आपदा प्रबंधन पर भाषण

हाल के दिनों में आपदा प्रबंधन को बहुत महत्व मिला है। आपदा प्रबंधन प्राकृतिक आपदाओं और विपत्तियों को कुशलतापूर्वक सँभालना सिखाता है। कुछ मामलों में आपदा प्रबंधन गंभीर स्थिति से बेशक ना बचाए लेकिन यह निश्चित रूप से उससे उत्पन्न प्रभावों को ज़रूर कम कर सकता है। आपदाओं के अप्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष प्रभावों, चाहे वह प्राकृतिक हो, मानव निर्मित हो, औद्योगिक हो या तकनीकी, का परिणाम हमेशा विनाश, क्षति और मृत्यु होता है। आपदाओं के कारण जानवरों और मनुष्यों दोनों के जीवन को बड़ा खतरा और नुकसान हो सकता है।

अधिकांश संगठनों, संस्थानों, स्कूलों और कॉलेजों ने अपने परिसर में आपदा प्रबंधन कौशल को अपनाया है। आपको किसी भी अवसर पर आपदा प्रबंधन पर भाषण देने की आवश्यकता हो सकती है। हमारा आपदा प्रबंधन पर नमूना भाषण आपको किसी भी ऐसे मौकों के लिए खुद को तैयार करने में मदद कर सकता है। यहां साझा किए गए आपदा प्रबंधन पर लघु भाषण स्कूल और कॉलेज स्तरों पर उपयोगी हैं। सभी भाषणों की भाषा बहुत सरल और जानकारीपूर्ण है। आपदा प्रबंधन पर लंबे भाषणों के नमूने का इस्तेमाल संगठनात्मक स्तर पर या और किसी अवसर पर किया जा सकता है।

आपदा प्रबंधन पर लम्बे और छोटे भाषण (Long and Short Speech on Disaster Management in Hindi)

आपदा प्रबंधन पर भाषण 1

आदरणीय प्रधानाचार्य, शिक्षकगण और प्रिय छात्रों!

आज प्राकृतिक आपदा न्यूनीकरण का अंतर्राष्ट्रीय दिवस है और हम यहां आपदा प्रबंधन पर चर्चा करने के लिए इकट्ठे हुए हैं। मैं इस कार्यक्रम को होस्ट करने और आपदा प्रबंधन के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को साझा करने का मौका देने के लिए बेहद आभारी हूं।

आपदा किसी भी प्रकार की हो सकती है या तो मानव निर्मित या प्राकृतिक। ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण में विभिन्न बदलावों के कारण दुनिया भर में सुनामी, भूकंप, तूफान, बाढ़ आदि जैसे प्राकृतिक आपदाएं होना आम हो गया है। हालांकि आपदा प्रबंधन अध्ययन की एक शाखा है जो लोगों को आपदा प्रबंधन में मदद करता है। यह महत्वपूर्ण है कि हम में से प्रत्येक व्यक्ति आपदा की स्थिति में कुछ सामान्य समझ को लागू करे। आपदा प्रबंधन लोगों को आत्मविश्वास देता है और आपदा के समय समाज को मजबूत बनाता है। आपदा प्राकृतिक या मानव निर्मित हो सकती है। आपदा प्रबंधन एक ऐसा अधिकार है जिसे आदर्श रूप से समाज और समुदाय की सहायता के लिए विकसित किया गया है। इससे लोगों को मानव निर्मित या प्राकृतिक आपदाओं की पूरी प्रक्रिया, ऐसी आपदाओं और उनके परिणामों से निपटने की प्रक्रिया को जानने में मदद मिलती है।

ऐसा अधिकतर देखा गया है कि बच्चे और महिलाएं आपदाओं के प्रति अधिक असुरक्षित हैं और इसलिए आज मैं अपने भाषण के माध्यम से आपदा प्रबंधन के महत्व को साझा कर रहा हूं:

आपदा प्रबंधन की टीम किसी भी आपदा की घटना से पहले ही बचने में मदद कर सकती है। वह टीम आपदा के संभावित कारणों का निरीक्षण कर सकती है और आपदा को रोकने या उससे बचने के लिए उचित कदम उठा सकती है। उदाहरण के लिए प्राकृतिक आपदा जैसे कि वनों की आग या मानव-निर्मित आपदा जैसे आतंकवादी हमलों से प्रभावी नियोजन और निवारक कार्रवाई करके बचा जा सकता है।

