एकता में बल है पर भाषण

हम सभी जानते हैं कि एकता में ताकत है और एकता के बिना मानव सभ्यता विकसित नहीं हो सकती। अगर हम एक राष्ट्र के रूप में प्रगति करना और विकास करना चाहते हैं तो एकता के साथ रहना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह इतना महत्वपूर्ण विषय है कि हम अक्सर छात्रों और लोकप्रिय नेताओं को इस विषय पर भाषण और लेख लिखते देखते हैं। इसलिए लोगों की इस विषय के प्रति प्रासंगिकता पर विचार करते हुए हमने एकता में बल है पर दोनों लंबे और छोटे भाषणों को कवर किया है जिन्हें आप निश्चित रूप से एक संदर्भ बिंदु के रूप में उपयोग कर सकते हैं या इससे सहायता ले सकते हैं। हमारे भाषण व्यापक और समझने में आसान हैं। हमारे भाषणों को ध्यान से पढ़ें और अपनी पसंद के किसी भी भाषण का चयन करें।

एकता में बल है पर पर लम्बे और छोटे भाषण (Long and Short Speech on Unity is Strength in Hindi)

एकता में बल है पर स्पीच/भाषण 1

मेरे सभी प्रिय छात्रों को मेरी ओर से नमस्कार!

जैसा कि मैं अन्य शिक्षकों से मेरी कक्षा के छात्रों के बीच विवाद और संघर्ष की बातों को सुन रहा हूं यह मेरे लिए वास्तव में परेशानी करने वाली स्थिति है। आपकी कक्षा अध्यापक के रूप में आपको ऐसा करने से आपको रोकना मेरी जिम्मेदारी है। मेरा आपका अतिरिक्त समय लेने का कारण व्यावहारिक मोर्चे पर आपको तैयार करना और आपको अपने स्कूल के पाठ्यक्रम के अलावा बहुत कुछ सिखाना है। हालांकि शुरूआत में मैं बहुत गुस्से में था और मेरा उद्देश्य आप में से हर एक के माता-पिता को बुला कर आपको उनके सामना डांटना का था लेकिन बाद में मुझे एहसास हुआ कि हिंसा ये बढ़ते मामले आप सब की ओर आपके अध्ययन के अलावा मेरी तरफ से पर्याप्त समय समर्पित करने में असमर्थता और मेरी लापरवाही भी हो सकती है।

तो आज मैं यहां एकता में बल है पर भाषण देने के लिए आप सब के सामने हूं। मुझे यकीन है कि आप सभी एकता के महत्व को समझते हैं क्योंकि अब आप काफी परिपक्व हो गए हैं। क्या नहीं हुए? और यदि आप समझते हैं तो आपको यह भी समझना चाहिए कि ये लड़ाई और झगड़े बिल्कुल तथ्यहिन हैं क्योंकि ये केवल स्थिति को बिगाड़ते हैं और किसी भी रिश्ते की सुंदरता को खराब करते हैं। तीसरा कोई भी बाहरी व्यक्ति झगड़े और दो व्यक्तियों के बीच होने वाली झड़पों से फ़ायदा उठा सकता है। क्या आपने एक पुराने किसान की कहानी नहीं सुनी जिसके तीन बेटे थे?

यह कहानी इस प्रकार थी - एक पुराना किसान जो मौत के कगार पर था उसके तीन बेटे थे जो आपस में बहुत झगड़ा करते थे। एक दिन उसने अपने सभी पुत्रों को बुलाया और हर एक को तोड़ने के लिए एक लकड़ी दी। हर बेटा लकड़ी तोड़ने में कामयाब रहा। फिर उसने अपने सबसे बड़े बेटे को लकड़ियों का एक बंडल दिया और उससे इसे तोड़ने के लिए कहा। वह ऐसा नहीं कर सका और इसी तरह किसान ने अपने शेष पुत्रों को भी वही लकड़ी का बंडल दिया जो इसे तोड़ने में नाकाम रहे।

