राजनीति पर भाषण

राजनीति इस्तेमाल में लिए जाने वाला एक बहुत ही आम शब्द है फिर चाहे हम राजनीतिक दलों के संदर्भ में बात करें या किसी व्यापक ढांचे में इसकी बात करें। हम अक्सर विचारधाराओं और विचार प्रक्रियाओं को कायम रखते हुए राजनीति पर भाषण देने वाले राजनीतिक नेताओं का निरीक्षण करते हैं। लेकिन राजनीतिक नेताओं, छात्रों और शिक्षकों के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ता के समूहों को भी यह विषय उनके असाइनमेंट या नौकरी में भाषण के हिस्से के रूप में संबोधित करने के लिए दिया जाता है। तो यदि आप इस कार्य को लेकर संघर्ष कर रहे हैं तो यहां आपके लिए चीजें आसान की गई हैं। राजनीति पर हमारे छोटे और लंबे भाषणों के साथ आपको अपने शिक्षकों या दर्शकों को प्रभावित करने के लिए काफ़ी मदद मिल सकती है और आप प्रभावी भाषण और/या विवरण तैयार कर सकते हैं। बस आप इन भाषणों को पढ़ें और विभिन्न विषयों में अंतर्दृष्टि प्राप्त करें।

राजनीति पर लंबे और छोटे भाषण (Long and Short Speech on Politics in Hindi)

राजनीति पर भाषण – 1

प्रिय छात्रों - भाषण सभा में आपका स्वागत है! आशा है अलग-अलग गतिविधियों के चलते आपकी पढाई प्रभावित नहीं हो रही है और जो आपके साप्ताहिक परीक्षण चल रहे हैं उनमें भी आप अच्छे नतीजे ला रहे हैं।

आज के भाषण का विषय राजनीति है। राजनीति क्यों? क्योंकि यह हमेशा से एक चर्चित विषय रहा है चाहे आप किसी भी देश से संबंध रखते हो। राजनीति इतना आकर्षक विषय है कि हर किसी को कुछ न कुछ इस पर कहना है। इसके अलावा मुझे यह जरूरी लगता है कि मेरे छात्रों को थ्योरी पर ध्यान देने की बजाए प्रैक्टिकल विषयों पर ध्यान ज्यादा देना चाहिए और पूरे आत्मविश्वास से अपनी सोच और विचारों को रखने में सक्षम होना चाहिए। तो मेरे भाषण के माध्यम से मुझे आशा है कि आप बहुत कुछ सीख सकेंगे।

अगर मैं राजनीति को परिभाषित करूँ तो मैं इसे सामाजिक प्रक्रिया के रूप में परिभाषित करूँगा जिसकी सहायता से सामूहिक शक्ति का गठन, उसे व्यवस्थित, प्रसारित और विभिन्न सामाजिक संरचनाओं में उपयोग किया जाता है। यह विशिष्ट सामाजिक प्रक्रियाओं और संरचनाओं में निहित है। यह स्थिति उस समाज में होती है जहाँ असतत आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था होती है।

सामाजिक दृष्टिकोण से राजनीति का अध्ययन सामाजिक संरचनाओं के भीतर राजनीतिक व्यवहार पर ध्यान केंद्रित करने के बारे में होगा। यह पूरे सामाजिक ताने-बाने के संबंध में राजनीतिक रिश्तों की खोज के बारे में भी है जिसकी यह जड़ है। राजनीति सत्ता के बारे में है और यह तब उजागर होती है जब सत्ता में मतभेद होता है। इसलिए कोई भी सामाजिक संघ जहाँ मतभेद शामिल हैं उसे राजनीति कहा जाता है।

वास्तव में राजनीति की अवधारणा मुख्य रूप से इस बिंदु पर जोर देती है कि प्रत्येक सामाजिक आधार में शक्ति संरचना शामिल होती है न कि केवल एक जगह जहां सत्ता के संदर्भ में सामाजिक भूमिकाएं आधिकारिक तौर पर बनाई जाती हैं। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि सामाजिक जीवन के हर पहलू में शक्ति संरचनाएं शामिल हैं और इस प्रकार राजनीति को 'राजनीतिक नेताओं’ का एकछत्र राज़ नहीं माना जा सकता। इसकी बजाए कोई भी प्रक्रिया जिसमें दूसरों पर शक्ति, नियंत्रण या समाज में मजबूती शामिल है वह आदर्श रूप से राजनीति है।