यह बहुत महत्वपूर्ण है कि लोग किसी भी आपदा की स्थिति में ना डरें और बुद्धिमानी से काम न करें। प्रत्येक व्यक्ति द्वारा उचित निवारक उपायों को इस्तेमाल में लिया जाना चाहिए और बच्चों को अपने माता-पिता के लिए भावनात्मक समर्थन देने हेतु बुद्धिमानी से कदम उठाने चाहिए। आपदा प्रबंधन के कर्मचारियों को बचाव कार्यों को कुशलतापूर्वक पूरा करने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है। इमारत के ढहने, बाढ़ या बड़ी आग आदि के दौरान प्रशिक्षित पेशेवर लोगों को सफलतापूर्वक बचा सकते हैं।

इन सब के अलावा यह भी महत्वपूर्ण है कि नागरिक आपदा प्रबंधन दल के साथ सहयोग करें और अपनी भावनाओं को नियंत्रित करें। कई बार लोग प्राधिकरण द्वारा उपेक्षित महसूस करते हैं और आपदा प्रबंधन टीम को विपरीत प्रतिक्रिया देते हैं। हालांकि टीम पीड़ित लोगों को राहत उपायों को उपलब्ध कराने में मदद करती है। वे भोजन, दवाइयों, राहत शिविर, कपड़े और अन्य आवश्यक वस्तुओं की व्यवस्था करते हैं। अगर उन्हें लोगों से सहयोग मिलेगा तो यह उनके मनोबल को बढ़ावा देगा क्योंकि वे ऐसी स्थितियों में बे-रोक टोक काम कर सकते हैं।

आपदा प्रबंधन दल स्थानीय प्राधिकरण के साथ मिलकर काम करता है और प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास प्रक्रिया को अंजाम देता है। घर, स्कूल और अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण पुनर्वास प्रक्रियाओं के कुछ उदाहरण हैं।

यह याद रखना भी महत्वपूर्ण है कि आपदा प्रबंधन टीम भी आपदा से उतनी ही प्रभावित हैं अंतर केवल यह है कि उन्हें हमें सहायता प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। इसलिए धैर्य दिखाने और उनके कार्य की सराहना करना हमारी जिम्मेदारी है। आपदा प्रबंधन दल किसी भी प्रकार की आपदा से पहले और बाद में तनाव और आघात को कम करने में मदद कर सकता है। अगर कोई आपदा की स्थिति उत्पन्न होती है, जैसे बाढ़ और भूकंप, तो टीम दुर्घटना को संभालने के लिए लोगों को ठीक से निर्देशित कर सकती है। दुर्घटना के बाद भी टीम भौतिक सहायता और वित्तीय सहायता प्रदान कर सकती है जो स्वचालित रूप से लोगों को दर्दनाक प्रभावों पर काबू पाने में मदद करती है।

मुझे आशा है कि यह आपके लिए एक जानकारीपूर्ण भाषण था और अंत में मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि हमेशा अपना सामान्य ज्ञान का उपयोग करें और घबराएँ नहीं क्योंकि जल्दबाज़ी किसी भी चीज़ के नुकसान का कारण बनती है।

धन्यवाद।

 

आपदा प्रबंधन पर भाषण 2

हेल्लो दोस्तों!

सबसे पहले मैं आपको इस समारोह को सफल बनाने के लिए आप सभी का धन्यवाद करना चाहता हूं। हमारी गैर-सरकारी संस्था किसी भी प्राकृतिक आपदा या विपत्ति के समय सहायता और पुनर्वास सेवाएं प्रदान करती है। हमने इस कार्यक्रम का आयोजन इसलिए किया है क्योंकि हम आपदा से लड़ने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को तैयार करने की आवश्यकता महसूस करते हैं जिसे सामान्यतः आपदा प्रबंधन कहा जाता है।

आपदा एक व्यापक घटना है जो आज मानव समाज को प्रभावित कर रही है। आपदा या तो मानव निर्मित होती हैं (जैसे आतंकवाद) या प्राकृतिक। ऐसा लोगों ने कई सालों से अनुभव किया है। हालांकि प्राकृतिक आपदा का रूप बदलता रहता है लेकिन जाति, पंथ, संस्कृति, देश आदि के बावजूद समाज के लिए यह बहुत बड़ी चुनौती रही है। नवीनतम विश्व आपदा रिपोर्टों के मुताबिक आपदा की संख्या बहुत आवृत्ति और तीव्रता से बढ़ रही है।