फिर उसने अपने बेटों से कहा “जिस तरह कोई भी आसानी से एक लकड़ी को तोड़ सकता है उसी तरह एक व्यक्ति को बर्बाद करना भी आसान है इसलिए अगर तुम सब मेरी मृत्यु के बाद अलग रहना चुनते हैं तो कोई भी तुम सब की स्थिति का फायदा उठा सकता है और आपको नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन अगर तुम सब इस लकड़ी के बंडल की तरह एक साथ रहना चुनते हैं तो कोई भी आपका दुश्मन आपको नुकसान नहीं पहुंचा सकता”। यह सुनकर उसके सभी बेटों ने अपने जीवन के बाकी समय के लिए एक साथ रहने का वादा किया। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि कहानी की शिक्षा है एकता में बल।

यह स्थिति आप सब पर भी लागू होती है। यदि मेरे सभी छात्र एकता से रहते हैं तो कोई भी मेरी कक्षा पर एक उंगली उठाने और आपकी कमज़ोर स्थिति का लाभ उठाने में सक्षम नहीं होगा। असल में आप सभी को सद्भाव में रहना चाहिए और यदि संघर्ष की कोई भी स्थिति आपके सामने आती है तो इसे शांतिपूर्वक हल करने का प्रयास करें। कोई भी लड़ाई इतनी बड़ी नहीं हो सकती जिसे चर्चाओं के माध्यम से हल नहीं किया जा सके। चर्चा वास्तव में मददगार साबित होती है क्योंकि फिर आप इस तरह की समस्याओं से बचने का समाधान ढूंढ सकते हैं जिससे जीवन काफ़ी शांतिपूर्ण हो जाता है। हमेशा याद रखें कि दूसरों के लिए कभी भी हंसी का पात्र ना बने और हमेशा अहिंसक साधनों के साथ स्थिति को शांत रखने का प्रयास करें।

अब मैं ईमानदारी से आशा करता हूं कि आप में से प्रत्येक ने मेरी बातों को गंभीरता से लिया है और इसे अपने जीवन में भी लागू करने की कोशिश करेंगे।

धन्यवाद!

 

एकता में बल है पर स्पीच/भाषण 2

सम्मानित प्रधानाचार्य, उप-प्रधानाचार्य, शिक्षकगण और मेरे प्यारे सहपाठियों – आप सभी को मेरी ओर से सुप्रभात!

मैं, कक्षा -11वीं की छात्रा, स्वाती सिंह ने "एकता में बल है" पर एक भाषण तैयार किया है जो आज मैं आप सबके सामने प्रस्तुत करना चाहती हूं। आज के इस भाषण समारोह के अवसर पर आपको आश्चर्य होगा लेकिन पहले मुझे अपने संदेह को स्पष्ट कर दें। ऐसा ज़रूरी नहीं है कि एकता में बल है पर बात की जाए लेकिन हमारे राज्य और देश में बड़े पैमाने पर हिंसा और आतंकवाद के बढ़ते मामलों पर विचार करने के बाद मुझे एकता की बात करने की इच्छा हुई और मेरे साथी विद्यार्थियों को चर्चा में संलग्न करने का मन हुआ। इसके अलावा हमें हमारे चारों तरफ विघटन के कई हिंसक मामलों देखने को मिलते हैं और यह महसूस करते हैं कि ये लोग वास्तव में गुस्सैल स्वभाव के बन रहे हैं और सामाजिक और नैतिक मूल्यों को खो रहे हैं। यह सही समय है कि हम बैठे और यह महसूस करें कि हम किस दिशा की ओर जा रहे हैं।

हमारा देश भारत एक बहुसांस्कृतिक भूमि के रूप में जाना जाता है जहां विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि के लोग सद्भाव में रहते हैं। हालांकि स्थिति की विडंबना यह है कि हमारा अपना देश सांप्रदायिक हिंसा, झगड़े, आतंकवादी गतिविधियों आदि की बढ़ती घटनाओं से भरा हुआ है।

हर दिन खबरों में हम हिंसक व्यवहार की भयावह घटनाओं के बारे में सुनते हैं। रक्तपात से कई निर्दोष लोग अपना जीवन खो देते हैं। यह सही वक़्त है जब हम पुराणी कहावत एकता में बल है को याद करें और हमारी मातृभूमि पर हिंसा को होने से रोकें। क्या हम नहीं जानते कि "एकता से हमारा अस्तित्व कायम रहता है, विभाजन से हमारा पतन हो जाता है"?

