधि पाने वाले छात्र बने और इसके बाद वह नियमित रुप से स्वतंत्रता संघर्षों में हिस्सा लेने लगे। भारत के स्वतंत्रता संघर्षों के दौरान उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा, लेकिन इससे उनके हौसले में कोई कमी नही आई यही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी। जो उन्हें दूसरों से अलग बनाती थी। जेल जाने के दौरान उन्होंने कई पश्चिमी क्रांतिकारीयों और दार्शनिकों के बारे में जानने का मौका मिला।

स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात वह संयुक्त प्रांत (वर्तमान में उत्तर प्रदेश) के पहले गृह मंत्री बने और उन्होंने 1947 के सांप्रदायिक दंगो की रोकथाम तथा शरणार्थियों को बसाने में सार्थक भूमिका निभाई, उनके इस कार्य की सबसे खास बात यह थी की इसके लिये उन्होंने कोई बल प्रयोग नही किया, जो कि उनके नेतृत्व क्षमता का प्रत्यक्ष प्रमाण था। भारत का प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने कहा की वह ऐसा भारत बनायेंगे जहां लोगो के स्वतंत्रता और खुशी से कोई समझौता नही होगा। उनका एक मात्र लक्ष्य हमारे देश को धर्मनिरपेक्ष और मिश्रित अर्थव्यवस्था के साथ एक लोकतांत्रिक व्यवस्था बनाना था, जिसके लिए किये गये प्रयासों के लिये लोग उन्हें आज भी याद करते हैं।

अपनी नितीयों के अलावा उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के रुप में जाना जाता है, जिनका भारत के विकास के लिए लिये गये महत्वपूर्ण फैसलों में अहम योगदान है। देश में शुरु हुए हरित क्रांति और दुग्ध क्रांति के पीछे शास्त्री जी का ही योगदान था। देश में कृषि उत्पादन को बढ़ाने और किसानों के शोषण को रोकने के लिए उन्होंने जय जवान जय किसान का नारा दिया। उन्होंने देश में उत्पन्न हुए खाद्य संकटो और आकाल की स्थिति का भी बहुत ही अच्छे तरीके से सामना किया और देश का स्वाभिमान बनाये रखा।

शास्त्री जी ही वह व्यक्ति है जिन्होंने युद्ध की स्थिति में भी देश के अंदर शांति व्यवस्था को बनाये रखा। भारत-पाक युद्ध के दौरान वह दोनो देशों के बीच वह एक समझौता चाहते थे, ताकि दोनो देश के बीच शांति स्थापित हो सके और लड़ाई को रोका जा सके और उनके प्रयासों सेऐसा हुआ भी और यही वजह है कि हम शास्त्री जी को देश के इतिहास में सबसे महान प्रधानमंत्रियों में से एक मानते है।

तो आइये हम सब मिलकर शास्त्री जी जैसे महान आत्मा की शांति के लिए प्रर्थना करते हैं और यह कामना करते हैं कि उनके यह आदर्श हमारे देश के आने वाले नेताओं में हस्तांतरितहो, जिससे हमारा देश तेजी से प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ सके।

अपना महत्वपूर्ण समय देने के लिए आप सभी का धन्यवाद!


 

लाल बहादुर शास्त्री पर भाषण 4

आदरणीय प्रधानाचार्य, उप प्रधानाचार्य, मेरे साथीयों और प्रिय छात्रों आप सभी का आज के इस कार्यक्रम में स्वागत है।

इस विद्यालय का भूतपूर्व छात्र होने के नाते और वर्तमान समय में एक पत्रकार होने के नाते, मुझे अपने आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय से आज यह अवसर मिला की आज के इस खास कार्यक्रम में, मैं आप सबके सामने हमारे देश के महानतम प्रधानमंत्रियों में से एक और देश के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लेने वाले लाल बहादुर शास्त्री को लेकर अपने विचार व्यक्त कर सकू।