लोग सभी प्रकार की आपदाओं जैसे वनों की आग, भूकंप, सूखे, बाढ़, दुर्घटना, चक्रवात, भूस्खलन, विमान दुर्घटना जैसों के आदी होते जा रहे हैं। प्रौद्योगिकी की उन्नति के साथ-साथ आपदाओं के प्रभाव में भी बदलाव आया है। जब कोई आपदा आ जाती है तो यह लोगों के लिए बड़ी परीक्षा का समय होता है तथा तभी मनुष्य द्वारा इस ओर की गई तैयारियों की असलियत पता चलती है। विकसित और विकासशील देशों के मामले में यह सच है। बाढ़, सूनामी, तूफान, चक्रवात आदि ने दुनिया भर में अब तक कई जिंदगियों को खत्म किया है।

आपदा प्रबंधन उन खतरे से निपटने के लिए महत्वपूर्ण है जो आपदा के दौरान, उससे पहले और बाद में होते हैं। आपदा प्रबंधन एक बीमारी का इलाज करने के लिए दवा लेने जैसा है। आपदा भी महामारी रोगों या औद्योगिक विफलताओं जैसे भोपाल गैस त्रासदी या फुकुशिमा परमाणु ऊर्जा संयंत्र की मुसीबत आदि जैसी हो सकती हैं। ये सभी मानव जीवन के लिए बेहद खतरनाक हैं।

इस प्रकार हमारी टीम दोनों स्थितियों में आपदा को प्रबंधित करने में लोगों की मदद करती है: आपदा और उसके बाद के प्रबंधन के एहतियाती उपाय। हमें इस महान कार्य के लिए स्थानीय प्राधिकरण और कई उद्योगपतियों से दान भी प्राप्त होता है।

भारत सरकार भारत में आपदाओं का प्रबंधन करने के लिए 'कोंटीजेंसी फण्ड ऑफ़ इंडिया' के रूप में एक अलग फंड का रखरखाव भी करता है। आपदा न केवल चीजों को तबाह कर लोगों को नुकसान पहुंचाती है बल्कि यह लोगों के भावनात्मक आघात का कारण भी बनती है। हमारी टीम भावनात्मक कमजोरी पर काबू पाने में लोगों की सहायता करती है और अधिक विश्वास के साथ आपदा का सामना करने के लिए प्रेरित करती है।

आपदा के दौरान हम आम लोगों से अपील करते हैं कि शारीरिक, भावनात्मक और वित्तीय जैसी सभी प्रकार की सहायता लोगों को दें। हम आम लोगों को अपने दोस्तों, परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों को सहायता प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित करते हैं।

आपदा की स्थिति में हालातों को काबू में करने के लिए उचित तैयारी आवश्यक है। प्रभावी तंत्र पूरी तरह से प्रभाव को कम करने में मदद करते हैं। कुछ प्रकार की आपदाओं की संभावना को देखते हुए इस तरह की घटना के लिए लोगों और समाज की भेद्यता को कम करने में मदद मिल सकती है। हमारी टीम पुनर्वास और आपदा प्रबंधन में मदद करती है और जीवन और संपत्तियों के नुकसान को कम करने में सहायता करती है। इसका कारण यह है कि हमने अपने पेशेवरों को प्रशिक्षित किया है जो न केवल खाना और पानी की सहायता प्रदान करते हैं बल्कि लोगों के भावनात्मक पुनर्वास में भी सहायता करते हैं। हमारी टीम आपदा की स्थिति को काबू करने के लिए पूर्व-प्रभावी कार्रवाई भी करती है। हमने अपनी टीम को आपदा प्रबंधन पर प्रशिक्षित किया है और इस प्रकार प्रशिक्षित पेशेवर पर्यावरण को संरक्षित और सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं।

यद्यपि आपदा आप को अपनी भावनाओं को नियंत्रित कर समझदारी से काम करने से परेशान कर सकती है परन्तु धीरज रख आप उन संकटों को कम कर सकते हैं। इस मंच के माध्यम से हम हर किसी से अपील करते हैं कि किसी भी प्राकृतिक आपदा या विपत्ति की स्थिति में सतर्क रहें और एक-दूसरे की मदद करें।

धन्यवाद।

 

आपदा प्रबंधन पर भाषण 3

सुप्रभात माननीय प्रधानाचार्य महोदया, माननीय शिक्षकगण और मेरे प्रिय मित्रों!