हमारा देश एक मजबूत और विकसित राष्ट्र के रूप में तब तक नहीं उभरेगा जब तक कि इसकी दुखद  स्थिति बेहतर न हो जाए और लोग यह समझ जाएँ कि हिंसा किसी भी समस्या को सुलझाती नहीं है बल्कि बढ़ाती है। इसके अलावा मनुष्य भी एक सामाजिक प्राणी है और वह अलगाव से नहीं रह सकता। उसे अपने अस्तित्व को मान्य करने के लिए दूसरों के साथ की आवश्यकता होगी। एक आदमी सब कुछ नहीं कर सकता। वह एक समय में कई चीजों को नहीं संभाल सकता। दूसरे कामों को संभालने के लिए उसे दूसरों का साथ चाहिए। उदाहरण के लिए यदि कोई शिक्षक विद्यार्थियों को सिखाता है तो कौन फसल उगाएगा और लोगों को खिलाएगा, कौन कपड़ों की सिलाई करेगा, कौन मरीजों की देखभाल करेगा, कौन हमारे देश की सीमाओं की सुरक्षा करेगा।

इसलिए यह निश्चित रूप से एकता और टीम-वर्क है। अन्य लोगों की मदद के बिना किसी भी व्यक्ति का जीवन संभव नहीं है। इसलिए सभी को सद्भाव में काम करना चाहिए और एक-दूसरे का सहयोग देना तथा एक-दूसरे को प्रोत्साहित करना चाहिए। अगर लोग कठोर और असंगत बने रहेंगे तो हमारे समाज की नींव गिरेगी और हमारा देश कभी भी दुनिया के शक्तिशाली देशों के समान एक मजबूत राष्ट्र के रूप में खुद की स्वतंत्र छवि बनाने में सक्षम नहीं हो पाएग। एकता प्रत्येक व्यक्ति को शक्ति देती है और एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाने में मदद करती है। वही इसके विपरीत हिंसा और दुखद स्थिति देश को कमज़ोर बनती है और इसे पिछड़ेपन की ओर ले जाती है।

आइए हम इस गंभीर मुद्दे के प्रति अपने आप को संवेदनशील बनाएं और अपनी मातृभूमि को हिंसक और बर्बर व्यवहार के कृत्यों से मुक्त करने की प्रतिज्ञा लें।

धन्यवाद।

 

एकता में बल है पर स्पीच/भाषण 3

प्रिय सोसायटी के सदस्यों – आप सभी को मेरी ओर से नमस्कार!

मैं आप सभी का दिल से अपनी सोसाइटी के क्लब हाउस में स्वागत करता हूं और आज के समारोह के आयोजन के लिए हर किसी का धन्यवाद करता हूं। हालांकि राधाकृष्ण सोसाइटी के एक सचिव के रूप में मैंने तीन साल पूरे कर लिए हैं लेकिन फिर भी यह महसूस होता है कि यह सब कुछ सिर्फ एक दिन पहले हुआ था। मेरे पास अब भी इतनी ऊर्जा बची है कि मैं अपने समाज के विकास की दिशा में अधिक से अधिक काम करूँ और हर गुजरते दिन इसे बेहतर बना सकूं।

हालांकि मैं संपूर्ण श्रेय नहीं ले सकता क्योंकि सोसाइटी के सभी सदस्य हमेशा सभी मामलों में बहुत सहयोग करते रहे हैं-चाहे वह किसी भी समारोह का आयोजन करने, सोसाइटी के पैसे समय पर जमा करने, संकट की किसी भी स्थिति का सामना करने आदि के बारे में हो। मुझे हमेशा सभी का समर्थन मिला है। ये तीन साल इतने महत्वपूर्ण और अच्छे रहे हैं कि मैं गर्व से कह सकता हूं कि हमारे पड़ोस की सभी सोसाइटीयों में राधाकृष्ण सोसायटी सबसे अच्छी है। ऐसा इसलिए नहीं कि हमने अपने परिसर को अच्छी तरह से बनाए रखा है और पूरे वर्ष विभिन्न समारोहों का आयोजन किया है बल्कि इसलिए भी कि हमारे लोगों में एकता है और जब भी परीक्षा की स्थिति आती है तो हम सभी एकजुट होकर हमेशा एक साथ खड़े होते हैं। हमने एक दूसरे के साथ साझा किए हुए संबंधों के विवादों या संघर्षों को कभी महत्व नहीं दिया है।