दूसरे शब्दों में राजनीति सिर्फ राजनेताओं के लिए ही सीमित नहीं है बल्कि इससे भी कहीं अधिक है। राजनीति को एक दिमागी खेल के रूप में भी परिभाषित किया जा सकता है जहां समाज के प्रमुख वर्ग समाज के कमजोर वर्गों या हाशिए पर बैठे लोगों पर शासन करने की कोशिश करते हैं। हम अक्सर लोगों को यह कहते हुए सुन सकते हैं कि "वे राजनीतिक खेल खेल रहे हैं"। राजनीति या राजनीतिक खेल खेलने से तात्पर्य किसी के लक्ष्य को समझने के लिए जोड़-तोड़, धूर्तता और गलत तरीकों का इस्तेमाल करना होगा। ज्यादातर नकारात्मक अर्थ इससे जुड़े होते हैं और इसमें सभी के लिए अच्छा सोचे बिना स्वार्थी हित शामिल हैं।

राजनीति तब तक ही अच्छी है जब तक यह सभी के सामान्य हितों की रक्षा करें और यदि ऐसा नहीं है तो इसे कम से कम दूसरों के हितों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। लेकिन शायद ही कभी ऐसा होता है और अक्सर लोग दूसरों को अपने वश में करने और शीर्ष पर खुद को स्थापित करने के लिए भेड़ चाल का हिस्सा बन जाते है। राजनीति सीखने की बजाए मुझे लगता है कि लोगों को नैतिक मूल्यों और गरिमा को सीखना चाहिए ताकि वे खुद के जीवन को स्थिरता से जी सकें तो दुनिया वास्तव में सभी के लिए शांतिपूर्ण आश्रय बन सकती है। भले ही आप किसी भी क्षेत्र से हो मानव संबंधों को महत्व देना और मानव जाति को पोषित करने के लिए सभी छोटे हितों से ऊपर उठना महत्वपूर्ण है।

धन्यवाद!

 

राजनीति पर भाषण – 2

देवियों और सज्जनों नमस्कार - हमारी जन कल्याण समिति की वार्षिक राजनीतिक सभा में आपका स्वागत है।

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि चुनाव आसपास हैं और विभिन्न राजनीतिक नेताओं तथा उनकी पिछली उपलब्धियों के राजनीतिक दिमागी चालों को समझने की कोशिश कर किस पार्टी को वोट देना है इस बारे में बहुत सारी चर्चा चल रही है। राजनीतिक नेताओं के बंद दरवाजों के पीछे क्या चल रहा है और जिस तरह के भी कदम वे उठाते हैं चाहे वह किसी विचारधारा से जुड़ा हो या किसी राजनीतिक सोच जिसका वे प्रचार करते हैं वह कभी भी मासूमीयत से भरा नहीं होता है और हमेशा उनकी राजनीतिक उठापटक, षडयंत्र और योजनाओं का हिस्सा होते हैं।

फिर भी अगर हम उनकी राजनीतिक चालों को समझ नहीं पाते हैं तो हम कम से कम यह समझ सकते हैं कि राजनीति क्या है। क्या यह सिर्फ विधायी निकायों के दायरे तक ही सीमित है या उससे परे है? आइए कोशिश करें और समझें!

यदि मैं बात करूँ, हमारे अपने देश की बात, यानी भारतीय राजनीति - यह विभिन्न स्तरों पर भारत के प्रशासन और शासन के साथ राजनीतिक दलों के कार्यों को संदर्भित करती है जैसे पंचायत स्तर, जिला, राज्य के साथ ही राष्ट्रीय स्तर और राजनेता वह व्यक्ति है जो व्यावसायिक रूप से राजनीतिक ज्ञानक्षेत्र का हिस्सा है। आम तौर पर ऐसा माना जाता है कि वह अपने लोगों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।

आम तौर पर यह कहा जाता है कि राजनीति सरकार की तकनीक और कला के बारे में है। जैसे किसी व्यक्ति द्वारा प्रस्तावित हर विचार के पीछे एक इरादा होता है वैसे ही राजनीतिक विचार भी कार्यान्वयन के उद्देश्य से आते हैं हालांकि कई लोग इसे नकारात्मक सोच के साथ समझते हैं। इसमें सत्तारूढ़ सरकार की राजनीति को प्रभावित करने या उस मामले के लिए सत्ता में रहने की ऐसी गतिविधियां शामिल हैं। इसमें कानून बनाने की प्रक्रिया और नीतियां भी शामिल हैं।