आज हम सभी यहां एक महत्वपूर्ण सभा के लिए इकट्ठा हुए हैं जो एक बहुत ही गंभीर विषय पर बुलाई गई है। जैसा कि हम जानते हैं कि जहां हम रहते हैं वह जगह प्राकृतिक आपदाओं से ग्रस्त हैं और इस प्रकार युवाओं को ऐसी समस्या से अवगत कराने के लिए शैक्षिक संस्थानों का यह कर्तव्य है कि यह जगह भर में सूचनाओं को परिचालित करने में मदद करे। जिस क्षेत्र में हम रह रहे हैं वहां बाढ़, भूकंप आदि जैसी कई प्राकृतिक आपदाएं आती रहती और लोगों में ज्ञान और जागरूकता की कमी के कारण जान और माल का भारी नुकसान हुआ है। कोई भी व्यक्ति बार-बार दर्दनाक परिस्थितियों से गुज़रना नहीं चाहता है और इस प्रकार हमें ऐसी स्थितियों के लिए तैयार रहना चाहिए और कुछ निवारक उपाय अपनाने चाहिए।

निवारक उपायों को अपनाने से पहले हमें प्राकृतिक आपदाओं के कारणों को समझना चाहिए। समय-समय पर प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ने के कई कारण हैं और ये सभी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हमारी जीवनशैली से संबंधित हैं। प्राकृतिक आपदाओं का मुख्य कारण अधिक से अधिक आराम पाने का हमारा व्यवहार है। हम चाहते हैं कि हमारा जीवन अधिक आरामदायक हो और इस प्रकार हम अत्यधिक बिजली, ईंधन, पानी आदि का उपयोग करते हैं जो पृथ्वी पर पारिस्थितिक असंतुलन को जन्म देता है जिसके परिणामस्वरूप प्राकृतिक आपदाएं होती हैं। मुझे आशा है कि सभी लोग "वनों की कटाई" शब्द के बारे में जानते हैं जिसका मतलब है कि पेड़ों को काटना। कम पेड़ों का मतलब पृथ्वी पर कम ऑक्सीजन और अधिक कार्बन डाइऑक्साइड है। कार्बन डाइऑक्साइड की अत्यधिक उपस्थिति के परिणामस्वरूप ओजोन परत की कमी, ग्लेशियरों के पिघलने, बढ़ते तापमान, बढ़ते श्वसन समस्याएँ हुई हैं जिससे पृथ्वी पर जलवायु परिस्थिति में भारी बदलाव आया है। गर्मियों की अवधि बढ़ रही है और सर्दियों में कमी आ रही है। ये सभी बदलाव सीधे तौर पर सूखे, बाढ़, भूकंप, सूनामी, चक्रवात, टॉरनाडो, मिट्टी का क्षरण आदि जैसी अत्यधिक प्राकृतिक आपदाओं को न्यौता देते हैं।

स्थिति काबू से बाहर होने से पहले स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हमें कुछ निवारक उपायों को लेना होगा। हमें जो उपाय करने चाहिए वह पूरी तरह से हमारी जीवन शैली से संबंधित है। हमें हमारी सुविधा क्षेत्र से बाहर आना होगा। वनों की कटाई के कारण होने वाले नुकसान की क्षतिपूर्ति करने के लिए हमें जहां भी संभव हो वहां पेड़ों और पौधों को रखना शुरू करना होगा। इससे ऑक्सीजन में वृद्धि होगी और वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड कम करने में मदद मिलेगी। हमें जितना संभव हो उतना पानी और बिजली का उपयोग कम करना चाहिए। भोजन की कम बर्बादी बहुत उपयोगी होगी क्योंकि सूखे के दौरान भोजन की कमी बहुत ज्यादा महसूस होती है। कार पूलिंग के माध्यम से पेट्रोल, डीजल आदि जैसे ईंधन के इस्तेमाल को कम करके वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड को कम करने में मदद मिलेगी। पारिस्थितिक असंतुलन को नियंत्रित करने के कई अन्य तरीके हैं और हमें इसके बारे में सोचना है।

इसी के साथ मैं अपने शब्दों को समाप्त करना चाहूंगा और इस सम्मान के लिए प्राचार्या महोदया को विशेष धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने आपदाओं या विपत्तियों को रोकने के लिए और सभी विद्यार्थियों को इस सभा में सहयोग करने और सफल बनाने के लिए यह समारोह आयोजित किया। मुझे उम्मीद है कि यहां खड़े सभी लोग इन बातों को याद रखेंगे और अन्य नागरिकों के बीच जागरूकता फैलाने में मदद करेंगे ताकि इस बड़ी समस्या का सामना किया जा सके और समाप्त किया जा सके।

धन्यवाद और मैं कामना करता हूँ कि आपका दिन शुभ हो!


 

आपदा प्रबंधन पर भाषण 4

देवियों और सज्जनों सुप्रभात!