इसलिए आज के अवसर पर विचार करते हुए मैं "एकता में बल है" पर एक भाषण देना चाहता हूं। यह कहावत काफी आत्मविवेकी है जिसका अर्थ है एक साथ रहना ताकत का एक स्रोत है। उपरोक्त नीतिवचन सामान्य रूप से सार्वभौमिक है और इसे किसी भी परिवार, समुदाय या देश में बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है। इसका अर्थ है कि यदि हम एकजुट रहें तो हम मजबूत हैं और किसी भी मुश्किल स्थिति को दूर कर सकते हैं।

एकता का सिद्धांत समाज और राष्ट्र दोनों में खुशी और शांति की भावना फ़ैलाता है और साथ ही साथ दया की सीख भी देता है। वास्तव में यह शब्द 'एकता' बिल्कुल उपयुक्त है क्योंकि यह हमारे समाज को परिभाषित करता है जहाँ हम एकता और सद्भाव के साथ रहते हैं। बेशक कई बार हमारे बीच में मतभेद हुए लेकिन हम इस तरह की परिस्थितियों पर विचार-विमर्श और एक-दूसरे के दृष्टिकोण को समझने से इन्हें दूर करने में कामयाब रहे।

यह पुरानी कहावत उस समय से प्रचलित है जब सभ्यता का जन्म भी नहीं हुआ था। प्रारंभ में मनुष्य अलग जीवन जीता था। धीरे-धीरे परिवारों का गठन हुआ और उन्हें एक साथ रहने के महत्व का एहसास हुआ जिसके फ़लस्वरूप मनुष्य ने समाजों और समुदायों का गठन शुरू कर दिया। हालांकि, "एकता में बल है का कानून" प्रत्येक व्यक्ति को इक्कट्ठे और अलग रहने की सीख देता है और आवश्यकता पड़ने पर ईमानदारी से एक-दूसरे के लिए खड़े होने का महत्व भी सिखाता है। अगर कोई व्यक्ति अन्य व्यक्ति के व्यक्तित्व को स्वीकार करने या बात मानने से मना कर देता है तो अराजकता की स्थिति उत्पन्न होती है। उदाहरण के लिए यदि किसी परिवार में कोई भी सदस्य विद्रोही हो जाता है तो वह उस घर के भीतरी वातावरण को ख़राब कर देता है। इसी प्रकार समाज या राष्ट्र में यदि कोई भी समूह या व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी से मुँह फेर लेता है तो उस समाज के पतन को रोका नहीं जा सकता।

सहिष्णुता, बलिदान की भावना, प्रेम, करुणा, स्नेह, नम्रता, दया एक समाज के स्तंभ हैं और अगर कोई भी स्तंभ हिलता है तो समाज की पूरी नींव हिलती है। इसलिए ये स्तंभ समाज के हर व्यक्ति की ज़िम्मेदारी बन जाती है ताकि ये स्तंभ ना हिले और हर जगह सुख, शांति और समृद्धि सुनिश्चित कर सकें। तो आइए हम अपने समाज को अच्छा बनाने की क्षमता की पहले सराहना करें और इससे कभी भी ना भटकें और फिर हमारे परिवेश में प्रेम और एकता की भावना को कायम रखने तथा दूसरों के लिए एक उदाहरण पेश करने की प्रतिज्ञा करते हैं।

धन्यवाद!


 

एकता में बल है पर स्पीच/भाषण 4

हेल्लों दोस्तों - मेरे घर की पार्टी में आप सभी का स्वागत है!

