गणतंत्र दिवस परेड - 26 जनवरी परेड

भारत में गणतंत्र दिवस, हर साल एक बड़ी और भव्य गणतंत्र दिवस परेड को नई दिल्ली में राजपथ, इंडिया गेट पर आयोजित करके मनाया जाता है। वार्षिक रुप से 26 जनवरी को राष्ट्रपति द्वारा ध्वजारोहण (झंड़ा फहराने) के बाद गणतंत्र दिवस परेड की जाती है। ये गतिविधि भारतीय गणतंत्र दिवस के उत्सव का प्रमुख आकर्षण होती है जो आमतौर पर बीटिंग रिट्रीट समारोह के होने तक अगले 3 दिनों तक चलती है। ये भारतीय सरकार द्वारा सुरक्षा क्षमता, भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत को पूरी दुनिया के सामाने दिखाने के लिये आयोजित की जाती है।

इस कार्यक्रम के आयोजन से लेकर अन्त तक आयोजन करने वाले और भाग लेने वालों द्वारा बहुत अधिक प्रयास किये जाते हैं। राष्ट्रीय राजधानी के साथ-साथ सभी राज्यों की राजधानी में मिलिट्री परेड आयोजित की जाती है। आर्मी (थल सेना), नेवी (जल सेना), एअर फोर्स (वायु सेना) के प्रतिनिधि और भारत के राज्यों के अनुसार परंपरागत नृत्य समूह गणतंत्र दिवस की परेड में भाग लेते हैं।

गणतंत्र दिवस परेड 2019

  • पिछले 61 वर्षों में पहली बार ऐसा देखने को मिलेगा जब गणतंत्र दिवस परेड में वीरता पुरस्कार पाने वाले बच्चे नही शामिल होंगे। इसका मुख्य कारण भारतीय बाल कल्याण परिषद पर लगे वित्तीय अनियमितता के आरोप हैं।
  • हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी गणतंत्र दिवस 2019 के परेड का आयोजन नई दिल्ली के राजपथ में किया जायेगा। इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर होने वाली परेड की शुरुआत भारत के राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कार वितरण के बाद होगी। गणतंत्र दिवस परेड की शुरुआत 9.30 बजे सुबह में होगी और यह तीन घंटे तक चलेगी। इस परेड में भारत के सुरक्षाशक्ति तथा युद्ध कौशल कलाओं को दिखाया जायेगा। इसके साथ ही 23 राज्यों की झांकियों द्वारा इसमें भारतीय संस्कृति और परंपराओं को भी प्रदर्शित किया जायेगा।
  • गणतंत्र दिवस 2019 परेड का टिकट नई दिल्ली में विभिन्न स्थानों से खरीदा जा सकता है। जैसे कि आईडीटीसी सेंटर, डीटीटीसी कांउटर्स, भारत सरकार पर्यटक केंद्र आदि ऐसे स्थान हैं जहां परेड देखने के लिए आवश्यक टिकटों को आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।
  • 26 जनवरी 2019 को होने वाली गणतंत्र दिवस परेड में काफी कुछ खास होने वाले है, इन्हीं में से कुछ विशेष बातों के विषय में नीचे बताया गया है।
  • इस वर्ष 26 जनवरी के दिन नई दिल्ली के राजपथ में होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह तथा परेड के मुख्य अतिथि दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति माटामेला सिरिल रामाफोसा’ होंगे।
  • इस वर्ष राजपथ में होने वाले गणतंत्र दिवस परेड देखने के लिए काशी की दो बेटियों को भी विशेष निमंत्रण भेजा गया। प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की रहने वाली जान्हवी सिंह तथा राम्या सिंह को मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा 26 जनवरी को राजपथ में होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह के लिए आमंत्रित किया गया है, क्योंकि इन दोनो मेधावी छात्राओं ने 2018 सीबीएसई की बारहवीं परीक्षा में टाप करते हुए वाराणसी का नाम रोशन किया था।
  • गणतंत्र दिवस परेड 2019 में उत्तराखंड द्वारा महात्मा गांधी के याद इस बार ‘अनाशक्ति आश्रम’ के थीम पर आधारित झांकी निकाली जायेगी। क्योंकि सन् 1929 के दौरान इस स्थान पर बापू ने अपना काफी समय व्यतीत किया था और यहीं पर उन्होंने अनासक्ति योग नामक पुस्तक भी लिखी थी।
  • पंजाब राज्य के झांकी को लगातार तीसरी बार गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा मिला है। इस वर्ष होने वाली गणतंत्र दिवस परेड में पंजाब राज्य की झांकी ‘जलियावाला बाग कांड’ पर आधारित होगा क्योंकि वर्ष 2019 में जलियावाला बाग नरसंहार को हुए, सौ वर्ष पूरे होने वाले हैं।
  • इस बार के गणतंत्र दिवस परेड 2019 में अंडमान एवं निकोबार की झांकियां भी काफी खास होने वाली है।
  • इस बार सेना की ओर से राजपूताना राइफल्स, मद्रास रेजिमेंट, सिख रेजिमेंट तथा अन्य कई रेजिमेंटो द्वारा गणतंत्र दिवस को नई दिल्ली के राजपथ में होने वाली परेड में हिस्सा लिया जायेगा। इसके साथ ही इस कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों के 600 बच्चों द्वारा भी भाग लिया जायेगा।
  • इस वर्ष होने वाली परेड में लोगों को M777 A2 और K9 वज्र जैसी आर्टलरी गनों को देखने का अवसर मिलेगा। इन आधुनिक तोपों को इसी वर्ष भारत के तोपखाने में शामिल किया गया है।