भारत के महान आध्यात्मिक नेता यानी महात्मा गांधी ने राजनीति के क्षेत्र में नैतिकता की भूमिका के बारे में बात की थी। उन्होंने कहा कि नैतिकता और नैतिकता रहित राजनीति बिल्कुल वांछनीय नहीं थी। जिन सिद्धांतों पर उन्होंने ज़ोर डाला वे नैतिक सिद्धांत थे। राजनीति से संबंधित उनके सिद्धांतों के अनुसार सच्चाई हमारे जीवन में सत्तारूढ़ कारक और साथ ही आत्म-शुद्धिकरण तथा नैतिकता भी है। हम सभी जानते हैं कि गांधी जी की राजनीति अहिंसा और निश्चित रूप से सत्य के सिद्धांतों के साथ जुड़ी हुई थी। उन्होंने भारत के लोगों को अपने सत्तारूढ़ नेताओं की नैतिकता के साथ संरेखित करने के लिए भी आह्वान किया। सच्चाई के प्रति पूरी तरह से समर्पित होने के कारण उन्होंने दृढ़ता से सभी के जीवन में नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों की भूमिका को बरकरार रखा। उन्होंने यह भी माना कि धार्मिक मुद्दे मृत्यु के जाल की तरह हैं क्योंकि वे एक आदमी की आत्मा को मार देते हैं।

उन्होंने एक बार कहा था, "मेरे लिए धर्म के बिना कोई राजनीति नहीं है, न कि अंधविश्वासों का धर्म या अँधा धर्म जो नफरत करता है और झगड़ा करता है, बल्कि धर्म की सहनशीलता है"।

आम तौर पर राजनीति को एक गंदा खेल माना जाता है जहां लोग पूरी तरह से स्वार्थी हितों से प्रेरित होते हैं और दूसरों के हितों को भी महत्व नहीं देते हैं। यह लोगों को नैतिक रूप से विकृत और धूर्त बनाता है। हालांकि अगर राजनेता अपनी भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को मानना ​​शुरू कर देते हैं और उनका निःस्वार्थ रूप से निर्वहन करना शुरू करते हैं तो 'राजनीति' शब्द नकारात्मक पहलुओं से जुड़ा नहीं होगा। लोगों के कल्याण के साथ-साथ राष्ट्र-राज्य के संबंध में कोई भी बिगड़ा राजनीतिक खेल नहीं होकर रचनात्मक दिमाग होना चाहिए।

धन्यवाद!

 

राजनीति पर भाषण – 3

हैलो दोस्तों – आप सभी को मेरी ओर से नमस्कार! आप सभी को लंबे समय के बाद देखकर मुझे बहुत खुशी हो रही है! मुझे आशा है कि आप जीवन का आनंद उठा रहे है और हर किसी का मन प्रफुल्ल्ति है।

राजनीति पर अपना भाषण शुरू करने से पहले मैं यहां मौजूद मेरे सभी दोस्तों के प्रति कृतज्ञता की भावना व्यक्त करता हूँ और इस समारोह को इतना सुंदर बनाने के लिए धन्यवाद देता हूँ।

राजनीति एक बहुत ही प्रचलित शब्द है क्योंकि इससे विभिन्न लोगों के अलग-अलग अर्थ जुड़े हैं तथा इसके लिए कोई विशेष तय परिभाषा नहीं है। हालांकि मैं अपनी परिभाषा को निम्न तरीके से रखना चाहूंगा: राजनीति वह प्रक्रिया है जिसमें एक एसोसिएशन अथवा संगठन के सदस्यों द्वारा निर्णय लिया जाता है। इसे और अधिक संकीर्ण रूप से परिभाषित करूँ तो राजनीति सरकार के पदों को प्राप्त करने और उनका इस्तेमाल करने तथा मुख्य रूप से एक राज्य के लोगों पर नियंत्रण हासिल करना है। इसके अलावा राजनीति संसाधनों के प्रसार के अभ्यास या अध्ययन को संदर्भित करती है और एक ज्ञात समुदाय (यह आमतौर पर एक संगठित आबादी है, जो पदानुक्रमित है) के भीतर सबसे महत्वपूर्ण शक्ति है जिसमें विभिन्न समुदायों के बीच पारस्परिक संबंध शामिल हैं।