मैं इस क्षण बेहद खुश हूं और मैं अपनी खुशी छिपा नहीं सकता क्योंकि हम सब बहुत लंबे समय बाद मिल रहे हैं। हालांकि हम हमेशा फोन पर संपर्क में रहते हैं और कभी-कभी एक दूसरे से मिल भी लेते हैं लेकिन पूरा समूह नहीं मिल पाता। इसलिए आज मुझे बहुत खुशी है कि हम कई सालों के बाद एक छत के नीचे एक समूह के रूप में एक-दूसरे से मिल रहे हैं।

हमारी दोस्ती हमेशा से बहुत ही खास रही है और हमारा समूह न केवल हमारे सहपाठियों के लिए ईर्ष्या का विषय था बल्कि पूरे कॉलेज के लिए भी। कॉलेज में छात्रों के अन्य बड़े समूह भी थे लेकिन यह केवल सात लोगों का समूह है जो हमेशा अधिक संख्या में लोगों का ध्यान आकर्षित करता था। क्या मैं सही नहीं हूँ? हमारे महाविद्यालय के दिनों के दौरान जिस तरह से हम एक-दूसरे से प्यार करते थे उसी तरह हम एक दूसरे के साथ लड़े भी लेकिन कभी अलग नहीं हुए। हम संभावित बदतर परिदृश्य में भी एकजुट रहे और यही एकमात्र कारण है कि हम पांच साल पहले हमारे कॉलेज को समाप्त करने के बाद आज भी एक साथ क्यों हैं।

 

आप सोच रहे होंगे कि मैं एकजुट होने पर भाषण क्यों दे रहा हूं! हम इसे महसूस नहीं कर सकते हैं लेकिन मैं दोस्तों आपको यह बताना चाहूँगा कि यह किसी भी रिश्ते की सबसे बड़ी शक्तियों में से एक है। हम सभी जानते हैं कि "एकता में ताकत है" और किसी भी समाज के लोग एकजुट नहीं होंगे तो उस समाज को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए हमें अपने संबंधों की प्रमुख ताकत का एहसास होना चाहिए और अपने जीवन के स्रोत को प्राप्त करे, अर्थात् एकता या किसी भी सम्मोहक परिस्थितियों में एक साथ रहने की हमारी इच्छा, ताकि हम इसका अपने जीवनकाल के लिए आनंद उठा सकें।

दरअसल कॉरपोरेट सेक्टर या बाहरी दुनिया को इस मामले पर पर्याप्त ज्ञान देने के बाद  मैं हमारी दोस्ती के लिए यहाँ आया हूं और अगर हम दूसरों के लिए एक उदाहरण बन सकें और एकता और एकजुटता के संदेश को फैला सकें तो दुनिया अपने आप में स्वर्ग बन जाएगी। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम कहाँ जाते हैं अगर हमारे परिवार और प्रियजनों के पास एकजुट रहने के लिए के गुण है तो हमें इस गुणवत्ता को बड़े पैमाने पर मानवता में प्रत्यारोपित करने की कोशिश करनी चाहिए।

हिंसा, हत्या, सड़क पर झगड़ें आदि की बढ़ती घटनाओं को देखने के बाद मेरी अंतर आत्मा हिल गई है। इन भयावह घटनाओं के अलावा दिन-ब-दिन मुझे लोग दबदबा रखने वाले, चतुर और लड़ाई झगड़े वाले लगते हैं जो अपने स्वार्थी उद्देश्यों के लिए दूसरे व्यक्ति को नुकसान पहुंचा सकता है। यह इतना दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारा देश जो "विविधता में एकता" का एक आदर्श प्रतीक था रक्तपात और मनुष्य की हत्याओं की चेतावनी के मामलों का सामना कर रहा है। यह सही समय है कि हम अपने आप को करुणा, प्रेम, नम्रता और सहिष्णुता के मूल्य को सिखाएं और यह समझे कि संघर्ष या युद्ध केवल बर्बादी लाता है बजाए हालातों को सुधारने के।

केवल एकजुट रहकर ही हम इसके महत्व को समझ सकते हैं और हमारे समाज को उस गहरी खाई में गिरने से रोक सकते हैं जहां से कोई वापिस नहीं आ पाता। मुझे आशा है कि हमारी दोस्ती समय गुज़रने के साथ मजबूत और दृढ़ होती जाएगी और हम एकता और एकजुटता के संदेश को भी फैलाना जारी रखेंगे।

धन्यवाद!

 

 

सम्बंधित जानकारी:

एकता पर भाषण

राष्ट्रीय एकता पर भाषण

विविधता में एकता पर भाषण

एकता में बल है पर भाषण

विविधता में एकता पर निबंध

एकता में अटूट शक्ति है पर निबंध

धर्म एकता का माध्यम है पर निबंध

राष्ट्रीय एकता पर स्लोगन