गणतंत्र दिवस परेड 2018

गणतंत्र दिवस पर होने वाली परेड, राजपथ पर होने वाले पुरे गणतंत्र दिवस कार्यक्रमों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। हर वर्ष के तरह इस वर्ष भी गणतंत्र दिवस के ऐतिहासिक दिन पर गणतंत्र दिवस परेड का आयोजन किया गया। इसके साथ ही वर्ष 2018 की इस परेड में ‘सीमा भवानी’ नामक बीएसएफ महिला दस्ते (बार्डर सिक्योरटी फोर्स) का भी प्रदर्शन देखने को मिला। इसमें इन महिला जाबांजों ने 350 सीसी के मोटरसाइकिलों पर जानदार तथा रोमांचक प्रदर्शन करके सभी दर्शकों का दिल जीत लिया।

विभिन्न कार्यक्रमों के साथ ही गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सेना के तीनों दस्तों द्वारा भी हिस्सा लिया गया और भारत के युद्ध क्षमता का प्रदर्शन किया गया। इस परेड में टी-90 टैकों, ब्रम्होस मिसाइल प्रणाली, वेपन लोकेटिंग रडार तथा अन्य कई सारे हथियारों और सैन्य संसाधनों का प्रदर्शन किया गया। इसके साथ ही 2018 की इस गणतंत्र दिवस परेड परेड में पहली बार स्वदेशी हेलीकाप्टर रुद्रा की झलक भी देखने को मिली।

इस वर्ष के गणतंत्र दिवस परेड में कुल 23 झांकियां देखने को मिली, जिनमें से 9 विभिन्न मंत्रालयों की थी और बाकी की 14 देश के विभिन्न प्रदेशों तथा केंद्र शासित राज्यों की थीं। इस परेड में आल इंडिया रेडियो द्वारा प्रधानमंत्री मोदी की ‘मन की बात’ कार्यक्रम के थीम पर आधारित झांकी निकाली गई।

इस बार के परेड में भारतीय सेना के तीनों भागों में बेस्ट मार्चिंग कंटिजेंट का पुरस्कार थल सेना के पंजाब रेजीमेंट को दिया गया तथा पैरामिलट्री और अन्य सहायक बलों के समूह में यह पुरस्कार इंडो-तिबेटीयन बॉर्डर फोर्स (आईटीबीपी) को दिया गया। महाराष्ट्र सरकार द्वारा ‘छत्रपति शिवाजी महाराज का राजतिलक’ के नाम से निकली गयी झांकी को 2018 के गणतंत्र दिवस परेड के सबसे श्रेष्ठ झांकी के रुप में पुरस्कृत किया गया।

गणतंत्र दिवस परेड क्या है?