जैसा कि आप जानते हैं कि आज का यह दिन हमारे लिए एक बहुत ही खास दिन है क्योंकि हमारी पूरी सोसाइटी रोमांचक पर्यावरण शिविर के लिए जा रही है। लोगों को प्रौद्योगिकी के बिना प्रकृति में रहने का अनुभव हासिल करने का अवसर देने के लिए यह शिविर विशेष रूप से आयोजित किया गया है। इस शिविर में एक प्रशिक्षक के रूप में मेरी यह जिम्मेदारी है कि आपको उन गतिविधियों के बारे में बताऊँ जो हम सभी इस शिविर में करेंगे। इस शिविर को आयोजित करने के पीछे का कारण लोगों को पर्यावरण संबंधी समस्याओं और प्राकृतिक आपदाओं से अवगत कराना है।

हम सभी पर्यावरण संबंधी समस्याओं, जो हमारी स्वार्थ के कारण हैं, के बारे में जानते हैं। चूंकि इस शिविर का मकसद प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में लोगों को प्रशिक्षित करने का एक है इस प्रकार यह हम सभी के लिए बहुत उपयोगी है। प्राकृतिक आपदाएं तेजी से बढ़ रही हैं और लोगों को सुरक्षा उपायों से अवगत होने की जरूरत है। सुरक्षा उपायों के बारे में समझने से पहले हमें प्राकृतिक आपदाओं के कारणों को समझना होगा। ऐसी आपदाओं के होने के पीछे बहुत सारे कारण हैं- जैसे पेट्रोल, पानी की बर्बादी और इसका प्रदूषण, बिजली का अत्यधिक इस्तेमाल करने के लिए ईंधन का अत्यधिक उपयोग। हमें यह समझना चाहिए कि ये आपदा मानव की बढ़ती जरूरतों के कारण हैं और ये ज़रूरतें पृथ्वी को विनाश की ओर ले जाएँगी यदि हम यही नहीं रुके तो।

ऐसी कई जगह हैं जो प्राकृतिक आपदाओं से अत्यधिक प्रभावित हैं। सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक उत्तराखंड त्रासदी थी। उत्तराखंड में बाढ़ ने पूरे स्थान को बर्बाद कर दिया था और भोजन, आश्रय और जीवन का भारी नुकसान पहुँचा था। बाढ़ पर्यावरण क्षरण की प्रतिक्रिया थी। ऐसे कई मामले हैं जहां पहले बड़ी दुर्घटनाएं हुई हैं और स्थिति नियंत्रण में नहीं लायी गई तो भविष्य में भी ऐसा हो सकता है। विभिन्न आपदाओं में भूकंप सबसे आम आपदा है जिसके बाद बाढ़, सूखा आदि का नम्बर आता है। सभी आपदाओं में सूखा सबसे भयानक और घातक है। सूखा पानी की कमी और भोजन की कमी का कारण बनता है। धरती पर जीवित रहने के दो सबसे महत्वपूर्ण आवश्यक पानी और भोजन हैं। इन दो के बिना अस्तित्व असंभव है।

प्राकृतिक आपदाओं के कारण इन त्रासदियों को नियंत्रित करने के लिए हमें जीवन में अपनी ज़रूरतों को नियंत्रित करना होगा। हमारी ज़रूरतों के कारण हम पेड़ों को काटते हैं, हमारी जरूरतों के कारण हम पेट्रोल, डीजल आदि का उपयोग करते हैं और हमारी अनन्त इच्छाएं या तथाकथित जरूरतें हैं जो पर्यावरणीय में अनेकों समस्याओं को जन्म देती हैं। सूखा, मिट्टी का क्षरण, भूकंप आदि के लिए वनों की कटाई मुख्य कारणों में से एक है और इस तरह की आपदाओं को रोकने के लिए हमें अधिक से अधिक पेड़ों को यथासंभव रोपण करना होगा। डीजल, पेट्रोल, इंधन जैसे अत्यधिक ईंधन के उपयोग से हवा में CO2 की मात्रा में वृद्धि हुई है और इसलिए तापमान बढ़ने के कारण ग्लेशियर पिघल रहे हैं।

यह सही समय है जब हमें धरती के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों को समझकर आपदाओं के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए आगे बढ़ना होगा।

इसी के साथ मैं अपने भाषण खत्म करता हूं और सभी दल के सदस्यों और आयोजकों को इतने समर्थन के लिए और आप सभी को इस शिविर में शामिल होने और सफल बनाने में मदद करने के लिए विशेष धन्यवाद देना चाहता हूं।

धन्यवाद! आप सभी का दिन शुभ हो!