कई देशों की तरह यदि आप देखे तो लोगों ने अपनी सोच और विचारों को सबके सामने रखने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों का गठन किया है। भले ही किसी विशेष पार्टी से जुड़े लोगों के बीच मतभेद हो लेकिन उनका साथ काम करना भी प्रशंसा के योग्य है क्योंकि इस मतभेद को सकारात्मक रूप से लिया जाता है। लोगों को लगता है कि जो मायने रखता है वह यह है कि वे कई अन्य चीजों पर सहमत हैं जो आम लोगों को एक लक्ष्य के लिए साथ लाने के लिए पर्याप्त हैं और यदि वे एक साथ आते हैं तो वे और भी शक्तिशाली बन जाएंगे।

ये लोग विभिन्न मुद्दों पर एक ही रुख को अपनाने के लिए अपनी सहमति देते हैं और कानून का पालन करते हुए समान परिवर्तनों को प्रोत्साहित करने के लिए सहमत हैं। चुनाव में हम क्या देखते हैं? चुनाव में मुख्य रूप से विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा होती है। राजनीतिक दलों के कुछ उदाहरण यहां दिए गए हैं - श्रम पार्टी, लिबरल पार्टी, कंज़र्वेटिव पार्टी और ग्रीन्स।

राजनीति में बहुमुखी आयाम होता है। इसमें विशिष्ट अर्थों का एक उचित संग्रह होता है जो स्पष्टीकरणपूर्ण और गैर-न्यायिक (जैसे "राजनीतिक सिद्धांत" और "सरकार का विज्ञान या कला") होते हैं; हालांकि यह समय-समय पर विभिन्न राजनीतिक चालों के संदर्भ में नकारात्मक अर्थ लेता है जो बेईमानी प्रथाओं और योजनाबद्ध रणनीतियों द्वारा चिह्नित हैं। राजनीति से आने वाली नकारात्मक भावना को "राजनीति खेलना" जैसे वाक्यांशों से उजागर किया जा सकता है जो लगभग 1853 के आसपास से प्रचलित रहा है जब उन्मूलनवादी वेंडेल फिलिप्स ने यह कहा "हम राजनीति नहीं करते हैं; विरोधी दासता हमारे साथ कोई मजाक नहीं है।"

राजनीतिक क्षेत्र में इस्तेमाल में लाई जाने वाली असंख्य रणनीतियां हैं जिनमें लोगों पर अपनी राजनीतिक रूप से थोपी गई राय, विधायी निकायों को तैयार करना, नियंत्रण शक्ति का प्रयोग करना अन्य राजनीतिक दलों के साथ तालमेल बैठाना और यदि यह रणनीतियाँ काम नहीं करती हैं तो विरोधियों के खिलाफ युद्ध की तैयारी करना शामिल है।

राजनीतिक खेल सामाजिक रूप से हर स्तर पर खेला जाता है। पारंपरिक समाजों की जनजातियों और वंशों से लेकर समकालीन स्थानीय सरकारों, संस्थानों के साथ-साथ दुनिया भर के संप्रभु राज्यों के संगठनों के व्यापक स्तर पर खेला जाता है। इसलिए राजनीति केवल विधायी निकायों तक ही सीमित नहीं है बल्कि आम तौर पर लोगों के लिए इसकी पहुंच व्यापक स्तर पर फैली हुई है जहां लोगों की छेड़छाड़, योजना और हस्तक्षेप दिन-प्रतिदिन के जीवन का हिस्सा बन गया है।

तो हमें गहराई से सोचने और समझने की जरूरत है कि हमारी वर्तमान सभ्यता किस दिशा में जा रही है? चाहे वह राजनीतिक हो या गैर-राजनीतिक हो, यदि वह नैतिकता और सिद्धांतों से रहित है तो यह समाज में गिरावट का कारण बनती है। मुझे बस यही कहना है!

धन्यवाद!


 

राजनीति पर भाषण – 4

यहाँ मौजूद सभी महानुभवों को मेरी ओर से नमस्कार - इस सभा में आने और आगामी चुनावों के लिए हमारे राजनीतिक दलों और हमारे अभियान का समर्थन करने के लिए धन्यवाद!