गणतंत्र दिवस के उत्सव पर विशेष रुप से आयोजित परेड गणतंत्र दिवस परेड कही जाती है। आमतौर पर, एक परेड मिलिट्री या सार्वजनिक प्रदर्शन होती है जो किसी विशेष दिन या कार्यक्रम पर आयोजित की जाती है। हम ये कह सकते हैं कि ये औपचारिक निरीक्षण या औपचारिक अवसर पर व्यक्तियों का एकत्रित समूह है। ये अर्थपूर्ण ढंग से मार्चिंग या एक रास्ते या स्थान के चारो ओर घूमते हुये किसी चीज को प्रदर्शित करने के लिये आयोजित की जाती है। एक परेड को मार्च या मार्चपास्ट भी कहा जाता है जिसके दौरान एक थीम (विषय) आधारित एक समूह के व्यक्तियों द्वारा अनूठा प्रतिनिधित्व करके प्रदर्शित किया जाता है।

आमतौर पर, ये एक मार्ग के आस-पास विशेष पहनावे के साथ मार्चिंग बैंड या फ्लोट्स (बिजली द्वारा संचालित एक छोटा वाहन या गाड़ी) के द्वारा आयोजित किया जाता है। एक परेड विशेष कारणों की श्रृंखला के साथ आयोजित की जाती है हांलाकि, आम तौर पर किसी ईवेंट या त्योहार के उत्सव के दौरान आयोजित होती है। कभी-कभी, लोग विरोध प्रदर्शनों के दौरान परेड प्रदर्शन करते हैं।

राजपथ, इंडिया गेट पर भारत के गणतंत्र दिवस परेड का प्रदर्शन करने के लिए एक उत्कृष्ट व्यवस्था की जाती है। सबसे पहले, भारत के राष्ट्रपति राष्ट्रीय झंड़े को फहराते हैं जिसका अनुकरण राष्ट्रीय गान (जन,गण,मन) को गाकर किया जाता है। 21 तोपों के माध्यम से राष्ट्रीय सलामी दी जाती है। इसके बाद, भारत के राष्ट्रपति द्वारा सम्मान या पुरस्कार (जैसे अशोक चक्र, क्रीर्ति चक्र, आदि) उन लोगों को वितरित किये जाते जो इन्हें प्राप्त करने के पात्र होते हैं।

तब राष्ट्रपति के द्वारा बहादुरी पुरस्कार और मेडल या पदक लोगों (शस्त्र फोर्सों और सैनिकों) के बीच उनके साधरण साहस और कठिन परिस्थितियों में वीरता प्रदर्शित करने के लिये वितरित किये जाते हैं। कुछ बच्चे भी (जो राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार प्राप्त करते हैं) परेड में भाग लेते हैं जिसके दौरान इन्हें दर्शकों के सामने कुछ रंगीन सजे हुये हाथियों या वाहनो पर बिठाया जाता है।

26 जनवरी परेड के प्रतिभागी

भारत की गणतंत्र दिवस की परेड दुनिया की सबसे प्रसिद्ध परेडों में से एक है जिसमें 25 से अधिक चलते और घुड़सवार दल वाले, लगभग 20 सैन्य बैंड, विभिन्न सैन्य वाहन, 30 विमान, 30 सांस्कृतिक झाँकी, राज्यों के अनुसार सांस्कृतिक झांकी और 1200 स्कूल के बच्चे शामिल होते हैं।

भारतीय सेना, नेवी, और वायु सेना की विभिन्न रेंजीमेंट्स अपने विविध बैंडो और सरकारी सजावट के साथ परेड में भाग लेती है। भारतीय सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ, भारत के राष्ट्रपति, सलामी लेते हैं। भारत के विभिन्न अर्द्ध-सैन्य बल और अन्य सैन्य बल गणतंत्र दिवस की परेड में बहुत सक्रिय रुप से भाग लेते हैं। पूरी परेड का दृश्य विशेष रुप से ऊंट सवार सीमा सुरक्षा बल दल (पूरी दुनिया में इकलौती ऊंट सवार सैन्य बल) की वजह से बहुत ही आकर्षक और मनोरंजक हो जाता है। गणतंत्र दिवस परेड के अन्य प्रतिभागी एनसीसी कैडेट (विशेष रूप से देश भर से परेड के लिए चयनित) और स्कूल के बच्चे (सभी देश भर के विभिन्न स्कूलों से) होते हैं।

बहुत से बिजली से चलने वाले (जिन्हें फ्लोट्स भी कहा जाता है, जिनकी संख्या 20 से 30 होती है) छोटे वाहन और गाड़ियाँ भारतीय गणतंत्र दिवस में भारत के विभिन्न राज्यों और संयुक्त राज्यों की संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिये भाग लेती हैं। केन्द्रीय मंत्रालयों और राज्य के उद्यमों के इस तरह के फ्लोट परेड को एक भव्य रुप देते हैं। भारतीय गणतंत्र दिवस की वार्षिक परेड को पूरे राष्ट्र में टीवी और रेडियों के माध्यम से सीधे प्रसारित किया जाता है। इस परेड में भारतीय सेना और मिलिट्री की शक्ति, सभी भारतीय राज्यों की परंपराओं और संस्कृति, सरकार की विशेष गतिविधियाँ, संगीत, नृत्य और स्कूल के बच्चों द्वारा गाने आदि प्रदर्शित किये जाते हैं।