आप सब सोच रहे होंगे कि मैं वर्तमान में मीडिया में उनके मृत्यु से जुड़े हो रहे चर्चा पर अपना पक्ष रखुगां, लेकिन ऐसा नही है मैं यहा इनगलतफहमीयों पर चर्चा करने नही आया हुं, बल्कि इस अवसर का उपयोग मैं उनके विशाल व्यक्तित्व और उपलब्धियों और एक राजनेता होने के बावजूद उनके सादगी भरे जीवन पर चर्चा करने आया हुं।

उनके सादगी के ऐसे कई किस्से है जिनके बारे में चर्चा की जा सकती है। इन्हीं में से एक के विषय में मैं आपको बताता हुं। यह वाक्य तब का है जब शास्त्री जी देश के प्रधानमंत्री बने थे, उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद उनके घर वाले उनसे एक कार लेने के लिए कह रहे थे। इस विषय में उन्होंने अपने सेक्रेटरी को बताया और उनसे फिएट कार का दाम पता करने के लिए कहा। उस कार की कीमत 12000 हजार रुपये थी, लेकिन शास्त्री जी के पास बैंक खाते में मात्र 7000 रुपये थे। जिससे उन्होंने सरकारी फंण्ड से पैसे लेने के बजाय पंजाब नेशनल बैंक से 5000 रुपयें के लोन का आवेदन किया। जो कि मात्र दो घंटे में पास हो गया, इस बात से हैरान शास्त्री जी ने लोन अधिकारी को अपने कार्यलय में बुलाया और उससे पुछा कि क्या अन्य लोगों का लोन भी इतनी शीघ्रता से ही पास होता है और उन्होंने अधिकारी को इस बात की सलाह दी कि वह उन्हें बैंक के पूरे नियमों के विषय में बताए। तो इस घटना से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि शास्त्री जी कितने विनम्रशील और ईमानदार व्यक्ति थे।

यह उनके ईमानदार और सादगीपूर्ण चरित्र का ही नतीजा था, जो उनके शासनकाल में 1965 भारत-पाक युद्ध में ना सिर्फ भारत को विजय प्राप्त हुई बल्कि वह समझौते द्वारा इस युद्ध का समाधान करने में भी सफल रहे। अपने बुद्धि और नेतृत्व क्षमता के कारण वह देश को कई कठिन परिस्थितियों से निकालने में भी कामयाब रहे। वह सदैव ही जवाहर लाल नेहरु के प्रशंसक रहे और उनका मानना था कि हमारा देश तेजी से औद्योगिकरण करके ही गरीबी और बेरोजगारी से मुक्ति पा सकता हैं। उनका मानना था कि विदेशी आयात के जगह, अपने देश को सही तरीके से स्वावलम्बित करना तरक्की के लिए अधिक कारगर विकल्प है।

हम कह सकते हैं कि शास्त्री जी राजनैतिक और आर्थिक मामलों में अपने समय से कही आगे की सोच रखने वाले में से एक थे। उन्होंने देश में तरक्की और खुशहाली लाने के लिए अन्य देशो के साथ शांति समझौते और विदेश निती को बेहतर करने का प्रयास किया। उनके इन्हीं कार्यों ने देश को तरक्की के राह पर आगे बढ़ाने का कार्य किया।

वह सन् 1966 का दुखद वर्ष था, जब भारत-पाक युद्ध के बाद ताशकंद समझौते के बाद भारत माता के सपूत लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु हो गयी थी। यह समझौता इस लिए था कि दोनो देशो के बीच होने वाले युद्धो को रोका जा सके, पर शास्त्री जी भारत के विजय के बाद भी इस समझौते का सदमा ना झेल सके और 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में उनकी मृत्यु हो गयी।

अब मैं आप सबसे अपने इस भाषण को समाप्त करने की अनुमति चाहुंगा और मैं यह आशा करता हुं कि मेरे इस भाषण ने आप सबको प्रभावित किया हो तथा आप पर सकरात्मक प्रभाव डाला हो। जिससे की आपको विकास और उन्नति के मार्ग पर बढ़ने की प्रेरणा मिले।

मेरे इस भाषण को इतने धैर्यपूर्वक सुनने के लिए आप सबका धन्यवाद!

 

 

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