चूंकि हम राजनीतिक क्षेत्र से संबंधित हैं और हमारे राजनीतिक अभियानों के दौरान हमें अक्सर लोगों से तीखी बातों को सुनना पड़ता है जैसे कि "आप अपने निजी लाभ के लिए राजनीति खेलते हैं", "सभी राजनेता एक जैसे हैं यानी पापी, नैतिक रूप से विकृत, दोहरे मानक के लोग इत्यादि।" ठीक है ये बयान काफ़ी हद तक सच है लेकिन हर किसी एक तराज़ू में तौलना और पहले से ही उसके बारे में नकारात्मक विचार लाना अच्छा नहीं होता है।

हालांकि हम आपको आँख बंद करके भरोसा करने के लिए भी नहीं कह रहे हैं लेकिन एक तटस्थ रुख अपनाकर हमारे काम के माध्यम से हमें आंकें और यदि आपको कुछ भी असंतोषजनक लगता है या हम आपके मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं तो आप हमें इस तरह की बातें कह सकते हैं कि "सभी राजनेता एक जैसे हैं और हर समय गंदे चालें चलते हैं"।

यहां हमने इस सभा को अपनी तारीफें करने के लिए आयोजित नहीं किया है बल्कि आपको राजनीति के सभी वास्तविक अर्थ और इसके विभिन्न अर्थों को बताने के लिए किया है। तो आइए उन विभिन्न अर्थों के बारे में विस्तार से जानें।

परिभाषा के संदर्भ में राजनीति उन गतिविधियों को संदर्भित करती है जो किसी क्षेत्र या राष्ट्र के शासन से जुड़ी हैं। राजनीति से जुड़ी गतिविधियों का लक्ष्य किसी संगठन में दूसरों के ऊपर अपनी स्थिति को सुधारना या बढ़ाना या शक्ति प्राप्त करना है। जहां तक ​​राजनीतिक अवधारणा का सवाल है मेरा मानना ​​है कि यह एक पूरी तरह से बचकाना विचार है। ईमानदारी से कहूँ तो हम में से प्रत्येक आदमी राजनेता है। हम जो कुछ भी करते हैं आम तौर पर हम वह रुख अपनाते हैं जो प्रकृति में राजनीतिक है और स्वार्थी उद्देश्य से प्रेरित होता है - चाहे कोई इसे पसंद करे या ना करें। राजनीति जीवन के हर क्षेत्र से जुड़ी होती है। आप कैसे और किस तरह से शिक्षित होंगे, चाहे आपको नौकरी मिले या ना मिले, किसी को अपने जीवन को चलाने के लिए कितने पैसे की जरुरत है, कितना पैसा खर्च करने की जरूरत है और साथ ही कितना बचाने की जरुरत है, आपके देश में कर देना है या नहीं देना है ये सब मामूली प्रश्न नहीं है बल्कि राजनीतिक प्रश्न हैं।

क्या आपकी तैयारी और शिक्षा जीवन में दूसरों की तरह ही होनी चाहिए या क्या आपके पास दूसरों के मुकाबले बेहतर अवसर होने चाहिए? हम शून्य में या किसी अन्य व्यक्ति की भूमि में नहीं रहते हैं - जो कुछ भी हम करते हैं उसके कुछ नतीजे होते हैं और वे नतीजे न केवल हमें प्रभावित करते हैं बल्कि पूरे समाज को प्रभावित करते हैं। दूसरे शब्दों में किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ सामूहिक स्वतंत्रता एक दूसरे के साथ मेल खाते हैं, अधिकार, न्याय, कर्तव्यों के समान समानता राजनीतिक क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

राजनीतिक चाल चलना एक सार्वभौमिक घटना बन गया है और कोई भी मानवीय गतिविधि इससे बची नहीं है। चाहे हम किसी भी विधायी निकाय, प्रशासनिक कर्मचारी, शैक्षिक संस्थान, खेल क्लब में जाएँ - राजनीति सभी जगह मौजूद है। लेकिन यह जानना महत्वपूर्ण नहीं है बजाए यह कि लोग राजनीतिक चाल कैसे चल रहे हैं और खुद को फ़ायदा पहुंचा रहे हैं। अगर हम अपने देश के एक जिम्मेदार नागरिक हैं तो हमें ऐसी चीजों को कभी भी प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए और लोगों को धार्मिकता और नैतिकता के मार्ग को अपनाने का आग्रह करना चाहिए।

धन्यवाद!