सैन्य बलों की मोटर साइकिल की इकाई अपने साहस का प्रदर्शन मोटर साइकिल की सवारी करके करती है जिसके बाद आकर्षक फ्लाई-पास्ट (लड़ाकू विमान द्वारा हवाई परेड) सैन्य हवाई जेट्स और हैलीकॉप्टर द्वारा राष्ट्रीय झंड़े को लेकर प्रदर्शित की जाती है। सभी दिखाई जाने वाली परेड विभिन्न धर्मो के लोगो के बीच, उत्सवों और त्योहरों से धनी विरासत और संस्कृति की विविधता में एकता प्रदर्शित करती है। इस वार्षिक परेड में, लगभग 1200 स्कूलों के बच्चे सांस्कृतिक नृत्य और गानों को दिखाने व गाने के लिये भाग लेते हैं। इस महान राष्ट्रीय कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागी अपना सौभाग्य समझते हैं।

पहली गणतंत्र दिवस की परेड 1950 में प्रदर्शित की गयी थी जब भारत का पहला गणतंत्र दिवस मनाया गया था। भारतीय राष्ट्रपति के पहुँचने के बाद परेड शुरु होती है। परेड से पहले, भारत के प्रधानमंत्री इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति पर पुष्प अर्पित करके भारत के लिये अपने जीवन का बलिदान करने वाले भारतीय जवानों को श्रद्धाजंलि देते हैं। और, भारत के राष्ट्रपति राष्ट्रीय ध्वज को फहराते हैं।

26 जनवरी परेड मार्ग और समय

भारत के गणतंत्र दिवस की परेड राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित की जाती है। ये राजपथ, इंडिया गेट पर प्रदर्शित की जाती है। ये राष्ट्रपति भवन (भारतीय राष्ट्रपति का निवास स्थान) के पास से रायसीना पहाड़ी से शुरु होती है और इंडिया गेट पर समाप्त होती है। परेड से पहले, प्रधानमंत्री के द्वारा अमर ज्योति जवानों को पुष्प अर्पित करके अमर शहीदों (देश को आजाद कराने के लिये स्वतंत्रता संग्राम के दौरान शहीदों) की याद में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धाजंलि दी जाती है साथ ही राष्ट्रीय झंड़े को राष्ट्रपति के द्वारा फहराया जाता है। गणतंत्र दिवस की परेड का मार्ग 5 किलोमीटर से अधिक लम्बा होता है।

आमतौर पर, ये 9:00 ध्वजा रोहण के बाद सुबह 9:30 पर 26 जनवरी को हरेक साल प्रदर्शित की जाती है। गणतंत्र दिवस की परेड का कुल समय लगभग 3 घंटे का होता है। वास्तविक कार्यक्रम 26 जनवरी के कुछ दिन पहले, प्रतिभागी रास्ते पर पूर्वाभ्यास करते हैं। शायद, सामान्यतः दो तीन घंटे के स्थान पर परेड का समय केवल 90 मिनट का भी हो सकता है। सरकार के कार्यक्रम के अनुसार, दलों की मार्च (परेड) की संख्या को एक दूसरे में मिलाकर कम किया जा सकता है।

टिकट कहाँ से प्राप्त करें और गणतंत्र दिवस की परेड में कैसे भाग लें

26 जनवरी के कार्यक्रम पर गणतंत्र दिवस की परेड देखने के लिये, किसी को भी प्रवेश के लिये टिकट की आवश्यकता होती है। उत्सव के लगभग दो हफ्ते पहले से ही टिकटों की बिक्री शुरु हो जाती है। आप हर साल 7 जनवरी से 25 जनवरी तक भारत के गणतंत्र दिवस की टिकट प्राप्त कर सकते हैं। दो प्रकार की टिकट उपलब्ध होती है, एक तो वी.आई.पी. (पहली लाईन पास) और दूसरी सामान्य टिकट। इन टिकटों को नई दिल्ली में निम्नलिखित स्थानों पर प्राप्त किया जा सकता है:

  • नार्थ ब्लाक गोलचक्कर
  • सेना भवन – गेट नंबर 2
  • प्रगति मैदान – गेट नंबर 1
  • जंतर मंतर – मुख्य गेट
  • शास्त्री भवन – गेट नंबर 3
  • जामनगर हाउस – इंडिया गेट के दूसरी तरफ।
  • लाल किला – अगस्त पार्क पंद्रह के अंदर तथा जैन मंदिर के विपरीत स्थान पर।
  • संसद भवन (रिशेप्शन आफिस) – यह विशेष काउंटर माननीय सांसदों के लिए बनाया गया है।

बहुत शान्ति और आसानी से गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल होने के लिये, हर एक को वहाँ के सुरक्षा दलों द्वारा बनाये गये सभी नियमों और कानूनों को मानना चाहिये। आपको अपना मोबाइल फोन, कैमरा, लैपटॉप, डिजिटल डायरी, ट्रांजिस्टर, कारों की रिमोर्ट वाली चाभी या अन्य कोई विद्युत यंत्र कुछ सुरक्षा कारणो से ले जाने की अनुमति नहीं है। आपको अपने सभी विद्युत यंत्रों को घर या वहाँ उपस्थित सुरक्षा जाँच केन्द्र पर रख देने चाहिये। अपने स्वंय के वाहनों पर पार्किंग स्टीकर प्रदर्शित करना आवश्यक है अन्यथा उन्हें उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्रों में प्रवेश करने से प्रतिबंधित कर दिया जायेगा। परेड शुरु होने के बाद, प्रवेश निषेध कर दिया जाता है और कोई भी कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश नहीं कर सकता। पानी की बोतलें, पेय पदार्थ या अन्य खाने योग्य चीजें ले कर जाने की अनुमति नहीं है। कार्यक्रम स्थल पर जाते समय आपके पास टिकट है या नहीं ये सुनिश्चित करना बहुत आवश्यक है।

26 जनवरी परेड के टिकट बिक्री का समय

गणतंत्र दिवस के टिकटों की बिक्री दो पालियों में की जायेगी पहली पाली की टिकट बिक्री सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर 12:30 तक चलेगी तथा दूसरी पाली के टिकट बिक्री दोपहर 2:00 से लेकर दोपहर 4:30 तक चलेगी।

7 जनवरी 2019 से लेकर 25 जनवरी 2019 तक – सुबह 10:00 बजे से लेकर दोपहर 12:30 बजे तक तथा दोपहर 2:00 बजे से लेकर दोपहर 4:30 बजे तक।

बीटिंग रिट्रीट समारोह के टिकट बिक्री का समय

27 जनवरी 2019 से लेकर - सुबह 10:00 बजे से लेकर दोपहर 12:30 तक तथा दोपहर 2:00 बजे से लेकर दोपहर 4:30 बजे तक।

28 जनवरी 2019 तक – सुबह 10:00 बजे से लेकर दोपहर 12:30 तक तथा दोपहर 2:00 बजे से लेकर दोपहर 3:00 बजे तक।

2019 में गणतंत्र दिवस परेड टिकट की कीमत

किसी को भी गणतंत्र दिवस की परेड की टिकट प्राप्त करने के लिये अपना वैध पहचानपत्र दिखाने की आवश्यकता होती है। टिकट खरीदने के दौरान धोखाधड़ी की गतिविधियों को रोकने के लिये (विशेष रुप से 2016 में), भारत सरकार ने टिकट खरीदने के लिये सरकारी फोटो पहचान पत्र को आवश्यक बना दिया है। 2019 की गणतंत्र दिवस के परेड की टिकट का मूल्य इस प्रकार है:

  • आरक्षित सीटों के लिए टिकट मूल्य – 500 रुपये।
  • अनारक्षित सीटों के लिए टिकट मूल्य – 100 तथा 20 रुपये।
  • अनारक्षित बीटिंग रिट्रीट समारोह में सीटों के लिए टिकट मूल्य – 50 तथा 20 रुपये।

अनारक्षित सीटें पहले आओ पहले पाओ (फर्स्ट कम फर्स्ट सर्व) के आधार पर उपलब्ध करायी जाती हैं। तो यदि आपने अनारक्षित टिकट खरीदा है या खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपको कार्यक्रम स्थल पर पहले पहुंचने का प्रयास करना होगा तभी आपको अपने पसंद की सीट मिल पायेगी।

26 जनवरी परेड 2019 के मुख्य अतिथि

भारत, 1950 से, अपने गणतंत्र दिवस पर हर साल एक मुख्य अतिथि आमंत्रित करता है। वो मुख्य अतिथि किसी भी देश का राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, या राजा हो सकता है। इस साल दक्षिण अफ्रीका के पांचवे तथा वर्तमान राष्ट्रपति “माटामेला सिरिल रामाफोसा” को मुख्य अतिथि के रुप में आमंत्रित किया गया है क्योंकि इस वर्ष भारत महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनायेगा और महात्मा गांधी का दक्षिण अफ्रीका से काफी गहरा जुड़ाव रहा है।

गणतंत्र दिवस परेड के लिए तैयारी

गणतंत्र दिवस परेड रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित किया जाती है। राष्ट्रीय समारोहों का आयोजन (जैसे गणतंत्र दिवस परेड, बीटिंग रिट्रीट समारोह, गणतंत्र दिवस समारोह का ध्वजा रोहण, शहीद दिवस आदि) रक्षा मंत्रालय की प्राथमिक जिम्मेदारी है। गणतंत्र दिवस परेड के प्रतिभागियों को अंतिम उत्सव की तैयारी के लिए राजपथ पर रिहर्सल करने के लिए इंडिया गेट पर आना पड़ता है। भारतीय सैनिक नई दिल्ली में आगामी गणतंत्र दिवस परेड के लिए सुबह जल्दी अभ्यास शुरू करते हैं।

बैठने की व्यवस्था और अन्य तैयारियाँ कम से कम दो हफ्ते पहले शुरु हो जाती है। 26 जनवरी को सुरक्षा कारणों से इंडिया गेट पर जनता का प्रवेश निषेध कर दिया जाता है और सुरक्षा प्रबंधों को कड़ा कर दिया जाता है। इस कार्यक्रम पर आतंकी घटनाओं को रोकने के लिये कुछ हफ्ते पहले से ही सभी राष्ट्रीय राजधानियों में पुलिस के माध्यम से कानूनी जाँच शुरु हो जाती है क्योंकि ये कार्यक्रम एक बहुत बड़ी भीड़ को अपनी ओर आकर्षित करता है।

गणतंत्र दिवस परेड का महत्व

एक भव्य गणतंत्र दिवस परेड में इस अवसर के महत्व को चिह्नित करने के लिए 26 जनवरी को आयोजित की जाती है। ये विशेषरुप से राष्ट्रीय राजधानी, दिल्ली में अमर जवान ज्योति के सामने स्वतंत्रता संग्राम और युद्ध के दौरान अपने राष्ट्र के बचाने के लिये शहीद हुये भारतीय सैनिकों को उनके बलिदान के सम्मान में श्रद्धाजंलि देकर आयोजित किया जाता है। ये रायसीना राष्ट्रपति भवन से राजपथ पर शुरु होकर और इंडिया गेट पर समाप्त होती है। ये परेड बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि ये भारतीय सेना के सशस्त्र बल की शक्ति (टैंक, मिसाइल, रडार, आदि के प्रदर्शन के द्वारा), विभिन्न भारतीय राज्यों की संस्कृति और परंपरा और स्कूलों के बच्चों की कलात्मकता का प्रतिनिधित्व करती है।

आमंत्रित मुख्य अतिथि (दूसरे देश से) और भारत के राष्ट्रपति गणतंत्र दिवस की परेड के बहुत महत्वपूर्ण अतिथि होते हैं। परेड की शुरुआत से पहले अमर जवान ज्योति पर पुष्प अर्पित करके श्रद्धांजलि, ध्वजा रोहण, 21 तोपों की सलामी और राष्ट्रीय गान का कार्यक्रम किया जाता है। भारत के राष्ट्रपति (भारतीय सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ) इस भव्य परेड की सलामी लेते हैं। ये भारतीय युवकों का साहस देता है और उन्हें एक भारतीय नागरिक होने पर गर्व महसूस कराता है।

भारत के अन्य शहरों में 26 जनवरी परेड

राष्ट्रीय राजधानी के अलावा, पूरे भारत में ऐसे और भी शहर है जहाँ गणतंत्र दिवस की परेड का आयोजन किया जाता है:

  • मुम्बई में मरीन ड्राइव पर और शिवाजी पार्क में गणतंत्र दिवस की भव्य परेड आयोजित की जाती है।
  • एक परेड और सांस्कृतिक मेले फील्ड मार्शल मानेकशॉ परेड ग्राउंड में 26 जनवरी को बेंगलूर में आयोजित की जाती है।
  • कोलकाता में, ये मैदान के पास लाल रोड पर आयोजित की जाती है।
  • चेन्नई में, इसे आयोजित करने के सबसे आम स्थान कामराज सालाई और मरीन बीच है।

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